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	<title><![CDATA[Latest Technology &amp; Gadgets - News in Hindi | News &amp; Reviews on Gadgets, Smart Phones, Mobile Apps &amp; Gaming | टेक न्यूज़ इन हिंदी | TECHLUSIVE.in Hindi]]></title>
	<description><![CDATA[Latest Technology &amp; Gadgets - News in Hindi | News &amp; Reviews on Gadgets, Smart Phones, Mobile Apps &amp; Gaming | टेक न्यूज़ इन हिंदी | TECHLUSIVE.in Hindi]]></description>
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		<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 07:12:23 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[57 प्रकाश-वर्ष दूर इस गुलाबी ग्रह और यहां मौजूद हैं नमक के बादल, सिर्फ 2 घंटे में JWST ने खोल दिए इसके राज!]]></title>
		<description>57 प्रकाश-वर्ष दूर मौजूद गुलाबी ग्रह GJ 504b ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। James Webb Space Telescope (JWST) ने सिर्फ 2 घंटे के अध्ययन में इसके वातावरण के कई रहस्यों का खुलासा किया। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Space Science में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए James Webb Space Telescope (JWST) ने GJ 504b नाम के एक अनोखे एक्सोप्लैनेट जैसी दुनिया के वातावरण के बारे में नई जानकारी जुटाई है। यह खगोलीय पिंड पृथ्वी से करीब 57 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है और अपने गुलाबी रंग की वजह से &#8216;Pink Planet&#8217; के नाम से मशहूर है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह न तो पूरी तरह ग्रह है और न ही तारा, बल्कि दोनों के बीच की एक खास कैटेगरी का पिंड हो सकता है। सबसे खास बात यह है कि JWST ने सिर्फ दो घंटे तक इस पिंक प्लैनेट का अध्ययन करके इसके वातावरण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कर लीं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज भविष्य में ऐसे दूर, ठंडे और धुंधले ग्रहों को समझने में काफी मददगार साबित होगी।</p>
<h2><strong>JWST ने GJ 504b के वातावरण का एनालिसिस कैसे किया?</strong></h2>
</p>
<p>18 जून को The Astronomical Journal में प्रकाशित इस अध्ययन का नेतृत्व नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता Aneesh Baburaj ने किया। वैज्ञानिकों ने JWST के NIRSpec उपकरण की मदद से GJ 504b की हल्की रोशनी को उसके पास मौजूद तारे की तेज चमक से अलग किया। यह काम लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए काफी मुश्किल था। अध्ययन के दौरान ग्रह के वातावरण में Water Vapor, Carbon Dioxide, Methane और Ammonia जैसी गैसों के संकेत मिले। शुरुआत में वैज्ञानिक इन संकेतों को पूरी तरह समझ नहीं पाए, लेकिन बाद में अलग-अलग तरह के बादलों वाले मॉडल की जांच करने पर पता चला कि इस ग्रह के वातावरण में नमक से बने बादल मौजूद हो सकते हैं, जो इन संकेतों को सबसे अच्छी तरह समझाते हैं।</p>
<h2><strong>क्या है इस ग्रह की सबसे बड़ी खासियत?</strong></h2>
</p>
<p>रिसर्च के मुताबिक GJ 504b के वातावरण में मौजूद नमक के बादल अंदर की परतों से आने वाले कुछ गैसों के संकेतों को ढक देते हैं, जिससे इसका स्पेक्ट्रम अलग दिखाई देता है। इसी आधार पर वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि यह खगोलीय पिंड करीब 2.5 से 4 अरब साल पुराना हो सकता है। इसका तापमान लगभग 550 डिग्री फारेनहाइट (करीब 288 डिग्री सेल्सियस) है, जो इसे अब तक अध्ययन किए गए सबसे ठंडे एक्सोप्लैनेट जैसे पिंडों में शामिल करता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी ठंडे एक्सोप्लैनेट में नमक से बने बादलों के इतने स्पष्ट सबूत पहली बार मिले हैं।</p>
<h2><strong>वैज्ञानिकों का क्या कहना है?</strong></h2>
</p>
<p>हालांकि JWST ने GJ 504b के वातावरण से जुड़े कई रहस्यों का खुलासा किया है, लेकिन यह अब भी साफ नहीं है कि यह वास्तव में एक ग्रह है या फिर ब्राउन ड्वार्फ। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसमें भारी तत्व काफी ज्यादा मात्रा में मौजूद हैं, इसलिए इसकी असली पहचान तय करना आसान नहीं है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस अध्ययन में इस्तेमाल की गई नई टेक्नोलॉजी भविष्य में ऐसे बाकी ठंडे और कम रोशनी वाले खगोलीय पिंडों को समझने में भी मदद करेगी। इससे उन दूर की दुनियाओं के बारे में ज्यादा जानकारी मिल सकेगी, जिन्हें आज की टेक्नोलॉजी से सीधे देख पाना बेहद मुश्किल है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/JWST-Reveals-Salt-Clouds-on-Pink-Planet-GJ-504b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[JWST Reveals Salt Clouds on Pink Planet GJ 504b]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 06:18:52 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Fiber Optic Cable कैसे करते हैं काम? इंटरनेट की स्पीड के पीछे छिपा है ये अनोखा विज्ञान]]></title>
		<description>आज हम सभी तेज इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि डेटा इतनी तेजी से आपके फोन या कंप्यूटर तक कैसे पहुंचता है? इसका जवाब फाइबर ऑप्टिक केबल में छिपा है। आइए जानते हैं इस खास टेक्नोलॉजी के बारे में...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आज के डिजिटल दौर में तेज इंटरनेट हमारी रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग, वीडियो कॉल और क्लाउड सेवाओं जैसी सुविधाओं के पीछे जिस टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा योगदान है, वह है फाइबर ऑप्टिक केबल। ये केबल सामान्य तांबे के तारों से बिल्कुल अलग होते हैं और इनमें डेटा को बिजली की बजाय रोशनी (Light) के जरिए भेजा जाता है। फाइबर ऑप्टिक केबल बेहद पतले कांच या प्लास्टिक के रेशों से बने होते हैं। जब एक सिरे से Light भेजी जाती है, तो वह केबल के अंदर लगातार उछलती हुई आगे बढ़ती रहती है। इसी प्रक्रिया की वजह से डेटा बहुत तेज स्पीड से लंबी दूरी तक पहुंच पाता है।</p>
<h2><strong>फाइबर ऑप्टिक केबल के अंदर डेटा आखिर कैसे ट्रैवल करता है?</strong></h2>
