Airplane में भी होता है Wi-Fi, जानें कैसे यात्रियों को हवा में मिलता है इंटरनेट
आज से 10 साल पहले फ्लाइट में इंटरनेट यूज नहीं किया जा सकता है, लेकिन टेक्नोलॉजी के अपग्रेड होने से यह अब संभव है। हवाई यात्रा के दौरान वाई-फाई का उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए दो प्रणाली सैटेलाइट व ग्राउंड टावर का उपयोग किया जाता है।
Published By: ajay verma | Published: Apr 29, 2026, 03:43 PM (IST)
हम जब भी हवाई यात्रा करते हैं, तो हमें फोन में मौजूद Flight Mode को ऑन करने के लिए कहा जाता है। इससे डिवाइस पूरी तरह से सभी नेटवर्क से डिस्कनेक्ट हो जाता है, जिससे न तो कॉल की जा सकती है और न ही इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इन-फ्लाइट वाई-फाई की मदद से इंटरनेट चलाया जा सकता है। ऐसे में अब यह सवाल उठता है कि आखिर यह वाई-फाई काम कैसे करता है और हवा में इंटरनेट कैसे मिलता है, तो इसका जवाब आपको हमारी इस खबर में मिलेगा। हम आपको यहां विस्तार से बताएंगे कि किस तरह एयरलाइन्स उड़ान के दौरान प्लेन में इंटरनेट पहुंचाती है।
कैसे फ्लाइट में काम करता है Wi-Fi ?
Airlines अपने विमान में खुद का इंटरनेट सिस्टम क्रिएट नहीं करती है। इस सेवा को देने के लिए ग्राउंड टावर और सैटेलाइट का इस्तेमाल किया जाता है। सबसे पहले Air-to-ground (ATG) सिस्टम की बात करें, तो यह सिस्टम मोबाइल नेटवर्क की तरह काम करता है। जब प्लेन उड़ान भरता है, तब विमान में लगा वाई-फाई ग्राउंड टावर के नेटवर्क से जुड़ जाता है। इसके बाद विमान आगे बढ़ते हुए लगातार टावर स्विच करता रहता है, जिससे कनेक्टिविटी बनी रहती है और यात्रियों को इंटरनेट मिलता रहता है। हालांकि, समुद्र या बिना टावर वाले क्षेत्र में पहुंचने पर कनेक्शन टूट जाता है।
सैटेलाइट सिस्टम बहुत एडवांस है, जिसका उपयोग लंबी दूरी और समुद्र के ऊपर से गुजरने वाली फ्लाइट में किया जाता है। विमान के ऊपर के हिस्से पर खास प्रकार का एंटीना लगा होता है, जो सैटेलाइट से कनेक्ट रहता है। फिर, जमीन पर मौजूद इंटरनेट स्टेशन सैटेलाइट को सिग्नल भेजता है और सैटेलाइट उस सिग्नल को प्लेन तक पहुंचाता है। इससे इंटरनेट स्थिर रहता है और स्टेशन व विमान के बीच कनेक्टिविटी बनी रहती है।
कैसे फोन तक पहुंचते सिग्नल ?
विमान लगा एंटीना सिग्नल रिसीव करने लगता है, तो वह उस सिग्नल को विमान में लगे राउटर तक भेजने लगता है, जिससे इंटरनेट पूरे केबिन में फैल जाता है। जैसे ही यात्री अपने फोन का वाई-फाई ऑन करते हैं, तो इंटरनेट उनके डिवाइस में जुड़ जाता है। यह सिस्टम ठीक वैसे ही काम करता है, जैसे घर में लगा राउटर काम करता है।
कितना सुरक्षित है विमान में लगा वाई-फाई ?
विशेज्ञों का मानना है कि विमान का वाई-फाई सिस्टम बहुत सिक्योर है। यह एयरक्राफ्ट के नेविगेशन और कंट्रोल सिस्टम से अलग प्रणाली पर काम करता है। इसके लिए सख्त नियम बनाए गए हैं, जिससे इसे कड़ाई से नियंत्रित किया जा सके।
क्या भारत में उपलब्ध है यह सेवा ?
रिपोर्ट्स की मानें, तो भारत में विमान यात्रा के दौरान वाई-फाई सर्विस का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी शुरुआत एयर इंडिया (Air India) औक विस्तारा (Vistara) ने की है। यह सेवा एयर इंडिया के Airbus A350 और Boeing 787-9 में दी जा रही है। इसके जरिए यात्री मैसेज भेजने से लेकर इंटरनेट तक का इस्तेमाल कर सकते हैं। फिलहाल, इन-फ्लाइट वाई-फाई को पूर्ण रूप से सभी विमानों में शुरू नहीं किया गया है।
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