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क्या Swiggy, Zepto और Blinkit ने हटाया ‘10-मिनट डिलीवरी’ दावा? सरकार के दखल के बाद क्या बदला

भारत में ऑनलाइन ग्रॉसरी और क्विक डिलीवरी का चलन तेजी से बढ़ा है लेकिन अब सरकार ने ‘10-मिनट डिलीवरी’ जैसे दावों पर सवाल उठाए हैं। Swiggy, Zepto और Blinkit ने अपने प्रचार में बदलाव किया है। आइए समझते हैं क्या बदला और क्यों...

Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jan 15, 2026, 03:20 PM (IST)

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भारत में क्विक कॉमर्स कंपनियों जैसे Swiggy, Zepto और Blinkit ने अपने ऐप और प्रचार से ’10-मिनट डिलीवरी’ का दावा हटाना शुरू कर दिया है। यह कदम केंद्र सरकार के निर्देश के बाद उठाया गया है। सरकार का मानना है कि तय समय में डिलीवरी का सार्वजनिक वादा डिलीवरी पार्टनर्स पर अनावश्यक दबाव डालता है और उनकी सड़क सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक Swiggy ने अपने प्लेटफॉर्म पर अब ’10-मिनट डिलीवरी’ को मुख्य वादे के तौर पर दिखाना बंद कर दिया है, वहीं Zepto और Blinkit ने भी इसी तरह का बदलाव किया है हालांकि कंपनियों का कहना है कि इस बदलाव से ग्राहकों के ऑर्डर अनुभव या डिलीवरी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को लेकर चिंता

सरकार की चिंता डिलीवरी वर्कर्स की सुरक्षा और काम की परिस्थितियों को लेकर है। दिसंबर के अंत में कई प्लेटफॉर्म्स के डिलीवरी पार्टनर्स ने स्ट्राइक की थी, जिसमें कम कमाई, लगातार दबाव और सामाजिक सुरक्षा की कमी जैसे मुद्दे उठाए गए थे। India Today के सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने Swiggy, Blinkit, Zepto और Zomato के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उन्हें विज्ञापन, प्रमोशनल मटीरियल और सोशल मीडिया से फिक्स्ड डिलीवरी टाइम हटाने के लिए कहा। सरकार का मानना है कि चाहे कंपनियां यह दावा करें कि तेज डिलीवरी डार्क स्टोर्स के नेटवर्क और टेक्नोलॉजी की वजह से संभव है लेकिन सार्वजनिक तौर पर किया गया समय का वादा राइडर्स पर वास्तविक दबाव बनाता है।

कंपनियों ने ये चीज की साफ

कंपनियों ने यह साफ किया है कि बदलाव केवल मैसेजिंग में है, सिस्टम में नहीं। Eternal (Zomato की पैरेंट कंपनी) के फाउंडर दीपिंदर गोयल ने पहले कहा था कि 10-मिनट डिलीवरी स्टोर की लोकेशन और रूटिंग एल्गोरिद्म से संभव होती है, न कि डिलीवरी पार्टनर्स को तेज चलाने से। उनके मुताबिक डिलीवरी पार्टनर्स के ऐप में कोई काउंटडाउन टाइमर नहीं दिखता। इसके बावजूद राजनेताओं और श्रमिक संगठनों का तर्क है कि ब्रांडिंग, यूनिफॉर्म पर छपे वादे और ग्राहक की अपेक्षाएं राइडर्स पर मानसिक दबाव डालती हैं। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे सड़क पर जोखिम कम होगा।

क्विक कॉमर्स इंडस्ट्री और शेयर मार्केट पर इसका असर

यह बदलाव ऐसे समय पर आया है जब क्विक कॉमर्स इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है लेकिन उस पर Regulatory Monitoring भी बढ़ रही है। कंपनियां भारी निवेश और कैश बर्न के बीच बाजार हिस्सेदारी बचाने में लगी हैं। शेयर बाजार में भी इसका असर दिखा है Swiggy का शेयर हाल के दिनों में दबाव में रहा है, जबकि Eternal के शेयर ने 2025 में अच्छी बढ़त दिखाई है।