<?xml version='1.0' encoding='UTF-8' ?><!-- generated-on='May 27, 2026 9:30 am' -->
<rss version='2.0' xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' xmlns:content='http://purl.org/rss/1.0/modules/content/'
	xmlns:wfw='http://wellformedweb.org/CommentAPI/' xmlns:dc='http://purl.org/dc/elements/1.1/'
	xmlns:atom='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:sy='http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/'
	xmlns:slash='http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/'>
  <channel>
	<title><![CDATA[Latest Technology &amp; Gadgets - News in Hindi | News &amp; Reviews on Gadgets, Smart Phones, Mobile Apps &amp; Gaming | टेक न्यूज़ इन हिंदी | TECHLUSIVE.in Hindi]]></title>
	<description><![CDATA[Latest Technology &amp; Gadgets - News in Hindi | News &amp; Reviews on Gadgets, Smart Phones, Mobile Apps &amp; Gaming | टेक न्यूज़ इन हिंदी | TECHLUSIVE.in Hindi]]></description>
	<lastBuildDate>Wed, 27 May 2026 09:30:04 +0000</lastBuildDate>
	<link>https://www.techlusive.in/hi/news/</link>
	<atom:link href='https://www.techlusive.in/rss-feeds/news-hindi.xml' rel='self' type='application/rss+xml' />
	 <item>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 08:02:41 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[मंगल ग्रह के नीचे छिपा है बड़ा राज, क्या अब रोबोट खोलेंगे नया रहस्य?]]></title>
		<description>मंगल ग्रह की सतह के नीचे छिपी रहस्यमयी लावा सुरंगों को खोजने के लिए वैज्ञानिक खास रोबोट और छोटे ड्रोन तैयार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि ये गुफाएं भविष्य में इंसानों को सुरक्षित ठिकाना दे सकती हैं, साथ ही यहां जीवन के संकेत मिलने की उम्मीद भी है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मंगल ग्रह की सतह के नीचे छिपे रहस्यमयी लावा ट्यूब्स को खोजने के लिए वैज्ञानिक अब खास तरह के रोबोट तैयार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि मंगल ग्रह के नीचे लगभग 746 मील लंबे सुरंगों का विशाल नेटवर्क मौजूद है, जो करोड़ों साल पहले ज्वालामुखी विस्फोटों से बना था। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये भूमिगत गुफाएं मंगल पर मौजूद खतरनाक रेडिएशन से सुरक्षा दे सकती हैं। इतना ही नहीं, यहां सूक्ष्म जीवों के जीवन के संकेत भी मिल सकते हैं और भविष्य में इंसानों के रहने के लिए सुरक्षित जगह भी तैयार हो सकती है। अब तक इन गुफाओं की जांच करना बेहद मुश्किल था, लेकिन नई टेक्नोलॉजी ने उम्मीद बढ़ा दी है।</p>
<h2><strong>क्या है ये खास टेक्नोलॉजी?</strong></h2>
</p>
<p>अमेरिका केNew Mexico Tech के वैज्ञानिक Mostafa Hassanalian एक खास रोबोटिक सिस्टम पर काम कर रहे हैं, जो प्रकृति से प्रेरित है। इस सिस्टम का पहला हिस्सा &#8216;Roly-Poly Robot&#8217; है, जिसे पिलबग नाम के छोटे कीड़े की तरह डिजाइन किया गया है। यह रोबोट गेंद की तरह गोल होकर मंगल की सतह पर मौजूद बड़े गड्ढों यानी &#8216;Skylight&#8217; से नीचे लावा ट्यूब्स में उतर सकता है। वहां पहुंचने के बाद यह हजारों छोटे &#8216;डैंडेलियन ड्रोन&#8217; छोड़ता है। ये बेहद हल्के उड़ने वाले ड्रोन हैं, जो मंगल की सुरंगों में बहने वाली तेज हवाओं के सहारे कई मील तक उड़ सकते हैं और रास्ते का नक्शा तैयार कर सकते हैं।</p>
<h2><strong>क्या छोटे ड्रोन मंगल की सुरंगों का नक्शा बना पाएंगे?</strong></h2>
</p>
<p>इन छोटे ड्रोन को खास सफेद रंग में बनाया गया है, ताकि वे कम गर्म हों और वजन में हल्के रहें। वैज्ञानिकों के अनुसार, ये ड्रोन एक खास Piezoelectric टेक्नोलॉजी से चलते हैं, जिसमें नरम और लचीले पॉलिमर से एनर्जी बनाई जाती है। इन ड्रोन का काम मंगल की लावा सुरंगों के अंदर जाकर वहां का तापमान, सुरंगों की बनावट और जीवन से जुड़े संकेतों की जानकारी जुटाना है। अभी मंगल पर मौजूद बड़े रोवर्स जैसे Curiosity और Perseverance बहुत बड़े और भारी हैं, इसलिए वे इन पतली और तंग सुरंगों में नहीं जा सकते। इसी वजह से वैज्ञानिक लंबे समय से छोटे रोबोट्स बनाने की कोशिश कर रहे थे।</p>
<h2><strong>क्या मंगल ग्रह की इन गुफाओं में इंसानों को फायदा होगा?</strong></h2>
</p>
<p>मंगल ग्रह के नीचे छिपे रहस्यों को जानने की दौड़ अब पूरी दुनिया में तेज हो गई है। यूरोप के वैज्ञानिक स्पेन के Lanzarote इलाके की लावा गुफाओं में ऐसे रोबोट्स का टेस्ट भी कर चुके हैं। वहीं NASA भी मंगल ग्रह के Arsia Mons ज्वालामुखी इलाके की जांच की तैयारी कर रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इन लावा सुरंगों में जीवन के कोई निशान मिलते हैं, तो यह इंसानों के लिए बहुत बड़ी और ऐतिहासिक खोज होगी। इतना ही नहीं, भविष्य में मंगल पर इंसानों की बस्ती बसाने में भी ये सुरंगें काफी मददगार साबित हो सकती हैं।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Mars-Lava-Tubes.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Mars Lava Tubes]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/scientists-develop-swarm-robots-to-explore-hidden-lava-tubes-beneath-mars-surface-1664031/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/scientists-develop-swarm-robots-to-explore-hidden-lava-tubes-beneath-mars-surface-1664031/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 07:35:42 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Spotify Premium यूजर्स की हुई बल्ले-बल्ले, मुफ्त में मिलेगा ये नया फीचर]]></title>
		<description>Spotify ने अपने यूजर्स के लिए एक शानदार नया फीचर लॉन्च किया है। अब लोग सिर्फ गाने और पॉडकास्ट ही नहीं, बल्कि लंबी मैगजीन आर्टिकल्स भी ऑडियो फॉर्म में सुन सकेंगे। खास बात यह है कि Spotify Premium यूजर्स को यह सुविधा बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के मिलेगी। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Spotify ने अपने यूजर्स के लिए एक नया और खास फीचर पेश किया है। अब यूजर्स ऐप पर सिर्फ गाने और पॉडकास्ट ही नहीं, बल्कि लंबी मैगजीन आर्टिकल्स को ऑडियो फॉर्म में भी सुन सकेंगे। कंपनी ने बताया कि यह फीचर उन 22 देशों में शुरू किया जा रहा है जहां पहले से Spotify Audiobooks उपलब्ध हैं। इस नए फीचर के जरिए यूजर्स अब मशहूर मैगजीन और पब्लिकेशन के लेखों को बिना पढ़े, सीधे सुन सकेंगे। कंपनी का मानना है कि इससे लोगों को जानकारी हासिल करने का नया और आसान तरीका मिलेगा।</p>
<h2><strong>Premium और Free यूजर्स के लिए क्या होंगे नए नियम?</strong></h2>
