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	<title><![CDATA[Latest Technology &amp; Gadgets - News in Hindi | News &amp; Reviews on Gadgets, Smart Phones, Mobile Apps &amp; Gaming | टेक न्यूज़ इन हिंदी | TECHLUSIVE.in Hindi]]></title>
	<description><![CDATA[Latest Technology &amp; Gadgets - News in Hindi | News &amp; Reviews on Gadgets, Smart Phones, Mobile Apps &amp; Gaming | टेक न्यूज़ इन हिंदी | TECHLUSIVE.in Hindi]]></description>
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		<pubDate>Mon, 11 May 2026 06:39:33 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[भारत ने बना ली सुपरफास्ट हाइपरसोनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी, DRDO ने की सफल टेस्टिंग]]></title>
		<description>भारत ने रक्षा टेक्नोलॉजी में बड़ी कामयाबी हासिल की है। DRDO ने हाइपरसोनिक मिसाइल से जुड़े खास इंजन का सफल टेस्ट किया है। यह टेस्ट 1200 सेकंड से ज्यादा चला, इस सफलता से भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास इतनी तेज और आधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी मौजूद है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भारत ने रक्षा टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। Defence Research and Development Organisation यानी DRDO ने हैदराबाद में हाइपरसोनिक मिसाइल इंजन से जुड़े एक महत्वपूर्ण स्क्रैमजेट कॉम्बस्टर का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण 9 मई को किया गया और खास बात यह रही कि यह 1200 सेकंड से ज्यादा समय तक सफलतापूर्वक चला, माना जा रहा है कि यह भारत के Hypersonic Missile Program के लिए अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। दुनिया के बहुत कम देशों के पास ऐसी टेक्नोलॉजी मौजूद है ।</p>
<h2><strong>हाइपरसोनिक मिसाइल आखिर इतनी खास क्यों मानी जाती है?</strong></h2>
</p>
<p>हाइपरसोनिक मिसाइल को आज की सबसे आधुनिक और ताकतवर सैन्य टेक्नोलॉजी में माना जाता है। ये मिसाइलें आवाज की रफ्तार से पांच गुना ज्यादा तेज उड़ सकती हैं। इतनी तेज स्पीड होने की वजह से दुश्मन के लिए इन्हें पकड़ना या रोकना बहुत मुश्किल हो जाता है। इस टेक्नोलॉजी में स्क्रैमजेट इंजन का इस्तेमाल किया जाता है। यह इंजन हवा से ही ऑक्सीजन लेकर मिसाइल को काफी तेज रफ्तार देता है। आसान शब्दों में कहें तो यह इंजन मिसाइल को बहुत कम समय में बहुत लंबी दूरी तय करने में मदद करता है। यही कारण है कि दुनिया के कई बड़े देश इस टेक्नोलॉजी को डेवलप करने में लगे हुए हैं।</p>
<h2><strong>नए स्क्रैमजेट टेस्ट में क्या खास उपलब्धि मिली?</strong></h2>
</p>
<p>DRDO के वैज्ञानिकों ने बताया कि यह नया टेस्ट पहले के मुकाबले काफी ज्यादा सफल रहा। इससे पहले जनवरी 2026 में भी इसी टेक्नोलॉजी का परीक्षण किया गया था, लेकिन तब इंजन करीब 700 सेकंड तक ही चल पाया था। इस बार यह टेस्ट 1200 सेकंड से ज्यादा समय तक सफलतापूर्वक चला, जिसे भारत की रक्षा टेक्नोलॉजी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस इंजन में इस्तेमाल की गई टेक्नोलॉजी पूरी तरह भारत में तैयार की गई है। इसे खास मजबूत मटेरियल और नई टेक्नोलॉजी से बनाया गया है, ताकि यह बहुत ज्यादा गर्मी और तेज दबाव को आसानी से झेल सके।</p>
<h2><strong>भारत के लिए यह टेक्नोलॉजी कितनी महत्वपूर्ण साबित होगी?</strong></h2>
</p>
<p>भारत के लिए यह सफलता केवल एक मिसाइल परीक्षण नहीं बल्कि आत्मनिर्भर रक्षा टेक्नोलॉजी की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। हाइपरसोनिक मिसाइलों की सबसे बड़ी खासियत उनकी स्पीड और दिशा बदलने की क्षमता होती है। ये मिसाइलें उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदल सकती हैं, जिससे दुश्मन के रडार और डिफेंस सिस्टम इन्हें आसानी से पकड़ नहीं पाते। यही कारण है कि रूस, चीन और अमेरिका जैसे देश पहले से इस टेक्नोलॉजी में भारी निवेश कर रहे हैं। अब भारत भी इस रेस में तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।</p>
<h2><strong>रक्षा मंत्री और DRDO प्रमुख ने क्या कहा?</strong></h2>
</p>
<p>रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने इस सफलता पर DRDO के वैज्ञानिकों और रिसर्च टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह भारत के हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है और भविष्य में देश की सुरक्षा को और मजबूत करेगी। वहीं DRDO के चेयरमैन Samir V Kamat ने भी वैज्ञानिकों और इंडस्ट्री पार्टनर्स की सराहना की, उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय रक्षा अनुसंधान की ताकत और क्षमता को दर्शाती है। हाल के वर्षों में भारत ने कई नई मिसाइल टेक्नोलॉजी पर काम तेज किया है। इससे पहले भारत ने अग्नि मिसाइल की MIRV टेक्नोलॉजी का भी सफल परीक्षण किया था, जिसमें एक ही मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों पर वार कर सकती है।</p>
<h2><strong>भारत की इस सफलता से भविष्य में क्या बदल सकता है?</strong></h2>
</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी आने वाले समय में युद्ध की तस्वीर बदल सकती है। भारत की यह सफलता देश को रक्षा और एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी में नई पहचान दिला सकती है। इसके जरिए भारत विदेशी टेक्नोलॉजी पर अपनी निर्भरता कम कर सकेगा और भविष्य में अत्याधुनिक हथियारों की मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बन पाएगा।</p>
]]></content:encoded>
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		<media:description type='plain'><![CDATA[India advances hypersonic missile ambitions with new DRDO breakthrough]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 05:33:15 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[मंगल ग्रह पर 6 दिनों तक फंसा रहा NASA का Curiosity Rover, जानें कैसे निकला बाहर]]></title>
		<description>मंगल ग्रह पर रिसर्च कर रहा NASA का Curiosity Rover एक छोटे से पत्थर की वजह से छह दिनों तक फंस गया, कई कोशिशों के बाद NASA के वैज्ञानिकों ने खास तरीके से उसे बाहर निकाला और अब Rover फिर से मंगल के रहस्यों की खोज में जुट गया है। आइए जानते हैं NASA ने उसे कैसे निकाला...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>NASA का फेमस Mars Rover Curiosity Rover एक छोटे से पत्थर की वजह से छह दिनों तक मुश्किल में फंस गया। यह घटना अप्रैल 2026 में हुई, जब Curiosity Rover मंगल ग्रह की सतह से चट्टानों के नमूने इकट्ठा कर रहा था। Curiosity Rover पिछले 13 सालों से मंगल ग्रह पर काम कर रहा है और अब तक धूल भरी आंधियां, खतरनाक रेडिएशन और -129 डिग्री सेल्सियस तक की ठंड झेल चुका है, लेकिन इस बार एक चट्टान ने उसकी ड्रिल को इस तरह जाम कर दिया कि वैज्ञानिकों को कई दिनों तक समाधान खोजने में मेहनत करनी पड़ी। NASA के इंजीनियरों ने इस चट्टान का नाम &#8216;Atacama&#8217; रखा था।</p>
