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	<title><![CDATA[Latest Technology &amp; Gadgets - News in Hindi | News &amp; Reviews on Gadgets, Smart Phones, Mobile Apps &amp; Gaming | टेक न्यूज़ इन हिंदी | TECHLUSIVE.in Hindi]]></title>
	<description><![CDATA[Latest Technology &amp; Gadgets - News in Hindi | News &amp; Reviews on Gadgets, Smart Phones, Mobile Apps &amp; Gaming | टेक न्यूज़ इन हिंदी | TECHLUSIVE.in Hindi]]></description>
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	 <item>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 13:22:46 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[LPG Scam Alert: गैस सिलेंडर डिलीवरी के नाम पर OTP स्कैम, शेयर किया तो बैंक अकाउंट होगा खाली!]]></title>
		<description>LPG Scam Alert: देश में अब भी एलपीजी किल्लत देखने को मिल रही है। एलपीजी सिलेंडर डिलीवरी के नाम पर इन दिनों DAC या फिर OTP स्कैम हो रहे हैं। यहां जानें कैसे करें बचाव।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>LPG Scam Alert:</strong> देशभर में LPG सिलेंडर से जुड़े स्कैम तेजी से बढ़ रहे हैं। स्कैमर्स मासूम लोगों को अपना शिकार बनाने के लिए नए-नए तरीके लेकर आते रहते हैं। इन दिनों देश में LPG सिलेंडर की किल्लत अभी भी बनी हुई है। ऐसे में लोग एक फर्जी मैसेज को देखकर आसानी से उसके झांसे में आकर अपना नुकसान करा रहे हैं। आने वाले दिनों में आप इस तरह के स्कैम का शिकार न हो&#8230; इसके लिए खुद गैस कंपनियों ने ग्राहकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी के जरिए बताया गया है कि इन दिनों मार्केट में OTP स्कैम तेजी से बढ़ रहे हैं। पोस्ट के जरिए असली और नकली मैसेज में कैसे पहचान करनी&#8230; इसकी जानकारी दी गई है। आइए जानते हैं सभी डिटेल्स।</p>
</p>
<p>HP Gas ने अपने X पोस्ट के जरिए जानकारी दी है कि भारत में इन दिनों <a href="https://www.techlusive.in/hi/best-deals/lpg-crisis-gas-cylinder-meter-detect-device-give-alert-before-gas-will-empty-1661533/">LPG</a> डिलीवरी मैसेज का फायदा उठाकर स्कैमर्स आपको ठगने की कोशिश कर रहे हैं। इस पोस्ट में बताया गया है कि कंपनी का असली OTP मैसेज की पहचान कैसे करनी है। अगर आपको नकली ओटीपी पर थोड़ा भी संदेह होता है, तो उसे सामने वाले को शेयर करने से बचे।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">Scammers may try to imitate LPG delivery messages but knowing what an authentic HP Gas message looks like can help you stay protected. ⚠️</p>
</p>
<p>Before sharing your Delivery Authentication Code, always verify:</p>
<p>✔️ The message comes from the official sender name: VM-HPGASc-S</p>
<p>✔️ It… <a href="https://t.co/Tov6PpJjPt" rel="nofollow" target="_blank">pic.twitter.com/Tov6PpJjPt</a></p>
</p>
<p>— Hindustan Petroleum Corporation Limited (@HPCL) <a href="https://twitter.com/HPCL/status/2053070959360483717?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 9, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<h2>असली Delivery Authentication Code (DAC) उर्फ OTP की पहचान</h2>
</p>
<p><strong>ऑफिशियल सेंडर नेम</strong></p>
</p>
<p>कंपनी ने पोस्ट में जानकारी दी है कि HP Gas द्वारा भेजा गया मैसेज ऑफिशियल सेंसर नेम के साथ आता है, जो कि VM-HPGASc-S है।</p>
</p>
<p><strong>4 डिजिट OTP</strong></p>
</p>
<p>इस नाम से आए मैसेज में आपको 4 डिजिट का OTP मिलेगा, जिसे Delivery Authentication Code (DAC) भी कहा जाता है।</p>
</p>
<p><strong>डिलीवरी के दौरान ही OTP करें शेयर</strong></p>
</p>
<p>ध्यान रहे DAC नंबर आपको तभी शेयर करना है, जब सिलेंडर आपके घर पर डिलीवर के लिए पंहुच जाए। यदि कोई शख्स आपको कॉल करके फोन पर आए OTP या फिर DAC नंबर शेयर करने को कहता है, तो आपको तुरंत अलर्ट हो जाना है।</p>
</p>
<p>पोस्ट में कहा गया है कि HP Gas कभी भी कॉल, व्हाट्सऐप मैसेज या फिर मैसेज में लिंक भेजकर OTP की मांग नहीं करता है।</p>
<h2>ऐसे काम करता है यह स्कैम</h2>
</p>
<p>यदि आप LPG सिलेंडर न मिलने के डर से स्कैमर्स के झांसे में आ जाते हैं और तुरंत फोन में आने वाला OTP शेयर देते हैं, तो स्कैमर्स आपकी कंज्यूमर प्रोफाइल या फिर अकाउंट का एक्सेस पा सकते हैं। दरअसल, इस तरह के ओटीपी स्कैम से स्कैमर्स आपके प्राइवेट डेटा को चोरी कर सकते हैं&#8230; आपका डिवाइस हैक कर सकते है या तक कि आपके अकाउंट को भी पूरा खाली कर सकते हैं।</p>
<h2>LPG नियमों में बदलाव</h2>
</p>
<p>आपको बता दें, LPG किल्लत के बाद गैस सिलेंडर की जमाखोरी व ब्लैक के केस काफी ज्यादा बढ़ गए हैं। इसी तरह की ब्लैक मार्केट को खत्म करने के लिए सरकार ने एलपीजी से जुड़े नियमों में काफी बदलाव किए थे। इन्हें में से एक Delivery Authentication Code (DAC) नंबर है। DAC एक तरह का OTP होता है, जो कि आपको गैस बुक कराने पर रिसीव होता है। आपको यह नंबर सिलेंडर डिलीवर करने वाले एजेंट के साथ शेयर करना होता। नंबर शेयर करने के बाद ही आपको सिलेंडर हैंड-ओवर किया जाता है। इसी तरह के नियम फायदा उठाकर स्कैमर्स अब लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/LPG-8.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Image generator by AI]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/tips-and-tricks/lpg-scam-alert-new-guidelines-to-curb-otp-fraud-1661848/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/tips-and-tricks/lpg-scam-alert-new-guidelines-to-curb-otp-fraud-1661848/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 11:47:04 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[HP OmniPad 12 टैबलेट 12 इंच स्क्रीन और डिटैचेबल कीबोर्ड के साथ भारत में लॉन्च, जानें कीमत]]></title>
		<description>HP OmniPad 12 भारत में लॉन्च हो गया है। यह टैब Qualcomm Snapdragon SM6475Q प्रोसेसर से लैस है। इसमें 31Wh चार्जिंग दी है, जो कि सिंगल चार्ज पर 18 दिन तक चलेगा। यहां जानें कीमत।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>HP OmniPad 12</strong> टैबलेट भारत में लॉन्च हो गया है। इस टैब को खासतौर पर स्टूडेंट्स, फर्स्ट टाइम पीसी यूजर व प्रोफेशनल्स के लिए पेश किया गया है। फीचर्स की बात करें, तो इस टैब में आपको 12 इंच टच डिस्प्ले मिलती है। इसके अलावा, टैब Qualcomm Snapdragon SM6475Q प्रोसेसर से लैस है। कंपनी ने इस टैब में 13MP का रियर कैमरा दिया है। इसमें सेल्फी कैमरा भी मौजूद है। यह टैब सिंगल चार्ज पर 18 घंटे तक की बैटरी प्रोवाइड करता है। इसके अलावा, कंपनी ने टैब में डिटैचेबल कीबोर्ड दिया है। आइए जानते हैं इस टैब की कीमत, उपलब्धता और फीचर्स से जुड़ी डिटेल्स।</p>