</p>
<p>Spotify ने बताया कि Premium सब्सक्राइबर्स को यह सुविधा बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के मिलेगी। यानी जो लोग पहले से Spotify Premium इस्तेमाल कर रहे हैं, वे अपने मौजूदा Audiobooks प्लेबैक अलाउंस के अंदर इन आर्टिकल्स को सुन पाएंगे। वहीं फ्री यूजर्स को हर आर्टिकल अलग से खरीदना होगा, जिसकी कीमत 1.99 डॉलर यानी लगभग 190 रुपये रखी गई है। कंपनी के मुताबिक हर ऑडियो आर्टिकल की लंबाई दो घंटे से कम होगी, ताकि यूजर्स आसानी से उन्हें सुन सकें। यह फीचर खासतौर पर उन लोगों के लिए यूजफुल माना जा रहा है जो लंबे आर्टिकल्स पढ़ने की बजाय सुनना पसंद करते हैं।</p>
<h2><strong>किन मशहूर मैगजीन के आर्टिकल्स सुनने को मिलेंगे?</strong></h2>
</p>
<p>Spotify की इस नई लाइब्रेरी में फिलहाल 650 से ज्यादा लंबे आर्टिकल्स शामिल किए गए हैं। इनमें मशहूर पब्लिकेशन जैसे Rolling Stone, The Atlantic, Vogue, WIRED, GQ, Billboard और Vanity Fair के आर्टिकल्स मौजूद हैं। फिलहाल ये सभी आर्टिकल्स केवल अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध हैं। Spotify का कहना है कि यह फीचर यूजर्स को पॉडकास्ट से आगे बढ़ाकर ऑडियोबुक्स और लंबे कंटेंट की दुनिया से जोड़ने का काम करेगा। साथ ही इससे लोग अपने पसंदीदा कलाकारों और विषयों के बारे में ज्यादा गहराई से जानकारी भी हासिल कर पाएंगे।</p>
<h2><strong>Spotify का यह नया फीचर यूजर्स के लिए क्यों खास है?</strong></h2>
</p>
<p>Spotify Audiobooks की Licensing Lead Colleen Prendergast ने कहा कि यह फीचर म्यूजिक, पॉडकास्ट और ऑडियोबुक्स के बीच एक नेचुरल एक्सटेंशन की तरह काम करेगा। उनके अनुसार लोग जिन विषयों को पसंद करते हैं, अब उन्हीं से जुड़े लंबे आर्टिकल्स भी ऑडियो फॉर्म में सुन सकेंगे। कंपनी को उम्मीद है कि यह नया फीचर यूजर्स के कंटेंट सुनने के अनुभव को और बेहतर बनाएगा। आने वाले समय में Spotify इस लाइब्रेरी में और ज्यादा पब्लिकेशन और भाषाओं को भी जोड़ सकता है, जिससे दुनिया भर के यूजर्स को इसका फायदा मिलेगा।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2025/08/Spotify-India-price-hike.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Spotify India price hike]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/spotify-launches-audio-magazine-articles-feature-for-premium-users-1664020/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/spotify-launches-audio-magazine-articles-feature-for-premium-users-1664020/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 06:13:03 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[सौर मंडल से जुड़े सबसे बड़े राज का हुआ खुलासा, वैज्ञानिकों की इन नई रिचर्स ने सबको चौंकाया!]]></title>
		<description>सौर मंडल की शुरुआत को लेकर वैज्ञानिकों ने एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। नई रिसर्च के मुताबिक, Jupiter ग्रह के बाहर मौजूद धूल और गैस की विशाल रिंग कभी ‘Planet Factory’ की तरह काम करती थी। यहीं से छोटे अंतरिक्षीय पिंड बने, जिन्होंने बाद में ग्रहों और Asteroids की नींव रखी। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>वैज्ञानिकों ने Solar System की शुरुआत से जुड़ा एक बड़ा रहस्य समझने का दावा किया है। जर्मनी के Max Planck Institute for Solar System Research के वैज्ञानिकों के मुताबिक, Jupiter ग्रह के बाहर धूल और गैस की एक बहुत बड़ी रिंग मौजूद थी, जो अरबों साल पहले &#8216;Planet Factory&#8217; की तरह काम कर रही थी। इसी जगह पर छोटे-छोटे अंतरिक्षीय पत्थर बने, जिन्हें प्लैनेटेसिमल्स कहा जाता है, बाद में यही पत्थर मिलकर ग्रहों और Asteroids की नींव बने। वैज्ञानिकों का मानना है कि करीब 4.6 अरब साल पहले जब Solar System बन रहा था, तब युवा सूर्य के चारों ओर गैस और धूल का एक विशाल घेरा फैला हुआ था। इस घेरे में मौजूद छोटे कण आपस में टकराते रहे और धीरे-धीरे बड़े होते गए। समय के साथ यही कण ग्रहों में बदलने लगे। नई स्टडी के अनुसार, ग्रह बनने की यह प्रक्रिया पूरे सौर मंडल में एक जैसी नहीं थी। अलग-अलग जगहों पर हालात अलग थे, इसलिए कहीं ग्रह तेजी से बने तो कहीं उनकी बनावट अलग तरीके से हुई। वैज्ञानिकों का कहना है कि बृहस्पति के बाहर वाला इलाका ग्रह बनाने के लिए सबसे खास और एक्टिव जगहों में से एक था।</p>
<h2><strong>कैसे बना Jupiter के पास धूल और गैस का विशाल &#8216;Dust Trap&#8217;?</strong></h2>
</p>
<p>शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर सिमुलेशन की मदद से पता लगाया कि Jupiter ग्रह के बाहर मौजूद यह &#8216;Dust Trap&#8217; लाखों सालों तक नए-नए अंतरिक्षीय पिंड बनाता रहा। वैज्ञानिकों के अनुसार, जब Jupiter ने अपने आसपास की ज्यादातर गैस और धूल को अपनी ओर खींच लिया, तब उसके बाहर एक बहुत घना और दबाव वाला इलाका बन गया। इस इलाके में बड़ी मात्रा में धूल जमा होने लगी। धीरे-धीरे छोटे-छोटे कण, जो कंकड़ जैसे दिखते थे, आपस में जुड़कर बड़े पत्थरों और पिंडों में बदलने लगे। बाद में यही पिंड ग्रहों और क्षुद्रग्रहों की नींव बने। रिसर्च टीम की प्रमुख Joanna Drążkowska ने बताया कि एक ही जगह पर अलग-अलग समय में अलग तरह के प्लैनेटेसिमल्स बने। यही वजह हो सकती है कि आज Solar System में Planets, Meteorites और Asteroids एक-दूसरे से इतने अलग दिखाई देते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह &#8216;Planet Factory&#8217; करीब 20 लाख साल तक लगातार काम करती रही और इस दौरान अंतरिक्ष में नए-नए पिंड बनते रहे।</p>
<h2><strong>Meteorites में कैसे छिपे हैं सौर मंडल के जन्म के पुराने राज?</strong></h2>
</p>
<p>इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने खास तरह के उल्कापिंडों का अध्ययन किया, जिन्हें &#8216;Carbonaceous Chondrite&#8217; कहा जाता है। इन उल्कापिंडों में कार्बन बहुत ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि ये सौर मंडल की शुरुआत के समय से लगभग वैसे ही बचे हुए हैं और इनमें ज्यादा बदलाव नहीं हुआ। पृथ्वी पर मिलने वाले ये उल्कापिंड वैज्ञानिकों के लिए किसी &#8216;Time Capsule&#8217; की तरह हैं क्योंकि इनके जरिए सौर मंडल के पुराने समय की जानकारी मिलती है। लैब में जांच करने पर पता चला कि इनकी उम्र और बनावट उसी इलाके से मिलती है, जिसे वैज्ञानिकों ने अपने कंप्यूटर सिमुलेशन में खोजा था। कुछ उल्कापिंड बहुत नरम और धूल जैसी चीजों से बने, जबकि कुछ में बड़े और मजबूत कण पाए गए। वैज्ञानिकों का कहना है कि बहुत पहले, जब सौर मंडल बन रहा था, तब अंतरिक्ष में दो तरह की चीजें थीं। एक बिल्कुल बारीक धूल जैसी थी, जबकि दूसरी सख्त और मजबूत टुकड़ों जैसी थी, जो बहुत ज्यादा गर्म जगहों पर बनी थीं। समय के साथ ये छोटी-छोटी चीजें आपस में चिपकती गईं और धीरे-धीरे बड़ी होती गईं, बाद में इन्हीं से ग्रह, उल्कापिंड और अंतरिक्ष के दूसरे बड़े-बड़े पिंड बन गए।</p>