</p>
<p>फाइबर ऑप्टिक केबल में डेटा ट्रांसफर की प्रक्रिया काफी दिलचस्प होती है। केबल के बाहरी हिस्से में मौजूद खास परत, जिसे क्लैडिंग (Cladding) कहा जाता है, Light को बाहर निकलने नहीं देती। इससे रोशनी केबल के अंदर ही बार-बार रिफ्लेक्ट होती रहती है। इस टेक्नोलॉजी को &#8216;Total Internal Reflection&#8217; कहा जाता है। जब यह Light अपनी मंजिल तक पहुंचता है, तो वहां मौजूद ऑप्टिकल रिसीवर इसे फिर से इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदल देता है। इसके बाद यह सिग्नल आपके कंप्यूटर, स्मार्टफोन, टीवी या बाकी डिवाइस तक पहुंचता है और वही डेटा स्क्रीन पर दिखाई देता है। हालांकि बहुत लंबी दूरी पर कुछ डेटा लॉस हो सकता है, लेकिन फिर भी यह टेक्नोलॉजी बाकी केबलों की तुलना में कहीं ज्यादा भरोसेमंद और तेज मानी जाती है।</p>
<h2><strong>फाइबर ऑप्टिक टेक्नोलॉजी कितनी पुरानी है और इसमें क्या नए बदलाव हुए हैं?</strong></h2>
</p>
<p>दिलचस्प बात यह है कि फाइबर ऑप्टिक टेक्नोलॉजी कोई नई खोज नहीं है। इसकी शुरुआत 1950 के दशक में हो गई थी, लेकिन इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल 1980 के दशक में शुरू हुआ, जब Telecom Companies ने इसे अपने नेटवर्क का हिस्सा बनाना शुरू किया। समय के साथ इसकी क्षमता और क्वालिटी में काफी सुधार हुआ है। वैज्ञानिकों ने ऐसी नई फाइबर टेक्नोलॉजी भी डेवलप की है जिन्हें &#8216;Hollow Fiber&#8217; कहा जाता है। इनमें Light फाइबर की तुलना में करीब 50% ज्यादा तेजी से ट्रैवल कर सकती है। इससे इंटरनेट की स्पीड बढ़ने के साथ-साथ लेटेंसी भी कम होती है, जो ऑनलाइन गेमिंग और रियल-टाइम कम्युनिकेशन के लिए बेहद जरूरी है।</p>
<h2><strong>फाइबर ऑप्टिक के अलावा और क्या ऑप्शन हैं?</strong></h2>
</p>
<p>फाइबर ऑप्टिक केबल आज पूरी दुनिया के इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ बन चुके हैं। हाल ही में जापान के वैज्ञानिकों ने फाइबर ऑप्टिक टेक्नोलॉजी की मदद से 1.02 पेटाबिट प्रति सेकंड की रिकॉर्ड डेटा ट्रांसफर स्पीड हासिल की है, जो इस क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। हालांकि सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं जैसे कि Starlink भी तेजी से फेमस हो रही हैं, लेकिन स्पीड और स्थिरता के मामले में फाइबर ऑप्टिक अब भी सबसे आगे है।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>फाइबर ऑप्टिक केबल क्या होती है?</strong></h2>
</p>
<p>फाइबर ऑप्टिक केबल बेहद पतले कांच या प्लास्टिक के रेशों से बनी होती है। इसमें डेटा को बिजली की बजाय रोशनी (Light) के जरिए भेजा जाता है, जिससे इंटरनेट की स्पीड काफी तेज हो जाती है।</p>
<h2><strong>फाइबर ऑप्टिक केबल में डेटा कैसे ट्रांसफर होता है?</strong></h2>
</p>
<p>फाइबर ऑप्टिक केबल के अंदर Light लगातार रिफ्लेक्ट होती हुई आगे बढ़ती है। इस प्रक्रिया को Total Internal Reflection कहा जाता है। मंजिल तक पहुंचने पर ऑप्टिकल रिसीवर इस Light को फिर से इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदल देता है।</p>
<h2><strong>फाइबर ऑप्टिक टेक्नोलॉजी कितनी पुरानी है?</strong></h2>
</p>
<p>फाइबर ऑप्टिक टेक्नोलॉजी की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी। हालांकि इसका बड़े स्तर पर इस्तेमाल 1980 के दशक में शुरू हुआ, जब टेलीकॉम कंपनियों ने इसे अपने नेटवर्क में शामिल करना शुरू किया।</p>
<h2><strong>क्या सैटेलाइट इंटरनेट फाइबर ऑप्टिक की जगह ले सकता है?</strong></h2>
</p>
<p>सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं जैसे Starlink तेजी से फेमस हो रही हैं, लेकिन स्पीड, स्थिरता और कम लेटेंसी के मामले में फाइबर ऑप्टिक इंटरनेट अभी भी सबसे बेहतर ऑप्शन माना जाता है।</p>
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		<media:description type='plain'><![CDATA[How Fiber Optic Cables Work]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 05:34:12 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Space के बारे में बचपन से सुनीं ये 5 बातें निकलीं झूठ, सच जानकर रह जाएंगे हैरान!]]></title>
		<description>अंतरिक्ष की दुनिया हमेशा से लोगों की जिज्ञासा का केंद्र रही है, बचपन से हम अंतरिक्ष से जुड़ी कई बातें सुनते आए हैं, लेकिन इनमें से कुछ सिर्फ मिथक निकलीं। NASA की रिसर्च और अंतरिक्ष मिशनों ने ऐसे कई भ्रमों की सच्चाई सामने लाई है। आइए जानते हैं अंतरिक्ष से जुड़े 5 ऐसे मिथकों के बारे में, जो वास्तव में सच नहीं हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अंतरिक्ष हमेशा से इंसानों के लिए रहस्य और रोमांच का विषय रहा है। सदियों से लोग तारों, ग्रहों और ब्रह्मांड के बारे में अलग-अलग धारणाएं और मिथक बनाते रहे हैं। समय के साथ विज्ञान ने काफी तरक्की की, लेकिन कई गलतफहमियां आज भी लोगों के बीच मौजूद हैं। NASA ने अपने मिशनों, अंतरिक्ष यानों और वैज्ञानिक शोधों के जरिए ऐसे कई मिथकों की सच्चाई दुनिया के सामने रखी है। चांद, सूरज, अंतरिक्ष की आवाज और गुरुत्वाकर्षण से जुड़े कई भ्रमों को NASA ने तथ्यों और सबूतों के आधार पर गलत साबित किया है। आइए जानते हैं ऐसे 5 अजीब अंतरिक्ष मिथकों के बारे में, जिनकी सच्चाई NASA ने उजागर की।</p>
</p>
<div id="attachment_1666684" style="width: 1290px" class="wp-caption alignnone"><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/sun.jpg"><img loading="lazy" aria-describedby="caption-attachment-1666684" class="wp-image-1666684 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/sun.jpg" alt="sun" width="1280" height="720" /></a></p>
<p id="caption-attachment-1666684" class="wp-caption-text">sun<br />image credit: NASA</p>
</div>
<h2><strong>क्या सूरज सच में जल रहा है?</strong></h2>
</p>
