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	<title><![CDATA[Latest Technology &amp; Gadgets - News in Hindi | News &amp; Reviews on Gadgets, Smart Phones, Mobile Apps &amp; Gaming | टेक न्यूज़ इन हिंदी | TECHLUSIVE.in Hindi]]></title>
	<description><![CDATA[Latest Technology &amp; Gadgets - News in Hindi | News &amp; Reviews on Gadgets, Smart Phones, Mobile Apps &amp; Gaming | टेक न्यूज़ इन हिंदी | TECHLUSIVE.in Hindi]]></description>
	<lastBuildDate>Tue, 26 May 2026 19:20:03 +0000</lastBuildDate>
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	 <item>
		<pubDate>Tue, 26 May 2026 11:02:06 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[PM-WANI को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, अब QR Code स्कैन करते ही चलेगा Free Wi-Fi]]></title>
		<description>भारत सरकार ने PM-WANI योजना में बड़े बदलाव किए हैं ताकि देश में पब्लिक Wi-Fi को और आसान और सस्ता बनाया जा सके। अब QR कोड स्कैन करके लोग जल्दी इंटरनेट से जुड़ सकेंगे। यह कदम डिजिटल इंडिया को मजबूत करने और सभी के लिए सस्ता इंटरनेट उपलब्ध कराने के लिए है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भारत सरकार ने देशभर में पब्लिक Wi-Fi को और आसान और सस्ता बनाने के लिए PM-WANI (Prime Minister’s Wi-Fi Access Network Interface) के तहत कई बड़े बदलाव किए हैं। Department of Telecommunications यानी DoT ने 22 मई को नए दिशा-निर्देश जारी किए, जिनका मकसद आम लोगों को बिना परेशानी के इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराना है। सरकार का कहना है कि इन सुधारों से छात्र, यात्री, छोटे कारोबारी और रोजाना इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों को फायदा मिलेगा। नई व्यवस्था के तहत अब लोग अपने लैपटॉप और दूसरे डिवाइस को भी आसानी से PM-WANI नेटवर्क से जोड़ सकेंगे। सरकार चाहती है कि डिजिटल इंडिया अभियान के तहत देश के हर हिस्से में सस्ता इंटरनेट पहुंचे।</p>
<h2><strong>अब QR Code से लैपटॉप और दूसरे डिवाइस कैसे होंगे कनेक्ट?</strong></h2>
</p>
<p>नए नियमों के अनुसार अब यूजर्स QR कोड स्कैन करके अपने लैपटॉप या दूसरे डिवाइस को PM-WANI हॉटस्पॉट से कनेक्ट कर पाएंगे। इसके लिए यूजर को अपने मोबाइल में पहले से ऑथेंटिकेटेड ऐप का इस्तेमाल करना होगा। इससे बार-बार लॉगिन करने की परेशानी कम होगी और इंटरनेट इस्तेमाल करना पहले से ज्यादा आसान बन जाएगा। Department of Telecommunications के मुताबिक यह फीचर सुरक्षित इंटरनेट एक्सेस देने के साथ-साथ यूजर अनुभव को भी बेहतर बनाएगा। खास बात यह है कि सरकार ने सभी PM-WANI से जुड़े ऑपरेटर्स और स्टेकहोल्डर्स को अगले आठ हफ्तों के भीतर इन बदलावों को लागू करने का निर्देश दिया है, ताकि जुलाई 2026 तक यह सुविधा पूरी तरह शुरू हो सके।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">The Department of Telecommunications (DoT) has introduced citizen-friendly reforms under the Prime Minister’s Wi-Fi Access Network Interface (PM-WANI) framework to simplify public Wi-Fi access.</p>
</p>
<p>The new measures include QR-based authentication, flexible short-duration plans and… <a href="https://t.co/bo7mmOdJ61" rel="nofollow" target="_blank">pic.twitter.com/bo7mmOdJ61</a></p>
</p>
<p>— DD News (@DDNewslive) <a href="https://twitter.com/DDNewslive/status/2059214559349719508?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 26, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<h2><strong>सरकार और क्या-क्या बदलाव कर सकती है?</strong></h2>
</p>
<p>सरकार ने छोटे समय वाले इंटरनेट प्लान शुरू करने की भी सलाह दी है। अब यूजर्स को 15 मिनट, 30 मिनट और 60 मिनट जैसे शॉर्ट-ड्यूरेशन Wi-Fi प्लान मिल सकेंगे। ये प्लान खासतौर पर रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, एयरपोर्ट, मॉल और बाकी सार्वजनिक जगहों पर काम आएंगे, जहां लोगों को थोड़े समय के लिए इंटरनेट की जरूरत होती है। मंत्रालय का मानना है कि इससे इंटरनेट ज्यादा किफायती बनेगा और छात्रों व यात्रियों को काफी राहत मिलेगी। इसके अलावा हॉटस्पॉट ऑपरेटर्स की कमाई बढ़ने की भी उम्मीद है क्योंकि ज्यादा लोग छोटी अवधि वाले प्लान खरीद पाएंगे। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक Wi-Fi अब केवल सुविधा नहीं बल्कि एक जरूरी डिजिटल सेवा बन चुका है।</p>
<h2><strong>क्या नए बदलावों से देशभर में डिजिटल कनेक्टिविटी और बेहतर होगी?</strong></h2>
</p>
<p>इन सुधारों के तहत एक और बड़ा बदलाव हॉटस्पॉट के नाम यानी SSID को लेकर किया गया है। अब सभी PM-WANI Wi-Fi नेटवर्क एक तय और समान नाम (फॉर्मेट) में दिखाई देंगे। इससे लोग आसानी से समझ पाएंगे कि कौन सा Wi-Fi असली और भरोसेमंद है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव से फर्जी या गलत Wi-Fi नेटवर्क की पहचान करना आसान हो जाएगा और लोग सुरक्षित तरीके से इंटरनेट इस्तेमाल कर सकेंगे। Union Minister of State for Communications, Chandra Sekhar Pemmasani ने बताया कि PM-WANI देश में सभी लोगों के लिए पब्लिक Wi-Fi उपलब्ध कराने का एक बड़ा प्लेटफॉर्म बन रहा है और इसे और आसान बनाया जा रहा है, वहीं Union Minister of Communications Jyotiraditya Scindia के नेतृत्व में सरकार इस सिस्टम को मजबूत करने और पूरे देश में सस्ता और बेहतर इंटरनेट पहुंचाने पर काम कर रही है। सरकार को उम्मीद है कि इन नए कदमों से भारत में इंटरनेट इस्तेमाल और डिजिटल कनेक्टिविटी दोनों बढ़ेंगे।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/PM-WANI-New-Rules-2026.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[PM-WANI New Rules 2026]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Tue, 26 May 2026 08:07:57 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Smartwatch के नीचे आखिर क्यों जलती है हरी लाइट? जानिए इसके पीछे की खास टेक्नोलॉजी]]></title>
