DoT ने पेश किया काम का टूल, नहीं होने देगा ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार

भारत में साइबर फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिन्हें रोकने के लिए DoT (Department of Telecommunications) ने FRI टूल पेश किया है। यह Financial Fraud Risk Indicator, जो धोखाधड़ी में शामिल फोन नंबर का अलर्ट भेजता है।

Published By: ajay verma | Published: May 22, 2025, 11:42 AM (IST)

DoT (Department of Telecommunications) ने देश में बढ़ते ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों पर लगाम लगाने के लिए नया टूल पेश किया है। यह Financial Fraud Risk Indicator (FRI) है, जो Digital Intelligence Platform (DIP) का हिस्सा है। बता दें कि इस प्लेटफॉर्म को साइबर फ्रॉड में शामिल संभावित मोबाइल नंबर से जुड़ी वार्निंग देने के लिए तैयार किया गया है। और पढें: Dhurandhar 2 फ्री देखने का है मन? WhatsApp Scam से रहें सावधान, वरना अकाउंट होगा खाली

क्या है FRI टूल ?

DoT का FRI टूल संभावित फोन नंबर का अलर्ट भेजने के लिए वित्तीय संस्थानों, Chakshu, NCRP (National Cybercrime Reporting Portal), बैंक व डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म के अलग-अलग डेटा को एनालाइज करता है और उन्हें तीन कैटेगरी में बांट देता है, जिनमें मीडियम, हाई और वेरी हाई कैटेगरी शामिल है। और पढें: BSNL ने कर दिया बड़ा कमाल, 96,000 से ज्यादा 4G साइट्स चालू, इंटरनेट की स्पीड होगी बेहतर

विभाग का मानना है कि इस टूल के आने से बैंक, NBFC और UPI सेवा प्रदान करने वाले प्लेटफॉर्म के लिए फ्रॉड में समम्लित मोबाइल नंबर को चिह्नित करना आसान हो जाएगा। इससे धोखाधड़ी के बढ़ते केस पर लगाम लगेगी और लोग सुरक्षित रहेंगे। और पढें: 1 मार्च से भारत में WhatsApp पर होगा नया नियम लागू, अब SIM के बिना नहीं चलेगा अकाउंट

कैसे करता है काम

दूरसंचार विभाग का डिजिटल इंटेलिजेंस यूनिट हर तीन से चार दिन में Mobile Number Revocation लिस्ट जारी करता है, जिसमें बिना वेरिफिकेशन और साइबर धोखाधड़ी में शामिल मोबाइल नंबर होते हैं। ऐसे नंबर को लेकर FRI पहले अलर्ट भेजता है। इसके बाद DIP स्टेकहोल्डर द्वारा चिह्नित किए गए नंबर की जांच करके जोखिम का स्तर निर्धारित करता है। फिर यह जानकारी तुरंत सभी स्टेकहोल्डर को भेज दी जाती है।

कहां हुआ सबसे पहले इस्तेमाल

सरकारी विभाग के अनुसार, FRI सिस्टम का उपयोग सबसे पहले ऑनलाइन पेमेंट ऐप PhonePe ने किया है। फोनपे ने बताया कि उसने अपने प्लेटफॉर्म पर सबसे ज्यादा रिस्क वाले नंबर को ब्लॉक किया और फोनपे प्रोटेक्ट फीचर के माध्यम से चेतावनी भी दी।

केवल फोनपे ही नहीं पेटीएम (Patym) और गूगल पे (Google Pay) जैसे प्लेटफॉर्म ने भी इस सिस्टम का उपयोग करना शुरू कर दिया है, जिससे अब भारत में लोगों की मेहनत की कमाई सुरक्षित रहेगी।

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