भारत में लॉन्च की तैयारी में एलन मस्क की Starlink, भारत के इन 9 शहरों में बनेंगे गेटवे स्टेशन
एलन मस्क की कंपनी Starlink भारत में जल्द अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने जा रही है। कंपनी मुंबई, नोएडा, हैदराबाद जैसे 9 शहरों में गेटवे स्टेशन बनाएगी ताकि देश के गांवों तक तेज इंटरनेट पहुंचाया जा सके। आइए जानते हैं
Published By: Ashutosh Ojha | Published: Oct 24, 2025, 12:37 PM (IST)
एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी Starlink अब भारत में अपनी सैटेलाइट कम्युनिकेशन (Satcom) सेवाओं की शुरुआत करने के लिए पूरी तरह तैयार हो रही है। The Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी भारत के कई बड़े शहरों जैसे मुंबई, नोएडा, चंडीगढ़, हैदराबाद, कोलकाता और लखनऊ में कुल 9 गेटवे स्टेशन लगाने की तैयारी कर रही है। ये स्टेशन कंपनी के सैटेलाइट नेटवर्क को भारत के इंटरनेट सिस्टम से जोड़ेंगे। इस कदम से भारत के गांवों और दूर-दराज के इलाकों में भी तेज इंटरनेट पहुंचाना आसान हो जाएगा। यह भारत में हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन देने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
सरकार ने Starlink को कौन-सी मंजूरी दी है?
सरकार ने Starlink को अभी डेमो के लिए अस्थायी स्पेक्ट्रम (provisional spectrum) दिया है ताकि कंपनी सुरक्षा से जुड़ी शर्तों का पालन कर सके। रिपोर्ट के मुताबिक, Starlink ने अपने Gen 1 constellation के तहत भारत के लिए 600 गीगाबिट प्रति सेकंड की क्षमता मांगी है। हालांकि इस समय कंपनी को केवल फिक्स्ड सैटेलाइट सर्विस के डेमो करने की अनुमति दी गई है और 100 यूजर टर्मिनल्स के आयात की मंजूरी मिली है। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर 'कड़े नियम' लगाए गए हैं ताकि किसी तरह का दुरुपयोग न हो, क्योंकि सैटेलाइट नेटवर्क को क्रिटिकल सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर माना जाता है।
विदेशी टेक एक्सपर्ट्स पर रोक क्यों लगाई गई है?
सरकार ने Starlink पर कई सुरक्षा नियम लगाए हैं। कंपनी ने अपने गेटवे स्टेशन चलाने के लिए विदेशी टेक एक्सपर्ट्स की मदद लेने की मांग की थी लेकिन सरकार ने कहा है कि गृह मंत्रालय की मंजूरी मिलने तक कोई भी विदेशी नागरिक इन स्टेशनों पर काम नहीं कर सकेगा। फिलहाल सिर्फ भारतीय नागरिक ही इन स्टेशनों का संचालन कर पाएंगे। यह फैसला देश की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है क्योंकि पहले सीमावर्ती इलाकों में Starlink के उपकरणों के गलत इस्तेमाल की खबरें आई थीं। इस साल मार्च में मणिपुर और अंडमान-निकोबार में कुछ गैरकानूनी Starlink डिवाइस पकड़े गए थे, जिसके बाद गृह मंत्रालय ने दूरसंचार विभाग (DoT) को जांच के आदेश दिए थे।
डाटा स्टोरेज और रिपोर्टिंग के क्या नियम बनाए गए हैं?
सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि डेमो के दौरान कोई व्यावसायिक सेवा नहीं दी जा सकती। इस अवधि में Starlink को यह सुनिश्चित करना होगा कि सारा डेटा भारत में ही संग्रहीत (Data Localisation) किया जाए। साथ ही कंपनी को हर 15 दिन में सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को रिपोर्ट देनी होगी, जिसमें टर्मिनल की लोकेशन, यूजर डिटेल्स और जियो-कोऑर्डिनेट्स जैसी जानकारी शामिल होगी। जब कंपनी सरकार के सभी सुरक्षा नियमों को पूरा कर लेगी, तभी उसे स्थायी स्पेक्ट्रम और कमर्शियल सेवाएं शुरू करने की अनुमति दी जाएगी। अगर सब कुछ समय पर और ठीक तरह से हुआ, तो Starlink भारत में सैटेलाइट इंटरनेट को नई ऊंचाई तक पहुंचा सकती है खासकर उन गांवों और दूर-दराज के इलाकों में, जहां आज भी इंटरनेट पहुंचाना मुश्किल है।
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