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	<title><![CDATA[Latest Technology &amp; Gadgets - News in Hindi | News &amp; Reviews on Gadgets, Smart Phones, Mobile Apps &amp; Gaming | टेक न्यूज़ इन हिंदी | TECHLUSIVE.in Hindi]]></title>
	<description><![CDATA[Latest Technology &amp; Gadgets - News in Hindi | News &amp; Reviews on Gadgets, Smart Phones, Mobile Apps &amp; Gaming | टेक न्यूज़ इन हिंदी | TECHLUSIVE.in Hindi]]></description>
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	 <item>
		<pubDate>Mon, 25 May 2026 12:21:09 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[क्या सच में Aadhaar Card धारकों को Electric साइकिल मिल रही FREE? PM Modi का वीडियो हो रहा वायरल, जानें सच्चाई]]></title>
		<description>PM Modi की एक वीडियो ऑनलाइन वायरल हो रही है। इस वीडियो में वह दावा करते दिख रहे हैं कि जिन लोगों के पास आधार कार्ड है, उन्हें सरकार इलेक्ट्रिक साइकिल फ्री मिलेगी। यहां जानें ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>PM Modi</strong> की एक वीडियो इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रही है। इस वीडियो में इस वीडियो में वो एक सभा को संबोधित करते हुए दावा कर रहे हैं कि 25 मई सोमवार यानी आज से आधारकार्ड धारकों को इलेक्टिक साइकिल फ्री दी जाने वाली है। इसके लिए दावेदारों को तुरंत आवेदन करने को भी कहा गया है। अगर आपने भी इस तरह की कोई वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर देखा है, तो यहां जान लें इस वीडियो की पूरी सच्चाई।</p>
</p>
<p>PIB Fact Check ने अपने ऑफिशियल X हैंडल पर <a href="https://www.techlusive.in/hi/news/prime-minister-narendra-modi-become-first-leader-with-100-million-followers-on-instagram-1648428/">PM Modi </a>का यह वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो को Dealdukaaan99 अकाउंट के जरिए Facebook पर शेयर किया गया है। वीडियो में पीएम नरेंद्र मोदी कहते दिख रहे हैं कि जिन भी लोगों के पास आधार कार्ड है, उन्हें इलेक्ट्रिक साइकिल दी जाएगी। हालांकि, इस दावे का PIB ने पूरी तरह से खंडन किया है और इसे Fake बताया है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi">🚨 सावधान!<a href="https://twitter.com/hashtag/Facebook?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">#Facebook</a> अकाउंट ‘Dealdukaaan99’ द्वारा प्रधानमंत्री <a href="https://twitter.com/narendramodi?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">@narendramodi</a> के एक AI-जनरेटेड वीडियो के माध्यम से यह दावा किया जा रहा है कि सभी आधार कार्ड धारकों को इलेक्ट्रिक साइकिल दी जाएगी।<a href="https://twitter.com/hashtag/PIBFactCheck?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">#PIBFactCheck</a></p>
</p>
<p>❌ यह दावा फर्जी है।</p>
</p>
<p>✅ प्रधानमंत्री या केंद्र सरकार द्वारा ऐसी कोई… <a href="https://t.co/4CNIUDFt4m" rel="nofollow" target="_blank">pic.twitter.com/4CNIUDFt4m</a></p>
</p>
<p>— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) <a href="https://twitter.com/PIBFactCheck/status/2058839318945566757?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 25, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>सोशल मीडिया पर PM Modi के वीडियो को AI के जरिए बदल दिया गया है। यहां वो कुछ और कह रहे हैं, लेकिन वीडियो में एआई के जरिए उनकी आवाज का क्लोन इस्तेमाल किया गया है और गलत दावे किए जा रहे हैं।</p>
</p>
<p>पोस्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या फिर केंद्र सरकार द्वारा इस तरह का कोई ऐलान नहीं किया गया है। इसके अलावा, सरकारी पोर्टल पर भी इस संबंध में किसी तरह की स्कीम पेश नहीं की गई है। पोस्ट में सलाह दी गई है कि इस तरह के झूठे दावों पर विश्वास न करें। हमेशा ऑफिशियल सोर्स के जरिए ही दावों पर क्रोस-चेक करें।</p>
<h2>फर्जी खबरों से ऐसे रहें सावधान</h2>
</p>
<p>सोर्स की जांच करें- अगर आप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कोई वीडियो या फिर इस तरह की खबर पाते हैं, तो सबसे पहले उसे ऑफिशियल सोर्स के जरिए कंफर्म कर लें।</p>
</p>
<p>Google lens- अगर सोशल मीडिया पर इस तरह की फोटो व वीडियो देखते हैं, जिस पर आपको फेक होने का संदेह होता है, तो आप गूगल लेंस का सहारा ले सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Modi-Scam.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/pm-modi-ai-generated-fake-video-claim-that-all-aadhaar-card-holders-will-be-given-electric-bicycles-1663772/</guid>
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		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 25 May 2026 05:32:15 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[X का बड़ा एक्शन, वायरल कंटेंट कॉपी करने वाले अकाउंट्स की अब खैर नहीं!]]></title>
		<description>X ने अब वायरल वीडियो और मीम्स को कॉपी करके कमाई करने वाले अकाउंट्स पर सख्ती शुरू कर दी है। कंपनी का कहना है कि असली क्रिएटर्स को उनका सही हक मिलना चाहिए। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X अब उन अकाउंट्स पर सख्ती करने जा रहा है जो दूसरों के वायरल वीडियो और मीम्स को कॉपी करके पैसे कमाते हैं। पिछले कुछ समय से प्लेटफॉर्म पर यह आम बात हो गई थी कि कोई वीडियो वायरल होते ही कई बड़े अकाउंट्स उसे तुरंत डाउनलोड करके दोबारा पोस्ट कर देते थे। इससे असली क्रिएटर को बहुत कम पहचान मिलती थी, जबकि रीपोस्ट अकाउंट्स लाखों व्यूज और एंगेजमेंट के जरिए कमाई कर लेते थे। अब कंपनी ने इस पर रोक लगाने के लिए नए बदलाव लागू करने का फैसला किया है।</p>
<h2><strong>किन अकाउंट्स पर X ने शुरू की कार्रवाई?</strong></h2>
</p>