<p>बहुत से लोग सोचते हैं कि सूरज आग का एक बड़ा गोला है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है। सूरज लकड़ी, गैस या कोयले की तरह नहीं जलता। वहां आग नहीं लगी हुई है, बल्कि सूरज के अंदर एक खास प्रक्रिया चलती है, जिसे Nuclear Fusion कहा जाता है। न्यूक्लियर फ्यूजन में सूरज के अंदर मौजूद हाइड्रोजन गैस मिलकर हीलियम बनाती है। इस प्रक्रिया में बहुत ज्यादा एनर्जी निकलती है। यही एनर्जी गर्मी और रोशनी के रूप में बाहर आती है और पृथ्वी तक पहुंचती है। अगर सूरज सच में आग से जल रहा होता, तो उसे ऑक्सीजन की जरूरत होती, लेकिन अंतरिक्ष में ऑक्सीजन बहुत कम होती है। इसलिए सूरज का गर्म होना आग की वजह से नहीं, बल्कि उसके अंदर हो रही परमाणु प्रक्रिया की वजह से है। सूरज की सतह पर हमें कई बार आग जैसी लपटें दिखती हैं। इन्हें देखकर लगता है कि सूरज जल रहा है, लेकिन ये असल में गर्म गैस और एनर्जी के विस्फोट होते हैं। इन्हें सोलर फ्लेयर्स या प्लाज्मा एक्टिविटी कहा जाता है। वैज्ञानिकों के लिए आज भी सूरज एक बड़ा रहस्य है। खासकर यह बात कि सूरज का बाहरी वातावरण, यानी Solar Corona, उसकी सतह से ज्यादा गर्म क्यों है। NASA जैसे स्पेस एजेंसी इस रहस्य को समझने की कोशिश कर रही हैं।</p>
</p>
<div id="attachment_1666685" style="width: 1290px" class="wp-caption alignnone"><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Great-Wall-of-China.jpg"><img loading="lazy" aria-describedby="caption-attachment-1666685" class="wp-image-1666685 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Great-Wall-of-China.jpg" alt="There's no water in space" width="1280" height="720" /></a></p>
<p id="caption-attachment-1666685" class="wp-caption-text">Great Wall of China<br />image credit: NASA</p>
</div>
<h2><strong>क्या Great Wall of China अंतरिक्ष से दिखती है?</strong></h2>
</p>
<p>कई सालों से यह दावा किया जाता है कि Great Wall of China अंतरिक्ष से साफ दिखाई देती है। यह बात सुनने में बहुत दिलचस्प लगती है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। Great Wall of China बहुत लंबी जरूर है, लेकिन वह ज्यादा चौड़ी नहीं है। अंतरिक्ष से किसी चीज को देखने के लिए उसका बहुत बड़ा और साफ दिखाई देने वाला आकार होना जरूरी होता है। दीवार लंबी है, लेकिन उसकी चौड़ाई कम होने की वजह से उसे पहचानना मुश्किल है। NASA के कई अंतरिक्ष यात्रियों ने बताया है कि अंतरिक्ष से Great Wall को आंखों से देखना आसान नहीं है। Apollo मिशन के दौरान भी इसे देखने की कोशिश की गई थी, लेकिन कोई साफ प्रमाण नहीं मिला। International Space Station पृथ्वी के ज्यादा करीब है, लेकिन वहां से भी Great Wall of China को बिना कैमरे या खास लेंस के देख पाना मुश्किल है। कई बार जो फोटो दिखाई जाती हैं, उनमें दीवार को पहचानना भी आसान नहीं होता। इसलिए यह कहना सही होगा कि Great Wall of China इंसानों द्वारा बनाई गई महान संरचना जरूर है, लेकिन इसे अंतरिक्ष से आंखों से साफ देखना लगभग असंभव है।</p>
</p>
<div id="attachment_1666687" style="width: 1290px" class="wp-caption alignnone"><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Theres-no-water-in-space.jpg"><img loading="lazy" aria-describedby="caption-attachment-1666687" class="wp-image-1666687 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Theres-no-water-in-space.jpg" alt="There's no water in space" width="1280" height="720" /></a></p>
<p id="caption-attachment-1666687" class="wp-caption-text">There&#8217;s no water in space<br />image credit:NASA</p>
</div>
<h2><strong>क्या अंतरिक्ष में पानी नहीं होता?</strong></h2>
</p>
<p>बहुत लोग सोचते हैं कि अंतरिक्ष पूरी तरह खाली है और वहां पानी जैसी कोई चीज नहीं हो सकती, लेकिन यह बात गलत है। अंतरिक्ष में पानी अलग-अलग रूपों में मौजूद है। पानी सिर्फ नदी, समुद्र या बारिश के रूप में ही नहीं होता। पानी Ice, Steam और Molecules के रूप में भी हो सकता है। अंतरिक्ष में कई जगह पानी की बर्फ और Water Vapor पाए गए हैं। Comet, Saturn के Rings और कुछ ग्रहों के चंद्रमाओं पर बर्फ मौजूद है। वैज्ञानिक मानते हैं कि कई चंद्रमाओं के अंदर बर्फ के नीचे महासागर भी हो सकते हैं। NASA ने एक Quasar के आसपास बहुत बड़ी मात्रा में Water Vapor खोजा था। यह पानी इतना ज्यादा बताया गया कि वह पृथ्वी के समुद्रों से कई खरब गुना ज्यादा हो सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हम वहां जाकर आसानी से पानी ला सकते हैं। ये चीजें पृथ्वी से बहुत दूर हैं, लेकिन यह खोज बताती है कि अंतरिक्ष पूरी तरह सूखा नहीं है, बल्कि वहां पानी कई अलग-अलग रूपों में मौजूद है।</p>
</p>
<div id="attachment_1666683" style="width: 1290px" class="wp-caption alignnone"><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/asteroid-belt.jpg"><img loading="lazy" aria-describedby="caption-attachment-1666683" class="wp-image-1666683 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/asteroid-belt.jpg" alt="asteroid belt" width="1280" height="720" /></a></p>
<p id="caption-attachment-1666683" class="wp-caption-text">asteroid belt<br />image credit: AI</p>
</div>
<h2><strong>क्या Asteroid Belt बहुत खतरनाक जगह है?</strong></h2>
</p>
<p>फिल्मों में Asteroid Belt को बहुत खतरनाक दिखाया जाता है। ऐसा लगता है कि वहां हर तरफ बड़े-बड़े पत्थर तैर रहे हैं और कोई भी स्पेसशिप उनसे टकरा सकता है। लेकिन असलियत इससे काफी अलग है। हमारे सोलर सिस्टम में Asteroid Belt, Mars and Jupiter Planets के बीच मौजूद है। यहां लाखों छोटे-बड़े पत्थर और चट्टानें हैं, लेकिन ये एक-दूसरे से बहुत दूर-दूर हैं। फिल्मों में Asteroid बहुत पास-पास दिखते हैं ताकि सीन रोमांचक लगे। असल में एक बड़े Asteroid और दूसरे Asteroid के बीच लाखों किलोमीटर की दूरी हो सकती है। यानी वहां खाली जगह बहुत ज्यादा होती है। NASA के कई स्पेसक्राफ्ट Asteroid Belt से गुजर चुके हैं। वे बिना किसी टक्कर के सुरक्षित आगे निकल गए। इसका मतलब है कि वहां से गुजरना उतना खतरनाक नहीं है, जितना फिल्मों में दिखाया जाता है। इसलिए Asteroid Belt को खतरनाक Obstacle Course समझना गलत है। वहां खतरा है, लेकिन टक्कर की संभावना बहुत कम होती है। असली स्पेस ट्रैवल में Radiation, Fuel, Communication और Life Support जैसी चीजें ज्यादा बड़ी चुनौती होती हैं।</p>
