AI जनरेटेड फोटो और वीडियो पर लगेगी लगाम, आज से नए नियम लागू

AI द्वारा बनाई गई फोटो, वीडियो या फिर ऑडियो पर लगाम लगाने के लिए नए नियम लागू कर दिए गए हैं। इन गाइडलाइन का नोटिफिकेशन 10 फरवरी को जारी किया गया था।

Published By: ajay verma | Published: Feb 20, 2026, 10:27 AM (IST)

AI जनरेटेड फोटो, ऑडियो और डीपफेक वीडियो पर लगाम लगाने के लिए आज से नए नियम को लागू कर दिया गया है। इन गाइडलाइन के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक द्वारा तैयार किए गए कंटेंट को लेबल किया जाएगा, जिससे लोगों के लिए उसकी पहचान करना आसान हो जाएगा। इसके साथ गलत व गैरकानूनी कंटेंट को भी प्लेटफॉर्म से 3 घंटे के भीतर हटाना होगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सिक्योर हो जाएंगे और फर्जी इमेज एवं वीडियो के कारण धोखाड़ी और बदनामी के मामलों में भी तेजी से गिरावट आएगी। और पढें: Ashwini Vaishnaw ने डिजिटल कंटेंट और नई टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए 3 बड़ी पहल का उद्घाटन किया, जानें क्या-क्या

3 घंटे के अंदर हटाना होगा कंटेंट

भारत सरकार के नए नियम के तहत अब 3 घंटे के अंदर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से गैरकानूनी और गलत जानकारी देने वाली वीडियो, फोटो या फिर ऑडियो को हटाना होगा, जिसे AI के माध्यम से बनाया गया है। इससे पहले इस तरह के कंटेंट को हटाने के लिए 36 घंटे का समय मिलता था। और पढें: AI करेगा आपका सारा काम, बिना लैपटॉप खोले होगा सब कुछ, Anthropic के Claude में आया खास फीचर

सरकार का कहना है कि अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपने यूजर्स को हर तीन महीने में नियमों की जानकारी प्रदान करनी होगी। साथ ही, यह भी बताना होगा कि यदि वे गलत वीडियो शेयर करते हैं, तो उनके खिलाफ सख्थ कार्रवाई की जा सकती है। और पढें: iPhone यूजर्स के लिए बड़ी खबर, Apple Maps में जल्द दिखे सकते हैं Ads, रिपोर्ट्स में हुआ खुलासा

लेबल होगा कंटेंट

नए नियम के लागू होने पर कंपनियों को ऐसे टूल लाने का सुझाव दिया गया है। इससे प्लेटफॉर्म पर मौजूद AI कंटेंट को लेबल किया जा सकेगा, जिससे लोगों के लिए यह पहचानना आसान हो जाएगा कि कंटेंट असली या फिर नकली।

यदि कोई गलत एआई जनरेटेड कंटेंट प्लेटफॉर्म पर शेयर करता है, उसकी पहचान करना सबसे पहले प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी है। इससे कंटेंट पर रोक लगेगी और लोगों तक गलत जानकारी नहीं पहुंचेगी। इसके साथ मेटा डेटा भी एंटर करने के लिए कहा गया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मेटा डेटा एक फाइल की तरह होता है। इसे डिजिटल डीएनए कहा जाता है। यह फाइल की कोडिंग में छिपा होता है। इसके जरिए पता लगाया जा सकता है कि फोटो को किस तारीख, किस एआई टूल से बनाया गया और इसे सबसे पहले किस प्लेटफॉर्म पर शेयर किया गया।

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