<h2>HP OmniPad 12 Price in India, Availability</h2>
</p>
<p>कीमत की बात करें, तो कंपनी ने <a href="https://www.techlusive.in/hi/best-deals/amazon-great-summer-sale-2026-best-laptop-deals-on-hp-dell-asus-and-lenovo-for-students-1661683/">HP</a> OmniPad 12 को 48,999 रुपये की कीमत में पेश किया है। इस टैब की सेल भारत में अगले महीने जून से शुरू होगी, जिसे आप कंपनी की साइट, Amazon व Reliance स्टोर से खरीद सकेंगे।</p>
<h2>HP OmniPad 12 Specifications</h2>
</p>
<p>फीचर्स की बात करें, तो एचपी के ओमनीपैड 12 में यूजर्स को 12 इंच का डिस्प्ले मिलेगा, जिसका रिफ्रेश रेट 90Hz का है। साथ ही इस डिस्प्ले का रेजलूशन 1,200&#215;2,000 पिक्सल होगा। इस डिस्प्ले में 400 Nits ब्राइटनेस मिलती है। इसके अलावा, यह टैब Qualcomm Snapdragon SM6475Q प्रोसेसर से लैस है। कंपनी ने इसमें 8GB RAM व 128GB स्टोरेज दी है।</p>
</p>
<p>फोटोग्राफी के लिए कंपनी ने इस टैब में 13MP का कैमरा दिया है। वहीं, सेल्फी व वीडियो कॉलिंग के लिए 8MP का फ्रंट कैमरा मौजूद है। कनेक्टिविटी के लिए इसमें Bluetooth 5.2, Wi-Fi 6E, USB 2.0 Type-C port और 3.5mm jack सपोर्ट मौजूद है। ऑडियो के लिए कंपनी ने इसमें क्वाड स्पीकर दिया गया है। वहीं, इसमें डुअल माइक्रोफोन मौजूद है। कंपनी ने इस टैब में 31Wh बैटरी दी है, जो कि 33W फास्ट चार्जिंग के साथ आती है। कंपनी का दावा है कि टैब सिंगल चार्ज पर 18 दिन काम करता है। कीबोर्ड के साथ इसका डायमेंशन 286.8&#215;184.2&#215;18.45mm है। वहीं, बिना कीबोर्ड के साथ 283&#215;178.1&#215;7.3mm डायमेंशन में आता है।</p>
<h2>HP OmniPad 12 की रेंज में मिलेंगे ये धाकड़ टैब</h2>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Tab-79.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-1661842" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Tab-79.jpg" alt="" width="1280" height="900" /></a></p>
</p>
<p>OnePlus Pad 3 को आप 48,999 रुपये में खरीद सकते हैं। फीचर्स की बात करें, तो इस टैब में 13.2 इंच डिस्प्ले दिया गया है। इसके अलावा, यह Snapdragon 8 Elite प्रोसेसर से लैस है। कंपनी ने इसमें 12GB RAM + 256GB स्टोरेज दी है। ऑडियो के लिए इसमें 8 स्पीकर्स मौजूद है। टैब की बैटरी 12,140 mAh की है, जिसके साथ 80W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट मिलता है।</p>
<h2>Samsung Galaxy Tab S10 FE</h2>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Tab-81.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-1661843" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Tab-81.jpg" alt="" width="1280" height="900" /></a></p>
</p>
<p>Samsung Galaxy Tab S10 FE को आप 49,999 रुपये में खरीदा जा सकता है। इस टैब में 10.9 इंच स्क्रीन मिलती है। इसके अलावा, यह टैब 10.9 इंच स्क्रीन के साथ आता है। इसके अलावा, यह Exynos 1580​ प्रोसेसर से लैस है। कंपनी ने इसमें 13MP का रियर कैमरा दिया गया है। वहीं, 12MP का अल्ट्रा-वाइड सेंसर दिया गया है। इसमें 8000mAh बैटरी मिलती है।</p>
]]></content:encoded>
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		<media:description type='plain'><![CDATA[HP OmniPad 12]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 11:03:49 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Google के नए सिस्टम ने बढ़ाई AI बॉट्स की टेंशन, पहले QR Code स्कैन होगा, तभी खुलेगी वेबसाइट!]]></title>
		<description>Google reCAPTCHA: गूगल पर अब तक ह्यूमन वेरिफिकेशन के लिए आपका कैप्चा कोड या फिर कुछ तस्वीरें सिलेक्ट करके बताना होता था कि &#039;I am not a Robot&#039;। हालांकि, अब नया QR code Scam फीचर दस्तक दे सकता है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Google</strong> पर अक्सर कोई वेबसाइट ओपन करने से पहले आपको CAPTCHA सिक्योरिटी सिस्टम देखने को मिलता होगा। इस सिस्टम का उद्देश्य यह पहचान करना है कि वेबसाइट को एक्सेस करने वाला इंसान है या फिर रिबोट। इसे आपके &#8216;I am not a Robot&#8217; के नाम से भी देखा होगा। हालांकि, आज के समय में एआई टेक्नोलॉजी इतनी मजबूत हो चुकी है कि इस सिक्योरिटी सिस्टम को कई AI Bots आसानी से पार कर लेते हैं। इसी को देखते हुए अब कथित रूप से गूगल एक नया reCAPTCHA सिस्टम लेकर आने की तैयारी में है, जो कि मौजूद CAPTCHA सिक्योरिटी से काफी एडवांस होगा। इस सिक्योरिटी सिस्टम को एआई नहीं बल्कि सिर्फ इंसान ही पार कर सकेंगे। आइए जानते हैं कैसे।</p>
</p>
<p>Reddit पोस्ट पर एक ऐसा ही स्क्रीनशॉट शेयर किया गया है। इस स्क्रीनशॉट में देखा जा सकता है कि <a href="https://www.techlusive.in/hi/news/google-fitbit-air-screenless-fitness-band-launched-know-price-features-1661430/">Google</a> जल्द ही नया reCAPTCHA सिस्टम लाने की तैयारी में है। यह सिस्टम मौजूद इमेज बेस्ड कैप्चा को बदलने वाला है। नए सिस्टम के तहत यूजर्स को QR code Scan सिक्योरिटी सिस्टम प्राप्त होगा, जिसके जरिए गूगल पहचान करेगा कि वेबसाइट यूज करने वाले इंसान है न कि कोई एआई बॉट।</p>
<h2>क्या है Google का नया QR code Scan?</h2>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/OPPO-47.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-1661826" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/OPPO-47.jpg" alt="" width="1280" height="900" /></a></p>
</p>
<p>स्क्रीनशॉट में देखा जा सकता है कि गूगल पर I am Not Robot वाले प्रोसेस को अब नए तरीके से पार किया जा सकेगा। इसके लिए कंपनी QR code Scan फीचर लाने की तैयारी में है, जहां आपको किसी वेबसाइट को ओपन करने से पहले एक QR Code दिखाई देगा। इस क्यूआर कोड को आपको अपने स्मार्टफोन से स्कैन करना होगा। स्कैन करके के बाद गूगल पहचान करेगा कि आप कोई रोबोट नहीं बल्कि इंसान हैं। इसके बाद आप आसानी से वेबसाइट को एक्सेस कर सकेंगे।</p>
