Nokia कर रहा कमाल, चांद पर पहुंचाएगा 4G इंटरनेट

Nokia चांद पर 4G इंटरनेट का सेटअप लगाने की प्लानिंग कर रहा है। इसकी मदद से न सिर्फ अंतरिक्ष यात्रियों को फायदा होगा, बल्कि अंतरिक्ष मिशन के दौरान होने वाले शोध में तेज गति मिलेगी।

Published By: Rohit Kumar | Published: Mar 29, 2023, 03:42 PM (IST)

हाइलाइट

  • Nokia चांद पर 4G इंटरनेट सेटअप लगा रहा है।
  • अंतरिक्ष यात्रियों को भी इससे काफी फायदा मिलेगा।
  • अंतरिक्ष पर होने वाले शोध में भी इससे फायदा पहुंचेगा।

Nokia चांद पर 4G Internet तकनीक को सेंड करने की प्लानिंग कर रही है। इस इंटरनेट की सहायता से स्पेस मिशन और जांद पर जिंदगी के साक्ष्य खोजने में आसानी होगी। इस तकनीक को चांद पर बिझाने के लिए IM-2 mission का इस्तेमाल किया जाएगा, जो नवंबर में SpaceX Falcon 9 रॉकेट से प्रक्षेपित किया जाएगा। नोकिया के इस प्रोजेक्ट की मदद से चांद पर इंसानों की बस्ती बसाने और वहां जाने वाले अंतरिक्ष मिशन क्रू के लिए काफी सुविधाजनक होगा।

चांद पर 4G communications सिस्टम को बिछाने के लिए नोकिया ने लूनर आउटपोस्ट और इंस्टूटिव मशीन के साथ पार्टनरशिप की है। यह तकनीक चांद के जलवायु में होने वाली विषम परिस्थितियों का भी सामना कर सकेगी और इंटरनेट की कनेक्टिविटी देती रहेगी। Intuitive Machines के डेवलप किया गया नोवा सी लूनर लैंडर, चांद पर सामान को लेकर जाएगा और उसे अलग-अलग स्थान पर स्थापित करने में मदद करेगा। इस तकनीक की मदद से चांद को लेकर भविष्य में होने वाले मिशन को लाभ मिलेगा। चांद की सतह पर नासा साल 2025 में अपने दो अंतरिक्ष यात्रियों को भेजेगा।

4G तकनीक मिशन के लिए नासा ने नोकिया को चुना

नासा ने साल 2020 में नोकिया का चयन किया और फिर बेल लैब्स के लिए 14.1 मिलियन अमेरिकी डॉलर की फंडिंग भी जारी की। नोकिया का उद्देश्य लैंडर के शॉर्ट और लॉन्ग रेंज कम्यूनिकेशन की काबिलियत को अलग-अलग स्तर पर चेक करना है। शुरुआत में इसे कुछ मीटर पर परीक्षण किया जाएगा, उसके बाद 2-3 किलोमीटर की दूरी पर टेस्टिंग की जाएगी।

नासा मिशन में मिलेगा फायदा

Nokia के इस 4G इंटरनेट तकनीक की मदद से Artemis 3 मिशन में फायदा मिलेगा। इसमें वॉयस और वीडियो कम्यूनिकेशन की काबिलियत को भी बेहतर करने की कोशिश करेगा। इसमें बायोमैट्रिक डाटा एक्सचेंज करने में भी आसानी होगा।  इसके साथ ही कंपनी का मुख्य मकसद चांद की बर्फ पर होने वाले नए-नए शोद और एक्सपेरिमेंट में सहायता प्रदान करना है। इसकी मदद से अंतरिक्ष यात्रियों को भी काफी फायदा होगा।

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