<p>कंपनी के हेड ऑफ प्रोडक्ट Nikita Bier ने बताया कि कई बड़े अकाउंट्स ऑटोमैटिक सिस्टम के जरिए छोटे क्रिएटर्स के कंटेंट को रीअपलोड कर रहे थे। उनका मकसद सिर्फ X के क्रिएटर रेवेन्यू-शेयर प्रोग्राम का फायदा उठाना था। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में कंपनी ने ऐसे कई अकाउंट्स की पहचान की है जो ओरिजिनल क्रिएटर्स को क्रेडिट दिए बिना उनका कंटेंट इस्तेमाल कर रहे थे। X का रेवेन्यू-शेयर प्रोग्राम यूजर्स को पोस्ट पर मिलने वाले एंगेजमेंट के आधार पर कमाई का मौका देता है, लेकिन इसी सिस्टम का कुछ लोग गलत फायदा उठा रहे थे।</p>
<h2><strong>अब असली क्रिएटर्स को कैसे मिलेगा ज्यादा फायदा?</strong></h2>
</p>
<p>अब X ऐसे रीपोस्ट किए गए वीडियो और पोस्ट की पहचान करके उनके इम्प्रेशन्स का बड़ा हिस्सा असली क्रिएटर को देगा। इसका मतलब यह है कि वायरल कंटेंट बनाने वाले लोगों को अब ज्यादा व्यूज, पहचान और कमाई मिल सकेगी, हालांकि कंपनी ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई यूजर किसी वायरल वीडियो पर अपनी राय, जानकारी या मजेदार रिएक्शन देना चाहता है तो वह अभी भी ऐसा कर सकता है। इसके लिए X ने &#8216;Share Video&#8217; और &#8216;Quote&#8217; फीचर इस्तेमाल करने की सलाह दी है, ताकि ओरिजिनल पोस्ट को सही क्रेडिट मिलता रहे। Nikita Bier के मुताबिक, जो लोग Meaningful Commentary जोड़ेंगे उन्हें भी कुछ इम्प्रेशन्स मिलेंगे, लेकिन सबसे ज्यादा फायदा हमेशा असली क्रिएटर को मिलेगा।</p>
<h2><strong>Share Video फीचर में क्या दिक्कत सामने आई?</strong></h2>
</p>
<p>इस दौरान कुछ यूजर्स ने &#8216;Share Video&#8217; फीचर में मौजूद एक समस्या की भी शिकायत की। उनका कहना था कि अगर पोस्ट 280 कैरेक्टर से ज्यादा लंबी हो जाए तो वीडियो एम्बेड होने की बजाय सिर्फ लिंक में बदल जाता है। इस पर जवाब देते हुए Nikita Bier ने माना कि यह एक बग है और इसे जल्द ठीक किया जाएगा, माना जा रहा है कि X का यह कदम उन कंटेंट एग्रीगेशन अकाउंट्स की कमाई कम करने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, जिनका पूरा बिजनेस मॉडल दूसरों के वायरल कंटेंट को दोबारा पोस्ट करके पैसा कमाने पर टिका हुआ था।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2025/10/X-app-draft-sync.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[X app]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 25 May 2026 05:02:13 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[ब्लैक होल के अंदर क्या होता है? नई रिसर्च में बड़ा दावा]]></title>
		<description>ब्लैक होल को लेकर वैज्ञानिकों की सोच बदल सकती है। नई रिसर्च में दावा किया गया है कि हर ब्लैक होल के अंदर ‘Singularity’ होना जरूरी नहीं है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, कुछ खास परिस्थितियों में ब्लैक होल बिना Infinite Gravity के भी बन सकते हैं। अगर यह थ्योरी सही साबित हुई, तो ब्लैक होल और ब्रह्मांड को समझने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ब्लैक होल को लेकर वैज्ञानिकों की सोच अब बदल सकती है। अब तक माना जाता था कि हर ब्लैक होल के अंदर एक &#8216;Singularity&#8217; होती है। इसका मतलब है ऐसा बिंदु जहां Gravity इतनी ज्यादा हो जाती है कि Physics के सारे नियम काम करना बंद कर देते हैं, लेकिन अब एक नई रिसर्च ने इस सोच को चुनौती दी है। जर्मनी की Goethe University Frankfurt के वैज्ञानिक फ्रांसेस्को डी फिलिप्पो का कहना है कि कुछ खास परिस्थितियों में ब्लैक होल बिना Singularity के भी बन सकते हैं। यह रिसर्च अप्रैल 2026 में Physical Review Letters में प्रकाशित हुई है। वैज्ञानिक मान रहे हैं कि अगर यह सही साबित होती है, तो ब्लैक होल को समझने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।</p>
<h2><strong>क्या है ब्लैक होल का नया रहस्य?</strong></h2>
</p>
<p>इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने एक खास तरह के ब्लैक होल पर रिसर्च की, जिन्हें &#8216;Reissner-Nordström Black Hole&#8217; कहा जाता है। ये ऐसे ब्लैक होल होते हैं जिनमें इलेक्ट्रिक चार्ज भी मौजूद होता है। अब तक वैज्ञानिक मानते थे कि ऐसे ब्लैक होल के अंदर दो बड़ी समस्याएं होती हैं।</p>
<ul>
<li>पहली &#8216;Singularity&#8217;, यानी ऐसी जगह जहां Gravity और Space-Time का असर Infinite हो जाता है।</li>
<li>दूसरी &#8216;Cauchy Horizon&#8217;, जिसके बाद यह समझना मुश्किल हो जाता है कि आगे क्या होगा, लेकिन वैज्ञानिक फ्रांसेस्को डी फिलिप्पो की नई रिसर्च कुछ अलग बताती है।</li>
</ul>
<p>उनके मुताबिक, ब्लैक होल का इलेक्ट्रिक चार्ज और उससे निकलने वाला &#8216;हॉकिंग रेडिएशन&#8217; मिलकर इन समस्याओं को रोक सकते हैं। इसका मतलब यह हो सकता है कि ब्लैक होल के अंदर Infinite Gravity बनने की जरूरत ही न पड़े, यानी Singularity शायद बने ही नहीं।</p>
<h2><strong>यह रिसर्च Physics के लिए क्यों अहम है?</strong></h2>
</p>
<p>इस खोज को बहुत खास माना जा रहा है क्योंकि इसका असर सिर्फ चार्ज वाले ब्लैक होल तक सीमित नहीं हो सकता। वैज्ञानिकों का मानना है कि यही नियम ब्रह्मांड के दूसरे ब्लैक होल पर भी लागू हो सकते हैं। इस रिसर्च की सबसे बड़ी बात यह है कि यह क्वांटम फील्ड थ्योरी पर आधारित है। इसमें स्ट्रिंग थ्योरी या लूप क्वांटम ग्रैविटी जैसे ऐसे मॉडल इस्तेमाल नहीं किए गए, जिन्हें अभी तक पूरी तरह सही साबित नहीं किया जा सका है, यही वजह है कि वैज्ञानिक इस अध्ययन को ज्यादा भरोसेमंद मान रहे हैं। अगर आगे चलकर यह सिद्धांत सही साबित होता है, तो ब्लैक होल और Gravity को समझने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।</p>
<h2><strong>क्या ब्लैक होल से डार्क मैटर का रहस्य सुलझ सकता है?</strong></h2>
</p>
<p>इस रिसर्च में यह भी कहा गया है कि अगर ब्लैक होल में Singularity न हो, तो उसके खत्म होने के बाद बहुत छोटे-छोटे माइक्रोस्कोपिक ऑब्जेक्ट्स बन सकते हैं। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यही रहस्यमयी चीजें &#8216;डार्क मैटर&#8217; से जुड़ी हो सकती हैं। डार्क मैटर आज भी ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में से एक है क्योंकि इसे सीधे देखा नहीं जा सकता, लेकिन इसका असर अंतरिक्ष में महसूस होता है, फिलहाल यह रिसर्च सिर्फ एक थ्योरी है और इसे सही साबित करने के लिए अभी और अध्ययन करने होंगे, फिर भी वैज्ञानिक इसे ब्लैक होल की दुनिया में एक बड़ा कदम मान रहे हैं क्योंकि पहली बार बिना सिंगुलैरिटी वाले ब्लैक होल को इतने बेहतर तरीके से समझाने की कोशिश की गई है।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>ब्लैक होल के अंदर आखिर होता क्या है?</strong></h2>
</p>
<p>अब तक वैज्ञानिक मानते थे कि ब्लैक होल के केंद्र में &#8216;Singularity&#8217; होती है, जहां Gravity Infinite हो जाती है और Physics के नियम काम करना बंद कर देते हैं, लेकिन नई रिसर्च के मुताबिक, कुछ ब्लैक होल बिना Singularity के भी मौजूद हो सकते हैं।</p>
<h2><strong>नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने क्या दावा किया है?</strong></h2>
</p>
<p>जर्मनी की Goethe University Frankfurt के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि इलेक्ट्रिक चार्ज और Hawking Radiation मिलकर ब्लैक होल के अंदर Infinite Gravity बनने से रोक सकते हैं, यानी ब्लैक होल बिना Singularity के भी बन सकते हैं।</p>
<h2><strong>Reissner-Nordström Black Hole क्या होता है?</strong></h2>
</p>
<p>यह एक खास तरह का ब्लैक होल होता है जिसमें इलेक्ट्रिक चार्ज मौजूद होता है। नई रिसर्च इसी प्रकार के ब्लैक होल पर आधारित है और वैज्ञानिकों का मानना है कि इनके अंदर की Physics सामान्य ब्लैक होल से अलग हो सकती है।</p>
<h2><strong>इस खोज का Physics और ब्रह्मांड पर क्या असर पड़ सकता है?</strong></h2>
</p>
<p>अगर यह थ्योरी सही साबित होती है, तो ब्लैक होल, Gravity और Space-Time को समझने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। इससे Quantum Physics और General Relativity के बीच के कई रहस्य भी सुलझ सकते हैं।</p>
<h2><strong>क्या इस रिसर्च से डार्क मैटर का रहस्य भी सुलझ सकता है?</strong></h2>
</p>
<p>कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि बिना Singularity वाले ब्लैक होल खत्म होने के बाद छोटे माइक्रोस्कोपिक ऑब्जेक्ट्स छोड़ सकते हैं। संभव है कि यही रहस्यमयी चीजें &#8216;Dark Matter&#8217; से जुड़ी हों, हालांकि इसे साबित करने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत है।</p>
]]></content:encoded>
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		<media:description type='plain'><![CDATA[Black Hole]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sun, 24 May 2026 05:07:35 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[मंगल से आई चौंकाने वाली तस्वीर, तीन पत्थरों ने वैज्ञानिकों का खींचा ध्यान]]></title>
		<description>मंगल ग्रह से आई एक नई तस्वीर ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। NASA के Perseverance Rover ने तीन पत्थरों जैसी दिखने वाली एक अनोखी चट्टान की फोटो भेजी है, जो ऐसे नजर आती है जैसे किसी ने उन्हें एक-दूसरे के ऊपर सजाकर रखा हो। वैज्ञानिक अब इसके पीछे की प्राकृतिक वजहों को समझने में जुटे हैं। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अंतरिक्ष की दुनिया में एक बार फिर ऐसा नजारा सामने आया है जिसने वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम लोगों को भी चौंका दिया है। NASA के मशहूर Perseverance Rover ने मंगल ग्रह पर एक अजीब चट्टान की तस्वीर भेजी है। यह चट्टान ऐसी दिखती है जैसे तीन पत्थरों को एक-दूसरे के ऊपर बहुत ही सही तरीके से रखा गया हो। यह तस्वीर 13 मई 2026 को मिशन के Sol 1859 के दौरान ली गई थी। तस्वीर को देखकर पहली नजर में ऐसा लगता है जैसे किसी ने जानबूझकर पत्थरों को सजाकर रखा हो। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर यह फोटो तेजी से वायरल हो गई। कुछ लोग इसे एलियंस से जोड़कर देख रहे हैं, तो कई लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर यह पत्थर इस तरह कैसे बने।</p>
<h2><strong>आखिर क्या है इन तीन पत्थरों का राज?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कोई रहस्यमयी चीज नहीं है, बल्कि मंगल ग्रह पर होने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया का असर हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ये पत्थर पहले एक बड़ी चट्टान का हिस्सा रहे होंगे, जो समय के साथ टूटकर अलग-अलग परतों जैसे दिखने लगे। वैज्ञानिक मानते हैं कि मंगल पर करोड़ों सालों तक चलने वाली तेज हवाओं और कभी वहां बहने वाले पानी ने चट्टानों को इस तरह का आकार दिया होगा। आज मंगल ग्रह सूखा और सुनसान नजर आता है, लेकिन कई रिसर्च बताती हैं कि बहुत पहले वहां नदियां, झीलें और शायद बारिश भी हुआ करती थी। NASA के दूसरे मिशनों से भी ऐसे संकेत मिले हैं कि एक समय मंगल का मौसम काफी हद तक पृथ्वी जैसा रहा होगा, लगातार हवाओं और मौसम के असर से वहां की चट्टानें धीरे-धीरे कटती और बदलती रहीं, जिससे ऐसे अजीब और रहस्यमयी आकार बन गए।</p>
<h2><strong>मंगल पर पहले भी दिख चुकी हैं ऐसी अजीब चीजें?</strong></h2>
</p>
<p>यह पहली बार नहीं है जब Perseverance Rover ने मंगल ग्रह पर कोई अजीब चीज देखी हो। पिछले कुछ सालों में रोवर ने कई ऐसी तस्वीरें भेजी हैं जिन्हें देखकर लोग हैरान रह गए। कभी पत्थरों पर तेंदुए जैसे धब्बे दिखाई दिए, तो कभी धागों की तरह उलझी हुई आकृतियां और पॉपकॉर्न जैसी चट्टानें नजर आईं। शुरुआत में लोगों को ये चीजें बहुत रहस्यमयी लगीं, लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने बताया कि ये सब मंगल ग्रह की प्राकृतिक बनावट और वहां के मौसम की वजह से बने आकार हैं। मंगल ग्रह हमेशा से लोगों के लिए रहस्य और जिज्ञासा का विषय रहा है। साल 1976 में NASA के Viking मिशन ने भी एक ऐसी तस्वीर ली थी जिसमें पहाड़ का आकार इंसानी चेहरे जैसा दिख रहा था। उस समय लोगों ने इसे लेकर कई कहानियां बना ली थीं, लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया कि वह सिर्फ रोशनी और छाया का असर था।</p>