<h2>AI Bots को बढ़ेंगी मुश्किलें <a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/AI-11.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-1661837" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/AI-11.jpg" alt="" width="1280" height="900" /></a></h2>
</p>
<p>AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) मौजूदा डेटा पर काम करता है। इसके लिए काफी सारे एआई बॉट इंटरनेट पर मौजूद वेबसाइट के जरिए डेटा कलेक्ट करते हैं। इसी तरह की एआई चलाकी को खत्म करने के लिए अब गूगल यह नया व अहम कदम उठाने जा रहा है।</p>
<h2>प्राइवेसी का क्या होगा?</h2>
</p>
<p>हालांकि, जहां गूगल एआई बॉट की तांका-झांसी को कम करने के लिए गूगल यह नया सिक्योरिटी सिस्टम ला सकता है वहीं आम यूजर्स को प्राइवेसी की चिंता सता रही है। जी हां, इंटरनेट पर कई यूजर्स को प्राइवेसी को लेकर चिंता जताई है। लोगों का कहना है कि इस तरह के कदम से लोगों को वेबसाइट एक्सेस करने के लिए अपने फोन को साइट से लिंक करना होगा, जो कि सेफ्टी के लिहाज से काफी सवाल उठाते हैं। आपको बता दें, आज के समय में कई कंपनियां CAPTCHA फीचर को एक्सेस करती है, लेकिन अगर गूगल ह्यूमन वेरिफिकेशन का नया तरीका लेकर आया तो उन्हें मजबूरन किसी भी साइट को एक्सेस करने के लिए साइट को फोन में स्कैन करना होगा।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/AI-10.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/google-may-launch-new-recaptcha-system-scan-qr-codes-for-human-verification-before-using-any-website-1661825/</guid>
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		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sun, 10 May 2026 05:14:57 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Amazon Prime Video में आया Instagram जैसा फीचर, अब स्क्रॉल करते ही मिलेंगी फिल्में और वेब सीरीज]]></title>
		<description>Amazon Prime Video अब अपने यूजर्स के लिए Instagram Reels और TikTok जैसा नया फीचर लेकर आया है। कंपनी ने ‘Clips’ फीचर टेस्ट करना शुरू किया है, जिसमें छोटे-छोटे वीडियो क्लिप्स देखकर यूजर्स नई फिल्में और वेब सीरीज सर्च कर सकेंगे। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Amazon अपने Prime Video App के लिए एक खास फीचर पेश किया है। कंपनी &#8216;Clips&#8217; नाम का एक नया फीचर टेस्ट कर रही है, जो TikTok और Instagram Reels की तरह काम करेगा। इस फीचर के जरिए यूजर्स छोटे-छोटे वर्टिकल वीडियो क्लिप्स देखकर नई फिल्में और वेब सीरीज सर्च कर सकेंगे। Amazon का कहना है कि यह फीचर खासतौर पर मोबाइल यूजर्स के लिए तैयार किया गया है।</p>
<h2><strong>छोटे वीडियो देखकर कैसे सर्च कर पाएंगे नई फिल्में और शोज?</strong></h2>
</p>
<p>Prime Video का यह नया Clips फीचर यूजर्स को फिल्मों और शो के छोटे वीडियो &#8216;Snippets&#8217; दिखाएगा। यूजर्स इन वीडियोज को ऊपर-नीचे स्क्रॉल करके देख सकेंगे, ठीक वैसे ही जैसे लोग TikTok, YouTube Shorts या Instagram Reels इस्तेमाल करते हैं। अगर किसी यूजर को कोई शो या फिल्म पसंद आती है, तो वह सीधे उसी स्क्रीन से उसे अपनी वॉचलिस्ट में जोड़ सकता है। इसके अलावा कंटेंट को दोस्तों के साथ शेयर करने, तुरंत स्ट्रीम शुरू करने, किराए पर लेने या खरीदने का ऑप्शन भी मिलेगा। Amazon के मुताबिक यह फीचर यूजर्स को उनकी पसंद के हिसाब से पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन देगा।</p>
<h2><strong>क्या ये Netflix और दूसरे OTT प्लेटफॉर्म्स जैसा फीचर है?</strong></h2>
</p>
<p>Prime Video में यह बदलाव अचानक नहीं आया है, पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स ने इस तरह के फीचर्स पर काम किया है। Netflix, Disney+, Peacock और Tubi जैसे प्लेटफॉर्म पहले ही वर्टिकल वीडियो फीड का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि यूजर्स ज्यादा देर तक ऐप पर एक्टिव रहें। दिलचस्प बात यह है कि Netflix भी अपने शॉर्ट वीडियो प्रीव्यू फीचर के लिए &#8216;Clips&#8217; नाम का इस्तेमाल करता है। Amazon ने इससे पहले NBA सीजन के दौरान स्पोर्ट्स हाइलाइट्स के लिए भी ऐसा स्क्रॉलिंग फीचर टेस्ट किया था, जहां यूजर्स छोटे-छोटे वीडियो क्लिप्स के जरिए मैच के खास मोमेंट्स देख सकते थे।</p>
<h2><strong>कब और किन यूजर्स के लिए शुरू हुआ Prime Video Clips फीचर?</strong></h2>
</p>
<p>फिलहाल Prime Video का Clips फीचर अमेरिका में चुनिंदा iOS, Android और Fire Tablet यूजर्स के लिए जारी किया जा रहा है। यूजर्स इसे Prime Video मोबाइल ऐप के होमपेज पर मौजूद Clips कैरोसेल के जरिए एक्सेस कर सकते हैं, जहां से फुल-स्क्रीन वर्टिकल वीडियो फीड खुलती है। Amazon का कहना है कि आने वाले महीनों में इसे ज्यादा यूजर्स तक पहुंचाया जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Amazon-Prime-Video-1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Amazon Prime Video]]></media:description>
		</media:content>
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		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/amazon-prime-video-tests-clips-feature-inspired-by-instagram-reels-tiktok-1661679/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 08:18:04 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[11 मई को क्यों मनाया जाता है National Technology Day? PM ने टेक्नोलॉजी को बताया आत्मनिर्भर भारत का अहम स्तंभ]]></title>
		<description>National Technology Day: 11 मई को हर साल टेक्नोलॉजी डे मनाया जाता है। इस खास मौके पर PM Modi ने Tweet करके देशवासियों को बधाई दी और अहम बात कहते हुए कहा टेक्नोलॉजी को आत्मनिर्भर भारत का अहम स्तंभ बताया। यहां जानें डिटेल्स।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भारत में आज 11 मई का दिन <strong>National Technology Day</strong> (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस) के तौर पर मनाया जाता है। भारत के प्रधानमंत्री ने नरेंद्र मोदी ने इस खास मौके पर देशवासियों को टेक्नोलॉजी डे की बधाई दी। इसी के साथ उन्होंने भारतीय साइंटिस्ट्स के कठिन परिश्रम पर गर्व जताते हुए उन्हें याद किया। आपको बता दें, इस दिन 11 मई साल 1998 को भारत ने राजस्थान के पोखरण में सफल परमाणु परीक्षण किया था। इस दिन के बाद से भारत एक परमाणु संपन्न देख बन चुका है। ऐसे में अगले साल 11 मई 1999 से इस दिन को राष्ट्रीय टेक्नोलॉजी डे के तौर पर मनाया जाता है।</p>
</p>
<p>PM Modi ने अपने ऑफिशियल X हैंडल के जरिए <a href="https://www.techlusive.in/hi/news/india-successfully-tests-drdo-hypersonic-scramjet-engine-boosting-indigenous-missile-technology-1661753/">National Technology Day</a> की बधाई दी। जैसे कि हमने बताया इस पोस्ट के जरिए उन्होंने पोखरण परमाणु परीक्षण में शामिल साइंटिस्ट्स पर गर्व जताते हुए उन्हें याद किया। इस परमाणु परीक्षण को पीएम मोदी ने भारत के वैज्ञानिक श्रेष्ठता और मजबूत संकल्प का प्रतीक बताया।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">Greetings on National Technology Day. We recall with pride the hard work and dedication of our scientists, which led to the successful tests in Pokhran in 1998. That landmark moment reflected India’s scientific excellence and unwavering commitment.</p>
</p>
<p>Technology has become a key…</p>
</p>
<p>— Narendra Modi (@narendramodi) <a href="https://twitter.com/narendramodi/status/2053671823771062478?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 11, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>इस पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा कि टेक्नोलॉजी आत्मनिर्भर भारत का एक अहम स्तंभ बन चुकी है। टेक्नोलॉजी इनोवेशन को बढ़ावा दे रही है और विकास के लिए नए मौके ला रही है। इसी के साथ उन्होंने कहा कि उनका फोकस टैलेंट को सशक्त बनाना, रिसर्च को बढ़ावा देना और सॉल्यूशन को क्रिएट करना है ताकी देश की प्रगति हो।</p>
<h2>11 मई को क्यों मनाया जाता है National Technology Day?</h2>
</p>
<div id="attachment_1661757" style="width: 1290px" class="wp-caption alignnone"><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Technology.jpg"><img loading="lazy" aria-describedby="caption-attachment-1661757" class="wp-image-1661757 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Technology.jpg" alt="" width="1280" height="900" /></a></p>
<p id="caption-attachment-1661757" class="wp-caption-text">Image: Freepik</p>
</div>
</p>
<p>जैसे कि हमने बताया आज के दिन भारत परमाणु सम्पन्न देश बनकर उभरा था। भारत ने साल 1998 में राजस्थान के पोखरण में दुनिया से छिपकर सफल परमाणु परीक्षण किया था। इस परीक्षण को ऑपरेशन शक्ति नाम दिया गया था। इसी सफल परीक्षण के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अगल सेल 11 मई 1999 से इस दिन को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस (National Technology Day) घोषित किया। हर साल इस दिन भारतीय वैज्ञानिकों व इंजीनियर्स की उपलब्धी को याद किया जाता है।</p>
<h2>Digital India की क्रांति</h2>
</p>
<p>भारत में टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार ने Digital India मिशन की शुरुआत की है। इस मिशन के तहत सरकार उद्देश्य भारत को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना है, जिसमें देश के गांव-गांव के लोग डिजिटली कनेक्ट हो सके, ताकी उन तक सरकारी सेवाएं आसानी से पहुंच सके। इस मिशन के तहत सरकार ने UPI व DigiLocker जैसी कई सर्विस शुरू की हैं। इसी क्रम में अब सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा दे रही है।</p>
]]></content:encoded>
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		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/national-technology-day-pm-modi-greet-the-nation-with-tweet-and-said-tech-key-pillar-of-self-reliant-india-1661756/</guid>
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		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 06:39:33 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[भारत ने बना ली सुपरफास्ट हाइपरसोनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी, DRDO ने की सफल टेस्टिंग]]></title>
		<description>भारत ने रक्षा टेक्नोलॉजी में बड़ी कामयाबी हासिल की है। DRDO ने हाइपरसोनिक मिसाइल से जुड़े खास इंजन का सफल टेस्ट किया है। यह टेस्ट 1200 सेकंड से ज्यादा चला, इस सफलता से भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास इतनी तेज और आधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी मौजूद है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भारत ने रक्षा टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। Defence Research and Development Organisation यानी DRDO ने हैदराबाद में हाइपरसोनिक मिसाइल इंजन से जुड़े एक महत्वपूर्ण स्क्रैमजेट कॉम्बस्टर का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण 9 मई को किया गया और खास बात यह रही कि यह 1200 सेकंड से ज्यादा समय तक सफलतापूर्वक चला, माना जा रहा है कि यह भारत के Hypersonic Missile Program के लिए अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। दुनिया के बहुत कम देशों के पास ऐसी टेक्नोलॉजी मौजूद है ।</p>
<h2><strong>हाइपरसोनिक मिसाइल आखिर इतनी खास क्यों मानी जाती है?</strong></h2>
</p>
<p>हाइपरसोनिक मिसाइल को आज की सबसे आधुनिक और ताकतवर सैन्य टेक्नोलॉजी में माना जाता है। ये मिसाइलें आवाज की रफ्तार से पांच गुना ज्यादा तेज उड़ सकती हैं। इतनी तेज स्पीड होने की वजह से दुश्मन के लिए इन्हें पकड़ना या रोकना बहुत मुश्किल हो जाता है। इस टेक्नोलॉजी में स्क्रैमजेट इंजन का इस्तेमाल किया जाता है। यह इंजन हवा से ही ऑक्सीजन लेकर मिसाइल को काफी तेज रफ्तार देता है। आसान शब्दों में कहें तो यह इंजन मिसाइल को बहुत कम समय में बहुत लंबी दूरी तय करने में मदद करता है। यही कारण है कि दुनिया के कई बड़े देश इस टेक्नोलॉजी को डेवलप करने में लगे हुए हैं।</p>
<h2><strong>नए स्क्रैमजेट टेस्ट में क्या खास उपलब्धि मिली?</strong></h2>
</p>
<p>DRDO के वैज्ञानिकों ने बताया कि यह नया टेस्ट पहले के मुकाबले काफी ज्यादा सफल रहा। इससे पहले जनवरी 2026 में भी इसी टेक्नोलॉजी का परीक्षण किया गया था, लेकिन तब इंजन करीब 700 सेकंड तक ही चल पाया था। इस बार यह टेस्ट 1200 सेकंड से ज्यादा समय तक सफलतापूर्वक चला, जिसे भारत की रक्षा टेक्नोलॉजी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस इंजन में इस्तेमाल की गई टेक्नोलॉजी पूरी तरह भारत में तैयार की गई है। इसे खास मजबूत मटेरियल और नई टेक्नोलॉजी से बनाया गया है, ताकि यह बहुत ज्यादा गर्मी और तेज दबाव को आसानी से झेल सके।</p>
<h2><strong>भारत के लिए यह टेक्नोलॉजी कितनी महत्वपूर्ण साबित होगी?</strong></h2>