		<description>आजकल Smartwatch सिर्फ समय देखने की डिवाइस नहीं रह गई है, बल्कि यह हमारी सेहत पर भी नजर रखती है। Smartwatch के नीचे जलने वाली हरी लाइट सिर्फ डिजाइन नहीं, बल्कि एक खास सेंसर टेक्नोलॉजी का हिस्सा है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आजकल लगभग हर किसी की कलाई पर Smartwatch दिखाई देती है। चाहे वह प्रीमियम Apple की Apple Watch हो या कोई बजट फिटनेस वॉच, इन सभी डिवाइसेज में एक चीज कॉमन होती है, नीचे की तरफ चमकने वाली हरी लाइट। कई लोग सोचते हैं कि यह सिर्फ डिजाइन का हिस्सा है, लेकिन असल में यह आपकी Heart Rate मापने के लिए बेहद जरूरी टेक्नोलॉजी है। Smartwatch आपकी नब्ज को मापने के लिए Photoplethysmography नाम की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करती है। इसमें वॉच स्किन पर रोशनी डालती है और फिर यह जांचती है कि कितनी लाइट वापस लौट रही है क्योंकि दिल की धड़कन के साथ शरीर में खून का बहाव बदलता रहता है, इसलिए लौटने वाली रोशनी भी बदलती रहती है। इसी डेटा की मदद से Smartwatch आपकी Pulse Rate का पता लगाती है।</p>
<h2><strong>Smartwatch आखिर Heart Rate कैसे मापती है?</strong></h2>
</p>
<p>दरअसल, Smartwatch में हरी लाइट इस्तेमाल करने के पीछे सीधा संबंध हमारे खून से है। हमारे खून में Hemoglobin नाम का तत्व होता है, जो ऑक्सीजन लेकर पूरे शरीर में घूमता है। यही Hemoglobin खून को लाल रंग देता है। लाल रंग की चीजें हरी रोशनी को ज्यादा Absorb करती हैं, इसलिए जब खून नसों में ज्यादा मात्रा में बहता है, तो हरी लाइट कम वापस लौटती है। Smartwatch इसी फर्क को पकड़कर दिल की धड़कन को पहचान लेती है। विशेषज्ञों के अनुसार हरी रोशनी स्किन के बहुत गहरे हिस्सों तक नहीं जाती और यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है। इससे वॉच को सिर्फ सतह के पास मौजूद Blood Flow की जानकारी मिलती है, जिससे Heart Rate ज्यादा सटीक तरीके से मापा जा सकता है।</p>
<h2><strong>कुछ Smartwatch में हरी लाइट के साथ लाल लाइट भी क्यों जलती है?</strong></h2>
</p>
<p>हालांकि Smartwatch सिर्फ हरी लाइट तक सीमित नहीं रहती। कई एडवांस मॉडल्स में लाल और Infrared लाइट भी दी जाती है। इनका इस्तेमाल Blood Oxygen Level यानी SpO2 मापने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया को Pulse Oximetry कहा जाता है। इसमें वॉच त्वचा पर लाल और Infrared रोशनी डालती है और यह देखती है कि शरीर कितना प्रकाश Absorb कर रहा है। Oxygen से भरपूर Hemoglobin और कम Oxygen वाले Hemoglobin दोनों अलग-अलग तरीके से रोशनी को Absorb करते हैं। Oxygen वाला खून Infrared लाइट ज्यादा Absorb करता है, जबकि कम Oxygen वाला खून Red Light को अलग तरीके से Reflect करता है। Smartwatch इन्हीं बदलावों का एनालिसिस करके आपके Blood Oxygen Level का अनुमान लगाती है।</p>
<h2><strong>क्या Smartwatch अब छोटी Health Machine बन चुकी है?</strong></h2>
</p>
<p>अगर आपकी Smartwatch में सिर्फ हरी लाइट जलती है, तो इसका मतलब है कि वह मुख्य रूप से Heart Rate मापने का काम करती है, लेकिन जिन Smartwatch में लाल और Infrared Sensors भी होते हैं, वे Blood Oxygen (SpO2) जैसी एडवांस हेल्थ जानकारी भी दिखा सकती हैं। आज की Smartwatch सिर्फ समय देखने की चीज नहीं रह गई है। यह एक छोटे हेल्थ मॉनिटर की तरह काम करती है। इससे लोग अपनी Heart Rate, Sleep, Stress और Blood Oxygen जैसी जरूरी चीजों पर आसानी से नजर रख सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Smartwatch.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Smartwatch]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Tue, 26 May 2026 05:51:02 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[अब चांद पर बनेगा इंसानों का बेस, NASA का बड़ा ऐलान]]></title>
		<description>NASA ने Moon Base बनाने की बड़ी योजना पर काम तेज कर दिया है। इस मिशन के जरिए चांद पर स्थायी बेस बनाया जाएगा, जहां Astronauts लंबे समय तक रह सकेंगे। NASA का मानना है कि यह कदम भविष्य में Mars Mission और Deep Space Travel के लिए बेहद अहम साबित होगा। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>NASA अब चांद पर इंसानों की स्थायी बस्ती बसाने की तैयारी कर रहा है। एजेंसी जल्द ही अपने बड़े Moon Base प्रोजेक्ट से जुड़ी नई जानकारी शेयर करेगी। यह मिशन NASA के Artemis Program का हिस्सा है, जिसका मकसद इंसानों को फिर से चांद पर भेजना और आगे चलकर मंगल ग्रह तक पहुंचना है। वॉशिंगटन में होने वाली इस खास ब्रीफिंग में NASA के अधिकारी जारेड आइजैकमैन, लोरी ग्लेज और कार्लोस गार्सिया-गालन शामिल होंगे। NASA का कहना है कि चांद पर बनने वाला यह बेस भविष्य के Mars Mission के लिए बहुत जरूरी साबित हो सकता है। इस दौरान एजेंसी आने वाले Artemis मिशनों, नई अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी और प्राइवेट कंपनियों के साथ पार्टनरशिप को लेकर भी बड़े ऐलान कर सकती है।</p>
<h2><strong>Moon Base के लिए सबसे खास जगह कौन-सी होगी?</strong></h2>
</p>
<p>NASA ने पहली बार 24 मार्च को अपने &#8216;Ignition&#8217; इवेंट में Moon Base की योजना का खुलासा किया था। एजेंसी चंद्रमा के South Pole यानी दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में स्थायी बेस बनाना चाहती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां मौजूद गहरे और हमेशा अंधेरे में रहने वाले क्रेटर्स में बड़ी मात्रा में Water Ice यानी बर्फ मौजूद हो सकती है। यही वजह है कि NASA इस क्षेत्र को भविष्य के मानव मिशनों के लिए सबसे परफेक्ट मान रहा है। यह बर्फ अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पीने का पानी उपलब्ध कराने के साथ-साथ ऑक्सीजन और रॉकेट फ्यूल बनाने में भी मदद कर सकती है। अगर यह योजना सफल होती है, तो इंसान लंबे समय तक चांद पर रह सकेंगे और वहां से गहरे अंतरिक्ष मिशन लॉन्च करना भी आसान हो जाएगा।</p>
<h2><strong>Moon Base बनाने के लिए NASA ने कौन-कौन से बड़े चरण तय किए हैं?</strong></h2>
</p>
<p>NASA ने Moon Base प्रोजेक्ट को तीन बड़े चरणों में बांटा है।</p>
<ul>
<li>पहले चरण में 25 लॉन्च और 21 Moon Landings की योजना है, जिनके जरिए करीब 4000 किलोग्राम सामान चंद्रमा तक पहुंचाया जाएगा। इस चरण का मुख्य उद्देश्य सुरक्षित लैंडिंग साइट्स और बेस बनाने के लिए सही जगह की पहचान करना होगा।</li>