<h2><strong>क्या इस खोज से अब ग्रहों के बनने की पूरी कहानी समझ आएगी?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज सिर्फ Meteorites के बनने की कहानी नहीं बताती, बल्कि इससे यह समझने में भी मदद मिलती है कि पूरा सौर मंडल कैसे बना था। रिसर्च टीम ने कंप्यूटर मॉडल की मदद से बहुत छोटे धूल के कणों की टक्कर से लेकर अंतरिक्ष में गैस और धूल की बड़ी हलचल तक सबकुछ समझने की कोशिश की। वैज्ञानिकों ने देखा कि Jupiter बड़े और भारी कणों को अपनी तरफ रोक लेता था, जबकि छोटे और हल्के धूल के कण आगे निकल जाते थे। धीरे-धीरे अंतरिक्ष में इन कणों की मात्रा बदलती गई और अलग-अलग समय पर नए-नए अंतरिक्षीय पिंड बनने लगे। बाद में इन्हीं से ग्रह, Meteorites और दूसरे बड़े पिंड बने। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आगे होने वाली नई रिसर्च से यह भी पता चल सकेगा कि पृथ्वी और दूसरे ग्रह आखिर कैसे बने थे। यह खोज इस बात का मजबूत सबूत भी देती है कि धूल से भरे ऐसे इलाके ही अंतरिक्ष में ग्रह बनाने की सबसे बड़ी फैक्ट्रियां थे।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>आखिर वैज्ञानिकों ने सौर मंडल को लेकर क्या नई खोज की है?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि Jupiter ग्रह के बाहर धूल और गैस की एक विशाल रिंग मौजूद थी, जो अरबों साल पहले &#8216;Planet Factory&#8217; की तरह काम करती थी। इसी जगह छोटे-छोटे अंतरिक्षीय पिंड बने, जिनसे बाद में Planets और Asteroids तैयार हुए।</p>
<h2><strong>‘Dust Trap’ क्या होता है?</strong></h2>
</p>
<p>‘Dust Trap’ अंतरिक्ष का ऐसा इलाका होता है जहां धूल और गैस बड़ी मात्रा में जमा हो जाती है। Jupiter के आसपास बने इस क्षेत्र में छोटे कण आपस में जुड़ते गए और धीरे-धीरे बड़े पत्थरों व प्लैनेटेसिमल्स में बदल गए।</p>
<h2><strong>Carbonaceous Chondrite उल्कापिंड इतने खास क्यों हैं?</strong></h2>
</p>
<p>ये उल्कापिंड सौर मंडल के शुरुआती समय के सबसे पुराने अवशेष माने जाते हैं। इनमें करोड़ों साल पुरानी जानकारी सुरक्षित है, इसलिए वैज्ञानिक इन्हें &#8216;Time Capsule&#8217; की तरह इस्तेमाल करते हैं।</p>
<h2><strong>क्या Jupiter ने ग्रह बनने की प्रक्रिया को प्रभावित किया था?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों के अनुसार Jupiter ने अपने Gravity से बड़े और भारी कणों को रोक लिया, जबकि हल्के कण आगे बढ़ते रहे। इसी वजह से अलग-अलग जगहों पर अलग तरह के ग्रह और अंतरिक्षीय पिंड बने।</p>
<h2><strong>इस रिसर्च से भविष्य में क्या फायदा होगा?</strong></h2>
</p>
<p>इस खोज से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि पृथ्वी और दूसरे ग्रह आखिर कैसे बने थे। साथ ही इससे पूरे Solar System की शुरुआती कहानी को और बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Jupiter-Planet-Factory.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Jupiter Planet Factory]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/scientists-discover-ancient-planet-factory-beyond-jupiter-that-helped-build-the-solar-system-1663996/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/scientists-discover-ancient-planet-factory-beyond-jupiter-that-helped-build-the-solar-system-1663996/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Tue, 26 May 2026 11:02:06 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[PM-WANI को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, अब QR Code स्कैन करते ही चलेगा Free Wi-Fi]]></title>
		<description>भारत सरकार ने PM-WANI योजना में बड़े बदलाव किए हैं ताकि देश में पब्लिक Wi-Fi को और आसान और सस्ता बनाया जा सके। अब QR कोड स्कैन करके लोग जल्दी इंटरनेट से जुड़ सकेंगे। यह कदम डिजिटल इंडिया को मजबूत करने और सभी के लिए सस्ता इंटरनेट उपलब्ध कराने के लिए है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भारत सरकार ने देशभर में पब्लिक Wi-Fi को और आसान और सस्ता बनाने के लिए PM-WANI (Prime Minister’s Wi-Fi Access Network Interface) के तहत कई बड़े बदलाव किए हैं। Department of Telecommunications यानी DoT ने 22 मई को नए दिशा-निर्देश जारी किए, जिनका मकसद आम लोगों को बिना परेशानी के इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराना है। सरकार का कहना है कि इन सुधारों से छात्र, यात्री, छोटे कारोबारी और रोजाना इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों को फायदा मिलेगा। नई व्यवस्था के तहत अब लोग अपने लैपटॉप और दूसरे डिवाइस को भी आसानी से PM-WANI नेटवर्क से जोड़ सकेंगे। सरकार चाहती है कि डिजिटल इंडिया अभियान के तहत देश के हर हिस्से में सस्ता इंटरनेट पहुंचे।</p>
<h2><strong>अब QR Code से लैपटॉप और दूसरे डिवाइस कैसे होंगे कनेक्ट?</strong></h2>
</p>
<p>नए नियमों के अनुसार अब यूजर्स QR कोड स्कैन करके अपने लैपटॉप या दूसरे डिवाइस को PM-WANI हॉटस्पॉट से कनेक्ट कर पाएंगे। इसके लिए यूजर को अपने मोबाइल में पहले से ऑथेंटिकेटेड ऐप का इस्तेमाल करना होगा। इससे बार-बार लॉगिन करने की परेशानी कम होगी और इंटरनेट इस्तेमाल करना पहले से ज्यादा आसान बन जाएगा। Department of Telecommunications के मुताबिक यह फीचर सुरक्षित इंटरनेट एक्सेस देने के साथ-साथ यूजर अनुभव को भी बेहतर बनाएगा। खास बात यह है कि सरकार ने सभी PM-WANI से जुड़े ऑपरेटर्स और स्टेकहोल्डर्स को अगले आठ हफ्तों के भीतर इन बदलावों को लागू करने का निर्देश दिया है, ताकि जुलाई 2026 तक यह सुविधा पूरी तरह शुरू हो सके।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">The Department of Telecommunications (DoT) has introduced citizen-friendly reforms under the Prime Minister’s Wi-Fi Access Network Interface (PM-WANI) framework to simplify public Wi-Fi access.</p>
</p>
<p>The new measures include QR-based authentication, flexible short-duration plans and… <a href="https://t.co/bo7mmOdJ61" rel="nofollow" target="_blank">pic.twitter.com/bo7mmOdJ61</a></p>
</p>
<p>— DD News (@DDNewslive) <a href="https://twitter.com/DDNewslive/status/2059214559349719508?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 26, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<h2><strong>सरकार और क्या-क्या बदलाव कर सकती है?</strong></h2>