</p>
<p>भारत के लिए यह सफलता केवल एक मिसाइल परीक्षण नहीं बल्कि आत्मनिर्भर रक्षा टेक्नोलॉजी की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। हाइपरसोनिक मिसाइलों की सबसे बड़ी खासियत उनकी स्पीड और दिशा बदलने की क्षमता होती है। ये मिसाइलें उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदल सकती हैं, जिससे दुश्मन के रडार और डिफेंस सिस्टम इन्हें आसानी से पकड़ नहीं पाते। यही कारण है कि रूस, चीन और अमेरिका जैसे देश पहले से इस टेक्नोलॉजी में भारी निवेश कर रहे हैं। अब भारत भी इस रेस में तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।</p>
<h2><strong>रक्षा मंत्री और DRDO प्रमुख ने क्या कहा?</strong></h2>
</p>
<p>रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने इस सफलता पर DRDO के वैज्ञानिकों और रिसर्च टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह भारत के हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है और भविष्य में देश की सुरक्षा को और मजबूत करेगी। वहीं DRDO के चेयरमैन Samir V Kamat ने भी वैज्ञानिकों और इंडस्ट्री पार्टनर्स की सराहना की, उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय रक्षा अनुसंधान की ताकत और क्षमता को दर्शाती है। हाल के वर्षों में भारत ने कई नई मिसाइल टेक्नोलॉजी पर काम तेज किया है। इससे पहले भारत ने अग्नि मिसाइल की MIRV टेक्नोलॉजी का भी सफल परीक्षण किया था, जिसमें एक ही मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों पर वार कर सकती है।</p>
<h2><strong>भारत की इस सफलता से भविष्य में क्या बदल सकता है?</strong></h2>
</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी आने वाले समय में युद्ध की तस्वीर बदल सकती है। भारत की यह सफलता देश को रक्षा और एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी में नई पहचान दिला सकती है। इसके जरिए भारत विदेशी टेक्नोलॉजी पर अपनी निर्भरता कम कर सकेगा और भविष्य में अत्याधुनिक हथियारों की मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बन पाएगा।</p>
]]></content:encoded>
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		<media:description type='plain'><![CDATA[India advances hypersonic missile ambitions with new DRDO breakthrough]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 05:33:15 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[मंगल ग्रह पर 6 दिनों तक फंसा रहा NASA का Curiosity Rover, जानें कैसे निकला बाहर]]></title>
		<description>मंगल ग्रह पर रिसर्च कर रहा NASA का Curiosity Rover एक छोटे से पत्थर की वजह से छह दिनों तक फंस गया, कई कोशिशों के बाद NASA के वैज्ञानिकों ने खास तरीके से उसे बाहर निकाला और अब Rover फिर से मंगल के रहस्यों की खोज में जुट गया है। आइए जानते हैं NASA ने उसे कैसे निकाला...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>NASA का फेमस Mars Rover Curiosity Rover एक छोटे से पत्थर की वजह से छह दिनों तक मुश्किल में फंस गया। यह घटना अप्रैल 2026 में हुई, जब Curiosity Rover मंगल ग्रह की सतह से चट्टानों के नमूने इकट्ठा कर रहा था। Curiosity Rover पिछले 13 सालों से मंगल ग्रह पर काम कर रहा है और अब तक धूल भरी आंधियां, खतरनाक रेडिएशन और -129 डिग्री सेल्सियस तक की ठंड झेल चुका है, लेकिन इस बार एक चट्टान ने उसकी ड्रिल को इस तरह जाम कर दिया कि वैज्ञानिकों को कई दिनों तक समाधान खोजने में मेहनत करनी पड़ी। NASA के इंजीनियरों ने इस चट्टान का नाम &#8216;Atacama&#8217; रखा था।</p>
<h2><strong>&#8216;Atacama&#8217; चट्टान में ड्रिलिंग करते समय आखिर क्या हुआ?</strong></h2>
</p>
<p>25 अप्रैल 2026 को Curiosity Rover ने &#8216;Atacama&#8217; नाम की चट्टान में ड्रिलिंग शुरू की। Curiosity Rover का खास Rotary-Percussive Drill सिस्टम चट्टानों को तोड़कर उनका पाउडर बनाता है, ताकि उसके अंदर लगे वैज्ञानिक उपकरण वहां मौजूद मिनरल्स और रासायनिक तत्वों की जांच कर सकें, लेकिन इस बार समस्या तब शुरू हुई जब ड्रिलिंग के बाद चट्टान का एक हिस्सा ड्रिल बिट में बुरी तरह फंस गया। यह चट्टान करीब 1.5 फीट चौड़ी, 6 इंच मोटी और लगभग 13 किलोग्राम वजनी थी। सबसे हैरानी की बात यह रही कि ड्रिल निकालते समय पूरी चट्टान जमीन से उठ गई और Rover के साथ लटक गई। इससे Curiosity Rover का काम पूरी तरह रुक गया।</p>
<h2><strong>NASA के वैज्ञानिकों ने छह दिन बाद Curiosity Rover को कैसे बचाया?</strong></h2>
</p>
<p>NASA की टीम ने पहले ड्रिल को जोर-जोर से कंपन देकर पत्थर हटाने की कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद 29 अप्रैल को Curiosity Rover की रोबोटिक आर्म को घुमाकर दोबारा कंपन पैदा किया गया। इस प्रक्रिया में चट्टान से थोड़ी रेत निकली, लेकिन पत्थर अब भी ड्रिल में अटका रहा। आखिरकार 1 मई को वैज्ञानिकों ने नई रणनीति अपनाई। उन्होंने ड्रिल को ज्यादा झुकाया और उसी समय ड्रिल बिट को घुमाते हुए तेज कंपन पैदा किया। पहली ही कोशिश में &#8216;Atacama&#8217; टूट गया और मंगल ग्रह की सतह पर गिर पड़ा। इसके बाद Curiosity Rover ने फिर से सामान्य तरीके से काम करना शुरू कर दिया।</p>
<h2><strong>Curiosity Rover का मिशन मंगल ग्रह के कौन से बड़े रहस्य खोज रहा है?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों का कहना है कि यह घटना दिखाती है कि मंगल ग्रह पर छोटे से छोटे काम में भी कितनी बड़ी चुनौतियां आ सकती हैं। Curiosity Rover का मुख्य मिशन मंगल ग्रह के Geological History और वहां कभी जीवन की संभावना रही या नहीं, इसकी जांच करना है। Curiosity Rover की ड्रिल टेक्नोलॉजी चट्टानों को पाउडर में बदलकर उनकी गहराई से जांच करती है, जिससे वैज्ञानिकों को अरबों साल पुराने रहस्यों के बारे में जानकारी मिलती है। NASA के अनुसार, इस छोटी रुकावट के बावजूद Curiosity Rover अब फिर से अपने मिशन पर लौट चुका है और मंगल ग्रह के नए रहस्यों की खोज में जुट गया है।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>NASA का Curiosity Rover मंगल ग्रह पर क्यों फंस गया था?</strong></h2>
</p>
<p>Curiosity Rover की ड्रिल में ‘Atacama’ नाम की चट्टान का एक हिस्सा फंस गया था। इस वजह से Rover की ड्रिलिंग प्रक्रिया रुक गई और वह लगभग छह दिनों तक काम नहीं कर पाया।</p>
<h2><strong>‘Atacama’ चट्टान में ऐसी क्या खास बात थी?</strong></h2>
</p>