<li>दूसरे चरण में मिशन और बड़ा होगा, जिसमें 27 लॉन्च और 24 लैंडिंग के जरिए लगभग 60,000 किलोग्राम कार्गो भेजा जाएगा। इसी चरण में पहली बार Astronauts Moon Base पर जाएंगे और साल में दो बार वहां मिशन चलाए जाएंगे।</li>
<li>तीसरे और अंतिम चरण में NASA लगातार मानव मौजूदगी कायम करना चाहता है। इसके लिए 29 लॉन्च और 28 लैंडिंग की योजना बनाई गई है, जिनसे करीब 1.5 लाख किलोग्राम सामान चंद्रमा तक पहुंचाया जाएगा।</li>
</ul>
<h2><strong>Artemis मिशन और नई स्पेस टेक्नोलॉजी भविष्य को कैसे बदल सकती है?</strong></h2>
</p>
<p>इस घोषणा से पहले NASA ने Artemis II मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया, जो पिछले 50 वर्षों में पहला Crewed Moon Mission था। इसके बाद एजेंसी ने Artemis III मिशन में भी बदलाव किए हैं। अब इसे Low-Earth Orbit Demonstration Mission के रूप में तैयार किया जा रहा है, जिसमें SpaceX और Blue Origin द्वारा बनाए गए Lunar Landers की Docking और Rendezvous टेक्नोलॉजी का परीक्षण होगा। इसके अलावा NASA SR-1 Freedom नाम का Nuclear-Powered Spacecraft भी डेवलप कर रहा है, जो भविष्य में Deep Space Travel के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। एजेंसी मंगल ग्रह के संभावित Landing Zones की जांच के लिए Robotic Helicopters पर भी काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर Moon Base योजना सफल होती है, तो यह मानव इतिहास में अंतरिक्ष खोज का सबसे बड़ा अध्याय साबित हो सकता है।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>NASA चांद पर Moon Base क्यों बनाना चाहता है?</strong></h2>
</p>
<p>NASA भविष्य में Mars Mission और Deep Space Travel को आसान बनाने के लिए चांद पर स्थायी बेस बनाना चाहता है। इससे Astronauts लंबे समय तक चांद पर रह सकेंगे और अंतरिक्ष मिशनों की तैयारी कर पाएंगे।</p>
<h2><strong>Moon Base चांद के किस हिस्से में बनाया जाएगा?</strong></h2>
</p>
<p>NASA चंद्रमा के South Pole यानी दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में Moon Base बनाना चाहता है क्योंकि वहां Water Ice मिलने की संभावना सबसे ज्यादा है।</p>
<h2><strong>चांद पर मिलने वाली बर्फ का क्या फायदा होगा?</strong></h2>
</p>
<p>इस बर्फ से पीने का पानी, ऑक्सीजन और रॉकेट फ्यूल बनाया जा सकता है। इससे इंसानों के लिए लंबे समय तक चांद पर रहना आसान हो जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/NASA-Moon-Base.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[NASA Moon Base]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 25 May 2026 12:21:09 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[क्या सच में Aadhaar Card धारकों को Electric साइकिल मिल रही FREE? PM Modi का वीडियो हो रहा वायरल, जानें सच्चाई]]></title>
		<description>PM Modi की एक वीडियो ऑनलाइन वायरल हो रही है। इस वीडियो में वह दावा करते दिख रहे हैं कि जिन लोगों के पास आधार कार्ड है, उन्हें सरकार इलेक्ट्रिक साइकिल फ्री मिलेगी। यहां जानें ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>PM Modi</strong> की एक वीडियो इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रही है। इस वीडियो में इस वीडियो में वो एक सभा को संबोधित करते हुए दावा कर रहे हैं कि 25 मई सोमवार यानी आज से आधारकार्ड धारकों को इलेक्टिक साइकिल फ्री दी जाने वाली है। इसके लिए दावेदारों को तुरंत आवेदन करने को भी कहा गया है। अगर आपने भी इस तरह की कोई वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर देखा है, तो यहां जान लें इस वीडियो की पूरी सच्चाई।</p>
</p>
<p>PIB Fact Check ने अपने ऑफिशियल X हैंडल पर <a href="https://www.techlusive.in/hi/news/prime-minister-narendra-modi-become-first-leader-with-100-million-followers-on-instagram-1648428/">PM Modi </a>का यह वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो को Dealdukaaan99 अकाउंट के जरिए Facebook पर शेयर किया गया है। वीडियो में पीएम नरेंद्र मोदी कहते दिख रहे हैं कि जिन भी लोगों के पास आधार कार्ड है, उन्हें इलेक्ट्रिक साइकिल दी जाएगी। हालांकि, इस दावे का PIB ने पूरी तरह से खंडन किया है और इसे Fake बताया है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi">🚨 सावधान!<a href="https://twitter.com/hashtag/Facebook?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">#Facebook</a> अकाउंट ‘Dealdukaaan99’ द्वारा प्रधानमंत्री <a href="https://twitter.com/narendramodi?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">@narendramodi</a> के एक AI-जनरेटेड वीडियो के माध्यम से यह दावा किया जा रहा है कि सभी आधार कार्ड धारकों को इलेक्ट्रिक साइकिल दी जाएगी।<a href="https://twitter.com/hashtag/PIBFactCheck?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">#PIBFactCheck</a></p>
</p>
<p>❌ यह दावा फर्जी है।</p>
</p>
<p>✅ प्रधानमंत्री या केंद्र सरकार द्वारा ऐसी कोई… <a href="https://t.co/4CNIUDFt4m" rel="nofollow" target="_blank">pic.twitter.com/4CNIUDFt4m</a></p>
</p>
<p>— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) <a href="https://twitter.com/PIBFactCheck/status/2058839318945566757?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 25, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>सोशल मीडिया पर PM Modi के वीडियो को AI के जरिए बदल दिया गया है। यहां वो कुछ और कह रहे हैं, लेकिन वीडियो में एआई के जरिए उनकी आवाज का क्लोन इस्तेमाल किया गया है और गलत दावे किए जा रहे हैं।</p>
</p>
<p>पोस्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या फिर केंद्र सरकार द्वारा इस तरह का कोई ऐलान नहीं किया गया है। इसके अलावा, सरकारी पोर्टल पर भी इस संबंध में किसी तरह की स्कीम पेश नहीं की गई है। पोस्ट में सलाह दी गई है कि इस तरह के झूठे दावों पर विश्वास न करें। हमेशा ऑफिशियल सोर्स के जरिए ही दावों पर क्रोस-चेक करें।</p>
<h2>फर्जी खबरों से ऐसे रहें सावधान</h2>
</p>
<p>सोर्स की जांच करें- अगर आप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कोई वीडियो या फिर इस तरह की खबर पाते हैं, तो सबसे पहले उसे ऑफिशियल सोर्स के जरिए कंफर्म कर लें।</p>
</p>
<p>Google lens- अगर सोशल मीडिया पर इस तरह की फोटो व वीडियो देखते हैं, जिस पर आपको फेक होने का संदेह होता है, तो आप गूगल लेंस का सहारा ले सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Modi-Scam.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/pm-modi-ai-generated-fake-video-claim-that-all-aadhaar-card-holders-will-be-given-electric-bicycles-1663772/</guid>
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		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 25 May 2026 05:32:15 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[X का बड़ा एक्शन, वायरल कंटेंट कॉपी करने वाले अकाउंट्स की अब खैर नहीं!]]></title>
		<description>X ने अब वायरल वीडियो और मीम्स को कॉपी करके कमाई करने वाले अकाउंट्स पर सख्ती शुरू कर दी है। कंपनी का कहना है कि असली क्रिएटर्स को उनका सही हक मिलना चाहिए। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X अब उन अकाउंट्स पर सख्ती करने जा रहा है जो दूसरों के वायरल वीडियो और मीम्स को कॉपी करके पैसे कमाते हैं। पिछले कुछ समय से प्लेटफॉर्म पर यह आम बात हो गई थी कि कोई वीडियो वायरल होते ही कई बड़े अकाउंट्स उसे तुरंत डाउनलोड करके दोबारा पोस्ट कर देते थे। इससे असली क्रिएटर को बहुत कम पहचान मिलती थी, जबकि रीपोस्ट अकाउंट्स लाखों व्यूज और एंगेजमेंट के जरिए कमाई कर लेते थे। अब कंपनी ने इस पर रोक लगाने के लिए नए बदलाव लागू करने का फैसला किया है।</p>
<h2><strong>किन अकाउंट्स पर X ने शुरू की कार्रवाई?</strong></h2>
</p>
<p>कंपनी के हेड ऑफ प्रोडक्ट Nikita Bier ने बताया कि कई बड़े अकाउंट्स ऑटोमैटिक सिस्टम के जरिए छोटे क्रिएटर्स के कंटेंट को रीअपलोड कर रहे थे। उनका मकसद सिर्फ X के क्रिएटर रेवेन्यू-शेयर प्रोग्राम का फायदा उठाना था। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में कंपनी ने ऐसे कई अकाउंट्स की पहचान की है जो ओरिजिनल क्रिएटर्स को क्रेडिट दिए बिना उनका कंटेंट इस्तेमाल कर रहे थे। X का रेवेन्यू-शेयर प्रोग्राम यूजर्स को पोस्ट पर मिलने वाले एंगेजमेंट के आधार पर कमाई का मौका देता है, लेकिन इसी सिस्टम का कुछ लोग गलत फायदा उठा रहे थे।</p>
<h2><strong>अब असली क्रिएटर्स को कैसे मिलेगा ज्यादा फायदा?</strong></h2>
</p>
<p>अब X ऐसे रीपोस्ट किए गए वीडियो और पोस्ट की पहचान करके उनके इम्प्रेशन्स का बड़ा हिस्सा असली क्रिएटर को देगा। इसका मतलब यह है कि वायरल कंटेंट बनाने वाले लोगों को अब ज्यादा व्यूज, पहचान और कमाई मिल सकेगी, हालांकि कंपनी ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई यूजर किसी वायरल वीडियो पर अपनी राय, जानकारी या मजेदार रिएक्शन देना चाहता है तो वह अभी भी ऐसा कर सकता है। इसके लिए X ने &#8216;Share Video&#8217; और &#8216;Quote&#8217; फीचर इस्तेमाल करने की सलाह दी है, ताकि ओरिजिनल पोस्ट को सही क्रेडिट मिलता रहे। Nikita Bier के मुताबिक, जो लोग Meaningful Commentary जोड़ेंगे उन्हें भी कुछ इम्प्रेशन्स मिलेंगे, लेकिन सबसे ज्यादा फायदा हमेशा असली क्रिएटर को मिलेगा।</p>
<h2><strong>Share Video फीचर में क्या दिक्कत सामने आई?</strong></h2>
</p>
<p>इस दौरान कुछ यूजर्स ने &#8216;Share Video&#8217; फीचर में मौजूद एक समस्या की भी शिकायत की। उनका कहना था कि अगर पोस्ट 280 कैरेक्टर से ज्यादा लंबी हो जाए तो वीडियो एम्बेड होने की बजाय सिर्फ लिंक में बदल जाता है। इस पर जवाब देते हुए Nikita Bier ने माना कि यह एक बग है और इसे जल्द ठीक किया जाएगा, माना जा रहा है कि X का यह कदम उन कंटेंट एग्रीगेशन अकाउंट्स की कमाई कम करने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, जिनका पूरा बिजनेस मॉडल दूसरों के वायरल कंटेंट को दोबारा पोस्ट करके पैसा कमाने पर टिका हुआ था।</p>
]]></content:encoded>
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		<media:description type='plain'><![CDATA[X app]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 25 May 2026 05:02:13 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[ब्लैक होल के अंदर क्या होता है? नई रिसर्च में बड़ा दावा]]></title>
		<description>ब्लैक होल को लेकर वैज्ञानिकों की सोच बदल सकती है। नई रिसर्च में दावा किया गया है कि हर ब्लैक होल के अंदर ‘Singularity’ होना जरूरी नहीं है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, कुछ खास परिस्थितियों में ब्लैक होल बिना Infinite Gravity के भी बन सकते हैं। अगर यह थ्योरी सही साबित हुई, तो ब्लैक होल और ब्रह्मांड को समझने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ब्लैक होल को लेकर वैज्ञानिकों की सोच अब बदल सकती है। अब तक माना जाता था कि हर ब्लैक होल के अंदर एक &#8216;Singularity&#8217; होती है। इसका मतलब है ऐसा बिंदु जहां Gravity इतनी ज्यादा हो जाती है कि Physics के सारे नियम काम करना बंद कर देते हैं, लेकिन अब एक नई रिसर्च ने इस सोच को चुनौती दी है। जर्मनी की Goethe University Frankfurt के वैज्ञानिक फ्रांसेस्को डी फिलिप्पो का कहना है कि कुछ खास परिस्थितियों में ब्लैक होल बिना Singularity के भी बन सकते हैं। यह रिसर्च अप्रैल 2026 में Physical Review Letters में प्रकाशित हुई है। वैज्ञानिक मान रहे हैं कि अगर यह सही साबित होती है, तो ब्लैक होल को समझने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।</p>
<h2><strong>क्या है ब्लैक होल का नया रहस्य?</strong></h2>
</p>
<p>इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने एक खास तरह के ब्लैक होल पर रिसर्च की, जिन्हें &#8216;Reissner-Nordström Black Hole&#8217; कहा जाता है। ये ऐसे ब्लैक होल होते हैं जिनमें इलेक्ट्रिक चार्ज भी मौजूद होता है। अब तक वैज्ञानिक मानते थे कि ऐसे ब्लैक होल के अंदर दो बड़ी समस्याएं होती हैं।</p>
<ul>
<li>पहली &#8216;Singularity&#8217;, यानी ऐसी जगह जहां Gravity और Space-Time का असर Infinite हो जाता है।</li>
<li>दूसरी &#8216;Cauchy Horizon&#8217;, जिसके बाद यह समझना मुश्किल हो जाता है कि आगे क्या होगा, लेकिन वैज्ञानिक फ्रांसेस्को डी फिलिप्पो की नई रिसर्च कुछ अलग बताती है।</li>
</ul>