</p>
<p>सरकार ने छोटे समय वाले इंटरनेट प्लान शुरू करने की भी सलाह दी है। अब यूजर्स को 15 मिनट, 30 मिनट और 60 मिनट जैसे शॉर्ट-ड्यूरेशन Wi-Fi प्लान मिल सकेंगे। ये प्लान खासतौर पर रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, एयरपोर्ट, मॉल और बाकी सार्वजनिक जगहों पर काम आएंगे, जहां लोगों को थोड़े समय के लिए इंटरनेट की जरूरत होती है। मंत्रालय का मानना है कि इससे इंटरनेट ज्यादा किफायती बनेगा और छात्रों व यात्रियों को काफी राहत मिलेगी। इसके अलावा हॉटस्पॉट ऑपरेटर्स की कमाई बढ़ने की भी उम्मीद है क्योंकि ज्यादा लोग छोटी अवधि वाले प्लान खरीद पाएंगे। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक Wi-Fi अब केवल सुविधा नहीं बल्कि एक जरूरी डिजिटल सेवा बन चुका है।</p>
<h2><strong>क्या नए बदलावों से देशभर में डिजिटल कनेक्टिविटी और बेहतर होगी?</strong></h2>
</p>
<p>इन सुधारों के तहत एक और बड़ा बदलाव हॉटस्पॉट के नाम यानी SSID को लेकर किया गया है। अब सभी PM-WANI Wi-Fi नेटवर्क एक तय और समान नाम (फॉर्मेट) में दिखाई देंगे। इससे लोग आसानी से समझ पाएंगे कि कौन सा Wi-Fi असली और भरोसेमंद है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव से फर्जी या गलत Wi-Fi नेटवर्क की पहचान करना आसान हो जाएगा और लोग सुरक्षित तरीके से इंटरनेट इस्तेमाल कर सकेंगे। Union Minister of State for Communications, Chandra Sekhar Pemmasani ने बताया कि PM-WANI देश में सभी लोगों के लिए पब्लिक Wi-Fi उपलब्ध कराने का एक बड़ा प्लेटफॉर्म बन रहा है और इसे और आसान बनाया जा रहा है, वहीं Union Minister of Communications Jyotiraditya Scindia के नेतृत्व में सरकार इस सिस्टम को मजबूत करने और पूरे देश में सस्ता और बेहतर इंटरनेट पहुंचाने पर काम कर रही है। सरकार को उम्मीद है कि इन नए कदमों से भारत में इंटरनेट इस्तेमाल और डिजिटल कनेक्टिविटी दोनों बढ़ेंगे।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/PM-WANI-New-Rules-2026.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[PM-WANI New Rules 2026]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/pm-wani-new-rules-2026-easy-affordable-public-wi-fi-access-across-india-1663891/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/pm-wani-new-rules-2026-easy-affordable-public-wi-fi-access-across-india-1663891/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Tue, 26 May 2026 08:07:57 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Smartwatch के नीचे आखिर क्यों जलती है हरी लाइट? जानिए इसके पीछे की खास टेक्नोलॉजी]]></title>
		<description>आजकल Smartwatch सिर्फ समय देखने की डिवाइस नहीं रह गई है, बल्कि यह हमारी सेहत पर भी नजर रखती है। Smartwatch के नीचे जलने वाली हरी लाइट सिर्फ डिजाइन नहीं, बल्कि एक खास सेंसर टेक्नोलॉजी का हिस्सा है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आजकल लगभग हर किसी की कलाई पर Smartwatch दिखाई देती है। चाहे वह प्रीमियम Apple की Apple Watch हो या कोई बजट फिटनेस वॉच, इन सभी डिवाइसेज में एक चीज कॉमन होती है, नीचे की तरफ चमकने वाली हरी लाइट। कई लोग सोचते हैं कि यह सिर्फ डिजाइन का हिस्सा है, लेकिन असल में यह आपकी Heart Rate मापने के लिए बेहद जरूरी टेक्नोलॉजी है। Smartwatch आपकी नब्ज को मापने के लिए Photoplethysmography नाम की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करती है। इसमें वॉच स्किन पर रोशनी डालती है और फिर यह जांचती है कि कितनी लाइट वापस लौट रही है क्योंकि दिल की धड़कन के साथ शरीर में खून का बहाव बदलता रहता है, इसलिए लौटने वाली रोशनी भी बदलती रहती है। इसी डेटा की मदद से Smartwatch आपकी Pulse Rate का पता लगाती है।</p>
<h2><strong>Smartwatch आखिर Heart Rate कैसे मापती है?</strong></h2>
</p>
<p>दरअसल, Smartwatch में हरी लाइट इस्तेमाल करने के पीछे सीधा संबंध हमारे खून से है। हमारे खून में Hemoglobin नाम का तत्व होता है, जो ऑक्सीजन लेकर पूरे शरीर में घूमता है। यही Hemoglobin खून को लाल रंग देता है। लाल रंग की चीजें हरी रोशनी को ज्यादा Absorb करती हैं, इसलिए जब खून नसों में ज्यादा मात्रा में बहता है, तो हरी लाइट कम वापस लौटती है। Smartwatch इसी फर्क को पकड़कर दिल की धड़कन को पहचान लेती है। विशेषज्ञों के अनुसार हरी रोशनी स्किन के बहुत गहरे हिस्सों तक नहीं जाती और यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है। इससे वॉच को सिर्फ सतह के पास मौजूद Blood Flow की जानकारी मिलती है, जिससे Heart Rate ज्यादा सटीक तरीके से मापा जा सकता है।</p>
<h2><strong>कुछ Smartwatch में हरी लाइट के साथ लाल लाइट भी क्यों जलती है?</strong></h2>
</p>
<p>हालांकि Smartwatch सिर्फ हरी लाइट तक सीमित नहीं रहती। कई एडवांस मॉडल्स में लाल और Infrared लाइट भी दी जाती है। इनका इस्तेमाल Blood Oxygen Level यानी SpO2 मापने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया को Pulse Oximetry कहा जाता है। इसमें वॉच त्वचा पर लाल और Infrared रोशनी डालती है और यह देखती है कि शरीर कितना प्रकाश Absorb कर रहा है। Oxygen से भरपूर Hemoglobin और कम Oxygen वाले Hemoglobin दोनों अलग-अलग तरीके से रोशनी को Absorb करते हैं। Oxygen वाला खून Infrared लाइट ज्यादा Absorb करता है, जबकि कम Oxygen वाला खून Red Light को अलग तरीके से Reflect करता है। Smartwatch इन्हीं बदलावों का एनालिसिस करके आपके Blood Oxygen Level का अनुमान लगाती है।</p>
<h2><strong>क्या Smartwatch अब छोटी Health Machine बन चुकी है?</strong></h2>
</p>
<p>अगर आपकी Smartwatch में सिर्फ हरी लाइट जलती है, तो इसका मतलब है कि वह मुख्य रूप से Heart Rate मापने का काम करती है, लेकिन जिन Smartwatch में लाल और Infrared Sensors भी होते हैं, वे Blood Oxygen (SpO2) जैसी एडवांस हेल्थ जानकारी भी दिखा सकती हैं। आज की Smartwatch सिर्फ समय देखने की चीज नहीं रह गई है। यह एक छोटे हेल्थ मॉनिटर की तरह काम करती है। इससे लोग अपनी Heart Rate, Sleep, Stress और Blood Oxygen जैसी जरूरी चीजों पर आसानी से नजर रख सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Smartwatch.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Smartwatch]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/why-smartwatch-sensors-use-green-light-for-heart-rate-tracking-1663852/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/why-smartwatch-sensors-use-green-light-for-heart-rate-tracking-1663852/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Tue, 26 May 2026 05:51:02 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[अब चांद पर बनेगा इंसानों का बेस, NASA का बड़ा ऐलान]]></title>