<p>यह चट्टान करीब 1.5 फीट चौड़ी, 6 इंच मोटी और लगभग 13 किलोग्राम वजनी थी। ड्रिल निकालते समय यह पूरी चट्टान जमीन से उठकर Rover के साथ लटक गई, जिससे समस्या और बढ़ गई।</p>
<h2><strong>NASA के वैज्ञानिकों ने Curiosity Rover को कैसे बाहर निकाला?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों ने पहले कंपन (Vibration) देकर पत्थर हटाने की कोशिश की, बाद में ड्रिल को झुकाकर तेज कंपन और घूमने की टेक्नोलॉजी अपनाई, जिससे चट्टान टूटकर नीचे गिर गई और Rover फिर से काम करने लगा।</p>
<h2><strong>Curiosity Rover मंगल ग्रह पर क्या खोज रहा है?</strong></h2>
</p>
<p>Curiosity Rover मंगल ग्रह के Geological History, वहां मौजूद मिनरल्स और इस संभावना की जांच कर रहा है कि क्या कभी मंगल पर जीवन मौजूद था।</p>
<h2><strong>Curiosity Rover कितने सालों से मंगल ग्रह पर काम कर रहा है?</strong></h2>
</p>
<p>Curiosity Rover पिछले 13 सालों से मंगल ग्रह पर एक्टिव है और अब तक धूल भरी आंधियों, रेडिएशन और बेहद ठंड जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना कर चुका है।</p>
]]></content:encoded>
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		<media:description type='plain'><![CDATA[NASA Curiosity Rover]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 04:23:33 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[अंतरिक्ष में कैसे बनते हैं बड़े-बड़े ब्लैक होल? वैज्ञानिकों ने खोला नया रहस्य]]></title>
		<description>अंतरिक्ष में मौजूद विशाल ब्लैक होल आखिर कैसे बनते हैं, इस रहस्य को लेकर वैज्ञानिकों ने एक थ्योरी बताई है। आइए जानते हैं क्या है ये नई स्टडी...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अंतरिक्ष में मौजूद सबसे बड़े ब्लैक होल आखिर कैसे बनते हैं, इसे लेकर वैज्ञानिकों के बीच लंबे समय से बहस चल रही थी। अब एक नई स्टडी ने इस रहस्य को काफी हद तक सुलझाने का दावा किया है। रिसर्च के अनुसार, विशाल ब्लैक होल सीधे किसी बड़े तारे के खत्म होने से नहीं, बल्कि कई छोटे ब्लैक होल के आपस में बार-बार टकराने और जुड़ने से बन सकते हैं। यह रिसर्च Gravitational Waves के डेटा पर आधारित है, जिन्हें LIGO, Virgo और KAGRA जैसी बड़ी Observatories ने रिकॉर्ड किया। वैज्ञानिकों ने 153 ब्लैक होल मर्जर की घटनाओं का एनालिसिस किया और पाया कि सबसे भारी ब्लैक होल का जन्म एक लंबे &#8216;Cosmic Chain Reaction&#8217; से हो सकता है। यह खोज ब्रह्मांड को समझने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।</p>
<h2><strong>ब्लैक होल की स्पिन से क्या मिला नया संकेत?</strong></h2>
</p>
<p>इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने ब्लैक होल को दो अलग-अलग ग्रुप्स में बांटा&#8230;</p>
<ul>
<li>पहला ग्रुप छोटे और हल्के ब्लैक होल का था, जिनकी स्पिन यानी घूमने की दिशा एक जैसी और धीमी थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे ब्लैक होल बड़े तारों के कोर के ढहने से बनते हैं।</li>
<li>दूसरा समूह बेहद भारी ब्लैक होल का था, जिनकी स्पिन तेज और अलग-अलग दिशाओं में पाई गई। इससे संकेत मिला कि ये ब्लैक होल किसी एक तारे से नहीं बने, बल्कि कई ब्लैक होल के बार-बार टकराने और जुड़ने से तैयार हुए। रिसर्चर्स के मुताबिक, घने स्टार क्लस्टर यानी तारों के घने ग्रुप्स में इस तरह की टक्करों की संभावना ज्यादा होती है, जहां Gravity बेहद शक्तिशाली होती है।</li>
</ul>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Black-Holes-1.jpg"><img loading="lazy" class="wp-image-1661733 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Black-Holes-1.jpg" alt="Black Holes " width="1200" height="900" /></a></p>
<h2><strong>अंतरिक्ष में कहां ब्लैक होल सबसे कम बनते हैं?</strong></h2>
</p>
<p>स्टडी में &#8216;Pair-Instability Mass Gap&#8217; नाम की एक रहस्यमयी सीमा का भी जिक्र किया गया है, जिसे वैज्ञानिक &#8216;Forbidden Zone&#8217; यानी प्रतिबंधित क्षेत्र कहते हैं। यह लगभग सूर्य के Mass से 50 से 130 गुना बड़े दायरे के बीच मौजूद होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस सीमा में आने वाले बहुत बड़े तारे, ब्लैक होल बनने के बजाय शक्तिशाली थर्मोन्यूक्लियर विस्फोट में पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। यही वजह है कि इस दायरे में ब्लैक होल बहुत कम देखने को मिलते हैं, लेकिन नई स्टडी में पाया गया कि करीब 45 Solar Mass से ज्यादा भारी ब्लैक होल की स्पिन और संरचना यह संकेत देती है कि वे दूसरे छोटे ब्लैक होल के अवशेषों से बने हैं, यानी ब्रह्मांड के सबसे बड़े ब्लैक होल शायद कई पुरानी टक्करों का नतीजा हैं।</p>
<h2><strong>यह खोज अंतरिक्ष विज्ञान के लिए क्यों है बड़ी उपलब्धि?</strong></h2>
</p>
<p>यह खोज इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इससे वैज्ञानिकों को ब्लैक होल के विकास और ब्रह्मांड की संरचना को समझने में नई मदद मिलेगी। Gravitational Waves के जरिए अब ऐसी घटनाओं को सीधे रिकॉर्ड करना संभव हो गया है, जो पहले केवल सिद्धांतों तक सीमित थीं। रिसर्चर्स का कहना है कि आने वाले वर्षों में और ज्यादा डेटा मिलने पर यह साफ हो सकेगा कि ब्लैक होल की असली उत्पत्ति क्या है और ब्रह्मांड में उनकी भूमिका कितनी बड़ी है। यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल Nature Astronomy में प्रकाशित हुआ है और इसे आधुनिक खगोल विज्ञान की बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>विशाल ब्लैक होल आखिर कैसे बनते हैं?</strong></h2>
</p>
<p>नई स्टडी के अनुसार, विशाल ब्लैक होल किसी एक बड़े तारे के खत्म होने से नहीं, बल्कि कई छोटे ब्लैक होल के बार-बार टकराने और आपस में जुड़ने से बनते हैं।</p>
<h2><strong>इस रिसर्च में वैज्ञानिकों को क्या नया पता चला?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों ने पाया कि भारी ब्लैक होल की स्पिन अलग-अलग दिशाओं में और काफी तेज होती है। इससे संकेत मिला कि वे कई ब्लैक होल मर्जर के बाद बने हैं।</p>
<h2><strong>Gravitational Waves क्या होती हैं?</strong></h2>
</p>
<p>Gravitational Waves अंतरिक्ष में पैदा होने वाली लहरें हैं, जो ब्लैक होल या न्यूट्रॉन स्टार जैसी टक्कर से बनती हैं। इन्हें LIGO, Virgo और KAGRA जैसी ऑब्जर्वेटरी रिकॉर्ड करती हैं।</p>
<h2><strong>Pair-Instability Mass Gap क्या है?</strong></h2>
</p>