<h2><strong>क्या मंगल ग्रह के ये रहस्य भविष्य में बड़े खुलासे करेंगे?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों का कहना है कि मंगल ग्रह पर दिखने वाली ऐसी अनोखी चीजें हमें वहां के पुराने समय और मौसम के बारे में समझने में मदद करती हैं। हर नई तस्वीर से यह पता चलता है कि मंगल सिर्फ सूखा और वीरान ग्रह नहीं था। Perseverance Rover लगातार मंगल पर नई-नई खोज कर रहा है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में यह रोवर ऐसे और बड़े राज खोल सकता है, जिनसे पता चल सके कि मंगल पर कभी जीवन के निशान मौजूद थे या नहीं।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>मंगल ग्रह पर दिखने वाले ये तीन पत्थर आखिर क्या हैं?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों के मुताबिक यह कोई Artificial Structure नहीं है। माना जा रहा है कि ये पत्थर पहले एक बड़ी चट्टान का हिस्सा थे, जो समय के साथ टूटकर इस अनोखे आकार में बदल गए।</p>
<h2><strong>क्या ये पत्थर एलियंस से जुड़े हो सकते हैं?</strong></h2>
</p>
<p>फिलहाल NASA और वैज्ञानिकों ने ऐसा कोई सबूत नहीं पाया है जो इन्हें एलियंस से जोड़ता हो। वैज्ञानिक इसे मंगल की प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रिया का परिणाम मान रहे हैं।</p>
<h2><strong>यह तस्वीर कब और किसने ली?</strong></h2>
</p>
<p>यह तस्वीर Perseverance Rover ने 13 मई 2026 को अपने मिशन के Sol 1859 के दौरान ली थी।</p>
<h2><strong>मंगल पर पहले भी ऐसी रहस्यमयी चीजें दिख चुकी हैं?</strong></h2>
</p>
<p>इससे पहले भी मंगल पर तेंदुए जैसे धब्बे, पॉपकॉर्न जैसी चट्टानें और इंसानी चेहरे जैसी आकृतियां दिखाई दे चुकी हैं।</p>
<h2><strong>इन खोजों से वैज्ञानिकों को क्या फायदा होता है?</strong></h2>
</p>
<p>ऐसी तस्वीरों से वैज्ञानिक मंगल ग्रह के पुराने मौसम, वहां बहने वाले पानी और संभावित जीवन के संकेतों को समझने की कोशिश करते हैं। इससे भविष्य की रिसर्च को भी मदद मिलती है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Mars-rock-formation.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[NASA’s Perseverance Rover captured an unusual rock formation on the surface of Mars. (Image credit: NASA/JPL-Caltech/ASU)]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sun, 24 May 2026 04:32:53 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[NASA ने खोले अंतरिक्ष के अनदेखे राज, लगभग 6 हजार नए ग्रहों का हुआ खुलासा]]></title>
		<description>NASA के TESS मिशन ने करीब 8 साल की मेहनत के बाद रात के आसमान का सबसे बड़ा और डिटेल्ड मैप तैयार किया है। इस मिशन में हजारों नए ग्रहों और अंतरिक्ष की कई रहस्यमयी एक्टिविटी का पता चला है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे भविष्य में Earth जैसे ग्रहों की खोज और तेज हो सकती है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अंतरिक्ष की दुनिया में एक बार फिर बड़ा कदम उठाते हुए NASA ने रात के आसमान का अब तक का सबसे डिटेल्ड मैप जारी किया है। यह खास मैप NASA के Transiting Exoplanet Survey Satellite यानी TESS मिशन द्वारा तैयार किया गया है। करीब आठ साल तक लगातार की गई निगरानी के बाद तैयार हुए इस विशाल स्काई मैप में लगभग 6000 ऐसे ग्रहों को दिखाया गया है जो हमारे सौरमंडल के बाहर मौजूद हैं। इस मैप में अप्रैल 2018 से सितंबर 2025 तक रिकॉर्ड किए गए 96 अलग-अलग सेक्टर शामिल हैं। तस्वीर में दिखाई देने वाले हजारों रंग-बिरंगे बिंदु उन ग्रहों की मौजूदगी का संकेत देते हैं जो दूसरे सितारों के चारों ओर चक्कर लगा रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मैप भविष्य की अंतरिक्ष खोजों के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।</p>
<h2><strong>TESS मिशन आखिर कैसे काम करता है?</strong></h2>
</p>
<p>NASA के अनुसार TESS मिशन एक्सोप्लैनेट यानी दूसरे सौरमंडलों के ग्रहों को खोजने के लिए &#8216;Transit Method&#8217; का इस्तेमाल करता है। इस टेक्नोलॉजी में सैटेलाइट एक साथ हजारों सितारों की चमक पर नजर रखता है। जब कोई ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है तो तारे की रोशनी थोड़ी देर के लिए कम हो जाती है। इसी छोटे बदलाव को पकड़कर वैज्ञानिक ग्रह की मौजूदगी का पता लगाते हैं। TESS में लगे चार वाइड-फील्ड कैमरे आसमान के हर सेक्टर को करीब एक महीने तक स्कैन करते हैं और फिर अगली दिशा में बढ़ जाते हैं। इस लंबे मिशन के दौरान सिर्फ नए ग्रह ही नहीं मिले, बल्कि पृथ्वी के पास घूमने वाले कई एस्टेरॉयड, नए तारों के ग्रुप और दूर की आकाशगंगाओं के केंद्र में होने वाली तेज एक्टिविटी भी रिकॉर्ड की गई हैं।</p>
<h2><strong>क्या इन नए ग्रहों पर जीवन मिलने की उम्मीद है?</strong></h2>
</p>
<p>सितंबर 2025 तक TESS मिशन 679 एक्सोप्लैनेट की पुष्टि कर चुका है, जबकि 5165 संभावित ग्रहों की पहचान अभी जांच के दौर में है। वैज्ञानिक इन ग्रहों की पुष्टि के लिए दूसरी ऑब्जर्वेट्री और टेलीस्कोप की मदद ले रहे हैं। इन ग्रहों की दुनिया बेहद अलग-अलग है। कुछ ग्रह Mercury से भी छोटे हैं, जबकि कुछ विशाल गैस ग्रह Jupiter से कई गुना बड़े बताए जा रहे हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इनमें कुछ ग्रह ऐसे भी हैं जो अपने सितारे के &#8216;Habitable Zone&#8217; में मौजूद हैं। इसका मतलब है कि वहां तरल पानी मौजूद होने की संभावना हो सकती है और इसी वजह से जीवन की उम्मीद भी जताई जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऐसे ग्रहों की संख्या और तेजी से बढ़ सकती है।</p>
<h2><strong>क्या वैज्ञानिक AI की भी ले रहे हैं मदद?</strong></h2>
</p>