		<description>NASA ने Moon Base बनाने की बड़ी योजना पर काम तेज कर दिया है। इस मिशन के जरिए चांद पर स्थायी बेस बनाया जाएगा, जहां Astronauts लंबे समय तक रह सकेंगे। NASA का मानना है कि यह कदम भविष्य में Mars Mission और Deep Space Travel के लिए बेहद अहम साबित होगा। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>NASA अब चांद पर इंसानों की स्थायी बस्ती बसाने की तैयारी कर रहा है। एजेंसी जल्द ही अपने बड़े Moon Base प्रोजेक्ट से जुड़ी नई जानकारी शेयर करेगी। यह मिशन NASA के Artemis Program का हिस्सा है, जिसका मकसद इंसानों को फिर से चांद पर भेजना और आगे चलकर मंगल ग्रह तक पहुंचना है। वॉशिंगटन में होने वाली इस खास ब्रीफिंग में NASA के अधिकारी जारेड आइजैकमैन, लोरी ग्लेज और कार्लोस गार्सिया-गालन शामिल होंगे। NASA का कहना है कि चांद पर बनने वाला यह बेस भविष्य के Mars Mission के लिए बहुत जरूरी साबित हो सकता है। इस दौरान एजेंसी आने वाले Artemis मिशनों, नई अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी और प्राइवेट कंपनियों के साथ पार्टनरशिप को लेकर भी बड़े ऐलान कर सकती है।</p>
<h2><strong>Moon Base के लिए सबसे खास जगह कौन-सी होगी?</strong></h2>
</p>
<p>NASA ने पहली बार 24 मार्च को अपने &#8216;Ignition&#8217; इवेंट में Moon Base की योजना का खुलासा किया था। एजेंसी चंद्रमा के South Pole यानी दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में स्थायी बेस बनाना चाहती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां मौजूद गहरे और हमेशा अंधेरे में रहने वाले क्रेटर्स में बड़ी मात्रा में Water Ice यानी बर्फ मौजूद हो सकती है। यही वजह है कि NASA इस क्षेत्र को भविष्य के मानव मिशनों के लिए सबसे परफेक्ट मान रहा है। यह बर्फ अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पीने का पानी उपलब्ध कराने के साथ-साथ ऑक्सीजन और रॉकेट फ्यूल बनाने में भी मदद कर सकती है। अगर यह योजना सफल होती है, तो इंसान लंबे समय तक चांद पर रह सकेंगे और वहां से गहरे अंतरिक्ष मिशन लॉन्च करना भी आसान हो जाएगा।</p>
<h2><strong>Moon Base बनाने के लिए NASA ने कौन-कौन से बड़े चरण तय किए हैं?</strong></h2>
</p>
<p>NASA ने Moon Base प्रोजेक्ट को तीन बड़े चरणों में बांटा है।</p>
<ul>
<li>पहले चरण में 25 लॉन्च और 21 Moon Landings की योजना है, जिनके जरिए करीब 4000 किलोग्राम सामान चंद्रमा तक पहुंचाया जाएगा। इस चरण का मुख्य उद्देश्य सुरक्षित लैंडिंग साइट्स और बेस बनाने के लिए सही जगह की पहचान करना होगा।</li>
<li>दूसरे चरण में मिशन और बड़ा होगा, जिसमें 27 लॉन्च और 24 लैंडिंग के जरिए लगभग 60,000 किलोग्राम कार्गो भेजा जाएगा। इसी चरण में पहली बार Astronauts Moon Base पर जाएंगे और साल में दो बार वहां मिशन चलाए जाएंगे।</li>
<li>तीसरे और अंतिम चरण में NASA लगातार मानव मौजूदगी कायम करना चाहता है। इसके लिए 29 लॉन्च और 28 लैंडिंग की योजना बनाई गई है, जिनसे करीब 1.5 लाख किलोग्राम सामान चंद्रमा तक पहुंचाया जाएगा।</li>
</ul>
<h2><strong>Artemis मिशन और नई स्पेस टेक्नोलॉजी भविष्य को कैसे बदल सकती है?</strong></h2>
</p>
<p>इस घोषणा से पहले NASA ने Artemis II मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया, जो पिछले 50 वर्षों में पहला Crewed Moon Mission था। इसके बाद एजेंसी ने Artemis III मिशन में भी बदलाव किए हैं। अब इसे Low-Earth Orbit Demonstration Mission के रूप में तैयार किया जा रहा है, जिसमें SpaceX और Blue Origin द्वारा बनाए गए Lunar Landers की Docking और Rendezvous टेक्नोलॉजी का परीक्षण होगा। इसके अलावा NASA SR-1 Freedom नाम का Nuclear-Powered Spacecraft भी डेवलप कर रहा है, जो भविष्य में Deep Space Travel के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। एजेंसी मंगल ग्रह के संभावित Landing Zones की जांच के लिए Robotic Helicopters पर भी काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर Moon Base योजना सफल होती है, तो यह मानव इतिहास में अंतरिक्ष खोज का सबसे बड़ा अध्याय साबित हो सकता है।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>NASA चांद पर Moon Base क्यों बनाना चाहता है?</strong></h2>
</p>
<p>NASA भविष्य में Mars Mission और Deep Space Travel को आसान बनाने के लिए चांद पर स्थायी बेस बनाना चाहता है। इससे Astronauts लंबे समय तक चांद पर रह सकेंगे और अंतरिक्ष मिशनों की तैयारी कर पाएंगे।</p>
<h2><strong>Moon Base चांद के किस हिस्से में बनाया जाएगा?</strong></h2>
</p>
<p>NASA चंद्रमा के South Pole यानी दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में Moon Base बनाना चाहता है क्योंकि वहां Water Ice मिलने की संभावना सबसे ज्यादा है।</p>
<h2><strong>चांद पर मिलने वाली बर्फ का क्या फायदा होगा?</strong></h2>
</p>
<p>इस बर्फ से पीने का पानी, ऑक्सीजन और रॉकेट फ्यूल बनाया जा सकता है। इससे इंसानों के लिए लंबे समय तक चांद पर रहना आसान हो जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/NASA-Moon-Base.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[NASA Moon Base]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/nasa-moon-base-plan-artemis-mission-to-build-permanent-human-colony-on-the-moon-1663833/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/nasa-moon-base-plan-artemis-mission-to-build-permanent-human-colony-on-the-moon-1663833/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 25 May 2026 12:21:09 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[क्या सच में Aadhaar Card धारकों को Electric साइकिल मिल रही FREE? PM Modi का वीडियो हो रहा वायरल, जानें सच्चाई]]></title>
		<description>PM Modi की एक वीडियो ऑनलाइन वायरल हो रही है। इस वीडियो में वह दावा करते दिख रहे हैं कि जिन लोगों के पास आधार कार्ड है, उन्हें सरकार इलेक्ट्रिक साइकिल फ्री मिलेगी। यहां जानें ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>PM Modi</strong> की एक वीडियो इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रही है। इस वीडियो में इस वीडियो में वो एक सभा को संबोधित करते हुए दावा कर रहे हैं कि 25 मई सोमवार यानी आज से आधारकार्ड धारकों को इलेक्टिक साइकिल फ्री दी जाने वाली है। इसके लिए दावेदारों को तुरंत आवेदन करने को भी कहा गया है। अगर आपने भी इस तरह की कोई वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर देखा है, तो यहां जान लें इस वीडियो की पूरी सच्चाई।</p>