<p>यह अंतरिक्ष का एक ऐसा दायरा है जहां बहुत बड़े तारे ब्लैक होल बनने के बजाय शक्तिशाली विस्फोट में पूरी तरह खत्म हो जाते हैं। इसलिए इस रेंज में ब्लैक होल बहुत कम पाए जाते हैं।</p>
<h2><strong>यह खोज अंतरिक्ष विज्ञान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?</strong></h2>
</p>
<p>इस खोज से वैज्ञानिकों को ब्लैक होल की उत्पत्ति, उनके विकास और ब्रह्मांड की संरचना को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी, साथ ही Gravitational Waves रिसर्च को भी नई दिशा मिलेगी।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Black-Holes.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Black Holes Formation

(AI image)]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/how-do-supermassive-black-holes-form-scientists-reveal-new-cosmic-mystery-1661731/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/how-do-supermassive-black-holes-form-scientists-reveal-new-cosmic-mystery-1661731/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sun, 10 May 2026 07:00:05 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[AI बन सकता है दुनिया के लिए खतरा, IMF की डराने वाली चेतावनी]]></title>
		<description>AI तेजी से दुनिया को बदल रही है, लेकिन अब इसके खतरे भी सामने आने लगे हैं। IMF ने चेतावनी दी है कि Claude Mythos जैसे एडवांस AI मॉडल बैंकिंग, पेमेंट और जरूरी नेटवर्क्स के लिए बड़ा साइबर खतरा बन सकते हैं। अगर इनका गलत इस्तेमाल हुआ, तो दुनियाभर में बड़े साइबर हमले हो सकते हैं। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>दुनियाभर में AI को लेकर तेजी से चर्चा बढ़ रही है और अब इसकी ताकत को लेकर नई चिंताएं भी सामने आने लगी हैं, हाल ही में International Monetary Fund (IMF) ने चेतावनी दी है कि एडवांस AI मॉडल ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। IMF ने खासतौर पर Anthropic के नए AI मॉडल Claude Mythos का जिक्र किया है, जिसे अब तक का सबसे शक्तिशाली साइबर सिक्योरिटी AI मॉडल माना जा रहा है। IMF का कहना है कि अगर ऐसे AI सिस्टम गलत हाथों में चले गए, तो बैंकिंग, पेमेंट और दूसरे जरूरी नेटवर्क बड़े साइबर हमलों का शिकार हो सकते हैं। यही वजह है कि IMF ने सभी देशों से मिलकर काम करने की अपील की है।</p>
<h2><strong>आखिर Claude Mythos इतना खतरनाक क्यों माना जा रहा है?</strong></h2>
</p>
<p>दरअसल, 7 अप्रैल 2026 को Anthropic ने Claude Mythos को पेश किया था। कंपनी के मुताबिक यह AI मॉडल साइबर सिक्योरिटी के मामले में इंसानों से कहीं ज्यादा तेज और ताकतवर है। हालांकि हैरानी की बात यह रही कि कंपनी ने इसे आम लोगों के लिए लॉन्च नहीं किया। Anthropic का कहना था कि यह AI इतना एडवांस है कि इसका गलत इस्तेमाल इंटरनेट और डिजिटल सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। कंपनी के अनुसार Claude Mythos हजारों ऐसे साइबर सिक्योरिटी खामियों को खोज सकता है जिन्हें इंसानी एक्सपर्ट्स भी नहीं पकड़ पाए। यही वजह है कि इसे फिलहाल केवल चुनिंदा कंपनियों तक सीमित रखा गया है।</p>
<h2><strong>कैसे AI बना सकता है बैंकिंग सिस्टम के लिए बड़ा खतरा?</strong></h2>
</p>
<p>IMF ने अपने ब्लॉग पोस्ट में कहा कि इस तरह के AI मॉडल साइबर हमलों को बेहद आसान और तेज बना सकते हैं, पहले किसी सिस्टम की कमजोरी ढूंढने और उसे हैक करने में काफी समय और पैसा लगता था, लेकिन अब AI कुछ ही समय में यह काम कर सकता है। अगर किसी बैंक, पेमेंट सिस्टम या बड़े नेटवर्क में कोई कमी मिलती है, तो साइबर अपराधी उसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कई संस्थानों पर एक साथ हमला करने के लिए कर सकते हैं। IMF ने इसे &#8216;Correlated Failures&#8217; का खतरा बताया है, यानी एक जैसी टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने वाली कई संस्थाएं एक साथ प्रभावित हो सकती हैं।</p>
<h2><strong>AI का यूज करके साइबर हमलों में क्या मिलेगा फायदा?</strong></h2>
</p>
<p>IMF का मानना है कि AI की वजह से साइबर अटैक अब &#8216;Machine Speed&#8217; पर हो सकते हैं, यानी इंसानों के मुकाबले AI कहीं ज्यादा तेजी से कमजोरियों को खोजकर हमला कर सकता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि किसी सिस्टम को ठीक करने या सुरक्षा पैच लगाने से पहले ही हमलावर उसका फायदा उठा सकते हैं। IMF ने यह भी कहा कि आने वाले समय में मौजूदा साइबर सिक्योरिटी सिस्टम ऐसे एडवांस AI मॉडल्स के सामने कमजोर पड़ सकते हैं। इसका असर सिर्फ बैंकिंग सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिजली, टेलीकॉम, पब्लिक सर्विस और दूसरे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी खतरे में आ सकते हैं।</p>
<h2><strong>दुनिया की सरकारें और अमेरिका क्यों हुए सतर्क?</strong></h2>
</p>
<p>इसी बीच दुनियाभर की सरकारें भी Claude Mythos को लेकर सतर्क हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक Donald Trump की सरकार अमेरिका में एक खास AI ओवरसाइट कमेटी बनाने पर विचार कर रही है, जो शक्तिशाली AI मॉडल्स की निगरानी करेगी, वहीं भारत, यूरोपियन यूनियन और कनाडा जैसे देश भी Claude Mythos का एक्सेस पाना चाहते हैं ताकि अपने साइबर डिफेंस को मजबूत कर सकें, हालांकि माना जा रहा है कि अमेरिकी सरकार फिलहाल इस AI मॉडल की पूरी पहुंच दूसरे देशों को देने के पक्ष में नहीं है।</p>
<h2><strong>IMF क्यों चाहता है कि सभी देश मिलकर काम करें?</strong></h2>
</p>
<p>फिलहाल Claude Mythos को केवल लगभग 40 बड़ी कंपनियों तक सीमित रखा गया है। Amazon, Google और Apple जैसी कंपनियां Anthropic के &#8216;Project Glasswing&#8217; का हिस्सा हैं और उन्हें इस AI मॉडल का खास एक्सेस मिला हुआ है। IMF का कहना है कि इससे कुछ कंपनियों को ज्यादा सुरक्षा और तेज पैच मिल रहे हैं, जबकि कई गैर-अमेरिकी बैंक और संस्थाएं पीछे छूट रही हैं। IMF ने साफ कहा है कि अगर दुनिया को AI-Based साइबर खतरों से बचाना है, तो सभी देशों को मिलकर काम करना होगा, जानकारी शेयर करनी होगी और AI का इस्तेमाल सुरक्षा मजबूत करने के लिए करना होगा।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>Claude Mythos क्या है और इसे खतरनाक क्यों माना जा रहा है?</strong></h2>
</p>
<p>Anthropic का Claude Mythos एक एडवांस AI साइबर सिक्योरिटी मॉडल बताया जा रहा है। दावा है कि यह सिस्टम की खामियों को इंसानों से कहीं ज्यादा तेजी से खोज सकता है। इसी वजह से डर है कि गलत हाथों में जाने पर इसका इस्तेमाल बड़े साइबर हमलों के लिए हो सकता है।</p>