</p>
<div id="attachment_1666686" style="width: 1290px" class="wp-caption alignnone"><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/You-will-die-instantly-if-exposed-to-space.jpg"><img loading="lazy" aria-describedby="caption-attachment-1666686" class="wp-image-1666686 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/You-will-die-instantly-if-exposed-to-space.jpg" alt="You will die instantly if exposed to space" width="1280" height="720" /></a></p>
<p id="caption-attachment-1666686" class="wp-caption-text">You will die instantly if exposed to space<br />image credit:NASA</p>
</div>
<h2><strong>क्या अंतरिक्ष में बिना स्पेससूट के जाते ही इंसान तुरंत मर जाएगा?</strong></h2>
</p>
<p>फिल्मों में अक्सर दिखाया जाता है कि अगर इंसान बिना स्पेससूट के अंतरिक्ष में चला जाए, तो वह तुरंत जम जाएगा या फट जाएगा, लेकिन असल में ऐसा तुरंत नहीं होता। अंतरिक्ष में हवा नहीं होती और दबाव भी बहुत कम होता है। इसलिए सबसे बड़ा खतरा ऑक्सीजन की कमी है। इंसान कुछ सेकंड तक होश में रह सकता है, लेकिन सांस न मिलने की वजह से जल्दी बेहोश हो जाएगा। अंतरिक्ष बहुत ठंडा माना जाता है, लेकिन वहां हवा नहीं होती जो शरीर की गर्मी तुरंत खींच ले। इसलिए इंसान तुरंत बर्फ की तरह नहीं जमता। शरीर की गर्मी धीरे-धीरे निकलती है। कम दबाव की वजह से शरीर के अंदर मौजूद गैस फैल सकती है। इससे शरीर को नुकसान हो सकता है। इसलिए स्पेससूट बहुत जरूरी होता है, क्योंकि वह शरीर को सही दबाव और ऑक्सीजन देता है। NASA के एक टेस्ट में एक व्यक्ति गलती से Vacuum Chamber में Exposure का शिकार हुआ था, लेकिन वह नहीं मरा। उसे बाद में बचा लिया गया। इसलिए अंतरिक्ष बेहद खतरनाक है, लेकिन तुरंत मौत वाला दावा सही नहीं है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Space-Myths.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Space Myths]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sun, 21 Jun 2026 09:30:08 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Adobe Firefly AI Assistant: अब Photoshop और Premiere Pro में AI करेगा कई काम, जानिए क्या बदला]]></title>
		<description>Adobe ने Firefly AI Assistant को Photoshop, Premiere Pro और दूसरे Creative Cloud Apps में जोड़ दिया है। अब यूजर्स कई एडिटिंग और डिजाइन से जुड़े काम सिर्फ टेक्स्ट कमांड देकर कर सकेंगे। कंपनी का कहना है कि यह AI क्रिएटर्स का समय बचाएगा और उनके काम को पहले से ज्यादा आसान और तेज बनाएगा। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Adobe ने अपने AI प्लेटफॉर्म Firefly को बड़ा अपडेट देते हुए Firefly AI Assistant को सीधे अपने फेमस Creative Cloud Apps में शामिल कर दिया है। अब Photoshop, Premiere Pro, Illustrator, InDesign और Frame.io जैसे ऐप्स के अंदर ही यूजर्स AI Assistant की मदद ले सकेंगे। कंपनी का कहना है कि इसका उद्देश्य क्रिएटर्स की क्रिएटिविटी को बदलना नहीं, बल्कि उनके समय लेने वाले और दोहराए जाने वाले कामों को आसान बनाना है। इससे डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट क्रिएटर बिना अलग-अलग टूल्स के बीच स्विच किए तेजी से काम कर सकेंगे।</p>
<h2><strong>Photoshop, Premiere Pro और Illustrator में AI क्या-क्या काम करेगा?</strong></h2>
</p>
<p>इस अपडेट के बाद Firefly AI Assistant एक साइडबार के रूप में ऐप्स के अंदर उपलब्ध होगा। Photoshop में यूजर सिर्फ टेक्स्ट कमांड देकर बैकग्राउंड बदल सकते हैं, कई तस्वीरों को अलग-अलग प्लेटफॉर्म के लिए एक साथ रीसाइज कर सकते हैं और पूरे प्रोजेक्ट पर एक जैसी एडिटिंग लागू कर सकते हैं। वहीं Premiere Pro में AI फुटेज को व्यवस्थित करने, क्लिप्स का नाम बदलने, इंटरव्यू के सवाल पहचानने, टाइमलाइन पर मार्कर लगाने और वीडियो का शुरुआती रफ कट तैयार करने जैसे काम कर सकेगा। Illustrator में यह स्प्रेडशीट डेटा से कई डिजाइन वर्जन तैयार करने और प्रिंटिंग से जुड़ी संभावित गलतियों की जांच करने में मदद करेगा। InDesign में भी AI कई पेजों पर एक साथ नई ब्रांडिंग और लेआउट अपडेट कर सकेगा।</p>
<h2><strong>Firefly के नए AI फीचर्स क्रिएटर्स के लिए कैसे फायदेमंद होंगे?</strong></h2>
</p>
<p>Adobe ने Firefly में कुछ नए AI फीचर्स भी जोड़े हैं जो बड़े क्रिएटिव प्रोजेक्ट्स को संभालना आसान बनाएंगे। इनमें &#8216;Elements&#8217; नाम का फीचर शामिल है, जिसकी मदद से यूजर AI द्वारा बनाए गए कैरेक्टर, ऑब्जेक्ट और लोकेशन को सेव करके बाद में दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे किसी Ads Campaign, कहानी या बड़े प्रोजेक्ट में एक जैसी विजुअल पहचान बनाए रखना आसान होगा। इसके अलावा यूजर AI से बने कंटेंट को अलग-अलग प्रोजेक्ट्स में व्यवस्थित कर सकेंगे। Firefly अब Logos, Colors और Design Styles को बनाए रखते हुए पूरी ब्रांड पहचान तैयार करने में भी मदद करेगा। इतना ही नहीं, यह कई वीडियो क्लिप्स से शुरुआती वीडियो एडिट तैयार कर सकता है और स्टोरीबोर्ड को वीडियो में बदलने की क्षमता भी रखता है।</p>
<h2><strong>Adobe अपने AI टूल्स को दूसरे प्लेटफॉर्म्स तक क्यों पहुंचा रहा है?</strong></h2>
</p>
