ISRO Roadmap: इंडिया स्पेस स्टेशन से लेकर गगनयान तक, बताया भविष्य का रोडमैप

ISRO का भविष्य का रोडमैप सामने आ गया है। डॉ. शर्मा ने गगनयान मिशन से लेकर इंडिया स्पेस स्टेशन तक पर रौशनी डाली है। आइए नीचे विस्तार से जानते हैं।

Published By: ajay verma | Published: Jan 13, 2026, 11:09 AM (IST)

ISRO के लिए साल की शुरुआत बेहद चैलेंजिंग रही, क्योंकि 2026 का पहला PSLV C62 मिशन विफल हुआ। हालांकि, इस विफलता के बाद अब देश एक बार फिर आगे के मिशन को सफल बनाने की तैयारी में लग गया है। इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस. वेंकटेश्वर शर्मा ने मिशन की विफलताओं को सफल बनाने और आने वाले महत्वाकांक्षी मिशन पर रौशनी डाली है। आइए इस रोडमैप पर डालते हैं एक नजर... और पढें: मंगल ग्रह पर 6 दिनों तक फंसा रहा NASA का Curiosity Rover, जानें कैसे निकला बाहर

विफलता से क्या मिली सीख ?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लॉन्च व्हीकल में आई तकनीकी खराबी के कारण PSLV-C62 मिशन फेल हुआ। इस विफलता को ध्यान में रखते हुए डॉ. एस. वेंकटेश्वर शर्मा ने कहा कि इसरो के लिए यह बड़ी विफलता नहीं है। इस फेलियर से इसरो खास अवसर के रूप में देखता है, जिससे भविष्य के मिशन्स को सफल करने में मदद मिलेगी। इससे विकास को भी गति मिलेगी। और पढें: अंतरिक्ष में कैसे बनते हैं बड़े-बड़े ब्लैक होल? वैज्ञानिकों ने खोला नया रहस्य

EOS-N1 को Anvesha के नाम से जाना जाता है। यह मल्टी-पर्पस अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है, जिसे ISRO और DRDO ने साथ मिलाकर तैयार किया है। डॉ. शर्मा ने बताया कि इस सैटेलाइट में कंट्रोल, इलेक्ट्रिकल और गाइडेंस कॉम्पोनेंट लगे हैं। इससे वेदर मॉनिटर करने के साथ सर्विलांस किया जा सकता है। साथ ही, बॉर्डर पर नजर रखी जा सकती है। इसके स्थापित होने से भविष्य में बॉर्डर की निगरानी बेहतर तरीके से रखी जा सकेगी, जिससे अवैध तस्करी और आतंकियों की गतिविधि पर लगाम लगेगी। यह डिजास्टर मैनेजमेंट सिस्टम के भी बहुत काम आएगा। और पढें: सूरज की वजह से धरती पर गिर रहे पुराने सैटेलाइट! ISRO ने किया बड़ा खुलासा

प्राइवेट पार्टिसिपेशन

डॉ. शर्म ने बताया कि PSLV-C62 इसरो के बेस्ट लॉन्च व्हीकल में से एक है। टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस हो गई है कि अब इसके प्रोडक्शन का काम HAL, L&T और Godrej जैसी प्राइवेट कंपनियों को दिया जा रहा है। इससे इसरो साल 2047 तक अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जाएगा।

गगनयान मिशन पर चल रहा काम

डॉ. शर्मा के अनुसार, गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है, जिसपर काम चल रहा है। इस मिशन को सफल बनाने के लिए कई टेस्ट किए जा चुके हैं। आने वाले दिनों में और भी टेस्ट किए जाएंगे। साथ ही, LVM3 रॉकेट की टेस्टिंग भी जा रही है, जिससे एस्ट्रोनॉट्स को सुरक्षित अंतरिक्ष में पहुंचा जा सके।

2035 में होगा खुद का स्पेस स्टेशन

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन अगले 10 साल में एक्सपायर होने वाला है। ऐसे में भारत खुद का स्पेस स्टेशन बनाने की योजना बना रहा है, जिसे 2035 में लॉन्च किए जाने की संभावना है। इसके आने से पृथ्वी को बेहतर तरीके से समझने में आसानी होगी और अंतरिक्ष में भारत की दावेदारी भी बनी रहेगी।

टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल की लेटेस्ट खबरों के लिए आप हमें व्हाट्सऐप चैनल, फेसबुक, यूट्यूब और X, पर फॉलो करें।