<h2><strong>&#8216;Atacama&#8217; चट्टान में ड्रिलिंग करते समय आखिर क्या हुआ?</strong></h2>
</p>
<p>25 अप्रैल 2026 को Curiosity Rover ने &#8216;Atacama&#8217; नाम की चट्टान में ड्रिलिंग शुरू की। Curiosity Rover का खास Rotary-Percussive Drill सिस्टम चट्टानों को तोड़कर उनका पाउडर बनाता है, ताकि उसके अंदर लगे वैज्ञानिक उपकरण वहां मौजूद मिनरल्स और रासायनिक तत्वों की जांच कर सकें, लेकिन इस बार समस्या तब शुरू हुई जब ड्रिलिंग के बाद चट्टान का एक हिस्सा ड्रिल बिट में बुरी तरह फंस गया। यह चट्टान करीब 1.5 फीट चौड़ी, 6 इंच मोटी और लगभग 13 किलोग्राम वजनी थी। सबसे हैरानी की बात यह रही कि ड्रिल निकालते समय पूरी चट्टान जमीन से उठ गई और Rover के साथ लटक गई। इससे Curiosity Rover का काम पूरी तरह रुक गया।</p>
<h2><strong>NASA के वैज्ञानिकों ने छह दिन बाद Curiosity Rover को कैसे बचाया?</strong></h2>
</p>
<p>NASA की टीम ने पहले ड्रिल को जोर-जोर से कंपन देकर पत्थर हटाने की कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद 29 अप्रैल को Curiosity Rover की रोबोटिक आर्म को घुमाकर दोबारा कंपन पैदा किया गया। इस प्रक्रिया में चट्टान से थोड़ी रेत निकली, लेकिन पत्थर अब भी ड्रिल में अटका रहा। आखिरकार 1 मई को वैज्ञानिकों ने नई रणनीति अपनाई। उन्होंने ड्रिल को ज्यादा झुकाया और उसी समय ड्रिल बिट को घुमाते हुए तेज कंपन पैदा किया। पहली ही कोशिश में &#8216;Atacama&#8217; टूट गया और मंगल ग्रह की सतह पर गिर पड़ा। इसके बाद Curiosity Rover ने फिर से सामान्य तरीके से काम करना शुरू कर दिया।</p>
<h2><strong>Curiosity Rover का मिशन मंगल ग्रह के कौन से बड़े रहस्य खोज रहा है?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों का कहना है कि यह घटना दिखाती है कि मंगल ग्रह पर छोटे से छोटे काम में भी कितनी बड़ी चुनौतियां आ सकती हैं। Curiosity Rover का मुख्य मिशन मंगल ग्रह के Geological History और वहां कभी जीवन की संभावना रही या नहीं, इसकी जांच करना है। Curiosity Rover की ड्रिल टेक्नोलॉजी चट्टानों को पाउडर में बदलकर उनकी गहराई से जांच करती है, जिससे वैज्ञानिकों को अरबों साल पुराने रहस्यों के बारे में जानकारी मिलती है। NASA के अनुसार, इस छोटी रुकावट के बावजूद Curiosity Rover अब फिर से अपने मिशन पर लौट चुका है और मंगल ग्रह के नए रहस्यों की खोज में जुट गया है।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>NASA का Curiosity Rover मंगल ग्रह पर क्यों फंस गया था?</strong></h2>
</p>
<p>Curiosity Rover की ड्रिल में ‘Atacama’ नाम की चट्टान का एक हिस्सा फंस गया था। इस वजह से Rover की ड्रिलिंग प्रक्रिया रुक गई और वह लगभग छह दिनों तक काम नहीं कर पाया।</p>
<h2><strong>‘Atacama’ चट्टान में ऐसी क्या खास बात थी?</strong></h2>
</p>
<p>यह चट्टान करीब 1.5 फीट चौड़ी, 6 इंच मोटी और लगभग 13 किलोग्राम वजनी थी। ड्रिल निकालते समय यह पूरी चट्टान जमीन से उठकर Rover के साथ लटक गई, जिससे समस्या और बढ़ गई।</p>
<h2><strong>NASA के वैज्ञानिकों ने Curiosity Rover को कैसे बाहर निकाला?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों ने पहले कंपन (Vibration) देकर पत्थर हटाने की कोशिश की, बाद में ड्रिल को झुकाकर तेज कंपन और घूमने की टेक्नोलॉजी अपनाई, जिससे चट्टान टूटकर नीचे गिर गई और Rover फिर से काम करने लगा।</p>
<h2><strong>Curiosity Rover मंगल ग्रह पर क्या खोज रहा है?</strong></h2>
</p>
<p>Curiosity Rover मंगल ग्रह के Geological History, वहां मौजूद मिनरल्स और इस संभावना की जांच कर रहा है कि क्या कभी मंगल पर जीवन मौजूद था।</p>
<h2><strong>Curiosity Rover कितने सालों से मंगल ग्रह पर काम कर रहा है?</strong></h2>
</p>
<p>Curiosity Rover पिछले 13 सालों से मंगल ग्रह पर एक्टिव है और अब तक धूल भरी आंधियों, रेडिएशन और बेहद ठंड जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना कर चुका है।</p>
]]></content:encoded>
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		<media:description type='plain'><![CDATA[NASA Curiosity Rover]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 04:23:33 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[अंतरिक्ष में कैसे बनते हैं बड़े-बड़े ब्लैक होल? वैज्ञानिकों ने खोला नया रहस्य]]></title>
		<description>अंतरिक्ष में मौजूद विशाल ब्लैक होल आखिर कैसे बनते हैं, इस रहस्य को लेकर वैज्ञानिकों ने एक थ्योरी बताई है। आइए जानते हैं क्या है ये नई स्टडी...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अंतरिक्ष में मौजूद सबसे बड़े ब्लैक होल आखिर कैसे बनते हैं, इसे लेकर वैज्ञानिकों के बीच लंबे समय से बहस चल रही थी। अब एक नई स्टडी ने इस रहस्य को काफी हद तक सुलझाने का दावा किया है। रिसर्च के अनुसार, विशाल ब्लैक होल सीधे किसी बड़े तारे के खत्म होने से नहीं, बल्कि कई छोटे ब्लैक होल के आपस में बार-बार टकराने और जुड़ने से बन सकते हैं। यह रिसर्च Gravitational Waves के डेटा पर आधारित है, जिन्हें LIGO, Virgo और KAGRA जैसी बड़ी Observatories ने रिकॉर्ड किया। वैज्ञानिकों ने 153 ब्लैक होल मर्जर की घटनाओं का एनालिसिस किया और पाया कि सबसे भारी ब्लैक होल का जन्म एक लंबे &#8216;Cosmic Chain Reaction&#8217; से हो सकता है। यह खोज ब्रह्मांड को समझने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।</p>
<h2><strong>ब्लैक होल की स्पिन से क्या मिला नया संकेत?</strong></h2>
</p>
<p>इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने ब्लैक होल को दो अलग-अलग ग्रुप्स में बांटा&#8230;</p>
<ul>
<li>पहला ग्रुप छोटे और हल्के ब्लैक होल का था, जिनकी स्पिन यानी घूमने की दिशा एक जैसी और धीमी थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे ब्लैक होल बड़े तारों के कोर के ढहने से बनते हैं।</li>
<li>दूसरा समूह बेहद भारी ब्लैक होल का था, जिनकी स्पिन तेज और अलग-अलग दिशाओं में पाई गई। इससे संकेत मिला कि ये ब्लैक होल किसी एक तारे से नहीं बने, बल्कि कई ब्लैक होल के बार-बार टकराने और जुड़ने से तैयार हुए। रिसर्चर्स के मुताबिक, घने स्टार क्लस्टर यानी तारों के घने ग्रुप्स में इस तरह की टक्करों की संभावना ज्यादा होती है, जहां Gravity बेहद शक्तिशाली होती है।</li>
