2023 में Chandrayaan-3 मिशन के Vikram Lander ने लगाया था छोटा Jump, अब ISRO को मिली ये बड़ी सफलता
भारत के Chandrayaan-3 मिशन ने एक बार फिर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। 2023 में विक्रम लैंडर द्वारा किया गया छोटा सा 'Hop Experiment' अब बड़ी वैज्ञानिक खोज बन गया है। इस टेस्ट से वैज्ञानिकों को चांद की मिट्टी और उसकी अलग-अलग परतों के बारे में अहम जानकारी मिली है। आइए जानते हैं...
Published By: Ashutosh Ojha | Published: May 20, 2026, 03:26 PM (IST)
भारत के Chandrayaan-3 मिशन ने एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया है। साल 2023 में चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग करने वाले विक्रम लैंडर का एक छोटा सा 'हॉप एक्सपेरिमेंट' अब वैज्ञानिकों के लिए बड़ी खोज बन गया है। मिशन खत्म होने से ठीक पहले ISRO वैज्ञानिकों ने बचा हुआ ईंधन इस्तेमाल करने का फैसला लिया और विक्रम लैंडर को हल्का सा ऊपर उठाकर कुछ दूरी पर उतारा गया। उस समय इसे सिर्फ टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग मानी गई थी, लेकिन अब इससे चांद की सतह के बारे में बेहद अहम जानकारी मिली है। यह खोज भविष्य में चांद पर इंसानों के बेस बनाने की योजना के लिए भी काफी यूजफुल मानी जा रही है।
Chandrayaan-3 ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर कौन सा इतिहास रचा था?
भारत ने 23 अगस्त 2023 को इतिहास रचते हुए चंद्रयान-3 को चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास सफलतापूर्वक उतारा था। ऐसा करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बना था। मिशन के साथ भेजे गए प्रज्ञान रोवर और कई वैज्ञानिक उपकरणों ने चांद की मिट्टी यानी 'Regolith' का अध्ययन किया। ChaSTE नाम के उपकरण ने पहली बार इस इलाके की मिट्टी के तापमान और उसकी संरचना को मापा। मिशन को लगभग 14 दिनों तक काम करना था, लेकिन अंत में वैज्ञानिकों ने बचा हुआ ईंधन बेकार न जाने देने का फैसला किया और विक्रम लैंडर को करीब 40 से 50 सेंटीमीटर तक ऊपर उठाकर दूसरी जगह उतार दिया। यही छोटा सा हॉप अब बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि बन गया है।
आखिर चांद की मिट्टी के अंदर वैज्ञानिकों को क्या नया मिला?
इस हॉप के दौरान लैंडर के इंजनों से निकली गैस ने चांद की ऊपरी सतह की लगभग 3 सेंटीमीटर मोटी ढीली परत को हटा दिया। इसके नीचे मौजूद मिट्टी का अध्ययन करने का मौका मिला, जो पहले कभी सामने नहीं आई थी। वैज्ञानिकों ने पाया कि चांद की मिट्टी एक जैसी नहीं है, बल्कि अलग-अलग परतों में बंटी हुई है। ऊपर की सतह हल्की और ज्यादा ढीली है, जबकि नीचे की परत ज्यादा सख्त और घनी है। सिर्फ कुछ सेंटीमीटर के अंदर मिट्टी के गुण बदलते देख वैज्ञानिक भी हैरान रह गए। इससे पता चला कि चांद के दक्षिणी ध्रुव की सतह काफी अलग-अलग प्रकार की है।
NASA और भविष्य के Moon Mission के लिए यह खोज क्यों है बेहद अहम?
ISRO की यह खोज भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए बेहद जरूरी मानी जा रही है। NASA का Artemis मिशन आने वाले समय में चांद पर इंसानों को भेजने और वहां स्थायी बेस बनाने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में चांद की मिट्टी कितनी मजबूत है, वहां मशीनें और इंसान कैसे काम करेंगे, यह समझना बहुत जरूरी है। चंद्रयान-3 के इस छोटे से हॉप ने वैज्ञानिकों को ऐसी जानकारी दी है, जो पहले कभी नहीं मिली थी। भारत के लिए यह एक और बड़ी उपलब्धि है क्योंकि Chandrayaan-1 ने जहां चांद पर पानी के संकेत खोजे थे, वहीं अब Chandrayaan-3 चांद की सतह की गहराई से नई परतें और रहस्य सामने ला रहा है।
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