Online Scam Trauma: ऑनलाइन स्कैम से पैसा ही नहीं मेंटल हेल्थ भी होती है प्रभावित, जानें कैसे करें रिकवर

Digitalization बढ़ने के साथ ऑनलाइन फ्रॉड भी तेजी से बढ़ा है। लोगों को ओटीपी, फिशिंग और फर्जी कॉल के माध्यम से ठगा जा रहा है, जिससे आर्थिक नुकसान होता है। साथ ही, लोगों के मानसिक स्वास्थ्य गलत प्रभाव पड़ता है, जिससे पैनिक अटैक आते हैं और डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं। नीचे ऑनलाइन स्कैम ट्रॉमा से रिकवर करने और भविष्य में खुद के बचाव के उपाय बताए गए हैं।

Published By: ajay verma | Published: Apr 02, 2026, 11:30 AM (IST) | Edited: Apr 02, 2026, 11:30 AM (IST)

आज के समय में डिजिटलाइजेशन बढ़ने से हमारी जिंदगी आसान हो गई है। हम घर बैठे ऑनलाइन पेमेंट, इंटरनेट बैंकिंग और शॉपिंग तक कर सकते हैं। इसके साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। हर दिन हैकर्स लोगों को ठगने के लिए नए-नए तरीके इजात कर रहे हैं, चाहे वो फेक कॉल-मैसेज हो या फिर मैलिशियस लिंक। इन घटनाओं से लोगों को आर्थिक नुकसान ही नहीं होता बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य पर गहर प्रभाव डालता है। और पढें: AI Deepfake Scam: नकली वीडियो बनाकर ठगी को दिया अंजाम, ऐसे करें खुद का बचाव

ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार हुए लोगों की मेहनत की कमाई जाने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा की भावना कम होती है और उनका आत्मविश्वास पूरी तरह से टूट जाता है, जिससे उन्हें एंग्जाइटी हो जाती है। साथ ही, पैनिक अटैक आने लगते हैं। कई लोग तो डिप्रेशन में चले जाते हैं। यह पीड़ा उन्हें अंदर से पूरी तरह से टोड़ देती है। हम आपको इस आर्टिकल में विस्तार से बताएंगे कि कैसे आप ऑनलाइन फ्रॉड से होने वाले ट्रॉमा से बाहर आ सकते हैं। सही ही में यह कुछ टिप्स भी देंगे, जिससे आप भविष्य में इस तरह के अपराध से खुद का बचाव कर सकेंगे। और पढें: क्या होता है Dark Web और यह आम इंटरनेट से अलग क्यों है? भारत के लोग हो रहे शिकार, ऐसे बचें

क्या होता है ऑनलाइन स्कैम ?

सबसे पहले हमारे लिए यह जानना जरूरी है कि ऑनलाइन स्कैम होता क्या है। यह स्कैम एक प्रकार की धोखाधड़ी है, जिसे इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लेकर अंजाम दिया जाता है। साइबर ठग फर्जी वेबसाइट, फिशिंग के साथ-साथ फेक ईमेल, ओटीपी, फर्जी मैसेज व कॉल के जरिए लोगों को अपना निशाना बनाते हैं। और पढें: AI Scam के खतनाक खेल में फंस रहे लोग, जानें क्या है, कैसे करें बचाव

फिशिंग की बात करें, तो यह लोगों को ठगने का एक डिजिटल तरीका है। इसके जरिए अपराधी लोगों को ऐसी वेबसाइट पर ले आते हैं, जो दिखने में बिल्कुल असली लगती है। यहां उनसे उनकी बैंकिंग व निजी डिटेल दर्ज करा ली जाती है। फिर स्कैम को अंजाम दिया जाता है।

ओटीपी स्कैम में ठग अपने आप को बैंक अधिकारी बातकर लोगों से वन टाइम पासवर्ड हासिल कर लेते हैं और उसे दर्ज करके पूरा बैंक अकाउंट खाली कर देते हैं। वहीं, लोगों को लालच वाली फर्जी कॉल और मैसेज भेजकर भी ठगा जाता है।

इन अपराध की खतरनाक बात यह है कि ठग भरोसा जीतकर लोगों को ठगते हैं। इससे न सिर्फ आर्थिक नुकसान होता है बल्कि मेंटल हेल्थ पर भी गहरी चोट लगती है। लंबे समय तक लोग इस दर्द से उबर नहीं पाते हैं।

