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	<title><![CDATA[Latest Technology &amp; Gadgets - News in Hindi | News &amp; Reviews on Gadgets, Smart Phones, Mobile Apps &amp; Gaming | टेक न्यूज़ इन हिंदी | TECHLUSIVE.in Hindi]]></title>
	<description><![CDATA[Latest Technology &amp; Gadgets - News in Hindi | News &amp; Reviews on Gadgets, Smart Phones, Mobile Apps &amp; Gaming | टेक न्यूज़ इन हिंदी | TECHLUSIVE.in Hindi]]></description>
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		<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 07:32:49 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[13 अरब प्रकाश वर्ष दूर ब्रह्मांड में मिली खास चीज, वैज्ञानिकों ने किया बड़ा खुलासा]]></title>
		<description>ब्रह्मांड की शुरुआत के सिर्फ 70 करोड़ साल बाद मौजूद एक दूर की आकाशगंगा में वैज्ञानिकों ने तारों को बनाने वाली गैस का विशाल भंडार खोजा है। यह आकाशगंगा पृथ्वी से करीब 13 अरब प्रकाश वर्ष दूर है। इस खोज से शुरुआती ब्रह्मांड में आकाशगंगाओं के तेजी से बनने के रहस्य समझने में मदद मिलेगी। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ब्रह्मांड की शुरुआत के केवल 70 करोड़ साल बाद मौजूद एक बेहद दूर की आकाशगंगा में वैज्ञानिकों ने तारों के निर्माण के लिए जरूरी गैस का विशाल भंडार खोजा है। इस आकाशगंगा का नाम REBELS-25 है और यह पृथ्वी से करीब 13 अरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज यह समझने में मदद करेगी कि ब्रह्मांड के शुरुआती दौर में आकाशगंगाएं इतनी तेजी से कैसे डेवलप हुईं। अब तक इतनी दूर स्थित आकाशगंगाओं में इस तरह की गैस का केवल अनुमान लगाया जाता था, लेकिन पहली बार इसे सीधे तौर पर देखा गया है।</p>
<h2><strong>वैज्ञानिकों ने यह खोज कैसे की?</strong></h2>
</p>
<p>यह अध्ययन जर्नल Monthly Notices of the Royal Astronomical Society में प्रकाशित हुआ है। रिसर्च का नेतृत्व नीदरलैंड की लीडेन यूनिवर्सिटी की Astronomer Karin Öberg ने किया। उनकी टीम ने अमेरिका के NSF Very Large Array (VLA) और चिली स्थित ALMA Observatory का इस्तेमाल करते हुए लगभग 40 घंटे तक REBELS-25 से आने वाले बेहद कमजोर संकेतों की खोज की। वैज्ञानिकों ने Carbon Monoxide Gas के CO(3-2) सिग्नल का पता लगाया, जो अब तक की सबसे दूर स्थित और सबसे पुराने समय की ऐसी खोज मानी जा रही है। इन आंकड़ों के आधार पर रिसर्चर्स ने अनुमान लगाया कि इस आकाशगंगा में लगभग 100 अरब सूर्यों के बराबर Molecular gas मौजूद है।</p>
<h2><strong>95% गैस होने का क्या मतलब है?</strong></h2>
</p>
<p>रिसर्च के अनुसार REBELS-25 का लगभग 95% Mass अभी भी गैस के रूप में मौजूद है। इसका मतलब है कि उस समय यह आकाशगंगा नए तारों के निर्माण के लिए भरपूर ईंधन से भरी हुई थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि यही वजह हो सकती है कि शुरुआती ब्रह्मांड की कुछ आकाशगंगाएं बहुत कम समय में तेजी से डेवलप हो गईं। यह खोज इस धारणा को मजबूत करती है कि कई नई आकाशगंगाएं अपने शुरुआती दौर में ही विशाल गैस भंडार के साथ मौजूद थीं और लगातार नए तारों का निर्माण कर रही थीं।</p>
<h2><strong>यह खोज विज्ञान के लिए क्यों खास है?</strong></h2>
</p>
<p>हालांकि इतनी दूर स्थित गैस का पता लगाना बेहद चुनौतीपूर्ण था। इसकी वजह Cosmic Microwave Background (CMB) है, जो बिग बैंग के बाद बची हुई Radiation है और दूर की गैस के संकेतों को कमजोर कर देती है। इसके बावजूद वैज्ञानिकों ने सफलतापूर्वक इन संकेतों को रिकॉर्ड किया। आने वाले वर्षों में प्रस्तावित Next-Generation Very Large Array (ngVLA) टेलीस्कोप इस तरह की खोजों को और आसान बनाएगा। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि भविष्य में वे ब्रह्मांड की शुरुआती आकाशगंगाओं का और विस्तार से अध्ययन कर पाएंगे और यह जान सकेंगे कि उन्होंने इतनी तेज गति से डेवलप कैसे किया।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Star-Forming-Gas.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Star-Forming Gas]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 05:12:19 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[हिंद महासागर की गहराई में मिला रहस्यमयी कब्रिस्तान, वैज्ञानिक भी हुए हैरान]]></title>
		<description>हिंद महासागर की गहराइयों में वैज्ञानिकों को एक ऐसी रहस्यमयी जगह मिली है, जहां बड़ी संख्या में व्हेलों के अवशेष और लाखों साल पुराने Fossils मौजूद हैं। इस इलाके को &#039;Whale Necropolis&#039; कहा जा रहा है। यह खोज समुद्र की गहराइयों में मौजूद अनोखे जीवों, व्हेलों के इतिहास और पृथ्वी के प्राचीन समुद्री जीवन को समझने में अहम साबित हो सकती है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पृथ्वी की लगभग 70% सतह महासागरों से ढकी हुई है, लेकिन समुद्र की तलहटी का बड़ा हिस्सा आज भी रहस्यों से भरा हुआ है। हाल ही में वैज्ञानिकों ने हिंद महासागर की गहराइयों में एक ऐसी जगह की खोज की है, जिसे उन्होंने &#8216;Whale Necropolis&#8217; यानी व्हेलों का कब्रिस्तान नाम दिया है। यह खोज Southeastern Indian Ocean के डायमंटिना जोन में हुई है। यहां समुद्र की गहराई में बड़ी संख्या में मृत व्हेलों के अवशेष मिले हैं, जिनके आसपास एक अनोखा समुद्री Ecosystem डेवलप हो चुका है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह दुनिया के सबसे गहरे व्हेल-फॉल इकोसिस्टम में से एक है, जहां मृत व्हेलों के शरीर कई समुद्री जीवों के लिए भोजन का स्रोत बनते हैं।</p>