</ul>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Black-Holes-1.jpg"><img loading="lazy" class="wp-image-1661733 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Black-Holes-1.jpg" alt="Black Holes " width="1200" height="900" /></a></p>
<h2><strong>अंतरिक्ष में कहां ब्लैक होल सबसे कम बनते हैं?</strong></h2>
</p>
<p>स्टडी में &#8216;Pair-Instability Mass Gap&#8217; नाम की एक रहस्यमयी सीमा का भी जिक्र किया गया है, जिसे वैज्ञानिक &#8216;Forbidden Zone&#8217; यानी प्रतिबंधित क्षेत्र कहते हैं। यह लगभग सूर्य के Mass से 50 से 130 गुना बड़े दायरे के बीच मौजूद होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस सीमा में आने वाले बहुत बड़े तारे, ब्लैक होल बनने के बजाय शक्तिशाली थर्मोन्यूक्लियर विस्फोट में पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। यही वजह है कि इस दायरे में ब्लैक होल बहुत कम देखने को मिलते हैं, लेकिन नई स्टडी में पाया गया कि करीब 45 Solar Mass से ज्यादा भारी ब्लैक होल की स्पिन और संरचना यह संकेत देती है कि वे दूसरे छोटे ब्लैक होल के अवशेषों से बने हैं, यानी ब्रह्मांड के सबसे बड़े ब्लैक होल शायद कई पुरानी टक्करों का नतीजा हैं।</p>
<h2><strong>यह खोज अंतरिक्ष विज्ञान के लिए क्यों है बड़ी उपलब्धि?</strong></h2>
</p>
<p>यह खोज इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इससे वैज्ञानिकों को ब्लैक होल के विकास और ब्रह्मांड की संरचना को समझने में नई मदद मिलेगी। Gravitational Waves के जरिए अब ऐसी घटनाओं को सीधे रिकॉर्ड करना संभव हो गया है, जो पहले केवल सिद्धांतों तक सीमित थीं। रिसर्चर्स का कहना है कि आने वाले वर्षों में और ज्यादा डेटा मिलने पर यह साफ हो सकेगा कि ब्लैक होल की असली उत्पत्ति क्या है और ब्रह्मांड में उनकी भूमिका कितनी बड़ी है। यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल Nature Astronomy में प्रकाशित हुआ है और इसे आधुनिक खगोल विज्ञान की बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>विशाल ब्लैक होल आखिर कैसे बनते हैं?</strong></h2>
</p>
<p>नई स्टडी के अनुसार, विशाल ब्लैक होल किसी एक बड़े तारे के खत्म होने से नहीं, बल्कि कई छोटे ब्लैक होल के बार-बार टकराने और आपस में जुड़ने से बनते हैं।</p>
<h2><strong>इस रिसर्च में वैज्ञानिकों को क्या नया पता चला?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों ने पाया कि भारी ब्लैक होल की स्पिन अलग-अलग दिशाओं में और काफी तेज होती है। इससे संकेत मिला कि वे कई ब्लैक होल मर्जर के बाद बने हैं।</p>
<h2><strong>Gravitational Waves क्या होती हैं?</strong></h2>
</p>
<p>Gravitational Waves अंतरिक्ष में पैदा होने वाली लहरें हैं, जो ब्लैक होल या न्यूट्रॉन स्टार जैसी टक्कर से बनती हैं। इन्हें LIGO, Virgo और KAGRA जैसी ऑब्जर्वेटरी रिकॉर्ड करती हैं।</p>
<h2><strong>Pair-Instability Mass Gap क्या है?</strong></h2>
</p>
<p>यह अंतरिक्ष का एक ऐसा दायरा है जहां बहुत बड़े तारे ब्लैक होल बनने के बजाय शक्तिशाली विस्फोट में पूरी तरह खत्म हो जाते हैं। इसलिए इस रेंज में ब्लैक होल बहुत कम पाए जाते हैं।</p>
<h2><strong>यह खोज अंतरिक्ष विज्ञान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?</strong></h2>
</p>
<p>इस खोज से वैज्ञानिकों को ब्लैक होल की उत्पत्ति, उनके विकास और ब्रह्मांड की संरचना को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी, साथ ही Gravitational Waves रिसर्च को भी नई दिशा मिलेगी।</p>
]]></content:encoded>
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		<media:description type='plain'><![CDATA[Black Holes Formation

(AI image)]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sun, 10 May 2026 07:00:05 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[AI बन सकता है दुनिया के लिए खतरा, IMF की डराने वाली चेतावनी]]></title>
		<description>AI तेजी से दुनिया को बदल रही है, लेकिन अब इसके खतरे भी सामने आने लगे हैं। IMF ने चेतावनी दी है कि Claude Mythos जैसे एडवांस AI मॉडल बैंकिंग, पेमेंट और जरूरी नेटवर्क्स के लिए बड़ा साइबर खतरा बन सकते हैं। अगर इनका गलत इस्तेमाल हुआ, तो दुनियाभर में बड़े साइबर हमले हो सकते हैं। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>दुनियाभर में AI को लेकर तेजी से चर्चा बढ़ रही है और अब इसकी ताकत को लेकर नई चिंताएं भी सामने आने लगी हैं, हाल ही में International Monetary Fund (IMF) ने चेतावनी दी है कि एडवांस AI मॉडल ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। IMF ने खासतौर पर Anthropic के नए AI मॉडल Claude Mythos का जिक्र किया है, जिसे अब तक का सबसे शक्तिशाली साइबर सिक्योरिटी AI मॉडल माना जा रहा है। IMF का कहना है कि अगर ऐसे AI सिस्टम गलत हाथों में चले गए, तो बैंकिंग, पेमेंट और दूसरे जरूरी नेटवर्क बड़े साइबर हमलों का शिकार हो सकते हैं। यही वजह है कि IMF ने सभी देशों से मिलकर काम करने की अपील की है।</p>
<h2><strong>आखिर Claude Mythos इतना खतरनाक क्यों माना जा रहा है?</strong></h2>
</p>
<p>दरअसल, 7 अप्रैल 2026 को Anthropic ने Claude Mythos को पेश किया था। कंपनी के मुताबिक यह AI मॉडल साइबर सिक्योरिटी के मामले में इंसानों से कहीं ज्यादा तेज और ताकतवर है। हालांकि हैरानी की बात यह रही कि कंपनी ने इसे आम लोगों के लिए लॉन्च नहीं किया। Anthropic का कहना था कि यह AI इतना एडवांस है कि इसका गलत इस्तेमाल इंटरनेट और डिजिटल सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। कंपनी के अनुसार Claude Mythos हजारों ऐसे साइबर सिक्योरिटी खामियों को खोज सकता है जिन्हें इंसानी एक्सपर्ट्स भी नहीं पकड़ पाए। यही वजह है कि इसे फिलहाल केवल चुनिंदा कंपनियों तक सीमित रखा गया है।</p>
<h2><strong>कैसे AI बना सकता है बैंकिंग सिस्टम के लिए बड़ा खतरा?</strong></h2>
</p>
<p>IMF ने अपने ब्लॉग पोस्ट में कहा कि इस तरह के AI मॉडल साइबर हमलों को बेहद आसान और तेज बना सकते हैं, पहले किसी सिस्टम की कमजोरी ढूंढने और उसे हैक करने में काफी समय और पैसा लगता था, लेकिन अब AI कुछ ही समय में यह काम कर सकता है। अगर किसी बैंक, पेमेंट सिस्टम या बड़े नेटवर्क में कोई कमी मिलती है, तो साइबर अपराधी उसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कई संस्थानों पर एक साथ हमला करने के लिए कर सकते हैं। IMF ने इसे &#8216;Correlated Failures&#8217; का खतरा बताया है, यानी एक जैसी टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने वाली कई संस्थाएं एक साथ प्रभावित हो सकती हैं।</p>
<h2><strong>AI का यूज करके साइबर हमलों में क्या मिलेगा फायदा?</strong></h2>
</p>
