Fiber Optic Cable कैसे करते हैं काम? इंटरनेट की स्पीड के पीछे छिपा है ये अनोखा विज्ञान

आज हम सभी तेज इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि डेटा इतनी तेजी से आपके फोन या कंप्यूटर तक कैसे पहुंचता है? इसका जवाब फाइबर ऑप्टिक केबल में छिपा है। आइए जानते हैं इस खास टेक्नोलॉजी के बारे में...

Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jun 22, 2026, 11:48 AM (IST)

आज के डिजिटल दौर में तेज इंटरनेट हमारी रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग, वीडियो कॉल और क्लाउड सेवाओं जैसी सुविधाओं के पीछे जिस टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा योगदान है, वह है फाइबर ऑप्टिक केबल। ये केबल सामान्य तांबे के तारों से बिल्कुल अलग होते हैं और इनमें डेटा को बिजली की बजाय रोशनी (Light) के जरिए भेजा जाता है। फाइबर ऑप्टिक केबल बेहद पतले कांच या प्लास्टिक के रेशों से बने होते हैं। जब एक सिरे से Light भेजी जाती है, तो वह केबल के अंदर लगातार उछलती हुई आगे बढ़ती रहती है। इसी प्रक्रिया की वजह से डेटा बहुत तेज स्पीड से लंबी दूरी तक पहुंच पाता है। और पढें: क्या दिल्ली समेत इस शहर में दिसंबर से शुरू होगी BSNL की 5G सर्विस? प्राइवेट कंपनियों को मिलेगी कड़ी टक्कर

फाइबर ऑप्टिक केबल के अंदर डेटा आखिर कैसे ट्रैवल करता है?

फाइबर ऑप्टिक केबल में डेटा ट्रांसफर की प्रक्रिया काफी दिलचस्प होती है। केबल के बाहरी हिस्से में मौजूद खास परत, जिसे क्लैडिंग (Cladding) कहा जाता है, Light को बाहर निकलने नहीं देती। इससे रोशनी केबल के अंदर ही बार-बार रिफ्लेक्ट होती रहती है। इस टेक्नोलॉजी को 'Total Internal Reflection' कहा जाता है। जब यह Light अपनी मंजिल तक पहुंचता है, तो वहां मौजूद ऑप्टिकल रिसीवर इसे फिर से इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदल देता है। इसके बाद यह सिग्नल आपके कंप्यूटर, स्मार्टफोन, टीवी या बाकी डिवाइस तक पहुंचता है और वही डेटा स्क्रीन पर दिखाई देता है। हालांकि बहुत लंबी दूरी पर कुछ डेटा लॉस हो सकता है, लेकिन फिर भी यह टेक्नोलॉजी बाकी केबलों की तुलना में कहीं ज्यादा भरोसेमंद और तेज मानी जाती है।

फाइबर ऑप्टिक टेक्नोलॉजी कितनी पुरानी है और इसमें क्या नए बदलाव हुए हैं?

दिलचस्प बात यह है कि फाइबर ऑप्टिक टेक्नोलॉजी कोई नई खोज नहीं है। इसकी शुरुआत 1950 के दशक में हो गई थी, लेकिन इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल 1980 के दशक में शुरू हुआ, जब Telecom Companies ने इसे अपने नेटवर्क का हिस्सा बनाना शुरू किया। समय के साथ इसकी क्षमता और क्वालिटी में काफी सुधार हुआ है। वैज्ञानिकों ने ऐसी नई फाइबर टेक्नोलॉजी भी डेवलप की है जिन्हें 'Hollow Fiber' कहा जाता है। इनमें Light फाइबर की तुलना में करीब 50% ज्यादा तेजी से ट्रैवल कर सकती है। इससे इंटरनेट की स्पीड बढ़ने के साथ-साथ लेटेंसी भी कम होती है, जो ऑनलाइन गेमिंग और रियल-टाइम कम्युनिकेशन के लिए बेहद जरूरी है।

फाइबर ऑप्टिक के अलावा और क्या ऑप्शन हैं?

फाइबर ऑप्टिक केबल आज पूरी दुनिया के इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ बन चुके हैं। हाल ही में जापान के वैज्ञानिकों ने फाइबर ऑप्टिक टेक्नोलॉजी की मदद से 1.02 पेटाबिट प्रति सेकंड की रिकॉर्ड डेटा ट्रांसफर स्पीड हासिल की है, जो इस क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। हालांकि सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं जैसे कि Starlink भी तेजी से फेमस हो रही हैं, लेकिन स्पीड और स्थिरता के मामले में फाइबर ऑप्टिक अब भी सबसे आगे है।

FAQ

फाइबर ऑप्टिक केबल क्या होती है?

फाइबर ऑप्टिक केबल बेहद पतले कांच या प्लास्टिक के रेशों से बनी होती है। इसमें डेटा को बिजली की बजाय रोशनी (Light) के जरिए भेजा जाता है, जिससे इंटरनेट की स्पीड काफी तेज हो जाती है।

फाइबर ऑप्टिक केबल में डेटा कैसे ट्रांसफर होता है?

फाइबर ऑप्टिक केबल के अंदर Light लगातार रिफ्लेक्ट होती हुई आगे बढ़ती है। इस प्रक्रिया को Total Internal Reflection कहा जाता है। मंजिल तक पहुंचने पर ऑप्टिकल रिसीवर इस Light को फिर से इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदल देता है।

फाइबर ऑप्टिक टेक्नोलॉजी कितनी पुरानी है?

फाइबर ऑप्टिक टेक्नोलॉजी की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी। हालांकि इसका बड़े स्तर पर इस्तेमाल 1980 के दशक में शुरू हुआ, जब टेलीकॉम कंपनियों ने इसे अपने नेटवर्क में शामिल करना शुरू किया।

क्या सैटेलाइट इंटरनेट फाइबर ऑप्टिक की जगह ले सकता है?

सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं जैसे Starlink तेजी से फेमस हो रही हैं, लेकिन स्पीड, स्थिरता और कम लेटेंसी के मामले में फाइबर ऑप्टिक इंटरनेट अभी भी सबसे बेहतर ऑप्शन माना जाता है।

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