NASA ने खोले अंतरिक्ष के अनदेखे राज, लगभग 6 हजार नए ग्रहों का हुआ खुलासा
NASA के TESS मिशन ने करीब 8 साल की मेहनत के बाद रात के आसमान का सबसे बड़ा और डिटेल्ड मैप तैयार किया है। इस मिशन में हजारों नए ग्रहों और अंतरिक्ष की कई रहस्यमयी एक्टिविटी का पता चला है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे भविष्य में Earth जैसे ग्रहों की खोज और तेज हो सकती है। आइए जानते हैं...
Published By: Ashutosh Ojha | Published: May 24, 2026, 10:02 AM (IST)
अंतरिक्ष की दुनिया में एक बार फिर बड़ा कदम उठाते हुए NASA ने रात के आसमान का अब तक का सबसे डिटेल्ड मैप जारी किया है। यह खास मैप NASA के Transiting Exoplanet Survey Satellite यानी TESS मिशन द्वारा तैयार किया गया है। करीब आठ साल तक लगातार की गई निगरानी के बाद तैयार हुए इस विशाल स्काई मैप में लगभग 6000 ऐसे ग्रहों को दिखाया गया है जो हमारे सौरमंडल के बाहर मौजूद हैं। इस मैप में अप्रैल 2018 से सितंबर 2025 तक रिकॉर्ड किए गए 96 अलग-अलग सेक्टर शामिल हैं। तस्वीर में दिखाई देने वाले हजारों रंग-बिरंगे बिंदु उन ग्रहों की मौजूदगी का संकेत देते हैं जो दूसरे सितारों के चारों ओर चक्कर लगा रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मैप भविष्य की अंतरिक्ष खोजों के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।
TESS मिशन आखिर कैसे काम करता है?
NASA के अनुसार TESS मिशन एक्सोप्लैनेट यानी दूसरे सौरमंडलों के ग्रहों को खोजने के लिए 'Transit Method' का इस्तेमाल करता है। इस टेक्नोलॉजी में सैटेलाइट एक साथ हजारों सितारों की चमक पर नजर रखता है। जब कोई ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है तो तारे की रोशनी थोड़ी देर के लिए कम हो जाती है। इसी छोटे बदलाव को पकड़कर वैज्ञानिक ग्रह की मौजूदगी का पता लगाते हैं। TESS में लगे चार वाइड-फील्ड कैमरे आसमान के हर सेक्टर को करीब एक महीने तक स्कैन करते हैं और फिर अगली दिशा में बढ़ जाते हैं। इस लंबे मिशन के दौरान सिर्फ नए ग्रह ही नहीं मिले, बल्कि पृथ्वी के पास घूमने वाले कई एस्टेरॉयड, नए तारों के ग्रुप और दूर की आकाशगंगाओं के केंद्र में होने वाली तेज एक्टिविटी भी रिकॉर्ड की गई हैं।
क्या इन नए ग्रहों पर जीवन मिलने की उम्मीद है?
सितंबर 2025 तक TESS मिशन 679 एक्सोप्लैनेट की पुष्टि कर चुका है, जबकि 5165 संभावित ग्रहों की पहचान अभी जांच के दौर में है। वैज्ञानिक इन ग्रहों की पुष्टि के लिए दूसरी ऑब्जर्वेट्री और टेलीस्कोप की मदद ले रहे हैं। इन ग्रहों की दुनिया बेहद अलग-अलग है। कुछ ग्रह Mercury से भी छोटे हैं, जबकि कुछ विशाल गैस ग्रह Jupiter से कई गुना बड़े बताए जा रहे हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इनमें कुछ ग्रह ऐसे भी हैं जो अपने सितारे के 'Habitable Zone' में मौजूद हैं। इसका मतलब है कि वहां तरल पानी मौजूद होने की संभावना हो सकती है और इसी वजह से जीवन की उम्मीद भी जताई जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऐसे ग्रहों की संख्या और तेजी से बढ़ सकती है।
क्या वैज्ञानिक AI की भी ले रहे हैं मदद?
साल 2026 में TESS डेटा से वैज्ञानिकों को कई चौंकाने वाली जानकारियां भी मिली हैं। शोधकर्ताओं ने एक ऐसे ग्रह सिस्टम की पहचान की है जहां साथी ग्रह का ऑर्बिट बेहद अजीब और झुका हुआ पाया गया। इसके अलावा दो ग्रहों के बीच हिंसक टक्कर जैसे संकेत भी मिले हैं। अब वैज्ञानिक इस विशाल डेटा का एनालिसिस करने के लिए मशीन लर्निंग और AI का सहारा ले रहे हैं। इससे भविष्य में नए ग्रहों की खोज और तेज होने की उम्मीद है। NASA का कहना है कि TESS मिशन सिर्फ नए ग्रह खोजने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमें ब्रह्मांड को पहले से ज्यादा गहराई से समझने में मदद कर रहा है।
FAQ
NASA का TESS मिशन क्या है?
NASA का TESS (Transiting Exoplanet Survey Satellite) मिशन अंतरिक्ष में दूसरे सितारों के आसपास मौजूद ग्रहों यानी Exoplanets को खोजने के लिए बनाया गया है। यह मिशन 2018 में लॉन्च किया गया था।
TESS मिशन ने अब तक कितने नए ग्रह खोजे हैं?
सितंबर 2025 तक TESS मिशन 679 एक्सोप्लैनेट की पुष्टि कर चुका है, जबकि 5165 से ज्यादा संभावित ग्रहों की पहचान की गई है जिनकी अभी जांच चल रही है।
TESS ग्रहों को कैसे खोजता है?
TESS 'Transit Method' का इस्तेमाल करता है। जब कोई ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है तो तारे की रोशनी थोड़ी कम हो जाती है। इसी बदलाव को पकड़कर वैज्ञानिक नए ग्रहों का पता लगाते हैं।
क्या इन नए ग्रहों पर जीवन होने की संभावना है?
कुछ ग्रह अपने सितारों के 'Habitable Zone' में पाए गए हैं, जहां पानी तरल रूप में मौजूद हो सकता है। इसलिए वैज्ञानिकों को वहां जीवन मिलने की उम्मीद नजर आती है।
क्या NASA इस मिशन में AI का इस्तेमाल भी कर रहा है?
वैज्ञानिक अब मशीन लर्निंग और AI की मदद से TESS के विशाल डेटा का तेजी से एनालिसिस कर रहे हैं, ताकि नए ग्रहों और अंतरिक्ष घटनाओं की पहचान आसान हो सके।
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