<h2><strong>मृत व्हेलों के आसपास कौन-कौन से जीव रहते हैं?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों के मुताबिक जब कोई व्हेल समुद्र की गहराई में मरकर नीचे डूब जाती है, तो उसका शव कई दशकों तक दूसरे समुद्री जीवों के लिए भोजन का बड़ा स्रोत बना रहता है। इस इलाके में व्हेलों की हड्डियों और अवशेषों पर बड़ी संख्या में ब्रिटल स्टार, हड्डियां खाने वाले कीड़े और क्लैम जैसे जीव मिले हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यहां कुछ ऐसे जीव भी हो सकते हैं, जिन्हें विज्ञान ने पहले कभी नहीं देखा या दर्ज किया है। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कई जीव शायद खासतौर पर व्हेलों के शवों के आसपास रहने और भोजन पाने के लिए ही डेवलप हुए हैं। यह खोज वैज्ञानिकों को समुद्र की गहराइयों में जीवन कैसे डेवलप होता है, इसे बेहतर तरीके से समझने में मदद करेगी।</p>
<h2><strong>करोड़ों साल पुराने Whale Fossil क्यों हैं खास?</strong></h2>
</p>
<p>इस खोज की सबसे खास बात सिर्फ हाल में मरी हुई व्हेलों के अवशेष नहीं हैं, बल्कि यहां बड़ी संख्या में बेहद पुराने व्हेल Fossils भी मिले हैं। वैज्ञानिक अब तक 476 व्हेल Fossils की पहचान कर चुके हैं, जिनमें से कुछ करीब 53 लाख साल पुराने हैं। हैरानी की बात यह है कि इन Fossils को खोजने के लिए ज्यादा खुदाई नहीं करनी पड़ी, क्योंकि ये समुद्र की तलहटी पर पत्थरों जैसी आकृतियों में दिखाई दे रहे थे। इसी खोज के दौरान वैज्ञानिकों को व्हेल की एक नई और पहले कभी न देखी गई प्रजाति का Fossils भी मिला, जिसे Pterocetus Diamantinae नाम दिया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज उन्हें करोड़ों साल पहले समुद्र में रहने वाले जीवों और उनके विकास को बेहतर तरीके से समझने में मदद करेगी।</p>
<h2><strong>यह रहस्यमयी व्हेल कब्रिस्तान कैसे बना होगा?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज अभी केवल शुरुआत है। अब तक केवल 0.64 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का ही सर्वे किया गया है, जबकि डायमंटिना जोन लगभग 1200 किलोमीटर तक फैला हुआ है। ऐसे में यहां सैकड़ों या हजारों और Fossils छिपे हो सकते हैं। शोधकर्ता अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में व्हेलों के अवशेष एक ही इलाके में कैसे जमा हुए। एक सिद्धांत के अनुसार समुद्री धाराओं और समुद्र की विशेष भौगोलिक बनावट ने व्हेलों के शवों को इस क्षेत्र में पहुंचाकर जमा कर दिया होगा। अगर यह सिद्धांत सही साबित होता है, तो भविष्य में वैज्ञानिक दुनिया के बाकी हिस्सों में भी ऐसे प्राचीन व्हेल कब्रिस्तानों की खोज कर सकते हैं। यह खोज समुद्री जीवन, व्हेलों के विकास और पृथ्वी के प्राचीन इतिहास को समझने में नई जानकारी दे सकती है।</p>
]]></content:encoded>
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		<media:description type='plain'><![CDATA[Whale Necropolis

image credit: Google]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/scientists-discover-hidden-whale-necropolis-in-indian-ocean-5-3-million-year-old-fossils-found-1665921/</guid>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sun, 14 Jun 2026 08:16:35 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[लॉन्च के कुछ दिन बाद ही बंद हुए Anthropic के ये AI मॉडल, आखिर क्यों?]]></title>
		<description>Anthropic के दो नए AI मॉडल Claude Fable 5 और Claude Mythos 5 लॉन्च के कुछ ही दिनों बाद विवादों में आ गए हैं। अमेरिकी सरकार को चिंता है कि इनकी कुछ क्षमताओं का गलत इस्तेमाल साइबर हमलों और सुरक्षा से जुड़े मामलों में हो सकता है। इसी वजह से दोनों मॉडलों की पहुंच फिलहाल अस्थायी रूप से रोक दी गई है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Anthropic की नई AI टेक्नोलॉजी लॉन्च होने के कुछ ही दिनों बाद विवादों में घिर गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सरकार ने कंपनी को अपने दो नए AI मॉडल Claude Fable 5 और Claude Mythos 5 की पहुंच अस्थायी रूप से बंद करने का निर्देश दिया है। सरकार को चिंता है कि इन मॉडलों की कुछ क्षमताओं का गलत इस्तेमाल साइबर हमलों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में किया जा सकता है। Anthropic ने बताया कि उसे 12 जून को यह निर्देश मिला था और उसने इसका पालन करते हुए दोनों मॉडलों की पहुंच रोक दी है। हालांकि कंपनी के बाकी AI मॉडल अभी भी सामान्य रूप से उपलब्ध हैं। इस फैसले ने AI इंडस्ट्री में नई बहस छेड़ दी है कि AI को कितना खुला रखा जाना चाहिए और उन पर कितनी निगरानी होनी चाहिए।</p>
<h2><strong>Claude Mythos 5 और Fable 5 में क्या खास था?</strong></h2>
</p>
<p>Claude Mythos 5 को Anthropic ने साइबर सुरक्षा के लिए बनाया गया अपना सबसे एडवांस AI मॉडल बताया था। कंपनी का कहना था कि यह सॉफ्टवेयर, ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउजर में छिपी खामियों को बहुत अच्छी तरह पहचान सकता है। इसी वजह से इसे आम लोगों के लिए लॉन्च नहीं किया गया। इसे सिर्फ Project Glasswing नाम के खास प्रोग्राम के तहत कुछ कंपनियों को ही इस्तेमाल करने दिया गया था। इनमें Amazon, Apple, Google, Microsoft और CrowdStrike जैसी बड़ी कंपनियां शामिल थीं। वहीं Claude Fable 5 को Mythos 5 का ऐसा वर्जन माना जा रहा था, जिसे आम यूजर्स के लिए तैयार किया गया था।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">The US government, citing national security authorities, has issued an export control directive to suspend all access to Fable 5 and Mythos 5 by any foreign national, whether inside or outside the United States, including foreign national Anthropic employees.</p>
</p>
<p>The net effect of…</p>
</p>
<p>— Anthropic (@AnthropicAI) <a href="https://x.com/AnthropicAI/status/2065597531644743999?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">June 13, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<h2><strong>जेलब्रेक टेक्नोलॉजी को लेकर विवाद क्यों हुआ?</strong></h2>
</p>
<p>Anthropic के अनुसार सरकार की चिंता एक ऐसे तरीके को लेकर है, जिससे Claude Fable 5 की कुछ सुरक्षा सीमाओं को पार किया जा सकता था। इसे AI की दुनिया में &#8216;jailbreak&#8217; कहा जाता है। आसान शब्दों में कहें तो jailbreak वह तरीका है, जिसमें कोई व्यक्ति AI को उसकी सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज करके ऐसे जवाब देने के लिए उकसाने की कोशिश करता है, जो सामान्य तौर पर उसे नहीं देने चाहिए। कंपनी का कहना है कि कुछ उदाहरणों में यह मॉडल कोड की जांच करके सॉफ्टवेयर की खामियों का पता लगा सकता था। हालांकि Anthropic का दावा है कि ऐसी क्षमता सिर्फ उसके मॉडल में नहीं, बल्कि कई दूसरे AI मॉडलों में भी मौजूद है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अक्सर ऐसे टूल्स का इस्तेमाल सिस्टम की कमियां खोजने और उन्हें ठीक करने के लिए करते हैं। कंपनी ने यह भी कहा कि उसके सबसे जरूरी सुरक्षा सिस्टम अलग से काम करते हैं और किसी भी खतरनाक या गलत जानकारी को रोकने की कोशिश करते रहते हैं।</p>
<h2><strong>Anthropic इस फैसले का विरोध क्यों कर रही है?</strong></h2>
</p>
<p>अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि Mythos 5 जैसी AI अगर गलत लोगों के हाथ लग जाए, तो उसका गलत इस्तेमाल हो सकता है। इसी वजह से दोनों AI मॉडलों की जांच पूरी होने तक उनकी पहुंच अस्थायी रूप से रोक दी गई है। हालांकि Anthropic इस फैसले से सहमत नहीं है। कंपनी का कहना है कि सिर्फ एक सीमित जेलब्रेक मामले के आधार पर किसी AI मॉडल को बंद करना सही नहीं है। Anthropic का तर्क है कि अगर ऐसा नियम सभी AI कंपनियों पर लागू किया गया, तो भविष्य में नए AI मॉडल लॉन्च करना काफी मुश्किल हो जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/02/Anthropic.png' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Anthropic has disabled access to Claude Fable 5 and Mythos 5 after a US government order citing security concerns.]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sun, 14 Jun 2026 06:41:43 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[वैज्ञानिकों ने सुलझाया ब्रह्मांड का बड़ा रहस्य, आखिर क्यों खत्म हो गईं शुरुआती समय की बड़ी-बड़ी Galaxies?]]></title>
		<description>ब्रह्मांड के शुरुआती दौर की कई विशाल आकाशगंगाएं बहुत जल्दी Inactive क्यों हो गईं, यह लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए एक रहस्य था। अब वैज्ञानिकों ने इसका पता लगाया है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Astronomers ने ब्रह्मांड के शुरुआती समय से जुड़े एक बड़े रहस्य का जवाब खोजने का दावा किया है। वैज्ञानिक लंबे समय से यह जानना चाहते थे कि बिग बैंग के बाद बनी कुछ विशाल आकाशगंगाएं इतनी जल्दी Inactive क्यों हो गईं। आमतौर पर शुरुआती ब्रह्मांड की आकाशगंगाओं में बड़ी संख्या में नए तारे बनने चाहिए थे, लेकिन कई बड़ी आकाशगंगाओं में यह प्रक्रिया दो अरब साल से भी कम समय में लगभग रुक गई। अब वैज्ञानिकों को लगता है कि उन्हें इसकी वजह मिल गई है। James Webb Space Telescope (JWST) और Atacama Large Millimeter/submillimeter Array (ALMA) की मदद से रिसर्चर्स ने एक बेहद शक्तिशाली गैसीय हवा का पता लगाया है, जिसे &#8216;Galaxy Killer Wind&#8217; कहा जा रहा है। यह आकाशगंगा के भीतर मौजूद गैस को बाहर निकाल देती है और नए तारों के बनने की प्रक्रिया को रोक देती है।</p>
<h2><strong>CRISTAL-02 में वैज्ञानिकों ने कौन-सी बड़ी खोज की?</strong></h2>
</p>
<p>यह रिसर्च 10 जून को Monthly Notices of the Royal Astronomical Society जर्नल में प्रकाशित हुआ है। Swinburne University of Technology की वैज्ञानिक रेबेका डेविस और उनकी टीम ने CRISTAL-02 नाम की एक Milky Way System का अध्ययन किया। यह सिस्टम हमें उस समय की दिखाई देती है जब बिग बैंग के सिर्फ 1.1 अरब साल ही बीते थे। दरअसल, यह दो आकाशगंगाओं के आपस में टकराकर एक बनने की प्रक्रिया में है। JWST और ALMA से मिले डेटा के एनालिसिस में वैज्ञानिकों ने पाया कि इस आकाशगंगा से ठंडी गैस का एक बहुत बड़ा बादल तेजी से बाहर निकल रहा है। यह गैस करीब 640 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से बाहर जा रही है, जो वहां नए तारों के बनने की गति से लगभग दोगुनी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर गैस इसी तरह बाहर निकलती रही, तो नए तारे बनाने के लिए जरूरी ईंधन 10 करोड़ साल से भी कम समय में खत्म हो सकता है। इसके बाद आकाशगंगा में नए तारों का बनना लगभग रुक जाएगा।</p>
<h2><strong>आकाशगंगा से गैस बाहर निकालने के लिए कौन जिम्मेदार है?</strong></h2>
</p>
<p>रिसर्च में सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि इस तेज गैसीय हवा के पीछे कोई विशाल ब्लैक होल नहीं, बल्कि सुपरनोवा विस्फोट हैं। सुपरनोवा तब होता है जब किसी बड़े तारे का जीवन खत्म होने पर उसमें जोरदार विस्फोट होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, जब दो आकाशगंगाएं आपस में टकराती हैं तो वहां बहुत तेजी से नए तारे बनने लगते हैं। CRISTAL-02 में भी सामान्य से लगभग तीन गुना ज्यादा तेजी से तारे बन रहे थे। इन नए बने बड़े तारों के जीवन के अंत में हुए शक्तिशाली सुपरनोवा विस्फोटों ने इतनी एनर्जी पैदा की कि उन्होंने आकाशगंगा के अंदर मौजूद गैस को बाहर धकेलना शुरू कर दिया। यही गैस नए तारों के बनने के लिए जरूरी होती है। जब गैस कम होने लगती है, तो नए तारे बनना भी रुक जाता है और धीरे-धीरे पूरी आकाशगंगा Inactive हो जाती है।</p>
<h2><strong>क्या यही प्रक्रिया इन सब का कारण बनी?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्रह्मांड के शुरुआती दौर में ऐसी घटनाएं काफी आम रही होंगी। रिसर्च के मुताबिक उस समय मौजूद लगभग आधी बड़ी आकाशगंगाएं किसी न किसी दूसरी आकाशगंगा के साथ टकराने या विलय होने की प्रक्रिया से गुजर रही थीं। अगर ऐसी तेज गैसीय हवाएं दूसरी आकाशगंगाओं में भी मौजूद थीं, तो यही वजह हो सकती है कि कई विशाल आकाशगंगाओं में नए तारे बहुत जल्दी बनना बंद हो गए और वे समय से पहले Inactive हो गईं। यह खोज वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करेगी कि आकाशगंगाएं समय के साथ कैसे डेवलप होती हैं और शुरुआती ब्रह्मांड में तारे बनने और खत्म होने की प्रक्रिया कैसे काम करती थी। शोधकर्ताओं का कहना है कि भविष्य में JWST और ALMA जैसे शक्तिशाली टेलीस्कोप की मदद से ऐसे और उदाहरण खोजे जा सकते हैं। इससे ब्रह्मांड के शुरुआती इतिहास और उसके विकास को और बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Galaxies.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Galaxies]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/astronomers-discover-why-massive-galaxies-died-early-in-the-universe-jwst-and-alma-reveal-galaxy-killer-wind-1665862/</guid>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sun, 14 Jun 2026 05:25:20 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[मोबाइल पर नहीं आएगा तेज साउंड वाला अलर्ट मैसेज, इमरजेंसी सर्विस पर लगी रोक]]></title>
		<description>NDMA ने मई में जारी हुई सेल ब्रॉडकास्ट सर्विस पर रोक लगा दी है। इस सिस्टम का मुख्य कार्य आपदा के समय लोगों तक इमरजेंसी अलर्ट पहुंचाना था।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भारत सरकार ने पिछले महीने यानी मई में फोन पर तेज अलर्ट वाले नोटिफिकेशन इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम की शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य आपात स्थिति में सभी लोगों को मैसेज के रूप में तुरंत सूचना प्रदान करना था। हालांकि, अब इस सेवा को अगले आदेश तक बंद करने का फैसला लिया गया है। इसकी जानकारी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी NDMA ने दी है।</p>
</p>
<p>NDMA की ओर से एडवाइजरी में सेल ब्रॉडकास्ट सर्विस को बंद करने की घोषणा की गई है। इस सर्विस के तहत आपदा के समय लोगों को उनके फोन पर तेज नोटिफिकेशन साउंड के साथ मैसेज मिलता था। फिलहाल, इस सेवा पर रोक लगने के पीछे की वजह अभी तक नहीं बताई गई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि प्राधिकरण अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर इसमें इस्तेमाल होने वाली तकनीक को अपग्रेड करने पर काम कर रही है।</p>
<h2>कैसे काम करती है सेल ब्रॉडकास्ट सर्विस ?</h2>
</p>
<p>इस सर्विस में एडवांस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह बिना इंटरनेट के मोबाइल टावर का उपयोग करके सभी फोन्स में सिग्नल भेजती है। इसके द्वारा भेजे गए अलर्ट से सिग्नल जाम नहीं होता है। यदि स्मार्टफोन साइलेंट मोड पर हो, तो भी तेज अलार्म बजता है, जिससे उस यूजर को अलर्ट के बारे में पता चल जाता है।</p>
</p>
<p>इस सिस्टम को फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) ने दूरसंचार विभाग (DoT), एनडीएमए और गृह मंत्रालय ने मिलकर बनाया है। इस सेवा के माध्यम से आपदा के समय अलर्ट भेजा जाता है।</p>
<h2>कब शुरू हुई टेस्टिंग ?</h2>
</p>
<p>आपको बता दें कि इस सर्विस की टेस्टिंग मई की शुरुआत में की गई थी। उस वक्त सभी लोगों के फोन पर इमरजेंसी अलर्ट भेजा गया। इसके बाद महीने के मध्य में इस सेवा को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया गया। अब इस पर रोक लगा दी गई है।</p>
<h2>FAQs</h2>
</p>
<p>Q1. सेल ब्रॉडकास्ट सर्विस क्या है?</p>
<p>Ans. यह एक इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम है, जिसके माध्यम से सरकार आपदा में लोगों के मोबाइल फोन पर तुरंत चेतावनी का संदेश भेजती है।</p>
</p>
<p>Q2. क्या सेल ब्रॉडकास्ट सर्विस फिलहाल बंद कर दी गई है?</p>
<p>Ans. जी हां, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने इस सेवा पर रोक लगा दी है।</p>
</p>
<p>Q3. सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट कैसे काम करता है?</p>
<p>Ans. यह सिस्टम मोबाइल टावरों के जरिए सीधे फोन तक नोटिफिकेशन पहुंचाता है। इसके लिए यह सिस्टम इंटरनेट का उपयोग नहीं करता है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/NDMA-alert.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[NDMA alert]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/cell-broadcast-service-suspended-by-national-disaster-management-authority-india-ndma-1665837/</guid>
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		<dc:creator><![CDATA[ajay verma]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sun, 14 Jun 2026 02:50:09 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[FIFA World Cup 2026: AR से Connected Ball तक, इन 5 हाईटेक तकनीकों का हो रहा इस्तेमाल]]></title>
		<description>इस वर्ष FIFA World Cup 2026 अपने खिलाड़ियों के लिए नहीं बल्कि तकनीक की वजह से खबरों में बना हुआ है। इस टूर्नामेंट में Augmented Reality से लेकर AI तक का इस्तेमाल किया गया है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>FIFA World Cup 2026</strong> का आगाज हो चुका है। दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट में इस बार 48 टीमों ने हिस्सा लिया है, लेकिन इस बार सबकी नजर सिर्फ खिलाड़ियों और उनकी टीमों पर ही नहीं, बल्कि नई टेक्नोलॉजी पर भी है, जिनका उपयोग दर्शकों को बेहतर अनुभव प्रदान करने के लिए इस प्रतियोगिता में दिया गया है। हम आपको यहां टूर्नामेंट में इस्तेमाल किए जाने वाली टॉप-5 तकनीकों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनसे फैंस और खिलाड़ियों दोनों का एक्सपीरियंस शानदार बनेगा। आइए जानते हैं&#8230;</p>
<h2>AR (Augmented Reality)</h2>
</p>
<p>FIFA World Cup 2026 में एआई यानी ऑगमेंटेड रियलिटी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इससे स्टेडियम में बैठे दर्शक अपने स्मार्टफोन या विशेष डिवाइस की मदद से खिलाड़ियों के आंकड़ों से लेकर रिप्ले तक को रियल-टाइम में देख सकेंगे। इससे लोगों का अनुभव पहले से ज्यादा इंटरैक्टिव और रोमांचक हो जाएगा।</p>
<h2>Connected Ball</h2>
</p>
<p>फीफा वर्ल्ड कप में खास तकनीक वाली फुटबॉल का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस बॉल के अंदर विशेष सेंसर लगाए गए हैं, जो उसकी हर मूवमेंट को मॉनिटर करके डेटा तैयार करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस टेक से ऑफसाइड और हैंडबॉल जैसे मामलों से जुड़े फैसले लेने में आसानी होगी।</p>
<h2>Smart Stadium टेक्नोलॉजी</h2>
</p>
<p>फीफा वर्ल्ड कप को बेहतर बनाने के लिए स्मार्ट स्टेडियम तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे लोगों को स्टेडियम में हाई-स्पीड इंटरनेट मिलेगा। डिजिटल टिकट मिलेगी। इसके अलावा, सुरक्षा प्रणाली बेहतर होगी, जिससे भीड़ को आसानी से कंट्रोल किया जा सकेगा।</p>
<h2>Fan ID</h2>
</p>
<p>इस टूर्नामेंट में एनएफसी की तरह Fan ID कार्ड का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये कार्ड स्टेडियम के सूचना केंद्रों पर मिल रहे हैं। इनकी खासियत है कि इन्हें फोन पर टैप करते ही फैंस को उनकी पसंद के अनुसार खास वर्ल्ड कप मर्चेंडाइज, स्टेडियम से जुड़ी जानकारी मिलेगी।</p>
<h2>AI</h2>
</p>
<p>इस बार फीफा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे मैच के दौरान खिलाड़ियों की हर गतिविधि को मॉनिटर किया जा रहा है। इससे टीम्स रणनीति बनाने के साथ खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर तरीके से समझ सकेंगी।</p>
<h2>FAQs</h2>
</p>
<p>1. FIFA World Cup में इस बार कितनी टीमों ने हिस्सा लिया है ?</p>
<p>Ans. इस टूर्नामेंट में 48 टीमों ने हिस्सा लिया है।</p>
</p>
<p>2. इस मेगा टूर्नामेंट की मेजबानी कौन-से देश कर रहे हैं?</p>
<p>Ans. फीफा वर्ल्ड कप की मेजबानी अमेरिका, कनाड़ा और मेक्सिको कर रहे हैं।</p>
</p>
<p>3. इस प्रतियोगिता की शुरुआत कब हुई ?</p>
<p>Ans. इस टूर्नामेंट का आगाज 11 जून 2026 से हुआ है।</p>
]]></content:encoded>
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		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[ajay verma]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 06:21:35 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[आ गया भारत का पहला AI वीडियो जनरेशन मॉडल Varya, सेकेंडों में बनाएगा वीडियो]]></title>
		<description>भारत का पहला AI वीडियो जनरेशन मॉडल Varya आ गया है। इस टूल को India AI Mission के तहत बनाया गया है। यह किफायती दाम में वीडियो जनरेट करता है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बनाने के लिए भारत ने अपना वीडियो जेनरेशन मॉडल Varya को लॉन्च कर दिया है। इस मॉडल को भारतीय स्टार्टअप Avataar AI ने तैयार किया है। यह भारतीय भाषाओं और संस्कृति को बेहतर तरीके से समझता है। कंपनी का कहना है कि यह मॉडल किफायती है। इसके जरिए तेजी से वीडियो जनरेट की जा सकती है। यह आम यूजर्स के साथ-साथ बिजनेस यूजर्स के भी बहुत काम आएगा।</p>
<h2>भारत का पहला AI मॉडल</h2>
</p>
<p>सरकार के अनुसार, भारत के India AI Mission के तहत 12 स्टार्टअप्स में से Avataar AI को चुना गया है, जिसने Varya वीडियो जनरेशन मॉडल को बनाया है। यह Alibaba के ओपन-सोर्स वीडियो जनरेशन मॉडल Wan 2.2 पर बेस्ड है। इसमें Model Distillation टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है। इससे मॉडल बेहतर और फास्ट परफॉर्म करेगा।</p>
</p>
<p>इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सचिव एस कृष्णन ने बताया कि Varya भारत का पहला AI मॉडल है। यह पूरी तरह से स्वदेशी है। इसके आने से लोग बिना ज्यादा खर्च किए अपने सारे काम कर सकेंगे और अपने हिसाब से वीडियो भी बना पाएंगे।</p>
<h2>बेहद फास्ट है Model</h2>
</p>
<p>Avataar AI ने कहा कि Varya तेजी से वीडियो जनरेट करने में सक्षम है। यह मॉडल केवल 4 स्टेप में वीडियो बना देता है। इसकी वीडियो जनरेटिंग स्पीड बहुत तेज और लागतभी कम है। उदाहरण के तौर पर समझें, तो यह मॉडल NVIDIA H200 GPU के साथ 45 सेकंड में 720p रिजॉल्यूशन वाली वीडियो को पांच सेकेंड में जनरेट कर सकता है।</p>
</p>
<p>कंपनी का दावा है कि वार्या मॉडल केवल 48 पैसे प्रति सेकेंड में वीडियो बना सकता है। यही कारण है कि इस एआई वीडियो टूल को अन्य वीडियो जनरेशन मॉडल की तुलना में किफायती माना गया है।</p>
<h2>कैसे करता है काम ?</h2>
</p>
<p>कंपनी के मुताबिक, वार्या मॉडल यूजर्स की फोटो या फिर रॉ वीडियो का इस्तेमाल करके एआई वीडियो बना सकता है। यह इतना एडवांस है कि सिर्फ 100 रुपये में यह 211 सेकेंड की वीडियो तैयार कर देता है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसे इस्तेमाल करना बहुत आसान है। यूजर सिर्फ टेक्स्ट प्रॉम्ट लिखकर या फिर इमेज अपलोड करके वीडियो बना सकते हैं।</p>
</p>
<p>सचिव एस कृष्णन का मानना है कि यह मॉडल उन लोगों के लिए कड़ा जवाब है, जो ये मानते हैं कि भारत एआई मॉडल बनाने में सक्षम नहीं है। इससे पुष्टि होती है कि हमारा देश एडवांस टेक से लैस एआई मॉडल बना सकता है और आने वाले समय में वैश्विक AI इंडस्ट्री में अहम भूमिका निभाएगा।</p>
]]></content:encoded>
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		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/varya-ai-video-generation-model-launch-by-avataar-ai-india-ai-mission-1665753/</guid>
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		<dc:creator><![CDATA[ajay verma]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:25:11 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[दुनियाभर में Instagram और Facebook हुआ डाउन, Twitter पर की यूजर्स ने शिकायत]]></title>
		<description>Instagram और Facebook के सर्वर अचानक ही शुक्रवार शाम डाउन हो गए, जिसके बाद कई यूजर्स को ऐप लॉगिन करने, फीड रिफ्रेश और पोस्ट लोडिंग में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Instagram</strong>, <strong>Facebook </strong>और <strong>Whatsapp</strong> दोनों ही Meta के प्लेटफॉर्म डाउन हो गए हैं। यह ग्लोबल आउटेज है। साइट आउटेज डिटेक्ट करने वाली कंपनी Downdetector पर लगभग 113504 लोगों ने Facebook डाउन होने की शिकायत की है। वहीं, Instagram की बात करें, तो अब-तक 9391 लोगों ने इंस्टा न चलने की शिकायत की है।</p>
</p>
<p><strong>Facebook</strong></p>
</p>
<p>Downdetector पर शुक्रवार शाम को हजारों यूजर्स ने Facebook और Instagram के ठप पड़ने की जानकारी दी है। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि ग्लोबली यूजर्स इन प्लेटफॉर्म को एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं। ग्लोबल मार्केट की बात करें, तो यह खबर लिखते हुए 123864 लोगों ने फेसबुक डाउन होने की शिकायत की है। वहीं, भारत में 1332 लोगों ने फेसबुक न चलने की शिकायत की है। इसमें 48 प्रतिशत लोगों ने ऐप न चलने की शिकायत की है। वहीं, 32 लोगों ने लॉग-इन करने को रिपोर्ट किया है। वहीं, 11 प्रतिशत लोगों का कहना है कि उन्हें सर्वर से जुड़ी समस्या देखने को मिल रही है।</p>
</p>
<p><strong><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Screenshot-2026-06-12-204756.png"><img loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-1665726" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Screenshot-2026-06-12-204756.png" alt="" width="1570" height="451" /></a></strong></p>
</p>
<p><strong>Instagram</strong></p>
</p>
<p>Instagram की बात करें, तो इस वक्त तक 9413 लोगों ने इंस्टाग्राम के डाउन होने को रिपोर्ट किया है। भारत में 8598 लोगों ने इसकी शिकायत की है। इंडियन साइट के मुताबिक, 47 प्रतिशत लोगों ने ऐप ठप पड़ने की शिकायत की है। वहीं, 39 प्रतिशत लोगो ने कहा है उन्हें लॉग-इन करने में समस्या आ रही है। वहीं, 8 प्रतिशत लोगों ने कहा है कि सर्वर कनेक्शन प्रोब्लम है।</p>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/afb1fe8e-de32-4dad-ae5c-0d4e1db634b7.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-1665725" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/afb1fe8e-de32-4dad-ae5c-0d4e1db634b7.jpg" alt="" width="1591" height="451" /></a></p>
<h2>WhatsApp भी हुआ डाउन</h2>
</p>
<p>Downdetector के मुताबिक, 172 लोगों ने व्हाट्सऐप के ठप होने की भी जानकारी दी है। इसमें 45 प्रतिशत लोग लॉग-इन नहीं कर पा रहे हैं। 34 प्रतिशत लोगों ने ऐप न एक्सेस करने की शिकायत की है। 15 प्रतिशत लोगों ने वेबसाइट न चलने को रिपोर्ट किया है।</p>
</p>
<p><strong>Twitter पर लोगों ने दिखाई नराजदी</strong></p>
</p>
<p>&lt;blockquote class=&#8221;twitter-tweet&#8221;&gt;&lt;p lang=&#8221;en&#8221; dir=&#8221;ltr&#8221;&gt;Elon Musk To Mark Zuckerberg After Facebook and Instagram Both are down.. X/ Twitter Is Better..!!&lt;br&gt;&lt;br&gt; &lt;a href=&#8221;https://x.com/hashtag/instagramdown?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc%5Etfw&#8221;&gt;#instagramdown&lt;/a&gt; &lt;a href=&#8221;https://x.com/hashtag/facebookdown?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc%5Etfw&#8221;&gt;#facebookdown&lt;/a&gt; &lt;a href=&#8221;https://x.com/hashtag/instagram?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc%5Etfw&#8221;&gt;#instagram&lt;/a&gt; &lt;a href=&#8221;https://x.com/hashtag/Twitter?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc%5Etfw&#8221;&gt;#Twitter&lt;/a&gt; &lt;a href=&#8221;https://x.com/hashtag/Facebook?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc%5Etfw&#8221;&gt;#Facebook&lt;/a&gt; &lt;a href=&#8221;https://t.co/ShT5zhWGgM&#8221;&gt;pic.twitter.com/ShT5zhWGgM&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; MAHIMUL ISLAM RAHIM (@MAHIMULX) &lt;a href=&#8221;https://x.com/MAHIMULX/status/2065433047403741436?ref_src=twsrc%5Etfw&#8221;&gt;June 12, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src=&#8221;https://platform.x.com/widgets.js&#8221; charset=&#8221;utf-8&#8243;&gt;&lt;/script&gt;</p>
</p>
<p>&lt;blockquote class=&#8221;twitter-tweet&#8221;&gt;&lt;p lang=&#8221;en&#8221; dir=&#8221;ltr&#8221;&gt;X right now after Instagram and Facebook are down.&lt;a href=&#8221;https://x.com/hashtag/Instagramdown?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc%5Etfw&#8221;&gt;#Instagramdown&lt;/a&gt;&lt;a href=&#8221;https://x.com/hashtag/Facebookdown?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc%5Etfw&#8221;&gt;#Facebookdown&lt;/a&gt; &lt;a href=&#8221;https://t.co/v608PtqHgm&#8221;&gt;pic.twitter.com/v608PtqHgm&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Yogesh Jadhav (@theyogeshjadhav) &lt;a href=&#8221;https://x.com/theyogeshjadhav/status/2065439793102868907?ref_src=twsrc%5Etfw&#8221;&gt;June 12, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src=&#8221;https://platform.x.com/widgets.js&#8221; charset=&#8221;utf-8&#8243;&gt;&lt;/script&gt;</p>
</p>
<p>&lt;blockquote class=&#8221;twitter-tweet&#8221;&gt;&lt;p lang=&#8221;en&#8221; dir=&#8221;ltr&#8221;&gt;Me trying to open Instagram again and again. &lt;a href=&#8221;https://x.com/hashtag/instagramdown?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc%5Etfw&#8221;&gt;#instagramdown&lt;/a&gt; &lt;a href=&#8221;https://t.co/ttWl7Jsa5r&#8221;&gt;pic.twitter.com/ttWl7Jsa5r&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Harshhh! 🇮🇳 (@Harsh_humour) &lt;a href=&#8221;https://x.com/Harsh_humour/status/2065440839372030441?ref_src=twsrc%5Etfw&#8221;&gt;June 12, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src=&#8221;https://platform.x.com/widgets.js&#8221; charset=&#8221;utf-8&#8243;&gt;&lt;/script&gt;</p>
</p>
<p>&lt;blockquote class=&#8221;twitter-tweet&#8221;&gt;&lt;p lang=&#8221;tl&#8221; dir=&#8221;ltr&#8221;&gt;Friend: Insta nhi chala raha yaar &lt;br&gt;&lt;br&gt;X users: &lt;a href=&#8221;https://x.com/hashtag/instagramdown?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc%5Etfw&#8221;&gt;#instagramdown&lt;/a&gt; &lt;a href=&#8221;https://x.com/hashtag/facebookdown?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc%5Etfw&#8221;&gt;#facebookdown&lt;/a&gt; &lt;a href=&#8221;https://t.co/pkmj9f3L16&#8243;&gt;pic.twitter.com/pkmj9f3L16&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Raja Babu (@GaurangBhardwa1) &lt;a href=&#8221;https://x.com/GaurangBhardwa1/status/2065437615910953381?ref_src=twsrc%5Etfw&#8221;&gt;June 12, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src=&#8221;https://platform.x.com/widgets.js&#8221; charset=&#8221;utf-8&#8243;&gt;&lt;/script&gt;</p>
</p>
<p>&lt;blockquote class=&#8221;twitter-tweet&#8221;&gt;&lt;p lang=&#8221;it&#8221; dir=&#8221;ltr&#8221;&gt;Io che vado su X per vedere se Instagram è down &lt;a href=&#8221;https://x.com/hashtag/Instagramdown?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc%5Etfw&#8221;&gt;#Instagramdown&lt;/a&gt; &lt;a href=&#8221;https://t.co/gHw0hyhwk2&#8243;&gt;pic.twitter.com/gHw0hyhwk2&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Jasmine Casella (@casella_jasmi) &lt;a href=&#8221;https://x.com/casella_jasmi/status/2065431716110463460?ref_src=twsrc%5Etfw&#8221;&gt;June 12, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src=&#8221;https://platform.x.com/widgets.js&#8221; charset=&#8221;utf-8&#8243;&gt;&lt;/script&gt;</p>
</p>
<p>&lt;blockquote class=&#8221;twitter-tweet&#8221;&gt;&lt;p lang=&#8221;it&#8221; dir=&#8221;ltr&#8221;&gt;Come mi sento in questo momento con quasi tutto in down &lt;a href=&#8221;https://x.com/hashtag/instagramdown?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc%5Etfw&#8221;&gt;#instagramdown&lt;/a&gt; &lt;a href=&#8221;https://x.com/hashtag/facebookdown?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc%5Etfw&#8221;&gt;#facebookdown&lt;/a&gt; &lt;a href=&#8221;https://t.co/4cbBDhEz80&#8243;&gt;pic.twitter.com/4cbBDhEz80&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Marco Borrello (@Marco_Borrello) &lt;a href=&#8221;https://x.com/Marco_Borrello/status/2065437291598717411?ref_src=twsrc%5Etfw&#8221;&gt;June 12, 2026&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt; &lt;script async src=&#8221;https://platform.x.com/widgets.js&#8221; charset=&#8221;utf-8&#8243;&gt;&lt;/script&gt;</p>
]]></content:encoded>
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		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/instagram-and-facebook-down-worldwide-users-flood-x-with-complaints-1665724/</guid>
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		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 07:15:28 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[FIFA World Cup 2026 में दिखेगी AI और नई टेक्नोलॉजी की ताकत, बदल जाएगा फुटबॉल मैच देखने का अनुभव]]></title>
		<description>FIFA World Cup 2026 सिर्फ फुटबॉल का टूर्नामेंट नहीं, बल्कि नई टेक्नोलॉजी का भी बड़ा प्रदर्शन होगा। इस बार AI, रियल-टाइम डेटा और एडवांस ब्रॉडकास्टिंग टूल्स की मदद से फैंस को मैच देखने का बिल्कुल नया अनुभव मिलेगा। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>FIFA World Cup 2026 फुटबॉल इतिहास का सबसे हाई-टेक टूर्नामेंट बनने जा रहा है। इस बार दर्शकों को सिर्फ मैच ही नहीं, बल्कि AI, रियल-टाइम डेटा और एडवांस ब्रॉडकास्टिंग टेक्नोलॉजी का भी नया अनुभव मिलेगा। FIFA का कहना है कि वह दुनिया भर के अरबों फुटबॉल फैंस के लिए मैच देखने, समझने और उससे जुड़ने के तरीके को पूरी तरह बदलना चाहता है। स्टेडियम में मौजूद दर्शकों से लेकर टीवी, मोबाइल और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर मैच देखने वाले फैंस तक, सभी को पहले से ज्यादा इमर्सिव और इंटरैक्टिव अनुभव मिलेगा। AI की मदद से मैचों का एनालिसिस, कंटेंट सजेशन और व्यक्तिगत हाइलाइट्स जैसी कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।</p>