<p>Adobe ने यह भी घोषणा की है कि उसकी AI टेक्नोलॉजी अब सिर्फ Creative Cloud ऐप्स तक सीमित नहीं रहेगी। कंपनी Firefly को ChatGPT, Microsoft Copilot और Claude जैसे AI प्लेटफॉर्म्स के साथ इंटीग्रेट कर रही है, जबकि Google Gemini और Slack सपोर्ट भी जल्द आने वाला है। इसका मतलब है कि यूजर्स भविष्य में Adobe के कई क्रिएटिव AI फीचर्स का इस्तेमाल बिना Creative Cloud Apps खोले भी कर सकेंगे। Adobe के अनुसार 16,000 से ज्यादा क्रिएटर्स पर किए गए सर्वे में 75% लोगों ने कहा कि AI उनके क्रिएटिव वर्कफ्लो का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, जबकि 85% लोगों का मानना है कि आखिरी क्रिएटिव फैसला हमेशा इंसान के हाथ में ही रहना चाहिए। Firefly AI Assistant का पब्लिक बीटा रोलआउट शुरू हो चुका है, जबकि नया Firefly Creative Studio फिलहाल प्राइवेट बीटा में उपलब्ध है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Adobe-Firefly-AI.png' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Adobe's Firefly AI Assistant is now available inside Photoshop, Premiere Pro, Illustrator and other Creative Cloud apps. (Image credit: Adobe)]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sun, 21 Jun 2026 08:44:56 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[International Yoga Day 2026: Apple Watch यूजर्स की हुई बल्ले-बल्ले! योगा करने पर मिलेगा खास रिवॉर्ड]]></title>
		<description>International Yoga Day 2026 के मौके पर Apple ने Apple Watch यूजर्स के लिए एक खास फिटनेस चैलेंज शुरू किया है। इस चैलेंज में सिर्फ योग करने पर यूजर्स को रिवॉर्ड्स मिलेंगे।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>International Yoga Day 2026 के मौके पर Apple ने अपने Apple Watch यूजर्स के लिए एक खास फिटनेस चैलेंज पेश किया है। हर साल की तरह इस बार भी कंपनी लोगों को फिट और एक्टिव रहने के लिए एक लिमिटेड-एडिशन रिवॉर्ड दे रही है। Apple समय-समय पर Global Running Day, World Mental Health Day और बाकी हेल्थ इवेंट्स के दौरान ऐसे खास Watch Awards जारी करता है। इनका मकसद यूजर्स को अपनी फिटनेस पर ज्यादा ध्यान देने और नियमित रूप से एक्टिव रहने के लिए प्रेरित करना है। आज योग दिवस के अवसर पर Apple Watch यूजर्स को योग से जुड़ा एक खास डिजिटल बैज और बाकी इनाम जीतने का मौका मिल रहा है।</p>
<h2><strong>कितनी देर तक करना होगा योगा?</strong></h2>
</p>
<p>इस खास रिवॉर्ड को पाने के लिए Apple Watch यूजर्स को कम से कम 10 मिनट या उससे ज्यादा समय तक योग वर्कआउट रिकॉर्ड करना होगा। इसके लिए Apple Watch में मौजूद Yoga Workout को शुरू करना जरूरी है, जैसे ही यूजर सफलतापूर्वक 10 मिनट का योग सत्र पूरा कर लेते हैं, उन्हें Apple की ओर से एक खास In-app Badge दिया जाएगा। इसके साथ ही कुछ खास एनिमेटेड योग स्टिकर्स भी मिलेंगे, जिन्हें Messages ऐप में दोस्तों और परिवार के साथ शेयर किया जा सकता है। यह चैलेंज सिर्फ एक दिन के लिए उपलब्ध है, इसलिए आज योग करने वाले यूजर्स को ही इसका लाभ मिलेगा।</p>
<h2><strong>Apple ऐसे फिटनेस चैलेंज क्यों आयोजित करता है?</strong></h2>
</p>
<p>Apple का कहना है कि ऐसे फिटनेस चैलेंज लोगों को हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। Apple Watch में मौजूद तीन एक्टिविटी रिंग्स Move, Exercise और Stand यूजर्स को रोजाना अपने फिटनेस लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करती हैं। वहीं, विशेष अवसरों पर मिलने वाले ये लिमिटेड-एडिशन अवॉर्ड्स लोगों को अतिरिक्त मोटिवेशन देते हैं। योग दिवस पर शुरू किया गया यह चैलेंज भी उसी पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य लोगों को योग और नियमित व्यायाम के प्रति जागरूक करना है।</p>
<h2><strong>Apple Fitness+ सब्सक्रिप्शन लेने वाले यूजर्स के लिए फायदे?</strong></h2>
</p>
<p>वहीं, Apple Fitness+ सब्सक्रिप्शन लेने वाले यूजर्स के लिए भी कंपनी ने खास तैयारी की है। Fitness+ Member आज &#8216;Morning Yoga with Jessica&#8217; नाम का एक खास योग सेशन एक्सेस कर सकते हैं। भारत में Apple Fitness+ की कीमत 149 रुपये प्रति माह और 999 रुपये प्रति वर्ष है। यूजर्स इसे iPhone के Fitness App के जरिए सब्सक्राइब कर सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/IYD-Apple.png' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Apple Watch users can unlock a special International Yoga Day award by completing a 10-minute yoga workout on June 21.]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sun, 21 Jun 2026 08:01:44 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[217 प्रकाश-वर्ष दूर मिला एक अनोखा ग्रह, वैज्ञानिकों ने देखा वहां चौंकाने वाला नजारा]]></title>
		<description>पृथ्वी से 217 प्रकाश-वर्ष दूर मौजूद HD 80606 b नाम का एक अनोखा ग्रह वैज्ञानिकों को हैरान कर रहा है। James Webb Space Telescope (JWST) ने पाया कि यह ग्रह अपने तारे के करीब आते ही कुछ ही घंटों में बेहद तेजी से गर्म हो जाता है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पृथ्वी से करीब 217 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित HD 80606 b नाम का एक विशाल गैस ग्रह इन दिनों वैज्ञानिकों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। NASA के James Webb Space Telescope (JWST) ने इस अनोखे एक्सोप्लैनेट का अध्ययन करते हुए एक हैरान करने वाली खोज की है। वैज्ञानिकों ने पाया कि यह ग्रह अपने तारे के सबसे करीब पहुंचते ही कुछ ही घंटों के भीतर लगभग 1100 डिग्री फारेनहाइट (करीब 600 डिग्री सेल्सियस) तक गर्म हो जाता है। यह बदलाव इतनी तेजी से हुआ कि रिसर्चर्स को भी इसकी तीव्रता देखकर आश्चर्य हुआ। HD 80606 b का एक वर्ष 111 दिनों का होता है और यह अपने अधिकांश समय बेहद ठंडे वातावरण में बिताता है, लेकिन कक्षा के एक खास हिस्से में पहुंचते ही इसकी स्थिति पूरी तरह बदल जाती है।</p>
<h2><strong>यह ग्रह अपने तारे के पास आते ही इतना गर्म क्यों हो जाता है?</strong></h2>
</p>
<p>HD 80606 b को सामान्य &#8216;Hot Jupiter&#8217; ग्रहों से अलग माना जाता है। इसका Mass Jupiter Planet से लगभग चार गुना ज्यादा है और इसकी कक्षा बहुत अधिक अंडाकार (Eccentric Orbit) है। अपने तारे से दूर रहने पर यह काफी ठंडा रहता है, लेकिन जब यह अपने तारे के सबसे नजदीकी बिंदु, जिसे पेरिआस्ट्रॉन कहा जाता है, पर पहुंचता है तो इसकी दूरी केवल 0.03 Astronomical unit (AU) रह जाती है। इस दौरान तारे से मिलने वाली एनर्जी अचानक कई गुना बढ़ जाती है, जिससे ग्रह का वातावरण तेजी से गर्म होने लगता है। इस अनोखी घटना को समझने के लिए NASA की Jet Propulsion Laboratory की वैज्ञानिक Tiffany Kataria और उनकी टीम ने JWST के MIRI इक्विपमेंट की मदद से ग्रह का अध्ययन किया।</p>
