Dr Mario Molina को समर्पित है आज का Google Doodle, ओजोन परत में पड़ रहे छेद का लगाया था पता

सर्च जाइंट Google ने अपने होम-पेज पर आज 19 मार्च को डॉ मारियो मोलिना को समर्पित एनिमेटेड डूडल बनाया है। आइए जानते हैं कौन हैं डॉ मारियो मोलिना और उनसे जुड़ी सभी जानकारियां।

Published By: Manisha | Published: Mar 19, 2023, 09:00 AM (IST)

हाइलाइट

  • Dr Mario Molina ने ओजोन परत में पड़ रहे छेद का लगाया था पता
  • वह एक मैक्सिकन कैमिस्ट और रिसर्चर थे
  • इस रिसर्च के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था

Google Doodle on March 19: हर खास मौके पर Google अपना स्पेशल Doogle बनाना नहीं भूलता। आज का गूगल डूडल (Google Doodle) डॉ मारियो मोलिना (Dr Mario Molina) को समर्पित किया गया है। आज उनका 80वां जन्मदिन हैं। सर्च जाइंट गूगल ने अपने होम-पेज पर आज 29 मार्च को डॉ मारियो मोलिना को समर्पित एनिमेटेड डूडल बनाया है। आइए जानते हैं कौन हैं डॉ मारियो मोलिना और उनसे जुड़ी सभी जानकारियां। और पढें: Valentine's Day पर Google ने बनाया स्पेशल Doodle, दुनिया को दिया प्यार का संदेश

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Google का आज का Doodle डॉ मारियो मोलिना (Dr Mario Molina) को समर्पित है, जो कि एक मैक्सिकन कैमिस्ट थे। डॉक्टर मारियो ने दुनिया को बताया था कि कैसे ओजन कैमिकल पृथ्वी की ओजन परत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। नष्ट होती ओजन की परतों की वजह से हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणें पृथ्वी पर गिरती हैं, जिसकी वजह से इंसानों, जीव-जानवरों और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। और पढें: Google 27th Birthday: गूगल आज मना रहा 27वां जन्मदिन, खास अवसर पर बनाया Nostalgic डूडल

आज जैसे ही आप कुछ सर्च करने के लिए Google ओपन करेंगे, तो आपको डॉ मारियो मोलिना (Dr Mario Molina) को समर्पित स्पेशल Doodle दिखाई देगा। इस डूडल में देखा जा सकता है कि कैसे पृथ्वी के कुछ तत्व आसमान में मौजूद ओजोन की परतों को नष्ट कर रहे हैं। इसमें जहरीले कैमिकल व गैस आदि शामिल है। इसके साथ Google के एक O को सूर्य के तौर पर दिखाया गया है। डॉ मारियो मोलिना इन सभी परिस्थितियों का आंकलन करते डूडल में दिख रहे हैं।

आपको बता दें, डॉ मोलिना का जन्म 19 मार्च 1943 को मैक्सिको में हुआ था। वह बचपन से ही साइंस के प्रति काफी जुनूनी थे। उन्होंने नेशनल ऑटोनॉमस यूनिवर्सिटी से केमिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की और जर्मनी फ्रीबर्ग यूनिवर्सिटी से एडवांस डिग्री ली। डिग्री हासिल करने के बाद वह रिसर्च के काम के लिए अमेरिका चले गए।

1970 के दौरान उन्होंने अपनी रिसर्च में पाया कि कैसे सिंथेटिक कैमिकल पृथ्वी की ओजोन परतों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस रिसर्च के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। 7 अक्टूबर साल 2020 में हार्ट अटैक की वजह उनका निधन हो गया था।

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