सुप्रीम कोर्ट की WhatsApp और Meta को सख्त चेतावनी, यूजर डेटा पर मचा बवाल
सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp और Meta को यूजर डेटा और प्राइवेसी को लेकर सख्त चेतावनी दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि भारत में काम करने वाली कंपनियों को भारतीय कानून का पालन करना होगा। इस मामले ने यूजर डेटा की सुरक्षा और सहमति पर बड़ी बहस छेड़ दी है। आइए जानते हैं...
Published By: Ashutosh Ojha | Published: Feb 03, 2026, 04:15 PM (IST) | Edited: Feb 03, 2026, 04:16 PM (IST)
सुप्रीम कोर्ट ने मैसेजिंग ऐप WhatsApp और उसकी पैरेंट कंपनी Meta को यूजर डेटा के इस्तेमाल को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि भारत में काम करने वाली किसी भी कंपनी को भारतीय कानून और संविधान का पालन करना ही होगा। अगर कोई कंपनी ऐसा नहीं कर सकती, तो उसे भारत में कारोबार करने पर दोबारा विचार करना चाहिए। यह टिप्पणी WhatsApp की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी और उस पर Competition Commission of India (CCI) द्वारा लगाए गए जुर्माने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की गई। कोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिकों के डेटा का व्यावसायिक इस्तेमाल किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यूजर की प्राइवेसी को लेकर कोर्ट ने कौन-से सवाल उठाए
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्या कांत की अगुवाई वाली पीठ ने WhatsApp की डेटा शेयरिंग नीति पर गंभीर चिंता जताई। CJI ने कहा कि कोर्ट 'यूजर डेटा का एक भी अंक' शेयर होने की अनुमति नहीं देगा और किसी कंपनी को भारतीयों के प्राइवेसी के अधिकार से खिलवाड़ करने का हक नहीं है। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि WhatsApp जैसे बड़े ऐप के मामले में यूजर की सहमति कितनी जरूरी हो सकती है, क्योंकि ज्यादातर लोगों के पास WhatsApp का कोई ऑप्शन नहीं है, इसलिए वे मजबूरी में उसकी शर्तें स्वीकार करते हैं। इसी दौरान कोर्ट ने यह सख्त टिप्पणी भी की कि अगर Meta भारत के संवैधानिक ढांचे का पालन नहीं कर सकती, तो उसे 'भारत छोड़ देना चाहिए।'
WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आम यूजर्स की स्थिति पर भी ध्यान दिया। CJI ने सवाल किया कि क्या कोई रेहड़ी-पटरी वाला, घरेलू कामगार या गांव में रहने वाला व्यक्ति WhatsApp की लंबी और मुश्किल प्राइवेसी पॉलिसी को वास्तव में समझ पाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में ली गई सहमति को निष्पक्ष नहीं माना जा सकता। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि यूजर डेटा का इस्तेमाल सिर्फ सुरक्षित रखने के लिए नहीं, बल्कि व्यावसायिक फायदे के लिए किया जा रहा है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भी कहा कि व्यवहार से जुड़ा डेटा (Behavioural Data) आर्थिक रूप से काफी जरूरी होता है और इसकी गहराई से जांच जरूरी है। CJI ने अपने निजी अनुभव का भी जिक्र किया, जब WhatsApp पर स्वास्थ्य से जुड़ी बातचीत के बाद उन्हें उसी तरह के विज्ञापन दिखे, जिससे डेटा ट्रैकिंग पर सवाल खड़े होते हैं।
WhatsApp और Meta की ओर से क्या दलील दी गई
WhatsApp और Meta की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने दलील दी कि WhatsApp के मैसेज एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड होते हैं और कंपनी उन्हें पढ़ या एक्सेस नहीं कर सकती। उन्होंने यह भी बताया कि CCI द्वारा लगाया गया 213 करोड़ रुपये का जुर्माना पहले ही जमा किया जा चुका है। Meta की कानूनी टीम ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि वह अपने डेटा इस्तेमाल को लेकर एक हलफनामा दाखिल करेगी। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई अगली तारीख तक के लिए टाल दी और इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को भी इस केस में पक्षकार बना लिया। यह मामला CCI के नवंबर 2024 के आदेश से जुड़ा है, जिसमें कहा गया था कि WhatsApp ने 'लेना है तो लो' वाली नीति अपनाकर अपने डोमिनेंस का दुरुपयोग किया। अब इस अहम मामले पर सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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