SpaceX का Dragon Capsule पहुंचा ISS, साथ ले गया 6,500 पाउंड जरूरी सामान

SpaceX का Dragon Capsule सफलतापूर्वक International Space Station (ISS) पहुंच गया है। इस मिशन के जरिए करीब 6,500 पाउंड जरूरी सामान अंतरिक्ष स्टेशन पर भेजे गए हैं। आइए जानते हैं...

Published By: Ashutosh Ojha | Published: May 19, 2026, 11:16 AM (IST)

SpaceX का Dragon Capsule सफलतापूर्वक International Space Station (ISS) पहुंच गया है। यह मिशन अंतरिक्ष यात्रियों के लिए काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसके जरिए करीब 6500 पाउंड जरूरी सामान, 'Research Instruments' और 'Scientific Experiments' ISS तक पहुंचाए गए हैं। Dragon कैप्सूल ने रविवार, 17 मई 2026 को भारतीय समयानुसार शाम 4:07 बजे ISS से सफलतापूर्वक डॉकिंग की। इसे स्टेशन के Harmony मॉड्यूल के फॉरवर्ड पोर्ट से जोड़ा गया। मिशन के दौरान NASA के अंतरिक्ष यात्री Jack Hathaway ने बताया कि Dragon की कैप्चरिंग और डॉकिंग पूरी तरह स्मूद रही। वहीं यूरोपियन स्पेस एजेंसी की अंतरिक्ष यात्री Sophie Adenot ने भी स्टेशन के अंदर से इसकी मॉनिटरिंग की। यह NASA के Commercial Resupply Services प्रोग्राम के तहत SpaceX का 34वां सप्लाई मिशन है। और पढें: एलियन खोजने की आई नई टेक्नोलॉजी, वैज्ञानिकों ने किया बड़ा दावा

Dragon Capsule क्या-क्या सामान लेकर गया है?

Dragon Capsule के जरिए भेजे गए सामान में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए जरूरी 'Food Supply', 'Research Instruments' और 'Scientific Experiments' शामिल हैं। ISS पर मौजूद क्रू अगले कुछ हफ्तों तक इस पूरे कार्गो को अनलोड करेगा और फिर मिशन से जुड़े वैज्ञानिक परिणामों व पुराने हार्डवेयर को वापस Dragon में लोड किया जाएगा। इसके बाद यह कैप्सूल जून के दूसरे हिस्से में दोबारा पृथ्वी पर लौट आएगा। रिपोर्ट के मुताबिक स्टेशन पर मौजूद क्रू माइक्रोग्रैविटी यानी बेहद कम गुरुत्वाकर्षण वाली स्थिति में कई महत्वपूर्ण रिसर्च करेगा। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इन प्रयोगों से भविष्य के स्पेस मिशनों और पृथ्वी पर मेडिकल साइंस को काफी फायदा मिल सकता है। इस मिशन का एक बड़ा मकसद यह समझना भी है कि धरती पर बनाए गए माइक्रोग्रैविटी सिमुलेटर अंतरिक्ष जैसी परिस्थितियों की कितनी सही नकल कर पाते हैं। और पढें: अंतरिक्ष में कैसे बनते हैं बड़े-बड़े ब्लैक होल? वैज्ञानिकों ने खोला नया रहस्य

इस मिशन में कौन-कौन से वैज्ञानिक प्रयोग हो रहे हैं?

इस मिशन में एक खास तरह का बोन स्कैफोल्ड भी भेजा गया है, जिसे लकड़ी से तैयार किया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह रिसर्च भविष्य में ऑस्टियोपोरोसिस जैसी हड्डियों को कमजोर करने वाली बीमारियों के इलाज में मददगार साबित हो सकती है। इसके अलावा ऐसे उपकरण भी भेजे गए हैं जिनकी मदद से यह अध्ययन किया जाएगा कि अंतरिक्ष में रेड ब्लड सेल्स और तिल्ली यानी spleen किस तरह व्यवहार करते हैं। NASA के मुताबिक लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर पर माइक्रोग्रैविटी का बड़ा असर पड़ता है, इसलिए इस तरह की रिसर्च भविष्य के चंद्रमा और मंगल मिशनों के लिए बेहद जरूरी मानी जा रही है। वैज्ञानिक यह भी जानना चाहते हैं कि अंतरिक्ष में इंसानी शरीर किस तरह खुद को नई परिस्थितियों के हिसाब से ढालता है और इसका स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है। और पढें: सूरज की वजह से धरती पर गिर रहे पुराने सैटेलाइट! ISRO ने किया बड़ा खुलासा

भविष्य के स्पेस मिशनों के लिए यह मिशन क्यों खास है?

इस मिशन के जरिए Dragon Capsule एक नया वैज्ञानिक उपकरण भी लेकर गया है जो पृथ्वी के आसपास मौजूद Charged Particles का अध्ययन करेगा। ये कण सैटेलाइट्स, कम्युनिकेशन सिस्टम और पावर ग्रिड्स को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा यह उपकरण सूर्य की रोशनी के पृथ्वी और चंद्रमा से रिफ्लेक्ट होने की प्रक्रिया का भी अध्ययन करेगा। इससे वैज्ञानिकों को पृथ्वी के वातावरण और स्पेस वेदर को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी। बता दें कि Dragon Capsule को Falcon 9 रॉकेट के जरिए फ्लोरिडा स्थित Cape Canaveral Space Force Station से शुक्रवार को लॉन्च किया गया था। यह मिशन एक बार फिर दिखाता है कि निजी स्पेस कंपनियां अब अंतरिक्ष रिसर्च और सप्लाई मिशनों में कितनी बड़ी भूमिका निभा रही हैं।

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