कोर्ट रिकॉर्डिंग मामले पर Google ने दिल्ली हाईकोर्ट से क्या कहा? जानें पूरा मामला

दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहे कोर्ट रिकॉर्डिंग मामले को लेकर Google का बयान आया है। आइए जानते हैं क्या कहां कंपनी ने...

Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jul 06, 2026, 05:16 PM (IST)

दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहे कोर्ट रिकॉर्डिंग मामले में Google ने अपने Affidavit में बताया कि वह YouTube पर कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो अपलोड होने से पहले उन्हें पहचानकर रोक नहीं सकता। अगर किसी वीडियो को अदालत गैरकानूनी घोषित करती है या उसके बारे में जानकारी दी जाती है, तभी वह उसे हटा सकता है, क्योंकि YouTube पर हर दिन लाखों वीडियो अपलोड होते हैं, ऐसे में हर वीडियो की पहले से जांच करना मुमकिन नहीं है।

कंपनी के अनुसार...

  • किसी वीडियो को देखकर यह तय करना आसान नहीं होता कि वह कोर्ट की रिकॉर्डिंग है या नहीं।
  • अगर वह कोर्ट का वीडियो है भी, तो यह पता लगाना मुश्किल है कि उसे अदालत की अनुमति से रिकॉर्ड किया गया था या बिना अनुमति के।
  • अलग-अलग राज्यों और हाईकोर्ट के अपने-अपने नियम हैं, इसलिए हर वीडियो की पहले से जांच करना पॉसिबल नहीं है।

वीडियो हटवानें के लिए क्या करना होगा?

भारत के कानून के अनुसार, किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की यह जिम्मेदारी नहीं होती कि वह यूजर्स द्वारा अपलोड किए गए हर वीडियो की निगरानी करे। कोई वीडियो कानून का उल्लंघन करता है या नहीं, इसका फैसला सिर्फ अदालत ही कर सकती है। अगर अदालत किसी वीडियो को अवैध मानती है और उसका URL कंपनी को देती है, तो उस वीडियो को हटा दिया जाएगा।

क्या है मामला?

यह मामला वकील वैभव सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर किया है। याचिका में कहा गया कि Arvind Kejriwal की कोर्ट में पेशी के दौरान बनाया गया एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया था। यह वीडियो आबकारी नीति मामले की सुनवाई के समय का बताया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि बिना अदालत की अनुमति कोर्ट की कार्यवाही रिकॉर्ड करके इंटरनेट पर डालना गलत है और ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

भारत का कानुन क्या कहता है?

Information Technology Act, 2000 की धारा 79 के तहत YouTube जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को कुछ कानूनी सुरक्षा मिलती है क्योंकि ये सिर्फ यूजर्स द्वारा अपलोड किया गए कंटेंट दिखाते हैं। इसलिए Google का कहना है कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी उस व्यक्ति की होती है, जिसने वीडियो रिकॉर्ड किया या अपलोड किया, न कि प्लेटफॉर्म की। अब इस पूरे मामले पर अंतिम फैसला दिल्ली हाईकोर्ट को करना है।

अदालत Google के खिलाफ फैसला लेती है तो क्या होगा?

अगर इस मामले में अदालत यह फैसला लेती है कि YouTube खुद ऐसे विडियों मॉनिटर करके हटाए, तो इस स्थिति में Google को अपनी Content Policy और Content Moderation सिस्टम में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। कंपनी को ऐसे टूल्स या सिस्टम डेवलप करने होंगे जो ऐसी वीडियो की पहचान करके उन्हें अपलोड होने से पहले या तुरंत बाद रोक सकें।

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