<h2><strong>IMF ने AI को लेकर क्या चेतावनी दी है?</strong></h2>
</p>
<p>IMF ने कहा है कि एडवांस AI मॉडल्स बैंकिंग, पेमेंट सिस्टम और जरूरी नेटवर्क्स के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। IMF के मुताबिक AI की मदद से साइबर हमले पहले से ज्यादा तेज और खतरनाक हो सकते हैं।</p>
<h2><strong>AI से बैंकिंग और पेमेंट सिस्टम को कैसे खतरा हो सकता है?</strong></h2>
</p>
<p>AI बहुत तेजी से सिस्टम की कमजोरियां ढूंढ सकता है। अगर हैकर्स को किसी बैंक या पेमेंट नेटवर्क में कमी मिल जाती है, तो वे एक साथ कई संस्थानों पर हमला कर सकते हैं। इससे बड़े स्तर पर डिजिटल सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।</p>
<h2><strong>क्या Claude Mythos आम लोगों के लिए उपलब्ध है?</strong></h2>
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<p>फिलहाल इसे आम यूजर्स के लिए लॉन्च नहीं किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मॉडल सिर्फ चुनिंदा बड़ी कंपनियों और पार्टनर्स तक सीमित रखा गया है ताकि इसका गलत इस्तेमाल न हो सके।</p>
<h2><strong>IMF सभी देशों से मिलकर काम करने की अपील क्यों कर रहा है?</strong></h2>
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<p>IMF का मानना है कि AI आधारित साइबर खतरे किसी एक देश तक सीमित नहीं रहेंगे। इसलिए देशों को जानकारी शेयर करनी होगी, सिक्योरिटी सिस्टम मजबूत करने होंगे और AI का इस्तेमाल साइबर डिफेंस के लिए करना होगा, ताकि बड़े हमलों से बचा जा सके।</p>
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		<media:description type='plain'><![CDATA[AI AI cyber threat IMF AI warning
(AI Image)]]></media:description>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
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		<pubDate>Fri, 08 May 2026 12:17:15 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[LPG गैस खत्म होने से 10 दिन पहले मोबाइल पर मिलेगा अलर्ट, कुछ ऐसे काम करता है Smart LPG Systems]]></title>
		<description>LPG सिलेंडर की किल्लत अब भी देखने को मिल रही है। ऐसे में ये डिवाइस आपके काफी काम के साबित होंगे, जो गैस खत्म होने से पहले आपको देंगे अलर्ट। जानें डिटेल्स।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>डिजिटल दौर में हर चीज स्मार्ट हो चुकी है.. जैसे स्मार्ट टीवी, स्मार्टफोन, स्मार्ट डोरलॉक आदि। इसी तरह मार्केट में LPG सिलेंडर के लिए भी Smart LPG Systems मौजूद हैं, जो कि गैस सिलेंडर खत्म होने से पहले आपको गैस खत्म होने का अलर्ट देते हैं। दरअसल, पिछले काफी महीनों से भारत में एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत देखने को मिल रही है। जहां सरकार आए दिनों नियमों में बदलाव कर रही है, वहीं लोगों का कहना है कि गैस बुक कराने के बाद भी उन्हें कई दिनों तक सिलेंडर रिसीव नहीं हो रहा। ऐसे में गैस सिलेंडर का खत्म हो जाना अपने आप में ही एक बुरे सपने जैसा बन चुका है। आपको नहीं पता गैस कब खत्म होगी&#8230; गैस खत्म होने के बाद सिलेंडर बुक करना और फिर सिलेंडर डिलीवरी तक आपको लंबा इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में यदि आपको ऐसा कोई स्मार्ट डिवाइस मिल जाए, जो गैस खत्म होने से 10 दिन पहले ही आपको अलर्ट भेज दे तो आप समय पर सिलेंडर बुक कर सकेंगे और समय से उसकी डिलीवरी रिसीव कर सकेंगे।</p>
</p>
<p>Smart <a href="https://www.techlusive.in/hi/news/lpg-new-rules-from-1st-may-2026-otp-based-delivery-ekyc-1660224/">LPG</a> Systems टेक्नोलॉजी की मदद से अब ऐसा मुमकिन है। जी हां, मार्केट में इस तरह के कई डिवाइस खरीद के लिए उपलब्ध हैं, जो कि आपको गैस खत्म होने से पहले अलर्ट कर देते हैं। यह डिवाइस का अलर्ट आप अपने स्मार्टफोन पर भी पा सकते हैं। आइए जानते हैं इससे जुड़ी सभी जानकारी।</p>
<h2>Smart LPG Systems क्या होता है?</h2>
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<p>ऐसे डिवाइस Smart LPG Systems कहा जाता है, जो कि आपके गैस सिलेंडर को मॉनिटर करके उसमें मौजूद गैस की जानकारी आपको देते हैं। इन डिवाइस में कंपनी स्मार्ट सेंसर्स देते ही, जो कि आपको गैस खत्म होने की जानकारी देते हैं। यह डिवाइस वाई-फाई, ब्लूटूथ व IoT (Internet of Things) की मदद से आपके स्मार्टफोन में कनेक्ट हो जाते हैं।</p>
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<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Gas-6.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-1661534" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Gas-6.jpg" alt="" width="1280" height="900" /></a></p>
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<p>आमतौर पर इस डिवाइस एक बेस होता है, जिसके ऊपर आप अपना सिलेंडर रखते हैं। इस बेस में स्मार्ट सेंसर या फिर कहें तो Weight Machine लगी होती है। गैस भरने के बाद और खत्म होने के बाद हर सिलेंडर का अपना एक मानक वजन होता है, जिसकी जानकारी इन सेंसर्स को होती है। जैसे-जैसे सिलेंडर अपने मानक वजन से कम होने लगता है, वैसे-वैसे यह डिवाइस गैस का अनुमान लगाना शुरू कर देता है। जैसे ही गैस 10 या फिर 20 प्रतिशत बचती है, यह डिवाइस आपको मोबाइल पर अलर्ट भेज देता है, जिसके बाद आप दूसरा सिलेंडर बुक करके समय पर उसे रिसीव कर सकते हैं।</p>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Gas-5.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-1661535" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Gas-5.jpg" alt="" width="1280" height="900" /></a></p>
</p>
<p>इसके अलावा, कुछ Regulator डिवाइस भी मार्केट में मौजूद है, जिन्हें आपको अपने सिलेंडर पर फिट करना होता है। यह रेगुलेटर आपके सिलेंडर में मौजूद गैस को मॉनिटर करने का काम करते हैं।</p>
<h2>इन डिवाइस के क्या हैं फायदे?</h2>
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<p>इस तरह के डिवाइस गैसे अचानक खत्म होने की टेंशन को दूर कर देते हैं। इसके अलावा, आपको समय से गैस खत्म होने की जानकारी पता चल जाती है, जिसके बाद आप समय रहते अपने लिए नया सिलेंडर बुर कर सकते हैं।</p>
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		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
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