कर्नाटक बना भारत का पहला राज्य, 16 साल से छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया पूरी तरह बंद

कर्नाटक अब भारत का पहला राज्य बन गया है, जहां 16 साल से छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों को इंटरनेट और मोबाइल के नकारात्मक असर से बचाना और उनकी सेहत सुरक्षित रखना है। आइए जानते हैं...

Published By: Ashutosh Ojha | Published: Mar 06, 2026, 05:41 PM (IST) | Edited: Mar 06, 2026, 05:55 PM (IST)

कर्नाटक अब भारत का पहला राज्य बन गया है, जहां 16 साल से छोटे बच्चे सोशल मीडिया इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इसका मकसद बच्चों को इंटरनेट और मोबाइल के बुरे असर से बचाना और उनकी सेहत को सुरक्षित रखना है। राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को अपने बजट भाषण में इस नए नियम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बच्चों पर मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि यह नियम कब से लागू होगा। और पढें: Google ने Pixel फोन के लिए पेश किया खास AI फीचर, अब स्कैम कॉल्स का तुरंत चलेगा पता

इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह?

इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह बच्चों में सोशल मीडिया की बढ़ती लत और असुरक्षित इंटरनेट एक्सेस है। दुनियाभर में बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटी को लेकर चिंता बढ़ रही है। इसी कड़ी में ऑस्ट्रेलिया दिसंबर 2025 में बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने वाला पहला देश बना। ब्रिटेन, डेनमार्क और ग्रीस भी इस बारे में सोच रहे हैं। भारत जैसे बड़े सोशल मीडिया मार्केट में यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में लगभग 10 करोड़ स्मार्टफोन यूजर्स हैं और एक अरब इंटरनेट यूजर्स मौजूद हैं। कर्नाटक की कुल आबादी 6.76 करोड़ है। इसमें 15 साल से छोटे बच्चे कम हैं, लेकिन उनका इंटरनेट पर असर बहुत बड़ा है। और पढें: Online Scam: कभी नहीं होंगे स्कैम का शिकार, ऐसे पहचानें और करें खुद का बचाव

कर्नाटक और बाकी राज्यों में इस प्रतिबंध का क्या असर होगा?

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु, जिसे भारत की सिलिकॉन वैली कहा जाता है, यहां कई बड़ी टेक कंपनियां जैसे Microsoft, Amazon, IBM, Dell और Google मौजूद हैं। गोवा में भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने के बारे में सोचा जा रहा है। आंध्र प्रदेश में एक विधायक ने बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल सीमित करने वाला बिल पेश किया है। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने भी कहा है कि बच्चों के लिए उम्र के हिसाब से सोशल मीडिया इस्तेमाल के नियम बनाना जरूरी है, ताकि उनकी डिजिटल लत कम की जा सके। और पढें: भारत सरकार के साथ मिलकर Meta ने शुरू किया Digital Suraksha कैंपेन, डिजिटल सेफ्टी का बनाएंगे मास्टर!

क्या उम्र के आधार पर प्रतिबंध बच्चों को पूरी तरह रोक सकता है?

हालांकि कुछ टेक एक्सपर्ट्स और सामाजिक कार्यकर्ता इस बात पर जोर दे रहे हैं कि सिर्फ उम्र के आधार पर प्रतिबंध पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि बच्चे नकली पहचान पत्र का यूज करके इन नियमों को आसानी से बायपास कर सकते हैं। इसलिए उन्हें और उनके माता-पिता को सोशल मीडिया का सुरक्षित और संतुलित इस्तेमाल सीखने की जरूरत है।

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