इंसानों के बाद अब रोबोट करेगा पूजा-पाठ, आ गया Robot Monk
दक्षिण कोरिया में टेक्नोलॉजी और अध्यात्म का अनोखा मेल देखने को मिला है। यहां देश का पहला रोबोट भिक्षु (Monk) ‘Gabi’ लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। यह रोबोट मंत्र पढ़ सकता है, पूजा में शामिल हो सकता है और लोगों के सवालों के जवाब भी दे सकता है। अब AI और रोबोटिक्स धर्म की दुनिया में भी कदम रख रहे हैं। आइए जानते हैं...
Published By: Ashutosh Ojha | Published: May 07, 2026, 01:04 PM (IST)
दक्षिण कोरिया में अब टेक्नोलॉजी और अध्यात्म का ऐसा अनोखा मेल देखने को मिला है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राजधानी सियोल के प्रसिद्ध बौद्ध मंदिर में देश के पहले ह्यूमनॉइड रोबोट भिक्षु (Monk) 'Gabi' को पेश किया गया। यह रोबोट सिर्फ मशीन नहीं है, बल्कि इसे बौद्ध परंपराओं और आध्यात्मिक में शामिल होने के लिए तैयार किया गया है। खास बात यह है कि गाबी मंत्रोच्चार कर सकता है, प्रार्थना के दौरान झुक सकता है और लोगों के सवालों का जवाब भी दे सकता है। दक्षिण कोरिया के बौद्ध धार्मिक संगठन का मानना है कि आधुनिक टेक्नोलॉजी की मदद से युवाओं को अध्यात्म और बौद्ध धर्म के करीब लाया जा सकता है।
धार्मिक समारोह में Gabi ने क्या-क्या किया?
Gabi को सियोल के जोग्ये मंदिर में बुद्ध पूर्णिमा समारोह से पहले आयोजित एक खास धार्मिक कार्यक्रम में पेश किया गया। करीब चार फीट लंबे इस रोबोट को पारंपरिक भूरे और ग्रे कलर के भिक्षु वस्त्र पहनाए गए थे। समारोह के दौरान यह बाकी भिक्षुओं के साथ बैठा, मंत्रोच्चार में शामिल हुआ और धार्मिक परंपराओं का पालन करता दिखाई दिया। जब एक भिक्षु ने उससे पूछा कि क्या वह बुद्ध और उनकी शिक्षाओं के प्रति समर्पित रहेगा, तो Gabi ने जवाब दिया, 'हां, मैं खुद को समर्पित करूंगा।' रोबोट ने प्रार्थना की मुद्रा में हाथ जोड़े, पगोडा के चारों ओर घूमकर अनुष्ठान पूरा किया और 108 मोतियों वाली माला भी ग्रहण की।
Gabi रोबोट को कैसे बनाया गया और उसके नाम का क्या मतलब है?
Gabi को चीन की कंपनी के यूनिट्री G1 ह्यूमनॉइड प्लेटफॉर्म पर तैयार किया गया है। इसका शरीर इंसानों की तरह डिजाइन किया गया है ताकि यह चल सके, हाथ हिला सके और धार्मिक गतिविधियों में भाग ले सके। इसके नाम के पीछे भी खास आध्यात्मिक अर्थ छिपा है। 'Gabi' नाम गौतम बुद्ध के बचपन के नाम सिद्धार्थ और कोरियाई शब्द 'जाबी' से मिलकर बना है, जिसका अर्थ दया और करुणा होता है। मंदिर से जुड़े भिक्षुओं का कहना है कि नाम ऐसा चुना गया ताकि यह सुनने में आसान लगे और साथ ही बौद्ध मूल्यों को भी दर्शाए। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर भी गाबी को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता देखने को मिल रही है।
इस रोबोट के लिए कौन-कौन से खास नियम बनाए गए हैं?
इस रोबोट को सिर्फ धार्मिक कार्यक्रमों में दिखाने के लिए नहीं बनाया गया, बल्कि इसके लिए खास 'रोबोट बौद्ध नियम' भी तैयार किए गए हैं। इन नियमों में जीवन का सम्मान करना, किसी रोबोट या वस्तु को नुकसान न पहुंचाना, इंसानों की बात मानना, झूठ न बोलना और जरूरत से ज्यादा बैटरी चार्ज न करना जैसी बातें शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन नियमों को तैयार करने में AI चैटबॉट्स जैसे ChatGPT और Gemini की भी मदद ली गई। धार्मिक संगठनों का मानना है कि आने वाले समय में ऐसे रोबोट मंदिरों में लोगों को बौद्ध शिक्षाओं के बारे में जानकारी देंगे और युवाओं के साथ संवाद बनाने में मदद करेंगे।
क्या Gabi जैसे और भी रोबोट है?
Gabi अकेला ऐसा रोबोट नहीं है जो अध्यात्म की दुनिया में कदम रख रहा हो। हाल ही में जापान की क्योटो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 'Buddharoid' नाम का AI आधारित रोबोट डेवलप किया था। यह रोबोट लोगों से बातचीत कर सकता है, बौद्ध धर्मग्रंथों को सीख सकता है और आध्यात्मिक सवालों के जवाब भी दे सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जापान में धार्मिक गुरुओं की उम्र बढ़ रही है और नए युवा इस क्षेत्र में कम आ रहे हैं। ऐसे में AI आधारित रोबोट भविष्य में धार्मिक परंपराओं को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं। बुद्धारॉयड को इस तरह तैयार किया गया है कि वह इंसानों के साथ बातचीत करते हुए लगातार नई बातें सीख सके और समय के साथ खुद को बेहतर बना सके।
क्या भविष्य में टेक्नोलॉजी और अध्यात्म साथ-साथ चलेंगे?
टेक्नोलॉजी और अध्यात्म का यह मेल अब दुनिया में नई बहस को जन्म दे रहा है। कुछ लोग इसे भविष्य की जरूरत मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि आध्यात्मिकता केवल इंसानी भावनाओं और अनुभवों से जुड़ी होती है, जिसे मशीन पूरी तरह समझ नहीं सकती, हालांकि दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों में AI और रोबोटिक्स तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, इसलिए धार्मिक संस्थाएं भी समय के साथ खुद को बदलने की कोशिश कर रही हैं। Gabi जैसे रोबोट यह दिखाते हैं कि आने वाले समय में टेक्नोलॉजी सिर्फ कामकाज या फैक्ट्री तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इंसानों की संस्कृति, धर्म और अध्यात्म का भी हिस्सा बन सकती है।
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