EVM: आखिर क्या है हाईटेक वोटिंग मशीन? कैसे बिना इंटरनेट के करती है काम? जानें पूरी टेक्नोलॉजी
EVM (Electronic voting machine) एक ऑफलाइन डिवाइस है, जो कि न तो Wifi से कनेक्ट होता है और न ही इंटरनेट व ब्लूटूथ से। इसमें मुख्य रूप से 3 हिस्से होते है, जो कि पूरी वोटिंग प्रक्रिया को सिक्योर बनाते है।
Published By: Manisha | Published: May 04, 2026, 02:04 PM (IST)
Electronic Voting Machine: चुनाव के दौरान हर किसी की जुबान पर एक डिवाइस का नाम होता है, जो कि EVM (Electronic voting machine) है। दरअसल, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन एक तरह का डिवाइस होता है, जिसका इस्तेमाल चुनाव पर होता है। इस डिवाइस में न केवल वोट का डेटा कलेक्ट होता है बल्कि इसी डिवाइस से वोटों की गिनती सटिक तरह से होती है। खास बात यह है कि ईवीएम के डेटा को आप सालों-साल सुरक्षित रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर कभी भी फिर से गिनती की जा सकती है। हालांकि, कई लोगों के मन में सवाल होगा कि आखिर यह EVM मशीन कैसे काम करती है। यह एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है, तो इसे आसानी से हैक किया जा सकता है... ऐसे में इसके द्वारा प्राप्त गिनती को कैसे मान्य समझा जाता है। आइए यहां जानते हैं EVM की पूरी ABCD।
EVM मशीन क्या है?
जैसे कि हमने बताया EVM (Electronic Voting Machine) एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है, जिसका इस्तेमाल वोटों के लिए किया जाता है। इस मशीन में Microcontroller चिप दिया जाता है, जिसमें वोटिंग का पूरा फर्मवियर एड किया होता है। इसमें PC या फिर Phone के OS जैसा नहीं होता। ईवीएम के जरिए तेजी से व सुरक्षित रूप से वोटिंग को आयोजित किया जाता है। इस मशीन का सॉफ्टवेयर OTP (One-Time Programmable) पर काम करता है, जिसमें एक बार एंट्री के बाद इसे बदला नहीं जा सकता। इस मशीन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसमें 1 बार वोट डालने के बाद मशीन अपनेआप लॉक हो जाती है। अगला वोट आप तभी डाल सकेंगे, जब पोलिंग ऑफिसर आपको Control Unit से उसकी अनुमति देगा।
इस मशीन में मुख्य रूप से 3 हिस्से होते हैं, जिसमें Ballot Unit (BU), Control Unit (CU) और VVPAT शामिल है।
Ballot Unit की बात करें, तो यह मशीन का वो हिस्सा होता है जहां से हम और आप अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट देते हैं। इस मशीन पर सभी उम्मीदवारों के नाम व उनकी पार्टी का चिन्ह होता है। आपको बस अपनी पसंद के उम्मीदवार के सामने बने बटन को दबाना होता है। जैसे ही आप बटन दबाते हैं, वैसे ही वोट उस उम्मीदवार के हिस्से में चले जाता है।
Control Unit की बात करें, तो यह मशीन का दूसरा हिस्सा होता है, जो कि पोलिंग ऑफिसर के पास होता है। इसे आप EVM का दिमाग भी कह सकते हैं, जिसमें 1 डिस्प्ले लगी होती है। इस यूनिट को एक्टिव करते ही मशीन की पूरी जानकारी सामने आ जाती है। मशीन में कितनी बैटरी है... इसमें कितने वोट अब-तक डाले गए हैं आदि। कंट्रोल यूनिट को बैलेट यूनिट के लिए एक्टिव किया जाता है। जैसे ही पोलिंग ऑफिसर इसे एक्टिव करता है, उसके बाद ही मतदाता अपना वोट दे सकता है।
VVPAT (Voter Verifiable Paper Audit Trail) यह EVM में लगा एक तरह का प्रिंटर डिवाइस होता है। जैसे ही मतदाता वोट डालता है, वैसे ही इस डिवाइस में एक पर्ची दिखाई देती है और उसमें देखा जा सकता है कि वोट किसी पार्टी को गया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह पर्ची कुछ ही देर तक दिखाई देती है और फिर उस मशीन में चली जाती है।
ऑफलाइन डिवाइस
EVM एक ऑफलाइन डिवाइस है, जिसे Wifi, Bluetooth व Internet से कनेक्ट नहीं किया जाता। ऐसे में इस डिवाइस का डेटा पूरी तरह से सुरक्षित होता है, जो कि सिर्फ इसी मशीन में स्टोर रहता है। इस वजह से यह डिवाइस हैक भी नहीं हो सकता। Ballot Unit और Control Unit के बीच Encrypted या कहें तो सिक्योर केबल कनेक्शन होता है। ऐसे में दोनों डिवाइस के बीच छेड़छाड़ करना भी नमुमकिन है। इस तरह
हार्डवेयर सिक्योरिटी
EVM मशीन में कई स्तर की टेम्पर-प्रूफ सील होती है, जिसके बाद यदि आप मशीन के साथ छेड़छाड़ भी करते हैं जो मशीन उसे डिटेक्ट कर लेती है और उसके बाद उस मशीन को इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
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