क्या आप भी ब्राउजर में Incognito Mode का करते हैं यूज? ये बड़ी भूल आपकी प्राइवेसी खतरे में डाल सकती है, इसकी बजाय क्या करें इस्तेमाल?
क्या आप भी अपने ब्राउजर में Incognito Mode का इस्तेमाल करते हैं ये सोचकर कि यह आपकी प्राइवेसी पूरी तरह सुरक्षित रखेगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि असल में यह आपकी ऑनलाइन पहचान को पूरी तरह छुपा नहीं पाता? आइए जानते हैं इसका सच और बेहतर ऑप्शन...
Published By: Ashutosh Ojha | Published: Dec 01, 2025, 09:39 AM (IST)
आज के डिजिटल दौर में ज्यादातर लोग अपने ब्राउजर में मौजूद Incognito Mode यानी Private Browsing का इस्तेमाल करते हैं। इसका नाम सुनकर लगता है कि यह इंटरनेट को पूरी तरह प्राइवेट बना देगा, लेकिन असलियत इससे काफी अलग है। इन्कॉग्निटो मोड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह आपके डिवाइस पर चल रही ब्राउजिंग हिस्ट्री, कुकीज और फॉर्म डाटा को सेव नहीं करता। यानी अगर आप किसी शेयर किए गए मोबाइल, लैपटॉप या साइबर कैफे पर इंटरनेट चला रहे हैं तो आपके बाद आने वाला व्यक्ति यह नहीं देख पाएगा कि आप क्या सर्च कर रहे थे। इसी वजह से लोग गिफ्ट सर्च करने, पर्सनल जानकारी पढ़ने या दोहरे अकाउंट्स लॉग-इन करने के दौरान इसे यूज करते हैं।
इन्कॉग्निटो मोड वास्तव में क्या करता है?
जब आप Chrome, Safari या किसी भी मॉडर्न ब्राउजर में इन्कॉग्निटो विंडो खोलते हैं, तो ब्राउजर कुछ चीजों को लोकल डिवाइस पर सेव करना बंद कर देता है। यह आपके विजिट किए गए वेब एड्रेस को हिस्ट्री में नहीं रखता, सेशन की कुकीज बंद कर देता है और सेशन खत्म होते ही उन्हें डिलीट भी कर देता है। साथ ही यह पेज पर भरी जानकारी को ऑटोफिल में सेव नहीं करता लेकिन इसके बावजूद आपकी डाउनलोड की गई फाइलें और बनाए गए बुकमार्क डिवाइस पर मौजूद रहते हैं। यानी यह मोड सिर्फ इतना सुनिश्चित करता है कि आपके डिवाइस पर कोई और आपकी ब्राउजिंग का रिकॉर्ड न देख सके बस इतना ही।
इन्कॉग्निटो मोड क्या नहीं कर सकता और कौन-कौन आपको ट्रैक कर सकता है?
इसके नाम में 'प्राइवेट' जरूर लिखा होता है, लेकिन यह आपकी ऑनलाइन पहचान नहीं छुपाता। आपका ISP (Internet Service Provider), यानी आपके इंटरनेट का नेटवर्क देने वाला कंपनी, आपकी सारी वेबसाइट विजिट देख सकती है। अगर आप ऑफिस या स्कूल के नेटवर्क पर हैं, तो वहां का नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर भी आपकी ब्राउजिंग को ट्रैक कर सकता है। जिन वेबसाइट्स को आप विजिट करते हैं, वे आपकी IP एड्रेस, डिवाइस इंफो, लॉगिन अकाउंट और ट्रैकिंग टूल्स के जरिए आपकी पहचान कर सकती हैं। विज्ञापन कंपनियां भी ब्राउजर फिंगरप्रिंटिंग और ट्रैकर्स के जरिए आपको पहचान सकती हैं।
अगर पूरी ऑनलाइन प्राइवेसी चाहिए तो इन्कॉग्निटो मोड के बजाय क्या इस्तेमाल करें?
अगर आप सच में इंटरनेट पर अपनी पहचान और लोकेशन छुपाना चाहते हैं, तो सिर्फ इन्कॉग्निटो मोड काफी नहीं है। इसके लिए VPN एक बेहतर ऑप्शन है, जो आपकी लोकेशन और IP एड्रेस को बदल देता है और आपके ट्रैफिक को एन्क्रिप्ट करता है। वहीं Tor Browser आपकी पहचान को कई लेयर वाले नेटवर्क के जरिए छुपाता है। DuckDuckGo जैसी प्राइवेसी-फोकस्ड सर्च इंजन भी ट्रैकिंग को कम करते हैं। हालांकि कोई भी तरीका 100% गारंटी नहीं देता, लेकिन इन्कॉग्निटो मोड की तुलना में ये टूल आपकी ऑनलाइन सुरक्षा को कई गुना बढ़ा देते हैं। इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि लोग इन्कॉग्निटो मोड को पूरी प्राइवेसी का ऑप्शन न समझें, बल्कि इसे सिर्फ एक लोकल डिवाइस प्राइवेसी फीचर के रूप में इस्तेमाल करें।
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