<h2><strong>JWST ने इस ग्रह के बारे में क्या नई जानकारी जुटाई?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों ने इस ग्रह को तब देखा जब वह अपने तारे के करीब पहुंच रहा था और फिर उससे दूर जा रहा था। JWST की खास टेक्नोलॉजी ने ग्रह और तारे से आने वाली रोशनी का बारीकी से अध्ययन किया। इससे वैज्ञानिकों को पता चला कि ग्रह का तापमान और उसका वायुमंडल समय के साथ कैसे बदलता है। अध्ययन में सामने आया कि ग्रह का तापमान वैज्ञानिकों की उम्मीद से भी ज्यादा बढ़ गया। पहले Spitzer Space Telescope के डेटा के आधार पर जो अनुमान लगाए गए थे, असली तापमान उनसे कहीं ज्यादा निकला। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह किसी एक्सोप्लैनेट पर अब तक देखे गए सबसे तेज और बड़े तापमान बदलावों में से एक है।</p>
<h2><strong>वैज्ञानिकों को ग्रह के वातावरण में कौन-सी गैसें मिलीं और यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है?</strong></h2>
</p>
<p>इस अध्ययन की एक और बड़ी सफलता यह रही कि JWST ने ग्रह के वातावरण में मौजूद कुछ अहम गैसों का साफ पता लगाया। वैज्ञानिकों को मीथेन (Methane) और कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon Dioxide) जैसी गैसों के बेहतर संकेत मिले हैं। Cornell University के वैज्ञानिक Ryan Challener के मुताबिक, पहली बार इन गैसों को इतनी स्पष्टता से देखा गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज भविष्य में हॉट जुपिटर जैसे विशाल और बेहद गर्म ग्रहों के वातावरण और उनके व्यवहार को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगी।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/NASA-5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[NASA]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/jwst-discovers-extreme-heating-on-exoplanet-hd-80606-b-temperature-rises-by-1100-degree-fahrenheit-in-hours-1666602/</guid>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sun, 21 Jun 2026 06:46:47 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[11 अरब प्रकाश-वर्ष दूर गैलेक्सी से आया ये रहस्यमयी कण, वैज्ञानिकों ने किया बड़ा खुलासा]]></title>
		<description>ब्रह्मांड के सबसे रहस्यमयी कणों में से एक न्यूट्रिनो को लेकर वैज्ञानिकों ने बड़ी खोज की है। अंटार्कटिका के IceCube Observatory ने 2021 में एक हाई-एनर्जी न्यूट्रिनो का पता लगाया था। अब रिसर्चर्स ने पता लगाया है कि यह कण पृथ्वी से करीब 11 अरब प्रकाश-वर्ष दूर स्थित गैलेक्सी से आया था। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ब्रह्मांड के सबसे रहस्यमयी कणों में से एक न्यूट्रिनो को लेकर वैज्ञानिकों ने बड़ी सफलता हासिल की है। अंटार्कटिका में स्थित IceCube Neutrino Observatory ने साल 2021 में एक बेहद हाई-एनर्जी न्यूट्रिनो का पता लगाया था, जिसे IC 210922A नाम दिया गया। उस समय वैज्ञानिक यह नहीं जान पाए थे कि यह कण आखिर आया कहां से है। अब एक नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने इसकी उत्पत्ति का पता लगा लिया है। उनके अनुसार यह न्यूट्रिनो &#8216;Shadow Blaster&#8217; नाम की एक Distant Starburst Galaxy से आया था, जो पृथ्वी से लगभग 11 अरब प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है। यह खोज इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार ऐसे संकेत मिले हैं कि तेजी से नए तारे बनाने वाली आकाशगंगाएं भी हाई-एनर्जी न्यूट्रिनो पैदा कर सकती हैं।</p>
<h2><strong>कैसे मिली न्यूट्रिनो के स्रोत की पहचान?</strong></h2>
</p>
<p>17 जून को प्रकाशित एक नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने बताया कि उन्होंने Shadow Blaster, जिसका आधिकारिक नाम JCMT0402−0424 है, का अध्ययन कई शक्तिशाली दूरबीनों की मदद से किया। इसमें James Clerk Maxwell Telescope, Submillimeter Array और Atacama Large Millimeter Array जैसी Observatories शामिल थीं। इस गैलेक्सी की रोशनी रास्ते में मौजूद एक विशाल Elliptical Galaxy के गुरुत्वाकर्षण के कारण चार अलग-अलग तस्वीरों में बंट गई। इस प्रक्रिया को ग्रैविटेशनल लेंसिंग कहा जाता है। इसी प्रभाव की वजह से वैज्ञानिकों को इस बेहद दूर स्थित गैलेक्सी को अधिक विस्तार से देखने का मौका मिला और उसके अंदर की एक्टिविटी का अध्ययन संभव हो सका।</p>
<h2><strong>गैलेक्सी के अंदर क्या मिला?</strong></h2>
</p>
<p>रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि Shadow Blaster गैलेक्सी का बीच वाला हिस्सा उम्मीद से ज्यादा छोटा और घना है। इसका एक्टिल क्षेत्र सिर्फ करीब 1500 प्रकाश-वर्ष तक फैला है, लेकिन यहां गैस और धूल की बहुत बड़ी मात्रा मौजूद है, जिससे तेजी से नए तारे बन रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि यहां किसी एक्टिव विशाल ब्लैक होल के सबूत नहीं मिले। अब तक वैज्ञानिक मानते थे कि ऐसे शक्तिशाली न्यूट्रिनो बनाने में ब्लैक होल की बड़ी भूमिका होती है, लेकिन इस रिसर्च ने उस सोच को बदल दिया है। इससे पता चलता है कि सिर्फ तेजी से तारे बनाने वाली गैलेक्सियां भी इतनी ज्यादा एनर्जी पैदा कर सकती हैं कि वहां से हाई-एनर्जी न्यूट्रिनो निकल सकें।</p>
<h2><strong>ब्रह्मांड को समझने में क्यों अहम है यह खोज?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों के अनुसार न्यूट्रिनो पूरे ब्रह्मांड में बड़ी संख्या में मौजूद हैं, लेकिन उनके स्रोतों की पहचान करना बेहद मुश्किल होता है। इस अध्ययन से पता चलता है कि स्टारबर्स्ट गैलेक्सियां Natural Cosmic-Ray Accelerator की तरह काम कर सकती हैं। रिसर्च के प्रमुख लेखक Yuji Urata का कहना है कि ऐसी गैलेक्सियां IceCube द्वारा दर्ज किए गए कुल डिफ्यूज न्यूट्रिनो बैकग्राउंड का लगभग 20% हिस्सा पैदा कर सकती हैं। करीब 10 अरब वर्ष पहले ब्रह्मांड में स्टारबर्स्ट गैलेक्सियों की संख्या काफी अधिक थी, इसलिए यह खोज यह समझने में मदद कर सकती है कि आज हमें इतने अधिक न्यूट्रिनो क्यों दिखाई देते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में होने वाली ऐसी खोजें ब्रह्मांड की सबसे शक्तिशाली और रहस्यमयी घटनाओं के बारे में नई जानकारी दे सकती हैं।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/IceCube-Neutrino-Observatory.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[IceCube Neutrino Observatory]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/icecube-traces-high-energy-neutrino-to-distant-starburst-galaxy-11-billion-light-years-away-1666599/</guid>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 12:29:11 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Amazon Prime Day 2026 Sale की तारीखों का ऐलान, मात्र 999 रुपये में बनें सालभर के लिए Prime सदस्य]]></title>