<p>IMF का मानना है कि AI की वजह से साइबर अटैक अब &#8216;Machine Speed&#8217; पर हो सकते हैं, यानी इंसानों के मुकाबले AI कहीं ज्यादा तेजी से कमजोरियों को खोजकर हमला कर सकता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि किसी सिस्टम को ठीक करने या सुरक्षा पैच लगाने से पहले ही हमलावर उसका फायदा उठा सकते हैं। IMF ने यह भी कहा कि आने वाले समय में मौजूदा साइबर सिक्योरिटी सिस्टम ऐसे एडवांस AI मॉडल्स के सामने कमजोर पड़ सकते हैं। इसका असर सिर्फ बैंकिंग सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिजली, टेलीकॉम, पब्लिक सर्विस और दूसरे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी खतरे में आ सकते हैं।</p>
<h2><strong>दुनिया की सरकारें और अमेरिका क्यों हुए सतर्क?</strong></h2>
</p>
<p>इसी बीच दुनियाभर की सरकारें भी Claude Mythos को लेकर सतर्क हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक Donald Trump की सरकार अमेरिका में एक खास AI ओवरसाइट कमेटी बनाने पर विचार कर रही है, जो शक्तिशाली AI मॉडल्स की निगरानी करेगी, वहीं भारत, यूरोपियन यूनियन और कनाडा जैसे देश भी Claude Mythos का एक्सेस पाना चाहते हैं ताकि अपने साइबर डिफेंस को मजबूत कर सकें, हालांकि माना जा रहा है कि अमेरिकी सरकार फिलहाल इस AI मॉडल की पूरी पहुंच दूसरे देशों को देने के पक्ष में नहीं है।</p>
<h2><strong>IMF क्यों चाहता है कि सभी देश मिलकर काम करें?</strong></h2>
</p>
<p>फिलहाल Claude Mythos को केवल लगभग 40 बड़ी कंपनियों तक सीमित रखा गया है। Amazon, Google और Apple जैसी कंपनियां Anthropic के &#8216;Project Glasswing&#8217; का हिस्सा हैं और उन्हें इस AI मॉडल का खास एक्सेस मिला हुआ है। IMF का कहना है कि इससे कुछ कंपनियों को ज्यादा सुरक्षा और तेज पैच मिल रहे हैं, जबकि कई गैर-अमेरिकी बैंक और संस्थाएं पीछे छूट रही हैं। IMF ने साफ कहा है कि अगर दुनिया को AI-Based साइबर खतरों से बचाना है, तो सभी देशों को मिलकर काम करना होगा, जानकारी शेयर करनी होगी और AI का इस्तेमाल सुरक्षा मजबूत करने के लिए करना होगा।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>Claude Mythos क्या है और इसे खतरनाक क्यों माना जा रहा है?</strong></h2>
</p>
<p>Anthropic का Claude Mythos एक एडवांस AI साइबर सिक्योरिटी मॉडल बताया जा रहा है। दावा है कि यह सिस्टम की खामियों को इंसानों से कहीं ज्यादा तेजी से खोज सकता है। इसी वजह से डर है कि गलत हाथों में जाने पर इसका इस्तेमाल बड़े साइबर हमलों के लिए हो सकता है।</p>
<h2><strong>IMF ने AI को लेकर क्या चेतावनी दी है?</strong></h2>
</p>
<p>IMF ने कहा है कि एडवांस AI मॉडल्स बैंकिंग, पेमेंट सिस्टम और जरूरी नेटवर्क्स के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। IMF के मुताबिक AI की मदद से साइबर हमले पहले से ज्यादा तेज और खतरनाक हो सकते हैं।</p>
<h2><strong>AI से बैंकिंग और पेमेंट सिस्टम को कैसे खतरा हो सकता है?</strong></h2>
</p>
<p>AI बहुत तेजी से सिस्टम की कमजोरियां ढूंढ सकता है। अगर हैकर्स को किसी बैंक या पेमेंट नेटवर्क में कमी मिल जाती है, तो वे एक साथ कई संस्थानों पर हमला कर सकते हैं। इससे बड़े स्तर पर डिजिटल सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।</p>
<h2><strong>क्या Claude Mythos आम लोगों के लिए उपलब्ध है?</strong></h2>
</p>
<p>फिलहाल इसे आम यूजर्स के लिए लॉन्च नहीं किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मॉडल सिर्फ चुनिंदा बड़ी कंपनियों और पार्टनर्स तक सीमित रखा गया है ताकि इसका गलत इस्तेमाल न हो सके।</p>
<h2><strong>IMF सभी देशों से मिलकर काम करने की अपील क्यों कर रहा है?</strong></h2>
</p>
<p>IMF का मानना है कि AI आधारित साइबर खतरे किसी एक देश तक सीमित नहीं रहेंगे। इसलिए देशों को जानकारी शेयर करनी होगी, सिक्योरिटी सिस्टम मजबूत करने होंगे और AI का इस्तेमाल साइबर डिफेंस के लिए करना होगा, ताकि बड़े हमलों से बचा जा सके।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/AI-2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[AI AI cyber threat IMF AI warning
(AI Image)]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sun, 10 May 2026 05:14:57 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Amazon Prime Video में आया Instagram जैसा फीचर, अब स्क्रॉल करते ही मिलेंगी फिल्में और वेब सीरीज]]></title>
		<description>Amazon Prime Video अब अपने यूजर्स के लिए Instagram Reels और TikTok जैसा नया फीचर लेकर आया है। कंपनी ने ‘Clips’ फीचर टेस्ट करना शुरू किया है, जिसमें छोटे-छोटे वीडियो क्लिप्स देखकर यूजर्स नई फिल्में और वेब सीरीज सर्च कर सकेंगे। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Amazon अपने Prime Video App के लिए एक खास फीचर पेश किया है। कंपनी &#8216;Clips&#8217; नाम का एक नया फीचर टेस्ट कर रही है, जो TikTok और Instagram Reels की तरह काम करेगा। इस फीचर के जरिए यूजर्स छोटे-छोटे वर्टिकल वीडियो क्लिप्स देखकर नई फिल्में और वेब सीरीज सर्च कर सकेंगे। Amazon का कहना है कि यह फीचर खासतौर पर मोबाइल यूजर्स के लिए तैयार किया गया है।</p>
<h2><strong>छोटे वीडियो देखकर कैसे सर्च कर पाएंगे नई फिल्में और शोज?</strong></h2>
</p>
<p>Prime Video का यह नया Clips फीचर यूजर्स को फिल्मों और शो के छोटे वीडियो &#8216;Snippets&#8217; दिखाएगा। यूजर्स इन वीडियोज को ऊपर-नीचे स्क्रॉल करके देख सकेंगे, ठीक वैसे ही जैसे लोग TikTok, YouTube Shorts या Instagram Reels इस्तेमाल करते हैं। अगर किसी यूजर को कोई शो या फिल्म पसंद आती है, तो वह सीधे उसी स्क्रीन से उसे अपनी वॉचलिस्ट में जोड़ सकता है। इसके अलावा कंटेंट को दोस्तों के साथ शेयर करने, तुरंत स्ट्रीम शुरू करने, किराए पर लेने या खरीदने का ऑप्शन भी मिलेगा। Amazon के मुताबिक यह फीचर यूजर्स को उनकी पसंद के हिसाब से पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन देगा।</p>
<h2><strong>क्या ये Netflix और दूसरे OTT प्लेटफॉर्म्स जैसा फीचर है?</strong></h2>
</p>
<p>Prime Video में यह बदलाव अचानक नहीं आया है, पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स ने इस तरह के फीचर्स पर काम किया है। Netflix, Disney+, Peacock और Tubi जैसे प्लेटफॉर्म पहले ही वर्टिकल वीडियो फीड का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि यूजर्स ज्यादा देर तक ऐप पर एक्टिव रहें। दिलचस्प बात यह है कि Netflix भी अपने शॉर्ट वीडियो प्रीव्यू फीचर के लिए &#8216;Clips&#8217; नाम का इस्तेमाल करता है। Amazon ने इससे पहले NBA सीजन के दौरान स्पोर्ट्स हाइलाइट्स के लिए भी ऐसा स्क्रॉलिंग फीचर टेस्ट किया था, जहां यूजर्स छोटे-छोटे वीडियो क्लिप्स के जरिए मैच के खास मोमेंट्स देख सकते थे।</p>
