सूर्य के खतरों पर 24 घंटे नजर रखेगा अमेरिका का ये नया सैटेलाइट
अमेरिका ने SOLAR-1 नाम का नया सैटेलाइट पूरी तरह चालू कर दिया है, जो 24 घंटे सूर्य की गतिविधियों और अंतरिक्ष मौसम पर नजर रखेगा। यह सैटेलाइट सौर तूफानों की समय रहते चेतावनी देगा, जिससे GPS, सैटेलाइट, संचार नेटवर्क और बिजली व्यवस्था को होने वाले संभावित नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी।
Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jun 12, 2026, 11:37 AM (IST)
NOAA (National Oceanic and Atmospheric Administration) ने अमेरिका के पहले ऐसे सैटेलाइट SOLAR-1 को पूरी तरह चालू कर दिया है, जो 24 घंटे अंतरिक्ष के मौसम और सूर्य की एक्टिविटी पर नजर रखेगा। इस सैटेलाइट का काम सौर तूफानों (Solar Storms) का समय रहते पता लगाना और उनकी चेतावनी देना है। Solar Storm GPS, Radio signals, Satellites और Power Supply जैसी जरूरी सेवाओं को प्रभावित कर सकते हैं। सितंबर 2025 में लॉन्च हुए SOLAR-1 ने करीब 8 महीने तक टेस्टिंग पूरी की, जिसके बाद अब इसे आधिकारिक रूप से काम पर लगा दिया गया है। NOAA का कहना है कि यह सैटेलाइट खतरनाक Solar Activities की पहले से जानकारी देकर संभावित नुकसान को कम करने में मदद करेगा।
SOLAR-1 सूर्य की किन एक्टिविटी पर नजर रखेगा?
SOLAR-1 को खासतौर पर सूर्य से निकलने वाली Solar Winds और Coronal Mass Ejections (CME) पर नजर रखने के लिए बनाया गया है। CME सूर्य से निकलने वाले तेज और ऊर्जा से भरे कणों के बड़े बादल होते हैं। जब ये पृथ्वी के पास पहुंचते हैं, तो GPS, रेडियो नेटवर्क, सैटेलाइट्स और बिजली ग्रिड जैसी टेक्नोलॉजी Services में दिक्कत पैदा कर सकते हैं, हालांकि यही Solar Activities आसमान में दिखने वाली खूबसूरत नॉर्दर्न लाइट्स और सदर्न लाइट्स भी बनाती हैं। मई 2024 में कई देशों में दिखाई देने वाली नॉर्दर्न लाइट्स भी ऐसी ही Solar Activities की वजह से बनी थीं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इन घटनाओं की पहले से जानकारी मिल जाए, तो संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है और जरूरी तैयारियां की जा सकती हैं।
SOLAR-1 को पृथ्वी से इतनी दूर क्यों रखा गया है?
SOLAR-1 को पृथ्वी से करीब 10 लाख मील दूर लैग्रेंज पॉइंट (L1) पर रखा गया है। यह अंतरिक्ष का एक खास स्थान है, जहां सूर्य और पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण संतुलित रहता है। इसकी वजह से सैटेलाइट एक स्थिर स्थिति में रहकर लगातार सूर्य पर नजर रख सकता है। यह जगह Solar Activities को साफ और बिना रुकावट देखने के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है। NOAA के मुताबिक, SOLAR-1 अब Solar Storms और CME से जुड़ी तस्वीरें और जरूरी जानकारी सिर्फ 30 मिनट के अंदर स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर तक भेज सकता है। पहले ऐसी जानकारी मिलने में 8 घंटे तक का समय लग जाता था। इससे वैज्ञानिकों को सौर तूफानों की चेतावनी पहले और ज्यादा सटीक तरीके से जारी करने में मदद मिलेगी।
SOLAR-1 से लोगों और तकनीकी सिस्टम को क्या फायदा होगा?
NOAA का कहना है कि SOLAR-1 अमेरिका की स्पेस वेदर चेतावनी सिस्टम का एक अहम हिस्सा है। यह सैटेलाइट सौर तूफानों की जानकारी और अलर्ट समय पर देगा, ताकि Power Companies, Communication Networks, Satellite Operators और Space Mission पहले से तैयारी कर सकें और संभावित नुकसान से बच सकें। इसके अलावा, ऑरोरा (नॉर्दर्न और सदर्न लाइट्स) देखने के शौकीनों को भी ज्यादा सटीक जानकारी मिल सकेगी कि यह खूबसूरत रोशनी कब और कहां दिखाई दे सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज की टेक्नोलॉजी पर निर्भर दुनिया में अंतरिक्ष मौसम पर नजर रखना बेहद जरूरी है। SOLAR-1 के शुरू होने से वैज्ञानिकों को Solar Activities को बेहतर ढंग से समझने और उनके असर से तकनीकी सिस्टम की सुरक्षा करने में मदद मिलेगी।
टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल की लेटेस्ट खबरों के लिए आप हमें व्हाट्सऐप चैनल, फेसबुक, यूट्यूब और X, पर फॉलो करें।