</p>
<p>PIB Fact Check ने अपने ऑफिशियल X हैंडल पर <a href="https://www.techlusive.in/hi/news/prime-minister-narendra-modi-become-first-leader-with-100-million-followers-on-instagram-1648428/">PM Modi </a>का यह वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो को Dealdukaaan99 अकाउंट के जरिए Facebook पर शेयर किया गया है। वीडियो में पीएम नरेंद्र मोदी कहते दिख रहे हैं कि जिन भी लोगों के पास आधार कार्ड है, उन्हें इलेक्ट्रिक साइकिल दी जाएगी। हालांकि, इस दावे का PIB ने पूरी तरह से खंडन किया है और इसे Fake बताया है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="hi">🚨 सावधान!<a href="https://twitter.com/hashtag/Facebook?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">#Facebook</a> अकाउंट ‘Dealdukaaan99’ द्वारा प्रधानमंत्री <a href="https://twitter.com/narendramodi?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">@narendramodi</a> के एक AI-जनरेटेड वीडियो के माध्यम से यह दावा किया जा रहा है कि सभी आधार कार्ड धारकों को इलेक्ट्रिक साइकिल दी जाएगी।<a href="https://twitter.com/hashtag/PIBFactCheck?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">#PIBFactCheck</a></p>
</p>
<p>❌ यह दावा फर्जी है।</p>
</p>
<p>✅ प्रधानमंत्री या केंद्र सरकार द्वारा ऐसी कोई… <a href="https://t.co/4CNIUDFt4m" rel="nofollow" target="_blank">pic.twitter.com/4CNIUDFt4m</a></p>
</p>
<p>— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) <a href="https://twitter.com/PIBFactCheck/status/2058839318945566757?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 25, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>सोशल मीडिया पर PM Modi के वीडियो को AI के जरिए बदल दिया गया है। यहां वो कुछ और कह रहे हैं, लेकिन वीडियो में एआई के जरिए उनकी आवाज का क्लोन इस्तेमाल किया गया है और गलत दावे किए जा रहे हैं।</p>
</p>
<p>पोस्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या फिर केंद्र सरकार द्वारा इस तरह का कोई ऐलान नहीं किया गया है। इसके अलावा, सरकारी पोर्टल पर भी इस संबंध में किसी तरह की स्कीम पेश नहीं की गई है। पोस्ट में सलाह दी गई है कि इस तरह के झूठे दावों पर विश्वास न करें। हमेशा ऑफिशियल सोर्स के जरिए ही दावों पर क्रोस-चेक करें।</p>
<h2>फर्जी खबरों से ऐसे रहें सावधान</h2>
</p>
<p>सोर्स की जांच करें- अगर आप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कोई वीडियो या फिर इस तरह की खबर पाते हैं, तो सबसे पहले उसे ऑफिशियल सोर्स के जरिए कंफर्म कर लें।</p>
</p>
<p>Google lens- अगर सोशल मीडिया पर इस तरह की फोटो व वीडियो देखते हैं, जिस पर आपको फेक होने का संदेह होता है, तो आप गूगल लेंस का सहारा ले सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Modi-Scam.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/pm-modi-ai-generated-fake-video-claim-that-all-aadhaar-card-holders-will-be-given-electric-bicycles-1663772/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/pm-modi-ai-generated-fake-video-claim-that-all-aadhaar-card-holders-will-be-given-electric-bicycles-1663772/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 25 May 2026 05:32:15 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[X का बड़ा एक्शन, वायरल कंटेंट कॉपी करने वाले अकाउंट्स की अब खैर नहीं!]]></title>
		<description>X ने अब वायरल वीडियो और मीम्स को कॉपी करके कमाई करने वाले अकाउंट्स पर सख्ती शुरू कर दी है। कंपनी का कहना है कि असली क्रिएटर्स को उनका सही हक मिलना चाहिए। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X अब उन अकाउंट्स पर सख्ती करने जा रहा है जो दूसरों के वायरल वीडियो और मीम्स को कॉपी करके पैसे कमाते हैं। पिछले कुछ समय से प्लेटफॉर्म पर यह आम बात हो गई थी कि कोई वीडियो वायरल होते ही कई बड़े अकाउंट्स उसे तुरंत डाउनलोड करके दोबारा पोस्ट कर देते थे। इससे असली क्रिएटर को बहुत कम पहचान मिलती थी, जबकि रीपोस्ट अकाउंट्स लाखों व्यूज और एंगेजमेंट के जरिए कमाई कर लेते थे। अब कंपनी ने इस पर रोक लगाने के लिए नए बदलाव लागू करने का फैसला किया है।</p>
<h2><strong>किन अकाउंट्स पर X ने शुरू की कार्रवाई?</strong></h2>
</p>
<p>कंपनी के हेड ऑफ प्रोडक्ट Nikita Bier ने बताया कि कई बड़े अकाउंट्स ऑटोमैटिक सिस्टम के जरिए छोटे क्रिएटर्स के कंटेंट को रीअपलोड कर रहे थे। उनका मकसद सिर्फ X के क्रिएटर रेवेन्यू-शेयर प्रोग्राम का फायदा उठाना था। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में कंपनी ने ऐसे कई अकाउंट्स की पहचान की है जो ओरिजिनल क्रिएटर्स को क्रेडिट दिए बिना उनका कंटेंट इस्तेमाल कर रहे थे। X का रेवेन्यू-शेयर प्रोग्राम यूजर्स को पोस्ट पर मिलने वाले एंगेजमेंट के आधार पर कमाई का मौका देता है, लेकिन इसी सिस्टम का कुछ लोग गलत फायदा उठा रहे थे।</p>
<h2><strong>अब असली क्रिएटर्स को कैसे मिलेगा ज्यादा फायदा?</strong></h2>
</p>
<p>अब X ऐसे रीपोस्ट किए गए वीडियो और पोस्ट की पहचान करके उनके इम्प्रेशन्स का बड़ा हिस्सा असली क्रिएटर को देगा। इसका मतलब यह है कि वायरल कंटेंट बनाने वाले लोगों को अब ज्यादा व्यूज, पहचान और कमाई मिल सकेगी, हालांकि कंपनी ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई यूजर किसी वायरल वीडियो पर अपनी राय, जानकारी या मजेदार रिएक्शन देना चाहता है तो वह अभी भी ऐसा कर सकता है। इसके लिए X ने &#8216;Share Video&#8217; और &#8216;Quote&#8217; फीचर इस्तेमाल करने की सलाह दी है, ताकि ओरिजिनल पोस्ट को सही क्रेडिट मिलता रहे। Nikita Bier के मुताबिक, जो लोग Meaningful Commentary जोड़ेंगे उन्हें भी कुछ इम्प्रेशन्स मिलेंगे, लेकिन सबसे ज्यादा फायदा हमेशा असली क्रिएटर को मिलेगा।</p>
<h2><strong>Share Video फीचर में क्या दिक्कत सामने आई?</strong></h2>
</p>
<p>इस दौरान कुछ यूजर्स ने &#8216;Share Video&#8217; फीचर में मौजूद एक समस्या की भी शिकायत की। उनका कहना था कि अगर पोस्ट 280 कैरेक्टर से ज्यादा लंबी हो जाए तो वीडियो एम्बेड होने की बजाय सिर्फ लिंक में बदल जाता है। इस पर जवाब देते हुए Nikita Bier ने माना कि यह एक बग है और इसे जल्द ठीक किया जाएगा, माना जा रहा है कि X का यह कदम उन कंटेंट एग्रीगेशन अकाउंट्स की कमाई कम करने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, जिनका पूरा बिजनेस मॉडल दूसरों के वायरल कंटेंट को दोबारा पोस्ट करके पैसा कमाने पर टिका हुआ था।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2025/10/X-app-draft-sync.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[X app]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/x-cracks-down-on-stolen-viral-videos-to-protect-original-creators-1663686/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/x-cracks-down-on-stolen-viral-videos-to-protect-original-creators-1663686/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 25 May 2026 05:02:13 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[ब्लैक होल के अंदर क्या होता है? नई रिसर्च में बड़ा दावा]]></title>
		<description>ब्लैक होल को लेकर वैज्ञानिकों की सोच बदल सकती है। नई रिसर्च में दावा किया गया है कि हर ब्लैक होल के अंदर ‘Singularity’ होना जरूरी नहीं है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, कुछ खास परिस्थितियों में ब्लैक होल बिना Infinite Gravity के भी बन सकते हैं। अगर यह थ्योरी सही साबित हुई, तो ब्लैक होल और ब्रह्मांड को समझने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ब्लैक होल को लेकर वैज्ञानिकों की सोच अब बदल सकती है। अब तक माना जाता था कि हर ब्लैक होल के अंदर एक &#8216;Singularity&#8217; होती है। इसका मतलब है ऐसा बिंदु जहां Gravity इतनी ज्यादा हो जाती है कि Physics के सारे नियम काम करना बंद कर देते हैं, लेकिन अब एक नई रिसर्च ने इस सोच को चुनौती दी है। जर्मनी की Goethe University Frankfurt के वैज्ञानिक फ्रांसेस्को डी फिलिप्पो का कहना है कि कुछ खास परिस्थितियों में ब्लैक होल बिना Singularity के भी बन सकते हैं। यह रिसर्च अप्रैल 2026 में Physical Review Letters में प्रकाशित हुई है। वैज्ञानिक मान रहे हैं कि अगर यह सही साबित होती है, तो ब्लैक होल को समझने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।</p>
<h2><strong>क्या है ब्लैक होल का नया रहस्य?</strong></h2>
</p>
<p>इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने एक खास तरह के ब्लैक होल पर रिसर्च की, जिन्हें &#8216;Reissner-Nordström Black Hole&#8217; कहा जाता है। ये ऐसे ब्लैक होल होते हैं जिनमें इलेक्ट्रिक चार्ज भी मौजूद होता है। अब तक वैज्ञानिक मानते थे कि ऐसे ब्लैक होल के अंदर दो बड़ी समस्याएं होती हैं।</p>
<ul>
<li>पहली &#8216;Singularity&#8217;, यानी ऐसी जगह जहां Gravity और Space-Time का असर Infinite हो जाता है।</li>
<li>दूसरी &#8216;Cauchy Horizon&#8217;, जिसके बाद यह समझना मुश्किल हो जाता है कि आगे क्या होगा, लेकिन वैज्ञानिक फ्रांसेस्को डी फिलिप्पो की नई रिसर्च कुछ अलग बताती है।</li>
</ul>
<p>उनके मुताबिक, ब्लैक होल का इलेक्ट्रिक चार्ज और उससे निकलने वाला &#8216;हॉकिंग रेडिएशन&#8217; मिलकर इन समस्याओं को रोक सकते हैं। इसका मतलब यह हो सकता है कि ब्लैक होल के अंदर Infinite Gravity बनने की जरूरत ही न पड़े, यानी Singularity शायद बने ही नहीं।</p>
<h2><strong>यह रिसर्च Physics के लिए क्यों अहम है?</strong></h2>
</p>
<p>इस खोज को बहुत खास माना जा रहा है क्योंकि इसका असर सिर्फ चार्ज वाले ब्लैक होल तक सीमित नहीं हो सकता। वैज्ञानिकों का मानना है कि यही नियम ब्रह्मांड के दूसरे ब्लैक होल पर भी लागू हो सकते हैं। इस रिसर्च की सबसे बड़ी बात यह है कि यह क्वांटम फील्ड थ्योरी पर आधारित है। इसमें स्ट्रिंग थ्योरी या लूप क्वांटम ग्रैविटी जैसे ऐसे मॉडल इस्तेमाल नहीं किए गए, जिन्हें अभी तक पूरी तरह सही साबित नहीं किया जा सका है, यही वजह है कि वैज्ञानिक इस अध्ययन को ज्यादा भरोसेमंद मान रहे हैं। अगर आगे चलकर यह सिद्धांत सही साबित होता है, तो ब्लैक होल और Gravity को समझने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।</p>
<h2><strong>क्या ब्लैक होल से डार्क मैटर का रहस्य सुलझ सकता है?</strong></h2>
</p>
<p>इस रिसर्च में यह भी कहा गया है कि अगर ब्लैक होल में Singularity न हो, तो उसके खत्म होने के बाद बहुत छोटे-छोटे माइक्रोस्कोपिक ऑब्जेक्ट्स बन सकते हैं। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यही रहस्यमयी चीजें &#8216;डार्क मैटर&#8217; से जुड़ी हो सकती हैं। डार्क मैटर आज भी ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में से एक है क्योंकि इसे सीधे देखा नहीं जा सकता, लेकिन इसका असर अंतरिक्ष में महसूस होता है, फिलहाल यह रिसर्च सिर्फ एक थ्योरी है और इसे सही साबित करने के लिए अभी और अध्ययन करने होंगे, फिर भी वैज्ञानिक इसे ब्लैक होल की दुनिया में एक बड़ा कदम मान रहे हैं क्योंकि पहली बार बिना सिंगुलैरिटी वाले ब्लैक होल को इतने बेहतर तरीके से समझाने की कोशिश की गई है।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>ब्लैक होल के अंदर आखिर होता क्या है?</strong></h2>
</p>
<p>अब तक वैज्ञानिक मानते थे कि ब्लैक होल के केंद्र में &#8216;Singularity&#8217; होती है, जहां Gravity Infinite हो जाती है और Physics के नियम काम करना बंद कर देते हैं, लेकिन नई रिसर्च के मुताबिक, कुछ ब्लैक होल बिना Singularity के भी मौजूद हो सकते हैं।</p>
<h2><strong>नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने क्या दावा किया है?</strong></h2>
</p>
<p>जर्मनी की Goethe University Frankfurt के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि इलेक्ट्रिक चार्ज और Hawking Radiation मिलकर ब्लैक होल के अंदर Infinite Gravity बनने से रोक सकते हैं, यानी ब्लैक होल बिना Singularity के भी बन सकते हैं।</p>
<h2><strong>Reissner-Nordström Black Hole क्या होता है?</strong></h2>
</p>
<p>यह एक खास तरह का ब्लैक होल होता है जिसमें इलेक्ट्रिक चार्ज मौजूद होता है। नई रिसर्च इसी प्रकार के ब्लैक होल पर आधारित है और वैज्ञानिकों का मानना है कि इनके अंदर की Physics सामान्य ब्लैक होल से अलग हो सकती है।</p>
<h2><strong>इस खोज का Physics और ब्रह्मांड पर क्या असर पड़ सकता है?</strong></h2>
</p>
<p>अगर यह थ्योरी सही साबित होती है, तो ब्लैक होल, Gravity और Space-Time को समझने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। इससे Quantum Physics और General Relativity के बीच के कई रहस्य भी सुलझ सकते हैं।</p>
<h2><strong>क्या इस रिसर्च से डार्क मैटर का रहस्य भी सुलझ सकता है?</strong></h2>
</p>