		<description>Amazon Prime Day Sale 2026 की तारीखों का ऐलान हो गया है। इस सेल के दौरान प्राइम सदस्यों को विभिन्न प्रोडक्ट्स पर बंपर डील व डिस्काउंट ऑफर्स मिलने वाले हैं। यहां जानें सभी डिटेल्स।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Amazon Prime Day 2026 Sale</strong> की तारीखों का ऐलान हो गया है। यह सेल अगले महीने यानी जुलाई में लाइव होने जा रही है, जो कि सिर्फ Amazon Prime members के लिए ही लाइव होने वाली है। इस सेल के दौरान प्राइम सदस्य विभिन्न प्रोडक्ट्स पर डील व डिस्काउंट ऑफर्स का लाभ उठा सकेंगे। अगर आप जल्द ही नया स्मार्टफोन या फिर डिवाइस खरीदने की सोच रहे थे, तो प्राइम डे सेल आपके कई सुनहरे ऑफर्स लेकर आने वाली है। इस सेल के लिए अमेजन ने SBI व Axis Bank के साथ साझेदारी की है। इसका मतलब यह है कि इस सेल के दौरान इस बैंक के ग्राहकों को स्पेशल डिस्काउंट ऑफर्स का लाभ मिलेगी।</p>
<h2>Amazon Prime Day Sale 2026 Dates</h2>
</p>
<p>कंपनी ने फाइनली <a href="https://www.techlusive.in/hi/photo-gallery/7200mah-battery-50mp-camera-vivo-t5x-5g-809-emi-offer-on-flipkart-amazon-deal-price-in-india-specs-1665820/">Amazon</a> Prime Day Sale 2026 की डेट्स का ऐलान कर दिया है। यह सेल 4 जुलाई से शुरू होने वाली है, जो कि 6 जुलाई तक जारी रहेगी। तीन दिन चलने वाली यह सेल बंपर डील व डिस्काउंट ऑफर्स से लैस होगी। इसकी शुरुआत 4 जुलाई रात 12:00 AM पर होगी, जो कि 6 जुलाई रात 11:59 तक जारी रहेगी।</p>
<h2>Amazon Prime Day Sale 2026 Offers</h2>
</p>
<p>जैसे कि हमने बताया अमेजन की यह सेल सिर्फ प्राइम मेंबर्स के लिए ही है। इस सेल के दौरान प्राइम सदस्य स्मार्टफोन, होम अप्लाइंसेस, इलेक्ट्रोनिक्स आदि पर धमाकेदार डील व डिस्काउंट ऑफर्स मिलेंगे। ऑफर्स की बात करें, तो SBI व Axis Bank कार्ड के जरिए सेल के दौरान खरीदारी करने पर आपको 10 प्रतिशत तक का इंस्टेंट डिस्काउंट ऑफर प्राप्त होगा। इसके अलावा, यह ऑफर EMI ट्रांसजेक्शन पर भी मिल रहा है। इसके अलावा, Amazon Pay ICICI Bank Credit Card के जरिए यूजर्स को चुनिंदा प्रोडक्ट्स पर 5 प्रतिशत तक का कैशबैक मिल रहा है।</p>
</p>
<p>कंपनी का दावा है कि इस साल प्राइम डे के दौरान कंपनी 500 से ज्यादा नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करने वाली है, जिसमें OnePlus व Samsung जैसे स्मार्टफोन ब्रांड्स भी शामिल है। वहीं, अमेजन प्रोडक्ट्स की बात करें, तो Echo स्मार्ट स्पीकर, डिस्प्ले व फायर टीवी जैसे डिवाइस पर 45 प्रतिशत डिस्काउंट ऑफर मिलेगा।</p>
<h2>Amazon Prime membership offers</h2>
</p>
<p>इसके अलावा, कंपनी नए सब्सक्राइबर्स के लिए लिमिटेड टाइम मेंबरशिप ऑफर भी लाई है। स्टैंडर्ड एनुअल प्राइम सब्सक्रिप्शन को 999 रुपये में खरीदा जा सकेगा, जिसकी कीमत 1499 रुपये है। वहीं, दूसरी ओर Prime Lite सब्सक्रिप्शन प्लान की कीमत 799 रुपये है, जिसे ऑफर के तहत 599 रुपये में पाया जा सकता है। Prime Shopping Edition को 299 रुपये में पाया जा सकेगा, जिसकी कीमत अभी 399 रुपये है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Phonepe-2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/amazon-prime-day-2026-sale-dates-announced-4-july-deal-and-discount-offers-prime-membership-price-just-rs-999-1666397/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/amazon-prime-day-2026-sale-dates-announced-4-july-deal-and-discount-offers-prime-membership-price-just-rs-999-1666397/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 10:35:08 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[FIFA World Cup 2026 में दिखी क्रिकेट वाली Snicko जैसी टेक्नोलॉजी, जानें कैसे करती है काम]]></title>
		<description>FIFA World Cup 2026 इस समय Sweden और Tunisia के बीच खेले गए मैच के कारण सुर्खियों में बना हुआ है, क्योंकि इस मुकाबले में क्रिकेट में इस्तेमाल होने वाली Snicko जैसी टेक्नोलॉजी देखने को मिली। आइए नीचे जानते हैं क्या है यह तकनीक और कैसे करती है काम।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>FIFA World Cup 2026</strong> का आगाज हो चुका है। इस बार टूर्नामेंट सिर्फ खिलाड़ियों और टीमों के परफॉर्मेंस की वजह से नहीं बल्कि एडवांस टेक्नोलॉजी के कारण भी चर्चा में बना है। फुलबॉल मैचों को अधिक सटीक और रोमांचक बनाने के लिए AR (Augmented Reality), AI (Artificial intelligence) और सेंसर लैस बॉल जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। खास बात यह है कि इस बार फुटबॉल में क्रिकेट की लोकप्रिय Snicko टेक से मिलती-जुलती तकनीक को भी यूज किया गया है, जिसकी झलक सोमवार को Sweden और Tunisia के बीच खेले गए मुकाबले में देखने को मिली।</p>
<h2>क्या है Snicko टेक्नोलॉजी ?</h2>
</p>
<p>Snicko टेक्नोलॉजी बहुत लोकप्रिय है। इसका इस्तेमाल क्रिकेट (Cricket) में किया जाता है। इसे Snickometer मशीन से नाम मिला है। इसका उपयोग यह जानने के लिए किया जाता है कि क्या बॉल बेट या फिर दस्तानों को छूकर निकली है या नहीं। इसके लिए स्टंप के पास बेहद ही संवेदनशील माइक्रोफोन लगाए जाते हैं, जो हल्की सी आवाज को भी रिकॉर्ड कर लेते हैं।</p>
</p>
