वैज्ञानिकों को मिलीं 2 ऐसी आकाशगंगाएं, जिनमें नहीं मिला डार्क मैटर
ब्रह्मांड में डार्क मैटर को आकाशगंगाओं का अदृश्य सहारा माना जाता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने दो ऐसी आकाशगंगाएं खोजी हैं जिनमें इसका लगभग कोई निशान नहीं मिला। FCC 224 और FCC 240 नाम की यह खोज वैज्ञानिकों को हैरान कर रही है और ब्रह्मांड से जुड़े कई पुराने सिद्धांतों पर नए सवाल खड़े कर रही है। आइए जानते हैं...
Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jun 11, 2026, 01:09 PM (IST)
वैज्ञानिकों का मानना है कि डार्क मैटर एक अदृश्य पदार्थ है, जो आकाशगंगाओं को एक साथ बनाए रखने में मदद करता है। माना जाता है कि ब्रह्मांड का बड़ा हिस्सा इसी डार्क मैटर से बना है, लेकिन अब Astronomers ने दो ऐसी अनोखी आकाशगंगाएं खोजी हैं, जिनमें लगभग डार्क मैटर नहीं मिला। इन आकाशगंगाओं के नाम FCC 224 और FCC 240 हैं। ये पृथ्वी से करीब 6 करोड़ प्रकाश-वर्ष दूर फॉर्नैक्स क्लस्टर के बाहरी इलाके में स्थित हैं। यह खोज वैज्ञानिकों को हैरान कर रही है, क्योंकि अब तक माना जाता था कि डार्क मैटर के बिना किसी आकाशगंगा का लंबे समय तक टिके रहना लगभग असंभव है।
FCC 224 और FCC 240 का अध्ययन कैसे किया गया?
इस रिचर्च का नेतृत्व Yale University की Astronomer Maria Luisa Buzzo ने किया। वैज्ञानिकों ने European Southern Observatory (ESO) के Very Large Telescope पर लगे MUSE उपकरण की मदद से इन दोनों आकाशगंगाओं का अध्ययन किया। मई 2026 में arXiv पर जारी इस शोध में एक खास सिद्धांत की जांच की गई, जिसके अनुसार जब छोटी आकाशगंगाएं बहुत तेज रफ्तार से आपस में टकराती हैं, तो उनका डार्क मैटर उनसे अलग हो सकता है। अध्ययन में FCC 224 और FCC 240 के तारों की गति काफी धीमी पाई गई, जो डार्क मैटर की कमी का संकेत मानी जाती है। वैज्ञानिकों को इनमें कुछ असामान्य रूप से चमकीले तारों के ग्रुप (Globular Cluster) भी मिले, जिससे इस सिद्धांत को और मजबूती मिलती है।
यह खोज पहले मिली ऐसी आकाशगंगाओं से कितनी अलग है?
अब तक वैज्ञानिकों को डार्क मैटर की कमी वाली सिर्फ 2 आकाशगंगाओं के बारे में पता था, जिनके नाम NGC 1052-DF2 और NGC 1052-DF4 हैं। ये दोनों बहुत फैली हुई लेकिन कम तारों वाली आकाशगंगाएं हैं। पहले वैज्ञानिकों का मानना था कि ऐसे मामले बेहद दुर्लभ होते हैं। लेकिन अब फॉर्नैक्स क्लस्टर में FCC 224 और FCC 240 जैसी दूसरी संभावित जोड़ी मिलने से संकेत मिलता है कि डार्क मैटर की कमी वाली आकाशगंगाएं शायद उतनी दुर्लभ नहीं हैं, जितना पहले सोचा जाता था। यह खोज वैज्ञानिकों को आकाशगंगाओं के बनने और डेवलप होने से जुड़े पुराने सिद्धांतों पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर सकती है।
क्या यह खोज डार्क मैटर से जुड़े पुराने सिद्धांतों को चुनौती देती है?
यह खोज वैज्ञानिकों के सामने कई नए सवाल खड़े कर रही है। अभी तक वैज्ञानिक यह पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि कोई आकाशगंगा अपना ज्यादातर डार्क मैटर खोने के बाद भी कैसे बनी रह सकती है। अगर भविष्य की रिसर्च यह साबित कर देती हैं कि FCC 224 और FCC 240 में सचमुच डार्क मैटर बहुत कम है, तो ब्रह्मांड को समझने के हमारे मौजूदा सिद्धांतों में बड़ा बदलाव आ सकता है। इसी वजह से वैज्ञानिक अब इन दोनों आकाशगंगाओं का और गहराई से अध्ययन करना चाहते हैं। उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह रहस्य डार्क मैटर और आकाशगंगाओं के बनने से जुड़े कई बड़े सवालों के जवाब देने में मदद करेगा।
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