<h2><strong>कब और किन यूजर्स के लिए शुरू हुआ Prime Video Clips फीचर?</strong></h2>
</p>
<p>फिलहाल Prime Video का Clips फीचर अमेरिका में चुनिंदा iOS, Android और Fire Tablet यूजर्स के लिए जारी किया जा रहा है। यूजर्स इसे Prime Video मोबाइल ऐप के होमपेज पर मौजूद Clips कैरोसेल के जरिए एक्सेस कर सकते हैं, जहां से फुल-स्क्रीन वर्टिकल वीडियो फीड खुलती है। Amazon का कहना है कि आने वाले महीनों में इसे ज्यादा यूजर्स तक पहुंचाया जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2025/12/Amazon-Prime-Video.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Amazon Prime Video]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/amazon-prime-video-tests-clips-feature-inspired-by-instagram-reels-tiktok-1661679/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/amazon-prime-video-tests-clips-feature-inspired-by-instagram-reels-tiktok-1661679/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Fri, 08 May 2026 12:17:15 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[LPG गैस खत्म होने से 10 दिन पहले मोबाइल पर मिलेगा अलर्ट, कुछ ऐसे काम करता है Smart LPG Systems]]></title>
		<description>LPG सिलेंडर की किल्लत अब भी देखने को मिल रही है। ऐसे में ये डिवाइस आपके काफी काम के साबित होंगे, जो गैस खत्म होने से पहले आपको देंगे अलर्ट। जानें डिटेल्स।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>डिजिटल दौर में हर चीज स्मार्ट हो चुकी है.. जैसे स्मार्ट टीवी, स्मार्टफोन, स्मार्ट डोरलॉक आदि। इसी तरह मार्केट में LPG सिलेंडर के लिए भी Smart LPG Systems मौजूद हैं, जो कि गैस सिलेंडर खत्म होने से पहले आपको गैस खत्म होने का अलर्ट देते हैं। दरअसल, पिछले काफी महीनों से भारत में एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत देखने को मिल रही है। जहां सरकार आए दिनों नियमों में बदलाव कर रही है, वहीं लोगों का कहना है कि गैस बुक कराने के बाद भी उन्हें कई दिनों तक सिलेंडर रिसीव नहीं हो रहा। ऐसे में गैस सिलेंडर का खत्म हो जाना अपने आप में ही एक बुरे सपने जैसा बन चुका है। आपको नहीं पता गैस कब खत्म होगी&#8230; गैस खत्म होने के बाद सिलेंडर बुक करना और फिर सिलेंडर डिलीवरी तक आपको लंबा इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में यदि आपको ऐसा कोई स्मार्ट डिवाइस मिल जाए, जो गैस खत्म होने से 10 दिन पहले ही आपको अलर्ट भेज दे तो आप समय पर सिलेंडर बुक कर सकेंगे और समय से उसकी डिलीवरी रिसीव कर सकेंगे।</p>
</p>
<p>Smart <a href="https://www.techlusive.in/hi/news/lpg-new-rules-from-1st-may-2026-otp-based-delivery-ekyc-1660224/">LPG</a> Systems टेक्नोलॉजी की मदद से अब ऐसा मुमकिन है। जी हां, मार्केट में इस तरह के कई डिवाइस खरीद के लिए उपलब्ध हैं, जो कि आपको गैस खत्म होने से पहले अलर्ट कर देते हैं। यह डिवाइस का अलर्ट आप अपने स्मार्टफोन पर भी पा सकते हैं। आइए जानते हैं इससे जुड़ी सभी जानकारी।</p>
<h2>Smart LPG Systems क्या होता है?</h2>
</p>
<p>ऐसे डिवाइस Smart LPG Systems कहा जाता है, जो कि आपके गैस सिलेंडर को मॉनिटर करके उसमें मौजूद गैस की जानकारी आपको देते हैं। इन डिवाइस में कंपनी स्मार्ट सेंसर्स देते ही, जो कि आपको गैस खत्म होने की जानकारी देते हैं। यह डिवाइस वाई-फाई, ब्लूटूथ व IoT (Internet of Things) की मदद से आपके स्मार्टफोन में कनेक्ट हो जाते हैं।</p>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Gas-6.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-1661534" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Gas-6.jpg" alt="" width="1280" height="900" /></a></p>
</p>
<p>आमतौर पर इस डिवाइस एक बेस होता है, जिसके ऊपर आप अपना सिलेंडर रखते हैं। इस बेस में स्मार्ट सेंसर या फिर कहें तो Weight Machine लगी होती है। गैस भरने के बाद और खत्म होने के बाद हर सिलेंडर का अपना एक मानक वजन होता है, जिसकी जानकारी इन सेंसर्स को होती है। जैसे-जैसे सिलेंडर अपने मानक वजन से कम होने लगता है, वैसे-वैसे यह डिवाइस गैस का अनुमान लगाना शुरू कर देता है। जैसे ही गैस 10 या फिर 20 प्रतिशत बचती है, यह डिवाइस आपको मोबाइल पर अलर्ट भेज देता है, जिसके बाद आप दूसरा सिलेंडर बुक करके समय पर उसे रिसीव कर सकते हैं।</p>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Gas-5.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-1661535" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Gas-5.jpg" alt="" width="1280" height="900" /></a></p>
</p>
<p>इसके अलावा, कुछ Regulator डिवाइस भी मार्केट में मौजूद है, जिन्हें आपको अपने सिलेंडर पर फिट करना होता है। यह रेगुलेटर आपके सिलेंडर में मौजूद गैस को मॉनिटर करने का काम करते हैं।</p>
<h2>इन डिवाइस के क्या हैं फायदे?</h2>
</p>
<p>इस तरह के डिवाइस गैसे अचानक खत्म होने की टेंशन को दूर कर देते हैं। इसके अलावा, आपको समय से गैस खत्म होने की जानकारी पता चल जाती है, जिसके बाद आप समय रहते अपने लिए नया सिलेंडर बुर कर सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Gas-7.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/best-deals/lpg-crisis-gas-cylinder-meter-detect-device-give-alert-before-gas-will-empty-1661533/</guid>
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		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Fri, 08 May 2026 10:56:48 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Apple अपने पुराने iPhone को खुद कर देता है स्लो? पूर्व कर्मचारी का हैरान कर देने वाला खुलासा]]></title>
		<description>Apple कंपनी कई आरोपों के चक्करों में सुर्खियों में घिरी रहती है। हाल ही में खुद को कंपनी की एक्स सॉफ्टवेयर इंजीनियर बताने वाली महिला ने दावा किया है कि कंपनी पुराने iPhone मॉडल्स को खुद स्लो कर देती है, ताकी लोग नए आईफोन मॉडल्स को खरीदें।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Apple</strong> कंपनी स्मार्टफोन इंडस्ट्री की टॉप कंपनियों में से एक है। हालांकि, इन दिनों यह कंपनी अलग-अलग कारणों की वजह से सुर्खियों में घिरी हुई है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक महिला खुद को एप्पल कंपनी की पूर्व कर्मचारी बता रही है। इसके साथ ही उस महिला ने वीडियो के जरिए कुछ सनसनीखेज खुलासे किए हैं। महिला के मुताबिक, एप्पल कंपनी जानबूझकर अपने पुराने iPhone मॉडल्स को स्लो कर देती है, ताकी लोग मजबूरन नए आईफोन की तरह शिफ्ट हो जाएं और उन्हें खरीद लें। आइए जानते हैं इससे जुड़ी सभी डिटेल्स।</p>