<p>साल 2026 में TESS डेटा से वैज्ञानिकों को कई चौंकाने वाली जानकारियां भी मिली हैं। शोधकर्ताओं ने एक ऐसे ग्रह सिस्टम की पहचान की है जहां साथी ग्रह का ऑर्बिट बेहद अजीब और झुका हुआ पाया गया। इसके अलावा दो ग्रहों के बीच हिंसक टक्कर जैसे संकेत भी मिले हैं। अब वैज्ञानिक इस विशाल डेटा का एनालिसिस करने के लिए मशीन लर्निंग और AI का सहारा ले रहे हैं। इससे भविष्य में नए ग्रहों की खोज और तेज होने की उम्मीद है। NASA का कहना है कि TESS मिशन सिर्फ नए ग्रह खोजने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमें ब्रह्मांड को पहले से ज्यादा गहराई से समझने में मदद कर रहा है।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>NASA का TESS मिशन क्या है?</strong></h2>
</p>
<p>NASA का TESS (Transiting Exoplanet Survey Satellite) मिशन अंतरिक्ष में दूसरे सितारों के आसपास मौजूद ग्रहों यानी Exoplanets को खोजने के लिए बनाया गया है। यह मिशन 2018 में लॉन्च किया गया था।</p>
<h2><strong>TESS मिशन ने अब तक कितने नए ग्रह खोजे हैं?</strong></h2>
</p>
<p>सितंबर 2025 तक TESS मिशन 679 एक्सोप्लैनेट की पुष्टि कर चुका है, जबकि 5165 से ज्यादा संभावित ग्रहों की पहचान की गई है जिनकी अभी जांच चल रही है।</p>
<h2><strong>TESS ग्रहों को कैसे खोजता है?</strong></h2>
</p>
<p>TESS &#8216;Transit Method&#8217; का इस्तेमाल करता है। जब कोई ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है तो तारे की रोशनी थोड़ी कम हो जाती है। इसी बदलाव को पकड़कर वैज्ञानिक नए ग्रहों का पता लगाते हैं।</p>
<h2><strong>क्या इन नए ग्रहों पर जीवन होने की संभावना है?</strong></h2>
</p>
<p>कुछ ग्रह अपने सितारों के &#8216;Habitable Zone&#8217; में पाए गए हैं, जहां पानी तरल रूप में मौजूद हो सकता है। इसलिए वैज्ञानिकों को वहां जीवन मिलने की उम्मीद नजर आती है।</p>
<h2><strong>क्या NASA इस मिशन में AI का इस्तेमाल भी कर रहा है?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिक अब मशीन लर्निंग और AI की मदद से TESS के विशाल डेटा का तेजी से एनालिसिस कर रहे हैं, ताकि नए ग्रहों और अंतरिक्ष घटनाओं की पहचान आसान हो सके।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/NASA-3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[NASA]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/nasa-tess-releases-most-detailed-night-sky-map-reveals-thousands-of-exoplanets-1663614/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/nasa-tess-releases-most-detailed-night-sky-map-reveals-thousands-of-exoplanets-1663614/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sat, 23 May 2026 07:19:13 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Google ने Pixel यूजर्स को दिया खास गिफ्ट, डिस्को स्टाइयल में दिखेंगे सभी आइकन]]></title>
		<description>Google ने Pixel फोन्स के आइकन को डिस्को बॉल स्टाइल दिया है, जिससे आइकन चमकदार हो गए हैं और दिखने में भी सुंदर लग रहे हैं। इससे आइकन का पूरा रंग-रूप बदल गया है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पॉपुलर म्जूयिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Spotify ने हाल ही में 20 साल पूरे होने की खुशी में अपने आइकन को डिस्को-बॉल में बदला था, जिसकी खूब चर्चा हुई। अब इस ट्रैंड को फॉलो करते हुए दिग्गज टेक जाइंट Google ने भी अपने Pixel सीरीज के सभी फोन में ऐप आइकन का रंग-रूप बदला है, जिससे इन्हें डिस्को लुक मिला है।</p>
<h2>बदल गया Icon का लुक</h2>
</p>
<p>गूगल के अनुसार, Google Pixel सीरीज के स्मार्टफोन्स की सेटिंग में कस्टामाइजेशन फीचर का सपोर्ट दिया गया है, जिससे सभी ऐप के आइकन को ग्लिटर (Glitter) से लैस डिस्को स्टाइल दिया जा सकता है। इससे सभी आइकन जगमगाते हुए दिखाई देंगे और यूजर्स को डिवाइस में नए फोन जैसे फीलिंग मिलेगी। सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए अलग से थर्ड पार्टी ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">Your wish is our command. Disco icons available on Pixel as of today.</p>
</p>
<p>&#8230; Are y&#8217;all sure you still want this ?? 😅<a href="https://twitter.com/DurvidImel?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">@DurvidImel</a> <a href="https://twitter.com/RaceJohnson?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">@RaceJohnson</a> <a href="https://t.co/S9dwLZRtHl" rel="nofollow" target="_blank">https://t.co/S9dwLZRtHl</a> <a href="https://t.co/nvevL7fTSb" rel="nofollow" target="_blank">pic.twitter.com/nvevL7fTSb</a></p>
</p>
<p>— Sameer Samat (@ssamat) <a href="https://twitter.com/ssamat/status/2057831639275983293?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 22, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
</p>
<p>पिक्सल फोन्स में मिलने वाले कस्टामाइज फीचर की जानकारी एंड्रॉइड इकोसिस्टम (Android Ecosystem) के प्रेसिडेंट Sameer Samat ने X पर एक पोस्ट कर साझा की है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि आपकी इच्छा ही हमारा आदेश है। आज से Pixel पर डिस्को आइकन मिलने लगेंगे। इससे पहले यूजर्स के लिए अपडेट के जरिए Scribbles, Treasure और Easel जैसे आइकन थीम को जोड़ा गया था, जिससे आइकन को यूनीक लुक मिला।</p>
<h2>क्रोम और जीमेल का भी बदला लुक</h2>
</p>
<p>गूगल की ओर से डिस्को थीम का सपोर्ट गूगल क्रोम (Google Chrome), जीमेल (Gmail), गूगल मैप्स (Google Maps) और यूट्यूब (Youtube) को भी दिया गया है। इससे आइकन में डिस्को बॉल टेक्चर में देखने को मिलेंगे।</p>
</p>
<p>डिस्को थीम आइकन को अभी पिक्सल सीरीज के स्मार्टफोन के लिए रिलीज किया जा गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में इन आइकन को अन्य एड्रॉइड यूजर्स के लिए भी रोलआउट किया जा सकता है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Google-Pixel-disco-icons.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Google’s new disco-style app icons are now available on supported Pixel phones. (Image credits: @ssamat/ X)]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/google-pixel-phone-icons-change-in-disco-ball-after-spotify-1663575/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/google-pixel-phone-icons-change-in-disco-ball-after-spotify-1663575/</link>
