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न्यूक्लियर रिएक्टर के आसपास नीली रोशनी क्यों चमकती है? जानिए इसके पीछे का विज्ञान

न्यूक्लियर रिएक्टरों की तस्वीरों में दिखाई देने वाली नीली रोशनी लोगों को अक्सर रहस्यमयी और डरावनी लगती है, लेकिन इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि एक दिलचस्प वैज्ञानिक प्रक्रिया काम करती है। आइए जानते हैं...

Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jun 24, 2026, 11:55 AM (IST)

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न्यूक्लियर पावर को बिजली बनाने का एक पावरफुल तरीका माना जाता है। यह पूरी तरह Pollution-Free नहीं है, लेकिन कोयला और तेल जैसे ईंधनों की तुलना में काफी कम ग्रीनहाउस गैसें छोड़ता है। यही वजह है कि दुनिया के कई देश Electricity Generation के लिए परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। हालांकि, न्यूक्लियर रिएक्टरों की तस्वीरों में दिखने वाली नीली रोशनी अक्सर लोगों का ध्यान खींच लेती है। कई लोग इसे देखकर डर जाते हैं, लेकिन असल में इस नीली चमक के पीछे एक बेहद दिलचस्प वैज्ञानिक कारण छिपा हुआ है।

नीली चमक क्या होती है और यह कैसे बनती है?

इस नीली चमक को चेरेनकोव रेडिएशन (Cherenkov Radiation) कहा जाता है। यह तब पैदा होती है जब Electron या Proton जैसे Electrical Charge वाले Particles पानी या किसी Transparent Medium में Light की स्पीड से भी तेज चलने लगते हैं, क्योंकि आमतौर पर कोई भी चीज Light की स्पीड से तेज नहीं चल सकती, लेकिन पानी में Light की स्पीड लगभग 25% कम हो जाती है। ऐसे में कुछ High Energy Particles पानी के भीतर Light से तेज स्पीड हासिल कर लेते हैं। इससे पानी के Molecules में गड़बड़ी पैदा होती है और वे Photon यानी Light Particles Emitted करते हैं, जब ऐसा होता है, तो पानी के Molecule Excited हो जाते हैं और नीली रोशनी छोड़ते हैं। वैज्ञानिक इसे Sound के ‘Sonic Boom’ की तरह मानते हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि यहां आवाज की जगह रोशनी की चमक दिखाई देती है।

चेरेनकोव रेडिएशन नीले कलर की ही क्यों दिखाई देती है?

यह रोशनी नीले रंग की क्यों दिखती है, इसके पीछे भी एक वैज्ञानिक वजह है। रोशनी छोटे-छोटे कणों यानी फोटॉन से बनी होती है और हर कलर की अपनी अलग Wavelength और Frequency होती है। चेरेनकोव रेडिएशन के दौरान जो फोटॉन निकलते हैं, उनकी Wavelength छोटी और एनर्जी ज्यादा होती है। इसलिए यह रोशनी नीले और बैंगनी कलर के बीच की दिखाई देती है। हालांकि इसमें बैंगनी कलर भी होता है, लेकिन हमारी आंखें नीले कलर को ज्यादा आसानी से देख पाती हैं। यही वजह है कि न्यूक्लियर रिएक्टरों के आसपास यह चमक ज्यादातर नीले कलर की नजर आती है।

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चेरेनकोव रेडिएशन का इस्तेमाल किन-किन कामों में होता है?

इसके अलावा, कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रेडियोथेरेपी के दौरान भी यह नीली चमक पैदा हो सकती है। डॉक्टर इसकी मदद से यह समझ सकते हैं कि मरीज के शरीर में रेडिएशन सही जगह और सही मात्रा में पहुंच रही है या नहीं। इतना ही नहीं, Space और Particle Physics से जुड़े कई बड़े वैज्ञानिक प्रयोगों में भी चेरेनकोव रेडिएशन का यूज किया जाता है। इसलिए यह नीली रोशनी सिर्फ एक दिलचस्प नजारा नहीं, बल्कि विज्ञान और चिकित्सा के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण भी है।