</p>
<p>सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में एक महिला खुद को <a href="https://www.techlusive.in/hi/news/apple-introduces-monthly-payment-option-for-annual-subscriptions-on-app-store-1659927/">Apple</a> की पूर्व सॉफ्टवेयर इंजीनियर बता रही है। इस महिला का दावा है कि एप्पल कंपनी नए iPhone लॉन्च करने के बाद अपने पुराने आईफोन्स में अपडेट रोलआउट करती है। इस अपडेट के जरिए कंपनी पुराने आईफोन्स में मालवेयर इंस्टॉल करके उन्हें खुद स्लो कर देती है। ताकी लोग स्लो आईफोन से परेशान होकर नए आईफोन में अपग्रेड हो जाएं।</p>
<h2>वीडियो</h2>
</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">Former software engineer at Apple is whistleblowing</p>
</p>
<p>She says whenever Apple launches a new phone, they would push an update to older iPhones with malware to slow them down. This pushes people to upgrade</p>
</p>
<p>“I used to be a software engineer at Apple, and with every new phone that… <a href="https://t.co/SSeTQGXvUp" rel="nofollow" target="_blank">pic.twitter.com/SSeTQGXvUp</a></p>
</p>
<p>— Wall Street Apes (@WallStreetApes) <a href="https://twitter.com/WallStreetApes/status/2052015524549398589?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 6, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>Apple ने फिलहाल इस वीडियो व महिला के दावे पर किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट हुई, वैसे ही यह वायरल हो गई है। एप्पल पर लगे इस तरह के आरोपों के बाद आईफोन यूजर्स खुद को ठगा-सा महसूस कर रहे हैं।</p>
<h2>सोशल मीडिया पर लोगों ने दी प्रतिक्रिया-</h2>
</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">So proud never used Iphone shiit in my life &#8211; people should just stop giving their money to Iphone tesla and all those stupid people who try to create trillion dollar companies out of fraud &#8211;</p>
</p>
<p>— 👑 (@Alifx2008) <a href="https://twitter.com/Alifx2008/status/2052039431503163406?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 6, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">So proud never used Iphone shiit in my life &#8211; people should just stop giving their money to Iphone tesla and all those stupid people who try to create trillion dollar companies out of fraud &#8211;</p>
</p>
<p>— 👑 (@Alifx2008) <a href="https://twitter.com/Alifx2008/status/2052039431503163406?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 6, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">So proud never used Iphone shiit in my life &#8211; people should just stop giving their money to Iphone tesla and all those stupid people who try to create trillion dollar companies out of fraud &#8211;</p>
</p>
<p>— 👑 (@Alifx2008) <a href="https://twitter.com/Alifx2008/status/2052039431503163406?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 6, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">I will never buy an Apple. There is nothing Apple phones can do that Android phones cannot do and cost about half.</p>
</p>
<p>— TommVR (@TommVR) <a href="https://twitter.com/TommVR/status/2052068880017682676?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 6, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">‼️Don’t update your old iPhones.</p>
<p>Otherwise the cameras for some “odd” reason will also start to all of a sudden take semi blurry not so clear pictures.</p>
</p>
<p>Funny how that happens.</p>
<p>This should be a lawsuit!</p>
</p>
<p>— Wonder Lia 🦸🏻‍♀️ (@RealLiaReyes) <a href="https://twitter.com/RealLiaReyes/status/2052083175564755213?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 6, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
</p>
<p>आपको बता दें, इससे पहले साल 2017 में ऐसा मामला देखने को मिला था। iPhone 7 लॉन्च के कुछ महीने बाद एप्पल ने एक अपडेट रिलीज किया था। इस अपडेट के बाद iPhone 6 यूजर्स ने दावा किया कि अपडेट के बाद उनके आईफोन की बैटरी तेजी से खत्म होने लगी थी। यूजर्स की शिकायत के बाद कंपनी ने एक अन्य अपडेट रिलीज किया जिसके बाद बैटरी की समस्या फिक्स हो गई थी।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Phone-2026-05-08T162553.650.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/apple-former-software-engineer-has-accused-company-for-slowing-down-older-iphones-with-an-update-1661505/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/apple-former-software-engineer-has-accused-company-for-slowing-down-older-iphones-with-an-update-1661505/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Fri, 08 May 2026 03:50:11 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Google लेकर आया बिना स्क्रीन वाला फिटनेस बैंड, फुल चार्ज में 7 दिन चलेगी बैटरी]]></title>
		<description>Google ने ग्लोबल बाजार में अपने शानदार फिटनेस बैंड को उतार दिया है। यह स्क्रीनलेस बैंड है। इसका उपयोग 24 घंटे तक किया जा सकता है। इसके जरिए हार्ट-रेट, स्लीप और स्टेप को मॉनिटर किया जा सकता है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Google</strong> ने फिटनेस लवर्स को ध्यान में रखकर बिना स्क्रीन वाले फिटनेस बैंड को लॉन्च कर दिया है। यह Google Fitbit Air है। इसका डिजाइन साधारण है, जिससे इसे पूरे दिन पहना जा सकता है। इसमें 24 घंटे हार्ट-रेट ट्रैक करने की सुविधा मिलती है। इसके जरिए ब्लड में मौजूद ऑक्सीजन, स्लीप और स्टेप को भी मॉनिटर किया जा सकता है। इसकी बैटरी सिंगल चार्ज में 6 दिन से ज्यादा चलती है। आइए जानते हैं नए स्मार्ट फिटनेस बैंड की कीमत और फीचर&#8230;</p>
<h2>कितनी है नए फिटनेस बैंड की कीमत ?</h2>
</p>
<p>कंपनी के अनुसार, Google Fitbit Air के स्टैंडर्ड वेरिएंट की कीमत 99 डॉलर यानी करीब 9,405 रुपये है। इसके साथ तीन महीने के लिए गूगल हेल्थ प्रीमियम का सब्सक्रिप्शन मिलेगा। साथ ही, गूगल हेल्थ कोच का एक्सेस दिया जाएगा। Stephen Curry एडिशन की बात करें, तो इस फिटनेस बैंड का प्राइस 129.99 डॉलर यानी करीब 12,225 रुपये रखा गया है। फिलहाल, कंपनी की ओर से यह क्लियर नहीं किया गया है कि इसे भारत में कब तक लॉन्च किया जाएगा।</p>
</p>
<div id="attachment_1661426" style="width: 1210px" class="wp-caption alignnone"><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/untitled-2026-05-08T085454.867.jpg"><img loading="lazy" aria-describedby="caption-attachment-1661426" class="wp-image-1661426 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/untitled-2026-05-08T085454.867.jpg" alt="Google Fitbit Air" width="1200" height="900" /></a></p>
<p id="caption-attachment-1661426" class="wp-caption-text">Google Fitbit Air</p>
</div>
<h2>डिजाइन</h2>
</p>
<p>गूगल के लेटेस्ट स्क्रीनलेस फिटनेस बैंड में Metallic Fabric का इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसे बेहतर लुक मिलता है। इसे दिन और रात दोनों समय पहना जा सकता है। इसका वजन 12 ग्राम है। इसे तीन अलग-अलग बैंड टाइप में लाया गया है। इसमें परफॉर्मेंस लूप, वॉटरप्रूफ एक्टिव और Discreet Elevated मॉर्डन बैंड शामिल है।</p>
<h2>मेमोरी और सेंसर</h2>
</p>
<p>अब फीचर्स पर नजर डालें, तो गूगल का यह फिटनेस बैंड 7 दिन का डिटेल डेटा स्टोर कर सकता है। इसमें 1 दिन का वर्कआउट डेटा और 30 दिन तक का डेटा स्टोर करने की सुविधा मिलती है। इसके अलावा, फिटनेस बैंड में ऑप्टिकल हार्ट रेट मॉनिटर, 3-axis accelerometer, gyroscope, इन्फ्रारेड और SpO2 सेंसर दिया गया है।</p>
<table style="border-collapse: collapse; width: 100%;">
<tbody>
<tr>
<td style="width: 50%;"><strong>Features</strong></td>
</p>
<td style="width: 50%;"><strong>Detail</strong></td>
</p>
</tr>
<tr>
<td style="width: 50%;">Sensors</td>
</p>
<td style="width: 50%;">SpO2, Heart Rate</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td style="width: 50%;">Battery Life</td>
</p>
<td style="width: 50%;">7 Days</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td style="width: 50%;">Charging Time</td>
</p>
<td style="width: 50%;">90 Minutes</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td style="width: 50%;">Connectivity</td>
</p>
<td style="width: 50%;">Bluetooth 5.0</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td style="width: 50%;">Battery Type</td>
</p>
<td style="width: 50%;">Lithium-polymer</td>
</p>
</tr>
</tbody>
</table>
<h2>कनेक्टिविटी और बैटरी</h2>
</p>
<p>तगड़ी कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए नए फिटनेस बैंड में ब्लूटूथ 5.0 दिया है। इस बैंड में Lithium-polymer बैटरी दी गई है, जो फुल चार्ज में पूरे 7 दिन चलती है। इसे फुल चार्ज होने में 90 मिनट का समय लगता है। वहीं, पांच मिनट के चार्ज में 1 दिन का बैटरी बैकअप मिलता है।</p>
</p>
<div id="attachment_1661427" style="width: 1210px" class="wp-caption alignnone"><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/untitled-2026-05-08T090143.742.jpg"><img loading="lazy" aria-describedby="caption-attachment-1661427" class="wp-image-1661427 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/untitled-2026-05-08T090143.742.jpg" alt="Google Fitbit Air" width="1200" height="900" /></a></p>
<p id="caption-attachment-1661427" class="wp-caption-text">Google Fitbit Air</p>
</div>
<h2>Whoop 5.0 से मिलेगी टक्कर</h2>
</p>
<p>बता दें कि गूगल के लेटेस्ट फिटनेस बैंड फिटबिट एयर को पिछले साल लॉन्च हुए Whoop 5.0 से जोरदार टक्कर मिलेगी। यह भी स्क्रीनलेस फिटनेस बैंड है, जिसका इस्तेमाल 24 घंटे तक किया जा सकता है। इसमें हार्ट-रेट, स्लीप, स्टेप और ब्लड ऑक्सीजन को मॉनिटर किया जा सकता है। इसकी बैटरी सिंगल चार्ज में 14 दिन चलने में सक्षम है। इसके जरिए अपनी फिटनेस और सेहत दोनों का बेहतर तरीके से ख्याल रखा जा सकता है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/untitled-2026-05-08T090819.820.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Google Fitbit Air]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/google-fitbit-air-screenless-fitness-band-launched-know-price-features-1661430/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/google-fitbit-air-screenless-fitness-band-launched-know-price-features-1661430/</link>
		<dc:creator><![CDATA[ajay verma]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Thu, 07 May 2026 11:48:16 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[आपके बेहोश होने से 5 मिनट पहले अलर्ट देगी Samsung Galaxy Watch, नई रिसर्च में हुआ खुलासा]]></title>
		<description>Samsung ने एक स्टडी के दौरान जानकारी दी है कि Galaxy Watch 6 किसी के बेहोश होने से 5 मिनट पहले उसे अलर्ट कर सकती है। इस तरह के अलर्ट से मरीज खुद को गंभीर चोट लगने से बचा सकते हैं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>क्या आप जानते हैं <strong>Samsung</strong> स्मार्टवॉच हेल्थ फीचर्स में सबसे बेहतरीन फीचर्स देने में सक्षम है। हाल ही में की गई एक स्टडी में खुलासा हुआ कि Samsung Galaxy Watch आपके बेहोश होने से 5 मिनट पहले आपको अलर्ट कर सकती है। यह स्टडी Vasovagal Syncope (वैसोवैगल सिंकोप) पर बेस्ड थी। वैसोवैगल सिंकोप की बात करें, तो यह इंसानों में देखी जाने वाली एक आम समस्या है, जिसमें अचानक ही हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर डाउन हो जाता है और आप कुछ सोचें या फिर समझे उससे पहले आप बेहोश हो जाते हैं। इसे पहली ऐसी सफल स्टडी कहा जा रहा है कि जिसमें बेहोश होने से पहले उसकी जानकारी एक कमर्शियल स्मार्टवॉच के जरिए प्राप्त की जा सकती है। आइए जानते हैं सभी डिटेल्स।</p>
</p>
<p>Samsung ने अपने लेटेस्ट प्रेस रिलीज के जरिए इस स्टडी की जानकारी दी। यह स्टडी दक्षिण कोरिया के हॉस्पिटल Chung-Ang University Gwangmyeong के साथ मिल कर किए शोध पर आधारित है। रिलीज के मुताबिक, स्टडी में <a href="https://www.techlusive.in/hi/mobile/motorola-razr-fold-india-launch-date-confirmed-13-may-flipkart-sale-compete-to-samsung-galaxy-z-fold-8-1661356/">Samsung</a> Galaxy 6 स्मार्टवॉच को इस्तेमाल किया गया था। क्लिनिकल टेस्टिंग के लिए इस वॉच के जरिए बायोसिग्नल डेटा कलेक्ट किया गया है। इस स्टडी में 132 मरीजों को शामिल किया गया था, जो कि वैसोवैगल सिंकोप के लक्षणों से ग्रसित हैं। उन सभी मरीजों को वो सैमसंग गैलेक्सी 6 स्मार्टवॉच पहनाई गई, जो कि Photoplethysmography Sensor के साथ आती हैं। यह सेंसर टेस्ट के दौरान हार्ट रेट डेटा को मॉनिटर करने का काम करता है।</p>
<h2>शोध में मिले सटिक वॉर्निंग साइन</h2>
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<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Watch-2026-05-07T170551.696.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-1661371" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Watch-2026-05-07T170551.696.jpg" alt="" width="1280" height="900" /></a></p>
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<p>शोध के बाद डेटा कलेक्ट किया गया और AI-based Prediction मॉडल के जरिए उस डेटा को एनलाइज किया गया। सैमसंग के मुताबिक, सिस्टम उन वॉर्निंग साइन को बेहोश होने से 5 मिनट पहले ही डिटेक्ट करने में सक्षम रहा, जो कि 84.6 प्रतिशत सटिक थी।</p>
<h2>अलर्ट से कर सकेंगे खुद का बचाव</h2>
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<p>वैसोवैगल सिंकोप की बात करें, तो यह ज्यादा स्ट्रेस लेने, ज्यादा दर्द लेने या फिर डर की वजह से ट्रिगर होता है। अचानक से बेहोशी का आना कई मामलों में ज्यादा खतरनाक नहीं होता, लेकिन इस वजह से शरीर को काफी चोट पहुंच सकती है। ऐसे में वॉच के जरिए अर्ली वॉर्निंग साइन की वजह से मरीज इन गंभीर चोटों से बच सकते हैं। यदि आपको स्मार्टवॉच खुद अलर्ट कर रही है कि आप बेहोश होने वाले हैं, तो आप कहीं बैठ सकते हैं खुद को किसी सेफ पॉजिशन में रख सकते या फिर किसी को मदद के लिए बुला सकते हैं।</p>
<h2>Samsung Galaxy 6 Price and specs</h2>
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<h2> <a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Watch-2026-05-07T171654.804.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-1661373" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Watch-2026-05-07T171654.804.jpg" alt="" width="1280" height="900" /></a></h2>
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<p>Samsung Galaxy 6 को भारत में 19,999 रुपये की कीमत में लॉन्च किया गया था। फीचर्स की बात करें, तो इस वॉच में 40mm और 43mm ऑप्शन मिलते हैं। इसमें 1.3 इंच स्क्रीन पेश की गई है। वहीं, 47mm व 44mm मॉडस में 1.5 इंच स्क्रीन मिलती है। यह वॉच Exynos W930 प्रोसेसर से लैस है। कंपनी ने इसमें कई हेल्थ फीचर्स दिए हैं।</p>
]]></content:encoded>
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		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Thu, 07 May 2026 10:51:22 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[अब इंसानों की तरह सीखने लगा AI, Anthropic के Claude में आया खास फीचर]]></title>
		<description>Anthropic ने Claude के लिए नया &#039;Dreaming&#039; फीचर पेश किया है, जो पुराने चैट्स और अनुभवों से सीखकर खुद को बेहतर बना सकेगा। कंपनी का दावा है कि इससे AI पहले से ज्यादा स्मार्ट और यूजफुल बनेगा। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>AI कंपनी Anthropic ने अपने फेमस AI चैटबॉट Claude के लिए एक नया फीचर पेश किया है, जिसे &#8216;Dreaming&#8217; नाम दिया गया है। कंपनी का दावा है कि यह फीचर Claude को समय के साथ खुद को बेहतर बनाने में मदद करेगा। आसान भाषा में समझें तो अब Claude पुराने चैट से सीख सकेगा, अपनी गलतियों को पहचान सकेगा और भविष्य में ज्यादा स्मार्ट तरीके से जवाब देगा। Anthropic ने इस फीचर को अपने &#8216;Code with Claude&#8217; डेवलपर इवेंट के दौरान पेश किया।</p>
<h2><strong>आखिर Claude का नया फीचर कैसे करेगा काम?</strong></h2>
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<p>Claude का यह नया Dreaming फीचर फिलहाल &#8216;Claude Managed Agents&#8217; प्लेटफॉर्म के लिए लाया गया है। यह प्लेटफॉर्म डेवलपर्स को AI एजेंट बनाने और उन्हें बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने की सुविधा देता है। Anthropic के मुताबिक, AI एजेंट जब लगातार काम करते हैं तो वे हर इंटरैक्शन की जानकारी अपनी मेमोरी में सेव करते रहते हैं, लेकिन समय के साथ यह मेमोरी दोहराई गई जानकारी, पुरानी बातों और विरोधाभासी डेटा से भर जाती है। इसी समस्या को हल करने के लिए Dreaming फीचर तैयार किया गया है। अब Claude पुराने सेशन्स को दोबारा पढ़कर जरूरी जानकारी अलग करेगा, पैटर्न पहचान पाएगा और मेमोरी को ज्यादा व्यवस्थित बना देगा। कंपनी का कहना है कि इससे AI पहले से ज्यादा समझदार और यूजफुल बन सकता है।</p>
<h2><strong>पुराने चैट पढ़कर AI खुद को कैसे बनाएगा ज्यादा स्मार्ट?</strong></h2>
</p>
<p>Anthropic के अनुसार, Dreaming एक Scheduled और Asynchronous प्रक्रिया है, यानी Claude बैकग्राउंड में पुराने डेटा का एनालिसिस करता है और फिर नई व्यवस्थित मेमोरी तैयार करता है। यह सिस्टम लगभग 100 पुराने सेशन्स तक की जानकारी को पढ़ सकता है, खास बात यह है कि असली मेमोरी स्टोर को बदला नहीं जाता, बल्कि Claude एक अलग आउटपुट मेमोरी तैयार करता है, जिसे डेवलपर्स चाहें तो इस्तेमाल कर सकते हैं या हटा सकते हैं। कंपनी का मानना है कि यह फीचर AI एजेंट्स को बार-बार होने वाली गलतियां पहचानने, टीम की पसंद समझने और लंबे प्रोजेक्ट्स में बेहतर तरीके से काम करने में मदद करेगा। डेवलपर्स इसमें अपने निर्देश भी जोड़ सकते हैं, जैसे केवल कोडिंग से जुड़ी जानकारी पर फोकस करना और बाकी बातचीत को नजरअंदाज करना।</p>
<h2><strong>क्या भविष्य में AI खुद अपनी गलतियां सुधार पाएगा?</strong></h2>
</p>
<p>फिलहाल Dreaming फीचर रिसर्च प्रीव्यू के तौर पर उपलब्ध कराया गया है और यह केवल Claude Opus 4.7 और Claude Sonnet 4.6 मॉडल्स को सपोर्ट करता है। इसे इस्तेमाल करने के लिए डेवलपर्स को विशेष अनुमति लेनी होगी। Anthropic ने यह भी बताया कि बड़े डेटा, मेमोरी लिमिट या टाइमआउट जैसी वजहों से Dreaming प्रक्रिया कभी-कभी फेल भी हो सकती है। इसके साथ कंपनी ने &#8216;Outcomes&#8217; फीचर को भी बेहतर बनाया है, जिससे AI अपने काम का खुद मूल्यांकन कर सकेगा और जरूरत पड़ने पर दोबारा कोशिश करेगा। टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह सिस्टम सफल रहा तो आने वाले समय में AI सिर्फ सवालों के जवाब देने वाला टूल नहीं रहेगा, बल्कि अनुभवों से सीखने वाला डिजिटल असिस्टेंट बन सकता है।</p>
]]></content:encoded>
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		<media:description type='plain'><![CDATA[Anthropic Claude]]></media:description>
		</media:content>
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		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/anthropic-introduces-claude-dreaming-feature-to-make-ai-smarter-over-time-1661366/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
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