		<dc:creator><![CDATA[ajay verma]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Fri, 22 May 2026 11:11:40 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[सिंगल चार्ज पर 50 घंटे चलने वाले Realme Buds Air 8 Pro भारत में लॉन्च, जानें कीमत]]></title>
		<description>Realme Buds Air 8 Pro भारत में लॉन्च हो गए हैं। इन बड्स में 11mm ड्राइवर्स दिए गए हैं। इनमें आपको 50 घंटे तक का प्लेटाइम भी मिलेगा। यहां जानें बड्स की कीमत, उपलब्धता और फीचर्स से जुड़ी डिटेल्स।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Realme Buds Air 8 Pro</strong> भारत में लॉन्च हो गया है। कंपनी ने Realme 16T और Realme Watch S5 के साथ इन बड्स को पेश किया है। फीचर्स की बात करें, तो इन बड्स में आपको 11mm ड्राइवर्स मिलते हैं। इनमें 6mm micro-planar tweeter दिए गए हैं। ये बड्स 55dB तक एक्टिव नॉइस कैंसिलेशन फीचर प्रोवाइड करता है। कॉलिंग के लिए इन बड्स में 6 माइक्रोफोन दिए गए हैं। पानी से बचाव के लिए इसमें IP55 रेटिंग मिलती है। कंपनी का दावा है कि यह बड्स सिंगल चार्ज पर 50 घंटे तक की बैटरी प्रोवाइड करता है। आइए जानते हैं इन बड्स की कीमत, उपलब्धता और फीचर से जुड़ी डिटेल्स।</p>
<h2>Realme Buds Air 8 Pro Price in India, Availability</h2>
</p>
<p>कंपनी ने <a href="https://www.techlusive.in/hi/mobile/realme-16t-5g-launched-in-india-with-8000mah-battery-check-price-specifications-1663415/">Realme</a> Buds Air 8 Pro को 6,999 रुपये की कीमत में पेश किया गया है। लॉन्च ऑफर की बात करें, तो बड्स पर 300 रुपये का डिस्काउंट ऑफर मिल रहा है। ये बड्स Master White और Master Black कलर ऑप्शन है। इन बड्स को आप Flipkart, Amazon, Myntra, Realme.com के जरिए खरीद सकेंगे।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">Meet the new master of silence &amp; sound.</p>
</p>
<p>The <a href="https://twitter.com/hashtag/realmeBudsAir8Pro?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">#realmeBudsAir8Pro</a> brings flagship-level noise cancellation, rich audio, and seamless AI features into one powerful experience.</p>
</p>
<p>Starting from ₹6,699*.</p>
<p>Sale starts 3rd June, 12 PM.</p>
</p>
<p>Know more: <a href="https://t.co/3KxWo7elNT" rel="nofollow" target="_blank">https://t.co/3KxWo7elNT</a>… <a href="https://t.co/SwOnNK545U" rel="nofollow" target="_blank">pic.twitter.com/SwOnNK545U</a></p>
</p>
<p>— realme (@realmeIndia) <a href="https://twitter.com/realmeIndia/status/2057714325259776187?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 22, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<h2>Realme Buds Air 8 Pro Specifications</h2>
</p>
<p>फीचर्स की बात करें, तो Realme Buds Air 8 Pro में 11mm ड्राइवर्स दिए गए हैं। इसके साथ इसमें 6mm micro-planar tweeter मौजूद है। साथ ही प्रत्येक बड्स में आपको 3 माइक्रोफोन मिलेंगे, जिसके साथ इसमें 6 माइक्रोफोन दिए गए हैं। कंपनी का दावा है कि ये बड्स कॉल के दौरान वॉइस क्लियरिटी को इम्प्रूव करने और बैंकग्राउंड नॉइस को कम करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।</p>
</p>
<p>इन बड्स में ANC सपोर्ट मिलता है, जो कि 55dB तक के शोर को कम करने में सक्षम है। रियलमी ने इनमें Transparency Mode भी दिया है, जो कि ईयरबड्स निकाले आपको आसपास के शोर से रूबरू कराते हैं। इनमें Voice Processing Unit दी गई है, जो कि बोन कंडक्ट टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इन बड्स में आपको Game Mode मिलता है, जिसके साथ 45ms Low latency मिलती है। कनेक्टिविटी के लिए इनमें Bluetooth 6.1, LHDC 5.0 Hi-Res wireless audio codec, dual-device आदि का सपोर्ट मौजूद है। ये बड्स Google Fast Pair सपोर्ट के साथ आते हैं।</p>
</p>
<p>प्रत्येक बड्स में 62mAh बैटरी मिलती है। वहीं, चार्जिंग केस में 590mAh की बैटरी मौजूद है। सिंगल चार्ज पर यह बड्स 12 घंटे तक का प्लेबैक प्रोवाइड करते हैं। वहीं, चार्जिंग केस के साथ इन्हें 50 घंटे तक इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी का दावा है कि रियलमी 10 मिनट की चार्जिंग पर 11 घंटे तक का म्यूजिक प्लेटाइम प्रोवाइड करता है। पानी से बचाव के लिए इन बड्स में IP55 रेटिंग मिलती है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Realme-2026-05-22T164035.108.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/realme-buds-air-8-pro-launched-in-india-with-up-to-50-hours-of-battery-life-price-in-india-specs-1663452/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/realme-buds-air-8-pro-launched-in-india-with-up-to-50-hours-of-battery-life-price-in-india-specs-1663452/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Thu, 21 May 2026 10:27:51 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[OPPO Enco Air 5 Pro बड्स 55dB ANC के साथ भारत में लॉन्च, जानें कीमत और स्पेक्स]]></title>
		<description>OPPO Enco Air 5 Pro भारत में लॉन्च हो गए हैं। इन बड्स में आपको 12mm डायनमिक ड्राइवर्स दिए गए है। यहां जानें बड्स की कीमत और खूबियां।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>OPPO Enco Air 5 Pro</strong> को OPPO Find X9s और Find X9 Ultra स्मार्टफोन के साथ भारत में लॉन्च कर दिया गया है। यह कंपनी के प्रीमियम TWS हैं। फीचर्स की बात करें, तो इन बड्स में 12mm dynamic ड्राइवर्स दिए गए हैं। साथ ही कंपनी ने इनमें 55dB ANC (एक्टिव नॉइस कैंसिलेशन) सपोर्ट दिया है। कॉलिंग के लिए इसमें आपको ट्रिपल माइक्रोफोन सेटअप मिलता है। साथ ही इनमें 47ms low-latency mode भी दिया गया है। इन बड्स में आपको 62mAh बैटरी मिलती है। कंपनी का दावा है कि ये सिंगल चार्ज पर 54 घंटे तक का प्लेटाइम प्रोवाइड करते हैं। वहीं, ANC ऑन होने पर यह 29 घंटे तक चलते हैं। आइए जानते हैं इनकी कीमत, उपलब्धता और फीचर्स से जुड़ी डिटेल्स।</p>
