Mobile Signal Jammers: इस खास डिवाइस ने जंतर-मंतर से गायब किए मोबाइल नेटवर्ट, जानें कैसे काम करती है ये टेक्नोलॉजी

Mobile Signal Jammers: जंतर-मंतर के आसपास के इलाकों में आखिर कैसे गायब हुए नेटवर्क और बंद हुआ इंटरनेट? इस खास टेक्नोलॉजी ने मिनटों में फोन से उड़ाए नेटवर्क।

Published By: Manisha | Published: Jul 21, 2026, 05:23 PM (IST)

Mobile Signal Jammers: अक्सर सुनने में आता है किसी प्रोटेस्ट व मार्च के दौरान सरकार किसी एक जगह की इंटरनेट व नेटवर्क सेवाएं बंद कर देती है, ताकी वहां मौजूद लोग उस इलाके के बाहर मौजूद लोगों से कनेक्ट न कर सके। इन दिनों देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर इलाके में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है, जिसमें देशभर के छात्रों ने हिस्सा लिया है। यह प्रोटेस्ट NEET पेपर लीक के खिलाफ शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए किया जा रहा है। 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी ने ससंद चलो मार्च का आयोजन किया था, जिसके तहत बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर में एकत्रित हुए थे। इसी दौरान देखा गया कि जंतर-मंतर व इसके आसपास के इलाकों में अचानक से ही सभी के फोन से नेटवर्क जा चुके थे। टेलीकॉम कंपनियां मैसेज करके यूजर्स को जानकारी दे रही थी कि सरकारी आदेशों के आधार पर आपके एरिया की इंटरनेट सर्विस अस्थाई रूप से बंद की जा रही है। और पढें: CJP Protest Jantar Mantar: दिल्ली के जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट पड़ा ठप, लोगों ने स्क्रीनशॉट किए शेयर

जो लोग भी 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे थे, उन्हें अपने Mobile फोन पर इस तरह का मैसेज प्राप्त हुआ ही होगा। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर किसी एक इलाके में ऑथॉरिटी किस तरह नेटवर्क व इंटरनेट को बंद करती है... इसके पीछे की टेक्नोलॉजी क्या है? आपके इन्हीं सवालों के जवाब आज हम आपको इस आर्टिकल में देने जा रहे हैं।

Mobile Signal Jammers

अगर अथॉरिटी को किसी इलाके में इंटरनेट व नेटवर्क की सर्विस बंद करनी है, तो वो Mobile Signal Jammers टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं। इन्हीं Jammers की वजह से किसी एक इलाके के नेटवर्क पूरी तरह के गायब हो जाते हैं और उस इलाके में मौजूद लोग स्मार्टफोन के जरिए अन्य लोगों से कनेक्ट नहीं कर पाते। आइए जानते हैं ये टेक्नोलॉजी काम कैसे करती है।

Mobile Signal Jammers कैसे काम करते हैं?

Mobile Signal Jammers की बात करें, तो ये एक तरह के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होते है, जिनका काम पास में मौजूद स्मार्टफोन के नेटवर्क को ब्लॉक करना होता है। एक स्मार्टफोन को नेटवर्क पाने के लिए पास के मोबइल टावर से सिग्नल की जरूरत पड़ती है। फोन अपनी रेडियो फ्रीक्वेंसी के जरिए टावर को सिग्नल भेजता है और फिर टावर फोन में सिग्नल भेजता है... यह एक तरह का टू-वे कम्युनिकेशन होता है।

हालांकि, अगर आप फोन से निकलने वाली फ्रीक्वेंसी के जितनी या उससे ज्यादा फ्रीक्वेंसी किसी अन्य डिवाइस से जनरेट करते हैं, तो आपका मोबाइल फोन उस टावर से कनेक्ट नहीं कर पाएगा और न ही उसे सिग्नल मिल पाएंगे। जैमर जैसे डिवाइस यही काम करते हैं। जैमर इन्हीं सिग्नल्स को दबा देते हैं। जहां भी ये जैमर एक्टिव होते हैं, वहां के मोबाइल फोन से नेटवर्क गायब हो जाता है और यूजर न तो कॉल कर पाते हैं और न ही कॉल रिसीव कर पाते हैं। इंटरनेट भी पूरी तरह से ठप पड़ जाता है।

आपको बता दें, ये जैमर अलग-अलग साइज में उपलब्ध होते हैं। छोटे जैमर 10 से 20 मीटर की रेंज को कवर करते हैं। वहीं, कई बड़े जैमर कई किलोमीटर तक की रेंज को कवर करके नेटवर्क गायब कर देते हैं। उस एरिया में दोबारा से नेटवर्क प्रोवाइड करने के लिए अथॉरिटीज को जैमर ऑफ करना होता है।

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