<p>जब बॉल बल्ले के संपर्क में आती है, तो मीटर में दिखाई देने वाली वेवफॉर्म तेजी से ऊपर-नीचे होती हैं। इससे थर्ड अंपायर को यह समझने में आ जाता है कि बॉल बैट या फिर ग्लव से टच हुई है। इससे निर्णय लेने में आसानी होती है।</p>
<h2>किस मैच में देखने को मिली झलक ?</h2>
</p>
<p>फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इस हफ्ते सोमवार को Sweden और Tunisia के बीच खेले गए मैच में Snicko जैसी टेक्नोलॉजी देखने को मिली। इस मुकाबले के 84वें मिनट में Sweden के खिलाड़ी Mattias Svanberg ने गोल किया, लेकिन शुरुआत में इसे ऑफसाइड मानकर रद्द किया गया। हालांकि, बहस के बाद इसकी जांच की जिम्मा VAR अधिकारियों को सौंपा गया।</p>
</p>
<p>इसके लिए आधिकारियों ने मैच में इस्तेमाल हो रही Adidas Trionda स्मार्ट बॉल के डेटा को मॉनिटर किया, जिसमें खास माइक्रोचिप लगी हैं। इनकी खूबी है कि ये किसी खिलाड़ी से टकराते ही उसके सिग्नल रिकॉर्ड कर लेती हैं और उसे वेवफॉर्म के रूप में दर्शाती है। इस ही वेवफॉर्म से पुष्टि हुई कि Isak ने गेंद को हल्का सा टच किया था। इसके बाद ऑफसाइड के फैसले को बदला गया और उस गोल को मान्य माना गया।</p>
<h2>क्या मुकाबले में इस्तेमाल हुई तकनीक Snicko जैसी है ?</h2>
</p>
<p>फुलबॉल में इस्तेमाल किए जाने वाली टेक्नोलॉजी क्रिकेट की Snicko जैसी नहीं है। दोनों के काम करने का तरीका अलग है। क्रिकेट में माइक्रोफोन स्टंप के पास होते हैं, जबकि फुटबॉल में IMU सेंसर बॉल में लगा होता है, जो बॉल और खिलाड़ी के संपर्क में आने पर वेवफॉर्म में रूप में रिकॉर्ड कर लेता है। हालांकि, इन दोनों तकनीक का परिणाम दिखना तरीका लगभग एक जैसा है।</p>
</p>
<p>स्क्रीन पर वेवफॉर्म देखने को मिलती है, जिससे पता चल जाता है कि बॉल प्लेयर को छूकर निकली है या नहीं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फीफा इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल पिछले पांच साल से कर रही है। इसका उपयोग सबसे पहले 2022 वर्ल्ड कप में किया गया था।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/football-1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/fifa-world-cup-2026-snicko-like-technology-in-football-know-what-is-it-and-how-it-works-1666369/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/fifa-world-cup-2026-snicko-like-technology-in-football-know-what-is-it-and-how-it-works-1666369/</link>
		<dc:creator><![CDATA[ajay verma]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 09:46:20 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Google ने पेश किया नया AI Home Speaker, Gemini के साथ मिलेंगे ये सब फीचर्स, कीमत बस इतनी]]></title>
		<description>Google ने अपना नया AI-Powered Google Home Speaker पेश कर दिया है, जो Gemini AI के साथ आता है। यह स्मार्ट स्पीकर सिर्फ म्यूजिक चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक ही कमांड में कई काम कर सकता है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Google ने अपने नए AI-Powered स्मार्ट स्पीकर Google Home Speaker की ग्लोबल बिक्री शुरू कर दी है। कंपनी ने चुनिंदा देशों में इसके लिए प्री-ऑर्डर लेना शुरू कर दिया है। Google ने इस स्मार्ट स्पीकर को अक्टूबर 2025 में पेश किया था और अब यह बाजार में आने के लिए तैयार है। इसकी कीमत 99.99 डॉलर (करीब 8,900 रुपये) रखी गई है। फिलहाल इसे अमेरिका और न्यूजीलैंड समेत कुछ बाजारों में प्री-ऑर्डर किया जा सकता है, जबकि इसकी शिपिंग 25 जून से शुरू होगी। यह Berry, Hazel, Jade और Porcelain जैसे चार कलर ऑप्शन में उपलब्ध होगा। Google का कहना है कि यह स्पीकर Gemini AI की मदद से पहले से ज्यादा स्मार्ट और यूजफुल अनुभव देगा।</p>
<h2><strong>Gemini AI वाला यह स्मार्ट स्पीकर क्या-क्या कर सकता है?</strong></h2>
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<p>Google Home Speaker की सबसे बड़ी खासियत इसका Gemini for Home वॉयस असिस्टेंट है। यह यूजर्स को सामान्य वॉयस कमांड से कहीं ज्यादा एडवांस सुविधाएं देता है। यूजर्स एक ही कमांड में कई काम कर सकते हैं, Gemini Live का इस्तेमाल कर सकते हैं और Home Briefs फीचर के जरिए यह जान सकते हैं कि उनकी गैरमौजूदगी में घर में क्या एक्टिविटी हुईं। स्पीकर पर मौजूद खास Light Ring यूजर्स को विजुअल फीडबैक भी देता है। यह डायनामिक लाइट दिखाती है कि Gemini आपकी बात सुन रहा है, सोच रहा है, जवाब तैयार कर रहा है या Gemini Live मोड में काम कर रहा है।</p>
<h2><strong>ऑडियो और स्मार्ट फीचर्स में क्या खास मिलेगा?</strong></h2>
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<p>ऑडियो के मामले में भी Google Home Speaker को काफी बेहतर बनाया गया है। इसमें 58mm का फुल-रेंज ड्राइवर दिया गया है जो 360-डिग्री ऑडियो आउटपुट देता है। इसे Google TV Streamer के साथ कनेक्ट किया जा सकता है और दो स्पीकर्स को एक साथ पेयर करके होम थिएटर जैसा स्पेशल सराउंड साउंड अनुभव भी लिया जा सकता है। बेहतर वॉयस रिकग्निशन के लिए इसमें तीन Far-Field माइक्रोफोन दिए गए हैं। इसके अलावा यूजर्स को माइक्रोफोन को तुरंत बंद करने के लिए एक फिजिकल म्यूट स्विच भी मिलता है, जिससे प्राइवेसी पर ज्यादा कंट्रोल मिलता है।</p>
<h2><strong>Google Home Speaker में कौन-कौन से हार्डवेयर और कनेक्टिविटी फीचर्स हैं?</strong></h2>
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<p>हार्डवेयर की बात करें तो Google Home Speaker में Quad core Cortex-A55 Processor और एक डेडिकेटेड Neural Processing Unit (NPU) दिया गया है, जो Gemini AI फीचर्स को तेज और बेहतर तरीके से चलाने में मदद करता है। इसमें 1GB LPDDR4 RAM और 4GB eMMC स्टोरेज मौजूद है। कनेक्टिविटी के लिए Wi-Fi 6, Bluetooth 5.4 और Thread 1.3 Border Router सपोर्ट मिलता है। यह Google Home App और Matter सपोर्टेड स्मार्ट होम डिवाइसेज के साथ भी काम करता है। कॉम्पैक्ट डिजाइन वाला यह स्पीकर 3.4-inch ऊंचा और 4.2-inch चौड़ा है, इसे 30W USB Type-C एडॉप्टर से पावर मिलती है।</p>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
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