<p>उनके मुताबिक, ब्लैक होल का इलेक्ट्रिक चार्ज और उससे निकलने वाला &#8216;हॉकिंग रेडिएशन&#8217; मिलकर इन समस्याओं को रोक सकते हैं। इसका मतलब यह हो सकता है कि ब्लैक होल के अंदर Infinite Gravity बनने की जरूरत ही न पड़े, यानी Singularity शायद बने ही नहीं।</p>
<h2><strong>यह रिसर्च Physics के लिए क्यों अहम है?</strong></h2>
</p>
<p>इस खोज को बहुत खास माना जा रहा है क्योंकि इसका असर सिर्फ चार्ज वाले ब्लैक होल तक सीमित नहीं हो सकता। वैज्ञानिकों का मानना है कि यही नियम ब्रह्मांड के दूसरे ब्लैक होल पर भी लागू हो सकते हैं। इस रिसर्च की सबसे बड़ी बात यह है कि यह क्वांटम फील्ड थ्योरी पर आधारित है। इसमें स्ट्रिंग थ्योरी या लूप क्वांटम ग्रैविटी जैसे ऐसे मॉडल इस्तेमाल नहीं किए गए, जिन्हें अभी तक पूरी तरह सही साबित नहीं किया जा सका है, यही वजह है कि वैज्ञानिक इस अध्ययन को ज्यादा भरोसेमंद मान रहे हैं। अगर आगे चलकर यह सिद्धांत सही साबित होता है, तो ब्लैक होल और Gravity को समझने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।</p>
<h2><strong>क्या ब्लैक होल से डार्क मैटर का रहस्य सुलझ सकता है?</strong></h2>
</p>
<p>इस रिसर्च में यह भी कहा गया है कि अगर ब्लैक होल में Singularity न हो, तो उसके खत्म होने के बाद बहुत छोटे-छोटे माइक्रोस्कोपिक ऑब्जेक्ट्स बन सकते हैं। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यही रहस्यमयी चीजें &#8216;डार्क मैटर&#8217; से जुड़ी हो सकती हैं। डार्क मैटर आज भी ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में से एक है क्योंकि इसे सीधे देखा नहीं जा सकता, लेकिन इसका असर अंतरिक्ष में महसूस होता है, फिलहाल यह रिसर्च सिर्फ एक थ्योरी है और इसे सही साबित करने के लिए अभी और अध्ययन करने होंगे, फिर भी वैज्ञानिक इसे ब्लैक होल की दुनिया में एक बड़ा कदम मान रहे हैं क्योंकि पहली बार बिना सिंगुलैरिटी वाले ब्लैक होल को इतने बेहतर तरीके से समझाने की कोशिश की गई है।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>ब्लैक होल के अंदर आखिर होता क्या है?</strong></h2>
</p>
<p>अब तक वैज्ञानिक मानते थे कि ब्लैक होल के केंद्र में &#8216;Singularity&#8217; होती है, जहां Gravity Infinite हो जाती है और Physics के नियम काम करना बंद कर देते हैं, लेकिन नई रिसर्च के मुताबिक, कुछ ब्लैक होल बिना Singularity के भी मौजूद हो सकते हैं।</p>
<h2><strong>नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने क्या दावा किया है?</strong></h2>
</p>
<p>जर्मनी की Goethe University Frankfurt के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि इलेक्ट्रिक चार्ज और Hawking Radiation मिलकर ब्लैक होल के अंदर Infinite Gravity बनने से रोक सकते हैं, यानी ब्लैक होल बिना Singularity के भी बन सकते हैं।</p>
<h2><strong>Reissner-Nordström Black Hole क्या होता है?</strong></h2>
</p>
<p>यह एक खास तरह का ब्लैक होल होता है जिसमें इलेक्ट्रिक चार्ज मौजूद होता है। नई रिसर्च इसी प्रकार के ब्लैक होल पर आधारित है और वैज्ञानिकों का मानना है कि इनके अंदर की Physics सामान्य ब्लैक होल से अलग हो सकती है।</p>
<h2><strong>इस खोज का Physics और ब्रह्मांड पर क्या असर पड़ सकता है?</strong></h2>
</p>
<p>अगर यह थ्योरी सही साबित होती है, तो ब्लैक होल, Gravity और Space-Time को समझने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। इससे Quantum Physics और General Relativity के बीच के कई रहस्य भी सुलझ सकते हैं।</p>
<h2><strong>क्या इस रिसर्च से डार्क मैटर का रहस्य भी सुलझ सकता है?</strong></h2>
</p>
<p>कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि बिना Singularity वाले ब्लैक होल खत्म होने के बाद छोटे माइक्रोस्कोपिक ऑब्जेक्ट्स छोड़ सकते हैं। संभव है कि यही रहस्यमयी चीजें &#8216;Dark Matter&#8217; से जुड़ी हों, हालांकि इसे साबित करने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Black-Hole.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Black Hole]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/new-black-hole-study-suggests-singularities-may-not-exist-inside-black-holes-1663683/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/new-black-hole-study-suggests-singularities-may-not-exist-inside-black-holes-1663683/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sun, 24 May 2026 05:07:35 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[मंगल से आई चौंकाने वाली तस्वीर, तीन पत्थरों ने वैज्ञानिकों का खींचा ध्यान]]></title>
		<description>मंगल ग्रह से आई एक नई तस्वीर ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। NASA के Perseverance Rover ने तीन पत्थरों जैसी दिखने वाली एक अनोखी चट्टान की फोटो भेजी है, जो ऐसे नजर आती है जैसे किसी ने उन्हें एक-दूसरे के ऊपर सजाकर रखा हो। वैज्ञानिक अब इसके पीछे की प्राकृतिक वजहों को समझने में जुटे हैं। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अंतरिक्ष की दुनिया में एक बार फिर ऐसा नजारा सामने आया है जिसने वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम लोगों को भी चौंका दिया है। NASA के मशहूर Perseverance Rover ने मंगल ग्रह पर एक अजीब चट्टान की तस्वीर भेजी है। यह चट्टान ऐसी दिखती है जैसे तीन पत्थरों को एक-दूसरे के ऊपर बहुत ही सही तरीके से रखा गया हो। यह तस्वीर 13 मई 2026 को मिशन के Sol 1859 के दौरान ली गई थी। तस्वीर को देखकर पहली नजर में ऐसा लगता है जैसे किसी ने जानबूझकर पत्थरों को सजाकर रखा हो। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर यह फोटो तेजी से वायरल हो गई। कुछ लोग इसे एलियंस से जोड़कर देख रहे हैं, तो कई लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर यह पत्थर इस तरह कैसे बने।</p>
<h2><strong>आखिर क्या है इन तीन पत्थरों का राज?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कोई रहस्यमयी चीज नहीं है, बल्कि मंगल ग्रह पर होने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया का असर हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ये पत्थर पहले एक बड़ी चट्टान का हिस्सा रहे होंगे, जो समय के साथ टूटकर अलग-अलग परतों जैसे दिखने लगे। वैज्ञानिक मानते हैं कि मंगल पर करोड़ों सालों तक चलने वाली तेज हवाओं और कभी वहां बहने वाले पानी ने चट्टानों को इस तरह का आकार दिया होगा। आज मंगल ग्रह सूखा और सुनसान नजर आता है, लेकिन कई रिसर्च बताती हैं कि बहुत पहले वहां नदियां, झीलें और शायद बारिश भी हुआ करती थी। NASA के दूसरे मिशनों से भी ऐसे संकेत मिले हैं कि एक समय मंगल का मौसम काफी हद तक पृथ्वी जैसा रहा होगा, लगातार हवाओं और मौसम के असर से वहां की चट्टानें धीरे-धीरे कटती और बदलती रहीं, जिससे ऐसे अजीब और रहस्यमयी आकार बन गए।</p>
<h2><strong>मंगल पर पहले भी दिख चुकी हैं ऐसी अजीब चीजें?</strong></h2>
</p>
<p>यह पहली बार नहीं है जब Perseverance Rover ने मंगल ग्रह पर कोई अजीब चीज देखी हो। पिछले कुछ सालों में रोवर ने कई ऐसी तस्वीरें भेजी हैं जिन्हें देखकर लोग हैरान रह गए। कभी पत्थरों पर तेंदुए जैसे धब्बे दिखाई दिए, तो कभी धागों की तरह उलझी हुई आकृतियां और पॉपकॉर्न जैसी चट्टानें नजर आईं। शुरुआत में लोगों को ये चीजें बहुत रहस्यमयी लगीं, लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने बताया कि ये सब मंगल ग्रह की प्राकृतिक बनावट और वहां के मौसम की वजह से बने आकार हैं। मंगल ग्रह हमेशा से लोगों के लिए रहस्य और जिज्ञासा का विषय रहा है। साल 1976 में NASA के Viking मिशन ने भी एक ऐसी तस्वीर ली थी जिसमें पहाड़ का आकार इंसानी चेहरे जैसा दिख रहा था। उस समय लोगों ने इसे लेकर कई कहानियां बना ली थीं, लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया कि वह सिर्फ रोशनी और छाया का असर था।</p>
<h2><strong>क्या मंगल ग्रह के ये रहस्य भविष्य में बड़े खुलासे करेंगे?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों का कहना है कि मंगल ग्रह पर दिखने वाली ऐसी अनोखी चीजें हमें वहां के पुराने समय और मौसम के बारे में समझने में मदद करती हैं। हर नई तस्वीर से यह पता चलता है कि मंगल सिर्फ सूखा और वीरान ग्रह नहीं था। Perseverance Rover लगातार मंगल पर नई-नई खोज कर रहा है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में यह रोवर ऐसे और बड़े राज खोल सकता है, जिनसे पता चल सके कि मंगल पर कभी जीवन के निशान मौजूद थे या नहीं।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>मंगल ग्रह पर दिखने वाले ये तीन पत्थर आखिर क्या हैं?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों के मुताबिक यह कोई Artificial Structure नहीं है। माना जा रहा है कि ये पत्थर पहले एक बड़ी चट्टान का हिस्सा थे, जो समय के साथ टूटकर इस अनोखे आकार में बदल गए।</p>
<h2><strong>क्या ये पत्थर एलियंस से जुड़े हो सकते हैं?</strong></h2>
</p>
<p>फिलहाल NASA और वैज्ञानिकों ने ऐसा कोई सबूत नहीं पाया है जो इन्हें एलियंस से जोड़ता हो। वैज्ञानिक इसे मंगल की प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रिया का परिणाम मान रहे हैं।</p>
<h2><strong>यह तस्वीर कब और किसने ली?</strong></h2>
</p>
<p>यह तस्वीर Perseverance Rover ने 13 मई 2026 को अपने मिशन के Sol 1859 के दौरान ली थी।</p>
<h2><strong>मंगल पर पहले भी ऐसी रहस्यमयी चीजें दिख चुकी हैं?</strong></h2>
</p>
<p>इससे पहले भी मंगल पर तेंदुए जैसे धब्बे, पॉपकॉर्न जैसी चट्टानें और इंसानी चेहरे जैसी आकृतियां दिखाई दे चुकी हैं।</p>
<h2><strong>इन खोजों से वैज्ञानिकों को क्या फायदा होता है?</strong></h2>
</p>
<p>ऐसी तस्वीरों से वैज्ञानिक मंगल ग्रह के पुराने मौसम, वहां बहने वाले पानी और संभावित जीवन के संकेतों को समझने की कोशिश करते हैं। इससे भविष्य की रिसर्च को भी मदद मिलती है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Mars-rock-formation.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[NASA’s Perseverance Rover captured an unusual rock formation on the surface of Mars. (Image credit: NASA/JPL-Caltech/ASU)]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/nasa-perseverance-rover-spots-mysterious-stacked-rocks-on-mars-sparks-alien-speculation-1663617/</guid>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sun, 24 May 2026 04:32:53 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[NASA ने खोले अंतरिक्ष के अनदेखे राज, लगभग 6 हजार नए ग्रहों का हुआ खुलासा]]></title>
		<description>NASA के TESS मिशन ने करीब 8 साल की मेहनत के बाद रात के आसमान का सबसे बड़ा और डिटेल्ड मैप तैयार किया है। इस मिशन में हजारों नए ग्रहों और अंतरिक्ष की कई रहस्यमयी एक्टिविटी का पता चला है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे भविष्य में Earth जैसे ग्रहों की खोज और तेज हो सकती है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अंतरिक्ष की दुनिया में एक बार फिर बड़ा कदम उठाते हुए NASA ने रात के आसमान का अब तक का सबसे डिटेल्ड मैप जारी किया है। यह खास मैप NASA के Transiting Exoplanet Survey Satellite यानी TESS मिशन द्वारा तैयार किया गया है। करीब आठ साल तक लगातार की गई निगरानी के बाद तैयार हुए इस विशाल स्काई मैप में लगभग 6000 ऐसे ग्रहों को दिखाया गया है जो हमारे सौरमंडल के बाहर मौजूद हैं। इस मैप में अप्रैल 2018 से सितंबर 2025 तक रिकॉर्ड किए गए 96 अलग-अलग सेक्टर शामिल हैं। तस्वीर में दिखाई देने वाले हजारों रंग-बिरंगे बिंदु उन ग्रहों की मौजूदगी का संकेत देते हैं जो दूसरे सितारों के चारों ओर चक्कर लगा रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मैप भविष्य की अंतरिक्ष खोजों के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।</p>
<h2><strong>TESS मिशन आखिर कैसे काम करता है?</strong></h2>
</p>
<p>NASA के अनुसार TESS मिशन एक्सोप्लैनेट यानी दूसरे सौरमंडलों के ग्रहों को खोजने के लिए &#8216;Transit Method&#8217; का इस्तेमाल करता है। इस टेक्नोलॉजी में सैटेलाइट एक साथ हजारों सितारों की चमक पर नजर रखता है। जब कोई ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है तो तारे की रोशनी थोड़ी देर के लिए कम हो जाती है। इसी छोटे बदलाव को पकड़कर वैज्ञानिक ग्रह की मौजूदगी का पता लगाते हैं। TESS में लगे चार वाइड-फील्ड कैमरे आसमान के हर सेक्टर को करीब एक महीने तक स्कैन करते हैं और फिर अगली दिशा में बढ़ जाते हैं। इस लंबे मिशन के दौरान सिर्फ नए ग्रह ही नहीं मिले, बल्कि पृथ्वी के पास घूमने वाले कई एस्टेरॉयड, नए तारों के ग्रुप और दूर की आकाशगंगाओं के केंद्र में होने वाली तेज एक्टिविटी भी रिकॉर्ड की गई हैं।</p>
<h2><strong>क्या इन नए ग्रहों पर जीवन मिलने की उम्मीद है?</strong></h2>
</p>
<p>सितंबर 2025 तक TESS मिशन 679 एक्सोप्लैनेट की पुष्टि कर चुका है, जबकि 5165 संभावित ग्रहों की पहचान अभी जांच के दौर में है। वैज्ञानिक इन ग्रहों की पुष्टि के लिए दूसरी ऑब्जर्वेट्री और टेलीस्कोप की मदद ले रहे हैं। इन ग्रहों की दुनिया बेहद अलग-अलग है। कुछ ग्रह Mercury से भी छोटे हैं, जबकि कुछ विशाल गैस ग्रह Jupiter से कई गुना बड़े बताए जा रहे हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इनमें कुछ ग्रह ऐसे भी हैं जो अपने सितारे के &#8216;Habitable Zone&#8217; में मौजूद हैं। इसका मतलब है कि वहां तरल पानी मौजूद होने की संभावना हो सकती है और इसी वजह से जीवन की उम्मीद भी जताई जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऐसे ग्रहों की संख्या और तेजी से बढ़ सकती है।</p>
<h2><strong>क्या वैज्ञानिक AI की भी ले रहे हैं मदद?</strong></h2>
</p>
<p>साल 2026 में TESS डेटा से वैज्ञानिकों को कई चौंकाने वाली जानकारियां भी मिली हैं। शोधकर्ताओं ने एक ऐसे ग्रह सिस्टम की पहचान की है जहां साथी ग्रह का ऑर्बिट बेहद अजीब और झुका हुआ पाया गया। इसके अलावा दो ग्रहों के बीच हिंसक टक्कर जैसे संकेत भी मिले हैं। अब वैज्ञानिक इस विशाल डेटा का एनालिसिस करने के लिए मशीन लर्निंग और AI का सहारा ले रहे हैं। इससे भविष्य में नए ग्रहों की खोज और तेज होने की उम्मीद है। NASA का कहना है कि TESS मिशन सिर्फ नए ग्रह खोजने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमें ब्रह्मांड को पहले से ज्यादा गहराई से समझने में मदद कर रहा है।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>NASA का TESS मिशन क्या है?</strong></h2>
</p>
<p>NASA का TESS (Transiting Exoplanet Survey Satellite) मिशन अंतरिक्ष में दूसरे सितारों के आसपास मौजूद ग्रहों यानी Exoplanets को खोजने के लिए बनाया गया है। यह मिशन 2018 में लॉन्च किया गया था।</p>
<h2><strong>TESS मिशन ने अब तक कितने नए ग्रह खोजे हैं?</strong></h2>
</p>
<p>सितंबर 2025 तक TESS मिशन 679 एक्सोप्लैनेट की पुष्टि कर चुका है, जबकि 5165 से ज्यादा संभावित ग्रहों की पहचान की गई है जिनकी अभी जांच चल रही है।</p>
<h2><strong>TESS ग्रहों को कैसे खोजता है?</strong></h2>
</p>
<p>TESS &#8216;Transit Method&#8217; का इस्तेमाल करता है। जब कोई ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है तो तारे की रोशनी थोड़ी कम हो जाती है। इसी बदलाव को पकड़कर वैज्ञानिक नए ग्रहों का पता लगाते हैं।</p>
<h2><strong>क्या इन नए ग्रहों पर जीवन होने की संभावना है?</strong></h2>
</p>
<p>कुछ ग्रह अपने सितारों के &#8216;Habitable Zone&#8217; में पाए गए हैं, जहां पानी तरल रूप में मौजूद हो सकता है। इसलिए वैज्ञानिकों को वहां जीवन मिलने की उम्मीद नजर आती है।</p>
<h2><strong>क्या NASA इस मिशन में AI का इस्तेमाल भी कर रहा है?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिक अब मशीन लर्निंग और AI की मदद से TESS के विशाल डेटा का तेजी से एनालिसिस कर रहे हैं, ताकि नए ग्रहों और अंतरिक्ष घटनाओं की पहचान आसान हो सके।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/NASA-3.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[NASA]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/nasa-tess-releases-most-detailed-night-sky-map-reveals-thousands-of-exoplanets-1663614/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/nasa-tess-releases-most-detailed-night-sky-map-reveals-thousands-of-exoplanets-1663614/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sat, 23 May 2026 07:19:13 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Google ने Pixel यूजर्स को दिया खास गिफ्ट, डिस्को स्टाइयल में दिखेंगे सभी आइकन]]></title>
		<description>Google ने Pixel फोन्स के आइकन को डिस्को बॉल स्टाइल दिया है, जिससे आइकन चमकदार हो गए हैं और दिखने में भी सुंदर लग रहे हैं। इससे आइकन का पूरा रंग-रूप बदल गया है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पॉपुलर म्जूयिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Spotify ने हाल ही में 20 साल पूरे होने की खुशी में अपने आइकन को डिस्को-बॉल में बदला था, जिसकी खूब चर्चा हुई। अब इस ट्रैंड को फॉलो करते हुए दिग्गज टेक जाइंट Google ने भी अपने Pixel सीरीज के सभी फोन में ऐप आइकन का रंग-रूप बदला है, जिससे इन्हें डिस्को लुक मिला है।</p>
<h2>बदल गया Icon का लुक</h2>
</p>
<p>गूगल के अनुसार, Google Pixel सीरीज के स्मार्टफोन्स की सेटिंग में कस्टामाइजेशन फीचर का सपोर्ट दिया गया है, जिससे सभी ऐप के आइकन को ग्लिटर (Glitter) से लैस डिस्को स्टाइल दिया जा सकता है। इससे सभी आइकन जगमगाते हुए दिखाई देंगे और यूजर्स को डिवाइस में नए फोन जैसे फीलिंग मिलेगी। सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए अलग से थर्ड पार्टी ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">Your wish is our command. Disco icons available on Pixel as of today.</p>
</p>
<p>&#8230; Are y&#8217;all sure you still want this ?? 😅<a href="https://twitter.com/DurvidImel?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">@DurvidImel</a> <a href="https://twitter.com/RaceJohnson?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">@RaceJohnson</a> <a href="https://t.co/S9dwLZRtHl" rel="nofollow" target="_blank">https://t.co/S9dwLZRtHl</a> <a href="https://t.co/nvevL7fTSb" rel="nofollow" target="_blank">pic.twitter.com/nvevL7fTSb</a></p>
</p>
<p>— Sameer Samat (@ssamat) <a href="https://twitter.com/ssamat/status/2057831639275983293?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 22, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
</p>
<p>पिक्सल फोन्स में मिलने वाले कस्टामाइज फीचर की जानकारी एंड्रॉइड इकोसिस्टम (Android Ecosystem) के प्रेसिडेंट Sameer Samat ने X पर एक पोस्ट कर साझा की है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि आपकी इच्छा ही हमारा आदेश है। आज से Pixel पर डिस्को आइकन मिलने लगेंगे। इससे पहले यूजर्स के लिए अपडेट के जरिए Scribbles, Treasure और Easel जैसे आइकन थीम को जोड़ा गया था, जिससे आइकन को यूनीक लुक मिला।</p>
<h2>क्रोम और जीमेल का भी बदला लुक</h2>
</p>
<p>गूगल की ओर से डिस्को थीम का सपोर्ट गूगल क्रोम (Google Chrome), जीमेल (Gmail), गूगल मैप्स (Google Maps) और यूट्यूब (Youtube) को भी दिया गया है। इससे आइकन में डिस्को बॉल टेक्चर में देखने को मिलेंगे।</p>
</p>
<p>डिस्को थीम आइकन को अभी पिक्सल सीरीज के स्मार्टफोन के लिए रिलीज किया जा गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में इन आइकन को अन्य एड्रॉइड यूजर्स के लिए भी रोलआउट किया जा सकता है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Google-Pixel-disco-icons.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Google’s new disco-style app icons are now available on supported Pixel phones. (Image credits: @ssamat/ X)]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/google-pixel-phone-icons-change-in-disco-ball-after-spotify-1663575/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/google-pixel-phone-icons-change-in-disco-ball-after-spotify-1663575/</link>
		<dc:creator><![CDATA[ajay verma]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Fri, 22 May 2026 11:11:40 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[सिंगल चार्ज पर 50 घंटे चलने वाले Realme Buds Air 8 Pro भारत में लॉन्च, जानें कीमत]]></title>
		<description>Realme Buds Air 8 Pro भारत में लॉन्च हो गए हैं। इन बड्स में 11mm ड्राइवर्स दिए गए हैं। इनमें आपको 50 घंटे तक का प्लेटाइम भी मिलेगा। यहां जानें बड्स की कीमत, उपलब्धता और फीचर्स से जुड़ी डिटेल्स।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Realme Buds Air 8 Pro</strong> भारत में लॉन्च हो गया है। कंपनी ने Realme 16T और Realme Watch S5 के साथ इन बड्स को पेश किया है। फीचर्स की बात करें, तो इन बड्स में आपको 11mm ड्राइवर्स मिलते हैं। इनमें 6mm micro-planar tweeter दिए गए हैं। ये बड्स 55dB तक एक्टिव नॉइस कैंसिलेशन फीचर प्रोवाइड करता है। कॉलिंग के लिए इन बड्स में 6 माइक्रोफोन दिए गए हैं। पानी से बचाव के लिए इसमें IP55 रेटिंग मिलती है। कंपनी का दावा है कि यह बड्स सिंगल चार्ज पर 50 घंटे तक की बैटरी प्रोवाइड करता है। आइए जानते हैं इन बड्स की कीमत, उपलब्धता और फीचर से जुड़ी डिटेल्स।</p>
<h2>Realme Buds Air 8 Pro Price in India, Availability</h2>
</p>
<p>कंपनी ने <a href="https://www.techlusive.in/hi/mobile/realme-16t-5g-launched-in-india-with-8000mah-battery-check-price-specifications-1663415/">Realme</a> Buds Air 8 Pro को 6,999 रुपये की कीमत में पेश किया गया है। लॉन्च ऑफर की बात करें, तो बड्स पर 300 रुपये का डिस्काउंट ऑफर मिल रहा है। ये बड्स Master White और Master Black कलर ऑप्शन है। इन बड्स को आप Flipkart, Amazon, Myntra, Realme.com के जरिए खरीद सकेंगे।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">Meet the new master of silence &amp; sound.</p>
</p>
<p>The <a href="https://twitter.com/hashtag/realmeBudsAir8Pro?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">#realmeBudsAir8Pro</a> brings flagship-level noise cancellation, rich audio, and seamless AI features into one powerful experience.</p>
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<p>Starting from ₹6,699*.</p>
<p>Sale starts 3rd June, 12 PM.</p>
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<p>Know more: <a href="https://t.co/3KxWo7elNT" rel="nofollow" target="_blank">https://t.co/3KxWo7elNT</a>… <a href="https://t.co/SwOnNK545U" rel="nofollow" target="_blank">pic.twitter.com/SwOnNK545U</a></p>
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<p>— realme (@realmeIndia) <a href="https://twitter.com/realmeIndia/status/2057714325259776187?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 22, 2026</a></p></blockquote>
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<h2>Realme Buds Air 8 Pro Specifications</h2>
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<p>फीचर्स की बात करें, तो Realme Buds Air 8 Pro में 11mm ड्राइवर्स दिए गए हैं। इसके साथ इसमें 6mm micro-planar tweeter मौजूद है। साथ ही प्रत्येक बड्स में आपको 3 माइक्रोफोन मिलेंगे, जिसके साथ इसमें 6 माइक्रोफोन दिए गए हैं। कंपनी का दावा है कि ये बड्स कॉल के दौरान वॉइस क्लियरिटी को इम्प्रूव करने और बैंकग्राउंड नॉइस को कम करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।</p>
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<p>इन बड्स में ANC सपोर्ट मिलता है, जो कि 55dB तक के शोर को कम करने में सक्षम है। रियलमी ने इनमें Transparency Mode भी दिया है, जो कि ईयरबड्स निकाले आपको आसपास के शोर से रूबरू कराते हैं। इनमें Voice Processing Unit दी गई है, जो कि बोन कंडक्ट टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इन बड्स में आपको Game Mode मिलता है, जिसके साथ 45ms Low latency मिलती है। कनेक्टिविटी के लिए इनमें Bluetooth 6.1, LHDC 5.0 Hi-Res wireless audio codec, dual-device आदि का सपोर्ट मौजूद है। ये बड्स Google Fast Pair सपोर्ट के साथ आते हैं।</p>
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<p>प्रत्येक बड्स में 62mAh बैटरी मिलती है। वहीं, चार्जिंग केस में 590mAh की बैटरी मौजूद है। सिंगल चार्ज पर यह बड्स 12 घंटे तक का प्लेबैक प्रोवाइड करते हैं। वहीं, चार्जिंग केस के साथ इन्हें 50 घंटे तक इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी का दावा है कि रियलमी 10 मिनट की चार्जिंग पर 11 घंटे तक का म्यूजिक प्लेटाइम प्रोवाइड करता है। पानी से बचाव के लिए इन बड्स में IP55 रेटिंग मिलती है।</p>
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