स्कैम होने के बाद तुरंत करें ये काम

साइबर स्कैम का शिकार होने के बाद आप बिल्कुल भी न घबराएं। सबसे पहले बैंक में जाकर धोखाधड़ी की जानकारी दें और UPI सेवा का बंद करें। इससे आपको ज्यादा नुकसान नहीं होगा। फिर पुलिस के साइबर सेल या पोर्टल पर जाकर शिकायत दर्ज कर दीजिए, जिससे कार्रवाई जल्दी शुरू हो जाएगी। इसके अलावा, अपने पासवर्ड और एटीएम पिन को बदल दें।

मेंटल हेल्थ पर क्या प्रभाव पड़ता है ?

साइबर स्कैम से होने वाले ट्रॉमा पर साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर सबा मालिनी से बात की, तो उन्होंने बताया कि इस तरह की धोखाधड़ी से वित्तय नुकसान नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ता है। जब किसी के साथ स्कैम होता है, तो उसके अंदर कई प्रकार की भावनाएं पैदा होती हैं। उसे सबसे पहले भरोसा नहीं होता कि वह स्कैम का शिकार हुआ है। उसे गिल्ट महसूस होती है। एंग्जायटी कई गुना बढ़ जाती है और दिमाग में घटना घूमती रहती है। इस वजह से नींद भी खराब हो जाती है।

व्यक्ति का ट्रास्ट हर चीज पर कम होने लगता है। वह हर मैसेज और कॉल पर शक करने लगता है। उसे असुरक्षित महसूस होने लगता है और उसके निर्णय लेने की क्षमता भी कम हो जाती है।

कैसे आएं ट्रॉमा से बाहर ?

तकनीक के इस दौर में स्कैमर्स अलग-अलग तरीकों से लोगों को ठगते हैं। यह लोगों की गलती नहीं है बल्कि सिस्टम और अपराधियों की चालाक रणनीतियों का नतीजा है। अगर कोई व्यक्ति ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हुआ है और ट्रॉमा में है, तो सबसे पहले उसे खुद को दोष देना बंद करना चाहिए। खुद को दोषी ठहराने की जगह अपने आप को यह समझाएं कि यह सब गलती से हुआ है। आपको शिकार बनाया गया है।

मन में न रखें बात

ट्रॉमा के दौरान रोना, गुस्सा आना और डर लगना बहुत स्वाभाविक है। मन में अनेकों सवाल उठते हैं। यदि इन भावनाओं को मन में दबाया जाए, तो ट्रॉमा और गहरा हो जाता है। ऐसी गलती न करें। अपनी भावनाओं को स्वीकार करने के साथ भरोसेबंद दोस्तों व परिवार के सदस्यों के साथ बात करें या फिर डायरी लिखकर अपनी फीलिंग साझा करें। इससे ट्रॉमा कम होता है और मन हल्का हो जाता है।

ऐसे वापस लाएं डिजिटल आत्मविश्वास

ट्रॉमा से उबरने के लिए मन की बात साझा करने के साथ डिजिटल आत्मविश्वास वापस लाना बहुत जरूरी है। इसके लिए शुरुआत में छोटी-छोटी ट्रांजैक्शन करते रहें। इससे आपके ऊपर ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा और ट्रास्ट बनना शुरू हो जाएगा। इसके साथ टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, मजबूत पासवर्ड और प्राइवेसी फीचर का भी इस्तेमाल करें। इससे आपको अतिरिक्त सुरक्षा लेयर मिलेगी। इन सब प्रयासों से समय के साथ आपका आत्मविश्वास दोबारा वापस आ जाएगा।

खुद का बचाव कैसे करें ?

ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के लिए सावधान रहना बहुत जरूरी है। अंजान नंबर से आए मैसेज में दिए गए लिंक पर भूलकर भी क्लिन न करें। ऐसे मैसेज को तुरंत डिलीट कर दें। अपने OTP को किसी के साथ शेयर न करें। अगर करते हैं, तो आपका बैंक अकाउंट खाली हो सकती है।

हमेशा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को ऑन करके रखें। इससे आपको अतिरिक्त सुरक्षा लेयर मिलेगी, जिससे आपका डेटा पूरी तरह से सिक्योर रहेगा और कोई भी आपके डेटा को चुरा नहीं सकेगा। इन तरीकों से आप खुद को ऑनलाइन फ्रॉड से बचा सकेंगे।

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