Written By Ashutosh Ojha
Published By: Ashutosh Ojha | Published: Apr 02, 2026, 06:50 PM (IST)
SIM-based account linking for messaging apps like WhatsApp may be delayed in India.
भारत में डिजिटल फ्रॉड और पहचान के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। Department of Telecommunications (DoT) ने SIM Binding से जुड़े नियमों को लागू करने की समयसीमा बढ़ाकर अब 2026 के अंत तक कर दी है। यह नियम पहली बार नवंबर 2025 में पेश किया गया था, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर यूजर्स की पहचान उनके मोबाइल नंबर और SIM से जुड़ी रहे, हालांकि कई कंपनियों ने इसे लागू करने में तकनीकी दिक्कतों का हवाला दिया, जिसके चलते सरकार को डेडलाइन बढ़ानी पड़ी। और पढें: 1 मार्च से भारत में WhatsApp पर होगा नया नियम लागू, अब SIM के बिना नहीं चलेगा अकाउंट
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स जैसे WhatsApp, Telegram और Signal ने DoT को बताया कि इस फीचर को लागू करना आसान नहीं है। वहीं स्मार्टफोन कंपनियों और ऑपरेटिंग सिस्टम बनाने वाली बड़ी कंपनियां जैसे Apple और Google ने भी अतिरिक्त समय की मांग की, खासतौर पर Apple ने iOS सिस्टम में तकनीकी सीमाओं की बात कही और कहा कि इस फीचर को सही तरीके से लागू करने के लिए और समय चाहिए। और पढें: WhatsApp–Telegram जैसी कंपनियां नई सरकारी SIM Binding पॉलिसी से नाराज, लेकिन Jio–Airtel ने इस फैसले का किया स्वागत
बताया जा रहा है कि Meta (WhatsApp की पेरेंट कंपनी) DoT के साथ मिलकर एक ऐसा समाधान खोज रही है, जो तकनीकी रूप से संभव हो। WhatsApp इस फीचर पर काम भी कर रहा है, जिसमें ऐप यूजर से यह कन्फर्म करेगा कि उसका SIM कार्ड उसी फोन में मौजूद है जिससे अकाउंट बनाया गया था, हालांकि अभी तक यह फीचर पब्लिक वर्जन में लॉन्च नहीं हुआ है और डेवलपमेंट स्टेज में ही है।
SIM बाइंडिंग क्या है, इसे समझना भी जरूरी है। यह नियम टेलीकम्युनिकेशन साइबर सिक्योरिटी (TCS) नियमों में संशोधन के तहत लाया गया है, जिसके अनुसार हर मैसेजिंग ऐप को यह सुनिश्चित करना होगा कि यूजर का अकाउंट उसी एक्टिव SIM से जुड़ा रहे जिससे उसने रजिस्ट्रेशन किया था। इसका मतलब है कि अगर SIM बदलता है या फोन में मौजूद नहीं है, तो ऐप काम करना बंद कर सकता है या वेरिफिकेशन मांगा जा सकता है। इस नियम के तहत Snapchat और Messenger जैसे प्लेटफॉर्म भी आते हैं। सरकार का मानना है कि इससे ऑनलाइन ठगी, फर्जी पहचान और साइबर अपराधों पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकेगी।