comscore

DoT ने बढ़ाई SIM बाइंडिंग की डेडलाइन, रिपोरट्स में हुआ खुलासा, जानें क्या है वजह

भारत में डिजिटल फ्रॉड और पहचान के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए DoT ने SIM बाइंडिंग नियम की डेडलाइन बढ़ा दी है। अब यह नियम 2026 के अंत तक लागू होगा। इसके तहत सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स में यूजर्स का अकाउंट उनके एक्टिव SIM से जुड़ा रहेगा, जिससे साइबर अपराधों पर काबू मिलेगा। आइए जानते हैं...

Published By: Ashutosh Ojha | Published: Apr 02, 2026, 06:50 PM (IST)

  • whatsapp
  • twitter
  • facebook
  • whatsapp
  • twitter
  • facebook

भारत में डिजिटल फ्रॉड और पहचान के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। Department of Telecommunications (DoT) ने SIM Binding से जुड़े नियमों को लागू करने की समयसीमा बढ़ाकर अब 2026 के अंत तक कर दी है। यह नियम पहली बार नवंबर 2025 में पेश किया गया था, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर यूजर्स की पहचान उनके मोबाइल नंबर और SIM से जुड़ी रहे, हालांकि कई कंपनियों ने इसे लागू करने में तकनीकी दिक्कतों का हवाला दिया, जिसके चलते सरकार को डेडलाइन बढ़ानी पड़ी। news और पढें: 1 मार्च से भारत में WhatsApp पर होगा नया नियम लागू, अब SIM के बिना नहीं चलेगा अकाउंट

कौन-कौन सी कंपनियां और ऐप्स इस नियम को लागू करने में परेशानी झेल रही हैं?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स जैसे WhatsApp, Telegram और Signal ने DoT को बताया कि इस फीचर को लागू करना आसान नहीं है। वहीं स्मार्टफोन कंपनियों और ऑपरेटिंग सिस्टम बनाने वाली बड़ी कंपनियां जैसे Apple और Google ने भी अतिरिक्त समय की मांग की, खासतौर पर Apple ने iOS सिस्टम में तकनीकी सीमाओं की बात कही और कहा कि इस फीचर को सही तरीके से लागू करने के लिए और समय चाहिए। news और पढें: WhatsApp–Telegram जैसी कंपनियां नई सरकारी SIM Binding पॉलिसी से नाराज, लेकिन Jio–Airtel ने इस फैसले का किया स्वागत

WhatsApp और Meta इस फीचर पर क्या काम कर रहे हैं?

बताया जा रहा है कि Meta (WhatsApp की पेरेंट कंपनी) DoT के साथ मिलकर एक ऐसा समाधान खोज रही है, जो तकनीकी रूप से संभव हो। WhatsApp इस फीचर पर काम भी कर रहा है, जिसमें ऐप यूजर से यह कन्फर्म करेगा कि उसका SIM कार्ड उसी फोन में मौजूद है जिससे अकाउंट बनाया गया था, हालांकि अभी तक यह फीचर पब्लिक वर्जन में लॉन्च नहीं हुआ है और डेवलपमेंट स्टेज में ही है।

Add Techlusive as a Preferred SourceAddTechlusiveasaPreferredSource

SIM बाइंडिंग क्या है और इससे यूजर्स को क्या फायदा होगा?

SIM बाइंडिंग क्या है, इसे समझना भी जरूरी है। यह नियम टेलीकम्युनिकेशन साइबर सिक्योरिटी (TCS) नियमों में संशोधन के तहत लाया गया है, जिसके अनुसार हर मैसेजिंग ऐप को यह सुनिश्चित करना होगा कि यूजर का अकाउंट उसी एक्टिव SIM से जुड़ा रहे जिससे उसने रजिस्ट्रेशन किया था। इसका मतलब है कि अगर SIM बदलता है या फोन में मौजूद नहीं है, तो ऐप काम करना बंद कर सकता है या वेरिफिकेशन मांगा जा सकता है। इस नियम के तहत Snapchat और Messenger जैसे प्लेटफॉर्म भी आते हैं। सरकार का मानना है कि इससे ऑनलाइन ठगी, फर्जी पहचान और साइबर अपराधों पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकेगी।