Microsoft Teams में आए एक साथ कई शानदार फीचर, एंड्रॉइड यूजर्स के आएंगे बहुत काम
Microsoft ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म टीम्स रूम्स के लिए नए फीचर रोलआउट किए हैं। इनमें चैट बबल और व्हाइटबोर्ड जैसे फीचर शामिल हैं।
Published By: ajay verma | Published: Jan 13, 2023, 05:01 PM (IST)
हाइलाइट
- माइक्रोसॉफ्ट के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप में कई फीचर्स को जोड़ा गया है।
- इनमें चैट बबल और व्हाइटबोर्ड जैसे फीचर शामिल हैं।
- इससे पहले यूजर्स के लिए Safe Links नाम के फीचर को रोलआउट किया गया था।
टेक जाइंट Microsoft ने अपने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म Teams Rooms के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट जारी किया है, जिसका नाम Android Update 3 है। इसके तहत प्लेटफॉर्म पर चैट बबल से लेकर इंटरएक्टिव वाइटबोर्ड तक को जोड़ा गया है, जो ऑनलाइन मीटिंग के दौरान यूजर के बहुत काम आएंगे। आइए टीम रूम्स के नए फीचर्स के बारे में जानते हैं...
व्हाइटबोर्ड
माइक्रोसॉफ्ट के नए फीचर व्हाइटबोर्ड का इस्तेमाल फॉर्मल और इनफॉर्मल मीटिंग के दौरान किया जा सकता है। यूजर इसे 'स्टार्ट मीटिंग' ऑप्शन पर टैप करके एक्टिवेट कर सकते हैं। यह फीचर एक्टिव होने पर अपने आप मीटिंग में जुड़ने वाले सदस्यों की स्क्रीन दिखाएगा। कंपनी का मानना है कि यह फीचर यूजर के बहुत काम आएगा और इसके जरिए मीटिंग करने में बहुत आसानी होगी।
चैट बबल
यूजर्स की सुविधा के लिए टीम रूम्स के प्लेटफॉर्म पर चैट बबल को जोड़ा गया है। इस फीचर के आने से यूजर्स को जरूरी मैसेज देखने के लिए बार-बार चैट बॉक्स में नहीं जाना पड़ेगा। यूजर्स को मैसेज मीटिंग के दौरान बबल के रूप में मिलेंगे।
4K रेजलूशन
माइक्रोसॉफ्ट ने अपडेट के तहत यूजर्स को टच स्क्रीन डिवाइस पर टीम रूम्स को कंट्रोल करने की सुविधा प्रदान की है। इसके अलावा प्लेटफॉर्म को 4K रेजलूशन का सपोर्ट भी मिला है।
रिडिजाइन हुआ शेयर मेन्यू
माइक्रोसॉफ्ट ने शेयर मेन्यू को दोबारा डिजाइन किया है। अब यूजर एक क्लिक में डॉक्यूमेंट से लेकर मल्टीमीडिया फाइल तक को शेयर कर सकते हैं। खास बात यह है कि शेयर ऑप्शन मीटिंग के दौरान यूजर के डिवाइस में मौजूद कंटेंट को कंपाइल फॉर्म में दिखाएगा।
आपको याद दिला दें कि माइक्रोसॉफ्ट ने साल 2021 में अपने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म Microsoft Teams में Safe Links नाम का फीचर जोड़ा था। यूजर इस फीचर की मदद से फेक यूआरएल की पहचान कर सकते हैं। कंपनी का मानना है कि इस फीचर को खासतौर पर फर्जी वेबसाइट्स की पहचान करने के लिए पेश किया गया है। इसकी मदद से यूजर अपने डेटा को सुरक्षित रख सकते हैं।
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