सरकार ने Telegram को भेजा नोटिस, बस 15 दिन में देना होगा जवाब
भारत सरकार ने फिल्मों और OTT कंटेंट की कथित पायरेसी को लेकर Telegram को नोटिस जारी किया है। कंपनी को 15 दिनों के भीतर अपना जवाब और Action Taken Report (ATR) सौंपने के लिए कहा गया है। आइए जानते हैं...
Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jul 04, 2026, 08:42 PM (IST)
टेलीग्राम एक बार फिर भारत सरकार की सख्ती का सामना कर रहा है। इस बार वजह प्लेटफॉर्म पर फिल्मों और OTT कंटेंट की कथित पायरेसी है। Ministry of Information and Broadcasting(I&B) ने कंपनी को नोटिस भेजकर 15 दिनों के भीतर Action Taken Report (ATR) मांगी है। सरकार का कहना है कि सिर्फ शिकायत आने के बाद कंटेंट हटाना पर्याप्त नहीं है। प्लेटफॉर्म को ऐसे मजबूत सिस्टम भी बनाने होंगे, जो पायरेटेड कंटेंट के बार-बार फैलने पर पहले से रोक लगा सकें। अधिकारियों के अनुसार अब फोकस केवल किसी एक चैनल या पोस्ट पर कार्रवाई करने का नहीं, बल्कि पूरे प्लेटफॉर्म पर पायरेसी रोकने की जिम्मेदारी तय करने का है। इसी वजह से सरकार ने टेलीग्राम से यह भी पूछा है कि वह भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाएगा और उसकी आगे की रणनीति क्या होगी।
सरकार ने टेलीग्राम को क्या नोटिस दिया है?
सरकार ने अपने नोटिस में साफ कहा है कि टेलीग्राम को उन चैनलों, ग्रुप्स, बॉट्स, यूजर अकाउंट्स और एडमिन्स के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करनी होगी, जो कॉपीराइट वाला कंटेंट शेयर कर रहे हैं। इसके अलावा कंपनी से यह भी पूछा गया है कि फिल्म निर्माताओं, OTT प्लेटफॉर्म और कानून लागू करने वाली एजेंसियों से मिलने वाली शिकायतों पर वह किस तरह कार्रवाई करती है और उन्हें कितनी जल्दी निपटाती है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि कॉपीराइट उल्लंघन को सिर्फ एक सामान्य विवाद नहीं माना जा सकता। कई मामलों में यह Copyright Act, 1957 और Cinematograph Act, 1952 के तहत आपराधिक अपराध की श्रेणी में भी आ सकता है। अधिकारियों का कहना है कि अगर टेलीग्राम का जवाब संतोषजनक नहीं हुआ या प्लेटफॉर्म पर पायरेटेड कंटेंट लगातार मिलता रहा, तो उसके खिलाफ आगे और सख्त कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।
टेलीग्राम पर पहले क्या कार्रवाई हुई थी?
यह नोटिस ऐसे समय में जारी किया गया है, जब सरकार पहले ही पायरेसी से जुड़े 3000 से ज्यादा टेलीग्राम चैनलों पर कार्रवाई कर चुकी है। अब सरकार सिर्फ पायरेटेड कंटेंट हटाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उसकी कोशिश है कि प्लेटफॉर्म खुद ऐसे कंटेंट की पहचान करें और उसे फैलने से रोकने के लिए मजबूत मॉडरेशन सिस्टम लागू करें। खास बात यह है कि पिछले एक हफ्ते के भीतर टेलीग्राम को मिला यह दूसरा सरकारी नोटिस है। इससे पहले Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) ने Telegram, WhatsApp और Signal को उनके Username फीचर को लेकर नोटिस भेजा था, वहीं जून में NEET (UG) 2026 Re-Examination के प्रश्नपत्र लीक होने की आशंकाओं के बीच 16 जून से 22 जून तक भारत में टेलीग्राम की सेवाओं पर अस्थायी रोक भी लगाई गई थी। इसी दौरान National Testing Agency (NTA) की सिफारिश पर सरकार ने टेलीग्राम के मैसेज एडिट फीचर को 30 जून तक बंद रखने का भी निर्देश दिया था।
सरकार ये कार्रवाई क्यों कर रही है?
सरकार का कहना है कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य Film Industry, Broadcasters, OTT Platforms, Producers और बाकी Copyright Holders के हितों की रक्षा करना है, जिन्हें पायरेसी की वजह से भारी नुकसान उठाना पड़ता है। अधिकारियों के मुताबिक अब सिर्फ कंटेंट मालिकों की शिकायत आने का इंतजार नहीं किया जाएगा। सरकार चाहती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म खुद ऐसी टेक्नोलॉजी और बेहतर सिस्टम तैयार करें, जो अवैध कंटेंट की समय रहते पहचान कर उस पर तुरंत कार्रवाई कर सकें। सरकार का मानना है कि यह कदम Information Technology Act, 2000 और Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules 2021 के तहत प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारियों को और स्पष्ट करता है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि अगर किसी प्लेटफॉर्म पर लगातार गैरकानूनी एक्टिविटी सामने आती हैं, तो वह सिर्फ खुद को 'Intermediary' बताकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।
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