<p>कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि बिना Singularity वाले ब्लैक होल खत्म होने के बाद छोटे माइक्रोस्कोपिक ऑब्जेक्ट्स छोड़ सकते हैं। संभव है कि यही रहस्यमयी चीजें &#8216;Dark Matter&#8217; से जुड़ी हों, हालांकि इसे साबित करने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Black-Hole.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Black Hole]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/new-black-hole-study-suggests-singularities-may-not-exist-inside-black-holes-1663683/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/new-black-hole-study-suggests-singularities-may-not-exist-inside-black-holes-1663683/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sun, 24 May 2026 05:07:35 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[मंगल से आई चौंकाने वाली तस्वीर, तीन पत्थरों ने वैज्ञानिकों का खींचा ध्यान]]></title>
		<description>मंगल ग्रह से आई एक नई तस्वीर ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। NASA के Perseverance Rover ने तीन पत्थरों जैसी दिखने वाली एक अनोखी चट्टान की फोटो भेजी है, जो ऐसे नजर आती है जैसे किसी ने उन्हें एक-दूसरे के ऊपर सजाकर रखा हो। वैज्ञानिक अब इसके पीछे की प्राकृतिक वजहों को समझने में जुटे हैं। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अंतरिक्ष की दुनिया में एक बार फिर ऐसा नजारा सामने आया है जिसने वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम लोगों को भी चौंका दिया है। NASA के मशहूर Perseverance Rover ने मंगल ग्रह पर एक अजीब चट्टान की तस्वीर भेजी है। यह चट्टान ऐसी दिखती है जैसे तीन पत्थरों को एक-दूसरे के ऊपर बहुत ही सही तरीके से रखा गया हो। यह तस्वीर 13 मई 2026 को मिशन के Sol 1859 के दौरान ली गई थी। तस्वीर को देखकर पहली नजर में ऐसा लगता है जैसे किसी ने जानबूझकर पत्थरों को सजाकर रखा हो। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर यह फोटो तेजी से वायरल हो गई। कुछ लोग इसे एलियंस से जोड़कर देख रहे हैं, तो कई लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर यह पत्थर इस तरह कैसे बने।</p>
<h2><strong>आखिर क्या है इन तीन पत्थरों का राज?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कोई रहस्यमयी चीज नहीं है, बल्कि मंगल ग्रह पर होने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया का असर हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ये पत्थर पहले एक बड़ी चट्टान का हिस्सा रहे होंगे, जो समय के साथ टूटकर अलग-अलग परतों जैसे दिखने लगे। वैज्ञानिक मानते हैं कि मंगल पर करोड़ों सालों तक चलने वाली तेज हवाओं और कभी वहां बहने वाले पानी ने चट्टानों को इस तरह का आकार दिया होगा। आज मंगल ग्रह सूखा और सुनसान नजर आता है, लेकिन कई रिसर्च बताती हैं कि बहुत पहले वहां नदियां, झीलें और शायद बारिश भी हुआ करती थी। NASA के दूसरे मिशनों से भी ऐसे संकेत मिले हैं कि एक समय मंगल का मौसम काफी हद तक पृथ्वी जैसा रहा होगा, लगातार हवाओं और मौसम के असर से वहां की चट्टानें धीरे-धीरे कटती और बदलती रहीं, जिससे ऐसे अजीब और रहस्यमयी आकार बन गए।</p>
<h2><strong>मंगल पर पहले भी दिख चुकी हैं ऐसी अजीब चीजें?</strong></h2>
</p>
<p>यह पहली बार नहीं है जब Perseverance Rover ने मंगल ग्रह पर कोई अजीब चीज देखी हो। पिछले कुछ सालों में रोवर ने कई ऐसी तस्वीरें भेजी हैं जिन्हें देखकर लोग हैरान रह गए। कभी पत्थरों पर तेंदुए जैसे धब्बे दिखाई दिए, तो कभी धागों की तरह उलझी हुई आकृतियां और पॉपकॉर्न जैसी चट्टानें नजर आईं। शुरुआत में लोगों को ये चीजें बहुत रहस्यमयी लगीं, लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने बताया कि ये सब मंगल ग्रह की प्राकृतिक बनावट और वहां के मौसम की वजह से बने आकार हैं। मंगल ग्रह हमेशा से लोगों के लिए रहस्य और जिज्ञासा का विषय रहा है। साल 1976 में NASA के Viking मिशन ने भी एक ऐसी तस्वीर ली थी जिसमें पहाड़ का आकार इंसानी चेहरे जैसा दिख रहा था। उस समय लोगों ने इसे लेकर कई कहानियां बना ली थीं, लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया कि वह सिर्फ रोशनी और छाया का असर था।</p>
<h2><strong>क्या मंगल ग्रह के ये रहस्य भविष्य में बड़े खुलासे करेंगे?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों का कहना है कि मंगल ग्रह पर दिखने वाली ऐसी अनोखी चीजें हमें वहां के पुराने समय और मौसम के बारे में समझने में मदद करती हैं। हर नई तस्वीर से यह पता चलता है कि मंगल सिर्फ सूखा और वीरान ग्रह नहीं था। Perseverance Rover लगातार मंगल पर नई-नई खोज कर रहा है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में यह रोवर ऐसे और बड़े राज खोल सकता है, जिनसे पता चल सके कि मंगल पर कभी जीवन के निशान मौजूद थे या नहीं।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>मंगल ग्रह पर दिखने वाले ये तीन पत्थर आखिर क्या हैं?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों के मुताबिक यह कोई Artificial Structure नहीं है। माना जा रहा है कि ये पत्थर पहले एक बड़ी चट्टान का हिस्सा थे, जो समय के साथ टूटकर इस अनोखे आकार में बदल गए।</p>
<h2><strong>क्या ये पत्थर एलियंस से जुड़े हो सकते हैं?</strong></h2>
</p>
<p>फिलहाल NASA और वैज्ञानिकों ने ऐसा कोई सबूत नहीं पाया है जो इन्हें एलियंस से जोड़ता हो। वैज्ञानिक इसे मंगल की प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रिया का परिणाम मान रहे हैं।</p>
<h2><strong>यह तस्वीर कब और किसने ली?</strong></h2>
</p>
<p>यह तस्वीर Perseverance Rover ने 13 मई 2026 को अपने मिशन के Sol 1859 के दौरान ली थी।</p>
<h2><strong>मंगल पर पहले भी ऐसी रहस्यमयी चीजें दिख चुकी हैं?</strong></h2>
</p>
<p>इससे पहले भी मंगल पर तेंदुए जैसे धब्बे, पॉपकॉर्न जैसी चट्टानें और इंसानी चेहरे जैसी आकृतियां दिखाई दे चुकी हैं।</p>
<h2><strong>इन खोजों से वैज्ञानिकों को क्या फायदा होता है?</strong></h2>
</p>
<p>ऐसी तस्वीरों से वैज्ञानिक मंगल ग्रह के पुराने मौसम, वहां बहने वाले पानी और संभावित जीवन के संकेतों को समझने की कोशिश करते हैं। इससे भविष्य की रिसर्च को भी मदद मिलती है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Mars-rock-formation.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[NASA’s Perseverance Rover captured an unusual rock formation on the surface of Mars. (Image credit: NASA/JPL-Caltech/ASU)]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/nasa-perseverance-rover-spots-mysterious-stacked-rocks-on-mars-sparks-alien-speculation-1663617/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/nasa-perseverance-rover-spots-mysterious-stacked-rocks-on-mars-sparks-alien-speculation-1663617/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
  </channel>
</rss>