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मरने के बाद भी जिंदा रहेगा आपका Facebook और Instagram? Meta ला सकता है ऐसी AI ट्रक्नोलॉजी

अगर किसी इंसान के जाने के बाद भी उसका Facebook और Instagram अकाउंट एक्टिव रहे तो? Meta एक ऐसी AI टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है जो किसी व्यक्ति की तरह पोस्ट और कमेंट कर सके। आइए जानते हैं...

Published By: Ashutosh Ojha | Published: Feb 12, 2026, 02:19 PM (IST)

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Meta ने हाल ही में एक ऐसा पेटेंट हासिल किया है जिसने सोशल मीडिया और AI को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसके सोशल मीडिया अकाउंट का क्या होगा? आमतौर पर किसी के निधन के बाद उसका अकाउंट या तो मेमोरियल पेज में बदल दिया जाता है या बंद कर दिया जाता है लेकिन अब रिपोर्ट्स के मुताबिक Meta एक ऐसी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किसी व्यक्ति की तरह व्यवहार कर सकता है, यानी अगर कोई यूजर लंबे समय तक एक्टिव न रहे या उसकी मृत्यु हो जाए, तो AI उसकी जगह सोशल मीडिया पर पोस्ट, कमेंट और रिएक्शन दे सकता है। यह पेटेंट दिसंबर 2025 में मिला, जिसे 2023 में फाइल किया गया था और इसमें Meta के CTO एंड्रयू बोसवर्थ का नाम जुड़ा है।

कैसे AI आपकी तरह व्यवहार कर सकता है?

पेटेंट के डॉक्यूमेंट के अनुसार यह सिस्टम एक बड़े लैंग्वेज मॉडल पर आधारित होगा, जिसे यूजर के पुराने डेटा से ट्रेन किया जाएगा। इसमें उस व्यक्ति के पुराने पोस्ट, कमेंट, लाइक, शेयर और बाकी ऑनलाइन एक्टिविटी का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि AI उसी अंदाज में जवाब दे सके जैसा असली यूजर देता था। कंपनी का कहना है कि जब कोई यूजर अचानक प्लेटफॉर्म से गायब हो जाता है, खासकर अगर उसकी मृत्यु हो जाए, तो इससे उसके दोस्तों और परिवार पर गहरा असर पड़ता है। ऐसे में AI के जरिए उसकी डिजिटल मौजूदगी बनाए रखना कुछ लोगों के लिए भावनात्मक सहारा बन सकता है। इसे ‘Griff Tech’ यानी शोक से जुड़ी टेक्नोलॉजी की कैटेगरी में रखा जा रहा है, जो किसी दिवंगत व्यक्ति की यादों को डिजिटल रूप में जिंदा रखने की कोशिश करती है।

क्या ‘Griff Tech’ सच में दुख कम करती है या नए सवाल खड़े करती है?

यह विचार पूरी तरह नया नहीं है। इससे पहले भी कई कंपनियां इस दिशा में काम कर चुकी हैं। Replika और You, Only Virtual जैसी कंपनियां ऐसे टूल्स बना चुकी हैं जो किसी व्यक्ति के डेटा के आधार पर उसका वर्चुअल वर्जन तैयार करती हैं। MicroSoft ने भी 2021 में एक ऐसे चैटबॉट का पेटेंट कराया था जो किसी मृत व्यक्ति की तरह बातचीत कर सकता है। इन टेक्नोलॉजी का मकसद लोगों को अपने प्रियजनों के खोने के दुख से उबरने में मदद करना है। हालांकि कई विशेषज्ञ इस पर सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या किसी की डिजिटल पहचान को AI के जरिए दोबारा जीवित करना नैतिक रूप से सही है।

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क्या Meta सच में इस टेक्नोलॉजी को लागू करेगा या यह सिर्फ एक आइडिया है?

हालांकि इस पूरे मामले में Meta ने साफ किया है कि फिलहाल उसका इस पेटेंट को लागू करने का कोई इरादा नहीं है। कंपनियां अक्सर कई नए आइडिया पर पेटेंट फाइल करती हैं, लेकिन सभी प्रोजेक्ट हकीकत नहीं बनते। Meta का कहना है कि यह सिर्फ एक रिसर्च और कॉन्सेप्ट का हिस्सा था, फिर भी इस खबर ने यह दिखा दिया है कि आने वाले समय में AI और सोशल मीडिया का रिश्ता कितना गहरा होने वाला है। यह टेक्नोलॉजी जहां एक तरफ लोगों को भावनात्मक सहारा दे सकती है, वहीं दूसरी तरफ यह प्राइवेसी, सहमति और नैतिकता जैसे गंभीर सवाल भी खड़े करती है। अब देखना यह होगा कि भविष्य में ऐसी टेक्नोलॉजी सच बनती हैं या सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाती हैं।