<h2>OPPO Enco Air 5 Pro price in India</h2>
</p>
<p>कंपनी ने <a href="https://www.techlusive.in/hi/mobile/oppo-find-x9-ultra-india-launched-with-200mp-camera-along-with-oppo-find-x9s-price-and-specs-1663270/">OPPO</a> Enco Air 5 Pro को 4,999 रुपये की कीमत में पेश किया है। इन बड्स में Moonstone White और Midnight Black कलर ऑप्शन मिलते हैं। इन बड्स की सेल 28 मई से शुरू होगी। इन बड्स की सेल 28 मई से शुरू होने जा रही है।</p>
<h2>OPPO Enco Air 5 Pro specifications</h2>
</p>
<p>फीचर्स की बात करें, तो OPPO Enco Air 5 Pro में 12mm डायनमिक ड्राइवर्स दिए गए हैं। इसमें AAC, SBC, and LHDC 5.0 High-Resolution ऑडियो सपोर्ट मिलता है। साथ ही इसमें 55dB तक का ANC सपोर्ट मौजूद है। अलग-अलग माहौल के लिए इसमें आपको ANC On, Adaptive mode, Transparency mode और ANC Off जैसे सपोर्ट मिलते हैं। शानदार कॉलिंग के लिए कंपनी ने इसमें ट्रिपल माइक्रोफोन सेटअप जिया है, जो कि वीडियो कॉल के दौरान आउटडोर में भी आपको क्लियर वॉइस क्वालिटी प्रोवाइड करेंगे।</p>
</p>
<p>जैसे कि हमने बताया इन ईयरबड्स में आपको 47ms low-latency mode भी मिलता है, जो कि गेमिंग और वीडियो स्ट्रीमिंग के दौरान लैग को कम करता है। कंपनी ने इसमें वॉल्यूम कंट्रोल के लिए टच कंट्रोल दिया है।</p>
</p>
<p>Enco Air 5 Pro में 54 घंटे तक की बैटरी मिलती है। हालांकि, यह ANC ऑफ होने पर मिलती है। वहीं, ANC ऑन होने पर यह 29 घंटे तक की बैटरी प्रोवाइड करते हैं। दोनों ही बड्स में 62mAh बैटरी दी गई है। वहीं, चार्जिंग केस में 530mAh की बैटरी मौजूद है। सिंगल चार्ज पर प्रत्येक बड्स आपको 7 घंटे का प्लेटाइम प्रोवाइड करते हैं। वहीं, ANC ऑफ होने पर यह 13 घंटे तक चलते हैं।</p>
<h2>ये बड्स देंगे OPPO बड्स को टक्कर</h2>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/LPG-11.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-1663299" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/LPG-11.jpg" alt="" width="1200" height="900" /></a></p>
</p>
<p>Samsung Galaxy Buds Core को अमेजन सेल के दौरान 4,499 रुपये में खरीदा जा सकता है। फीचर्स की बात करें, तो इन बड्स में 6.55mm ड्राइवर्स दिए गए हैं। साथ ही इनमें अडैप्टिव नॉइस कंट्रोल सपोर्ट भी मिलता है। कॉलिंग के लिए इसमें 3 माइक का सपोर्ट मौजूद है। पानी से बचाव के लिए बड्स में IP54 रेटिंग मिलती है।</p>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Buds-2026-05-21T155323.404.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-1663298" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Buds-2026-05-21T155323.404.jpg" alt="" width="1200" height="900" /></a></p>
</p>
<p>Realme Buds Air 7 Pro को 4,940 रुपये में खरीदा जा सकता है। इन बड्स में 11mm+6mm डुअल ड्राइवर्स मिलते हैं। साथ ही यह 53 dB ANC सपोर्ट के साथ आते हैं। पानी से बचाव के लिए बड्स में IP55 रेटिंग मिलती है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Buds-2026-05-21T155633.526.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/oppo-enco-air-5-pro-launched-in-india-with-55db-anc-and-up-to-54-hours-total-battery-life-price-and-specs-1663295/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/oppo-enco-air-5-pro-launched-in-india-with-55db-anc-and-up-to-54-hours-total-battery-life-price-and-specs-1663295/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Thu, 21 May 2026 10:24:00 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Apple यूजर्स के लिए बड़ी खुशखबरी, Watch और AirPods में आए नए हेल्थ फीचर]]></title>
		<description>Apple ने भारत में अपने यूजर्स के लिए कई नए हेल्थ फीचर्स लॉन्च किए हैं। अब Apple Watch और AirPods Pro की मदद से लोग घर बैठे अपनी नींद और सुनने की क्षमता की जांच कर सकेंगे। कंपनी का कहना है कि ये फीचर्स यूजर्स को समय रहते हेल्थ से जुड़ी समस्याओं का पता लगाने और जरूरी कदम उठाने में मदद करेंगे। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Apple ने भारत में अपने यूजर्स के लिए कई नए हेल्थ फीचर्स लॉन्च करने की घोषणा की है। अब Apple Watch और AirPods Pro के जरिए लोग अपनी सेहत पर पहले से ज्यादा नजर रख पाएंगे। कंपनी ने बताया कि Apple Watch में Sleep Apnea Notification और AirPods Pro में Hearing Test जैसे एडवांस फीचर्स आज से उपलब्ध होंगे। इन फीचर्स का मकसद यूजर्स को घर बैठे हेल्थ से जुड़ी जरूरी जानकारी देना है ताकि वे समय रहते जरूरी कदम उठा सकें।</p>
<h2><strong>Sleep Apnea क्या है और कैसे पता लगाएगी Apple Watch?</strong></h2>
</p>
<p>Sleep Apnea एक ऐसी गंभीर समस्या है जिसमें सोते समय व्यक्ति की सांस कुछ सेकंड के लिए रुक जाती है। इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और लंबे समय में हाई ब्लड प्रेशर, टाइप 2 डायबिटीज और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। Apple Watch का नया &#8216;Breathing Disturbances&#8217; फीचर नींद के दौरान कलाई की हलचल और सांस लेने के पैटर्न को ट्रैक करेगा। अगर 30 दिनों के डेटा में मध्यम या गंभीर Sleep Apnea के संकेत मिलते हैं, तो वॉच यूजर को नोटिफिकेशन भेजेगी ताकि वह डॉक्टर से सलाह ले सके।</p>
<h2><strong>Health Data को PDF में कैसे सेव और शेयर करेंगे?</strong></h2>
</p>
<p>कंपनी ने यह भी बताया कि यूजर्स अपने हेल्थ डेटा को आसानी से PDF फॉर्मेट में एक्सपोर्ट कर सकेंगे। इसमें पिछले तीन महीनों तक का Breathing Disturbance डेटा और बाकी जरूरी जानकारियां शामिल होंगी। यह रिपोर्ट डॉक्टर के साथ शेयर की जा सकेगी, जिससे बीमारी की पहचान और इलाज में मदद मिलेगी। Apple का कहना है कि इस फीचर से लोग अपनी नींद और सांस से जुड़ी समस्याओं को समय रहते समझ पाएंगे और गंभीर बीमारियों के खतरे को कम कर सकेंगे।</p>
<h2><strong>AirPods Pro का Hearing Test फीचर कैसे काम करेगा?</strong></h2>
</p>
<p>इसके अलावा AirPods Pro में नया Hearing Test फीचर भी जोड़ा गया है। यह फीचर यूजर्स को घर बैठे लगभग पांच मिनट में अपनी सुनने की क्षमता जांचने की सुविधा देगा। यह टेस्ट Pure-Tone Audiometry टेक्नोलॉजी पर आधारित है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर क्लिनिक में किया जाता है। टेस्ट पूरा होने के बाद यूजर को दोनों कानों की Hearing Level रिपोर्ट, उसकी स्थिति और जरूरी सुझाव मिलेंगे। यह रिपोर्ट भी Health App में सेव रहेगी और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर के साथ शेयर की जा सकेगी। Apple का मानना है कि ये नए फीचर्स लोगों को अपनी हेल्थ को बेहतर तरीके से मॉनिटर करने में मदद करेंगे।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Apple-Health-Features.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Apple Health Features]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/apple-launches-sleep-apnea-hearing-test-features-for-apple-watch-and-airpods-pro-in-india-1663296/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/apple-launches-sleep-apnea-hearing-test-features-for-apple-watch-and-airpods-pro-in-india-1663296/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Thu, 21 May 2026 09:56:16 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Instagram और Facebook पर बच्चे क्या देखते हैं, अब जान पाएंगे माता-पिता, Meta ने इस टूल्स को किया और ज्यादा एडवांस]]></title>
		<description>आज के समय में बच्चे कम उम्र में ही Instagram और Facebook जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने लगे हैं। ऐसे में माता-पिता को यह चिंता रहती है कि उनके बच्चे ऑनलाइन क्या देख रहे हैं और किससे जुड़ रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए Meta ने अपने सुपरविजन टूल्स को और ज्यादा एडवांस बनाया है, ताकि पैरेंट्स बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटी पर बेहतर नजर रख सकें। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आज के दौर में बच्चे कम उम्र में ही स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का इस्तेमाल तेजी से करने लगे हैं। ऐसे में माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता यही रहती है कि उनके बच्चे मोबाइल पर क्या देख रहे हैं, किस तरह का कंटेंट उनकी फीड में आ रहा है और वे किन लोगों से बातचीत कर रहे हैं। इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए Meta ने Instagram और Facebook के लिए अपने सुपरविजन टूल्स को और ज्यादा एडवांस बना दिया है। कंपनी का कहना है कि इन नए फीचर्स का मकसद बच्चों के लिए सोशल मीडिया को ज्यादा सुरक्षित बनाना और पैरेंट्स को बेहतर मॉनिटरिंग की सुविधा देना है। अब माता-पिता बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटी पर पहले से ज्यादा नजर रख सकेंगे और यह समझ पाएंगे कि उनका बच्चा इंटरनेट पर कितना समय बिता रहा है।</p>
<h2><strong>अब पैरेंट्स कैसे रख पाएंगे स्क्रीन टाइम पर नजर?</strong></h2>
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<p>नए अपडेट के बाद पैरेंट्स बच्चों के Instagram और Facebook अकाउंट की एक्टिविटी को आसान तरीके से ट्रैक कर सकेंगे। इसमें स्क्रीन टाइम की पूरी जानकारी दिखाई जाएगी, जिससे माता-पिता जान पाएंगे कि बच्चा दिनभर में कितने घंटे सोशल मीडिया का यूज कर रहा है। इसके अलावा यह फीचर यह भी बताएगा कि बच्चा किस तरह की रील्स, वीडियो या पोस्ट सबसे ज्यादा देख रहा है। अगर किसी खास तरह का कंटेंट बार-बार सामने आ रहा है, तो माता-पिता उस पर ध्यान दे सकेंगे। इससे बच्चों की ऑनलाइन आदतों को समझना आसान होगा और जरूरत पड़ने पर उन्हें सही दिशा में गाइड किया जा सकेगा।</p>
<h2><strong>कौन कर रहा है बच्चों को फॉलो, कैसे चलेगा पता?</strong></h2>
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<p>Meta ने अपने फैमिली सेंटर फीचर को भी अपडेट किया है। अब माता-पिता यह देख पाएंगे कि उनके बच्चे ने हाल ही में किन नए लोगों को फॉलो किया है और किन लोगों ने उन्हें फॉलो करना शुरू किया है। यह फीचर खासतौर पर सुरक्षा के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे अनजान लोगों से बढ़ते संपर्क पर नजर रखना आसान होगा। कई बार बच्चे बिना जानकारी के ऐसे लोगों से जुड़ जाते हैं जो उनके लिए सुरक्षित नहीं होते। ऐसे में यह नया सिस्टम पैरेंट्स को समय रहते सतर्क रहने में मदद करेगा। कंपनी का कहना है कि इन टूल्स का उद्देश्य बच्चों की प्राइवेसी को बनाए रखते हुए उन्हें सुरक्षित डिजिटल माहौल देना है।</p>
<h2><strong>रातभर मोबाइल चलाने की आदत कैसे रुकेगी?</strong></h2>
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<p>इसके अलावा बच्चों की नींद और मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए रात के समय नोटिफिकेशन को सीमित करने वाला फीचर भी जोड़ा गया है। तय समय के बाद ऐप कम नोटिफिकेशन भेजेगा ताकि बच्चे देर रात तक मोबाइल इस्तेमाल न करें। आजकल कई बच्चे रातभर सोशल मीडिया स्क्रॉल करते रहते हैं, जिसका असर उनकी पढ़ाई, नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। ऐसे में यह फीचर बच्चों को हेल्दी डिजिटल आदतें अपनाने में मदद कर सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोशल मीडिया का सही और संतुलित यूज जरूरी है, खासकर बच्चों के लिए। यही वजह है कि कंपनियां अब ऐसे टूल्स पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं, जिससे पैरेंट्स और बच्चों दोनों के लिए ऑनलाइन दुनिया सुरक्षित और बेहतर बन सके।</p>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
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