<h2><strong>इस टूर्नामेंट की सबसे बड़ी खासियत</strong></h2>
</p>
<p>इस टूर्नामेंट की सबसे बड़ी खासियत AI आधारित मैच डेटा और एनालिटिक्स होगी। FIFA ने Football Technology Centre AG और Hawk-Eye Innovations के साथ मिलकर ऐसी टेक्नोलॉजी डेवलप की है जो खिलाड़ियों की एक्टिविटी को ट्रैक करके अपने आप मैच का डेटा तैयार करेगी। पहले जहां कई आंकड़े मैन्युअली तैयार किए जाते थे, अब AI रियल टाइम में खिलाड़ियों की स्पीड, पोजिशन और परफॉर्मेंस का एनालिसिस करेगा। इससे फैंस को एडवांस हीट मैप्स, खिलाड़ी मूवमेंट डेटा, कनेक्टेड बॉल से जुड़ी जानकारी और टीमों की रणनीति से जुड़े कई नए आंकड़े देखने को मिलेंगे। FIFA Football Data Platform और Football Data Ecosystem इन सभी जानकारियों को एक साथ जोड़कर मैच की गहराई से समझ डेवलप करने में मदद करेंगे। इससे आम दर्शकों को भी वही स्तर का एनालिसिस देखने को मिलेगा जो अभी तक केवल कोच और Professional Analysts के पास होता था।</p>
<h2><strong>रेफरी के फैसलों को समझना पहले से आसान होगा</strong></h2>
</p>
<p>FIFA World Cup 2026 में रेफरी के फैसलों को समझना पहले से आसान होगा। इस बार स्टेडियम में मौजूद दर्शक भी वही वीडियो देख सकेंगे जिसे रेफरी VAR (Video Assistant Referee) चेक करते समय देखते हैं। अगर पेनल्टी, ऑफसाइड या रेड कार्ड जैसे बड़े फैसले की समीक्षा होगी, तो उसकी वीडियो क्लिप स्टेडियम की बड़ी स्क्रीन पर दिखाई जाएगी। इससे फैंस आसानी से समझ सकेंगे कि रेफरी ने कोई फैसला क्यों लिया। इसके साथ ही Semi-Automated Offside Technology, Connected Ball Technology और बेहतर VAR सिस्टम का भी इस्तेमाल होगा।</p>
<h2><strong>AI फैंस का अनुभव बेहतर बनाएगा</strong></h2>
</p>
<p>मैच के दौरान ही नहीं, बल्कि मैच के बाद भी AI फैंस का अनुभव बेहतर बनाएगा। FIFA AI की मदद से हर फैन की पसंद के अनुसार खास हाइलाइट्स दिखाएगा। उदाहरण के लिए, अगर आपको किसी खास टीम या खिलाड़ी को देखना पसंद है, तो उससे जुड़े जरूरी पल सबसे पहले दिखाए जा सकते हैं। इसके अलावा AI कंटेंट सजेशन, अलग-अलग भाषाओं में जानकारी, स्मार्ट नोटिफिकेशन, मैच के आंकड़े और जरूरी इनसाइट्स भी देगा। FIFA AI आधारित 3D Player Avatars और नई Referee View टेक्नोलॉजी भी लाएगा, जिससे फैंस मैच को नए एंगल से देख सकेंगे। वहीं टीवी और स्ट्रीमिंग कंपनियों को रियल-टाइम डेटा, इंटरैक्टिव ग्राफिक्स और 3D मैच रीक्रिएशन जैसे नए टूल्स मिलेंगे।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/FIFA-World-Cup-2026.png' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[FIFA World Cup 2026 live streaming in India: How to watch every match on Zee5]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/fifa-world-cup-2026-ai-powered-broadcasting-3d-avatars-and-real-time-match-data-revolution-1665669/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/fifa-world-cup-2026-ai-powered-broadcasting-3d-avatars-and-real-time-match-data-revolution-1665669/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 06:07:06 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[सूर्य के खतरों पर 24 घंटे नजर रखेगा अमेरिका का ये नया सैटेलाइट]]></title>
		<description>अमेरिका ने SOLAR-1 नाम का नया सैटेलाइट पूरी तरह चालू कर दिया है, जो 24 घंटे सूर्य की गतिविधियों और अंतरिक्ष मौसम पर नजर रखेगा। यह सैटेलाइट सौर तूफानों की समय रहते चेतावनी देगा, जिससे GPS, सैटेलाइट, संचार नेटवर्क और बिजली व्यवस्था को होने वाले संभावित नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>NOAA (National Oceanic and Atmospheric Administration) ने अमेरिका के पहले ऐसे सैटेलाइट SOLAR-1 को पूरी तरह चालू कर दिया है, जो 24 घंटे अंतरिक्ष के मौसम और सूर्य की एक्टिविटी पर नजर रखेगा। इस सैटेलाइट का काम सौर तूफानों (Solar Storms) का समय रहते पता लगाना और उनकी चेतावनी देना है। Solar Storm GPS, Radio signals, Satellites और Power Supply जैसी जरूरी सेवाओं को प्रभावित कर सकते हैं। सितंबर 2025 में लॉन्च हुए SOLAR-1 ने करीब 8 महीने तक टेस्टिंग पूरी की, जिसके बाद अब इसे आधिकारिक रूप से काम पर लगा दिया गया है। NOAA का कहना है कि यह सैटेलाइट खतरनाक Solar Activities की पहले से जानकारी देकर संभावित नुकसान को कम करने में मदद करेगा।</p>
<h2><strong>SOLAR-1 सूर्य की किन एक्टिविटी पर नजर रखेगा?</strong></h2>
</p>
<p>SOLAR-1 को खासतौर पर सूर्य से निकलने वाली Solar Winds और Coronal Mass Ejections (CME) पर नजर रखने के लिए बनाया गया है। CME सूर्य से निकलने वाले तेज और ऊर्जा से भरे कणों के बड़े बादल होते हैं। जब ये पृथ्वी के पास पहुंचते हैं, तो GPS, रेडियो नेटवर्क, सैटेलाइट्स और बिजली ग्रिड जैसी टेक्नोलॉजी Services में दिक्कत पैदा कर सकते हैं, हालांकि यही Solar Activities आसमान में दिखने वाली खूबसूरत नॉर्दर्न लाइट्स और सदर्न लाइट्स भी बनाती हैं। मई 2024 में कई देशों में दिखाई देने वाली नॉर्दर्न लाइट्स भी ऐसी ही Solar Activities की वजह से बनी थीं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इन घटनाओं की पहले से जानकारी मिल जाए, तो संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है और जरूरी तैयारियां की जा सकती हैं।</p>
<h2><strong>SOLAR-1 को पृथ्वी से इतनी दूर क्यों रखा गया है?</strong></h2>
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<p>SOLAR-1 को पृथ्वी से करीब 10 लाख मील दूर लैग्रेंज पॉइंट (L1) पर रखा गया है। यह अंतरिक्ष का एक खास स्थान है, जहां सूर्य और पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण संतुलित रहता है। इसकी वजह से सैटेलाइट एक स्थिर स्थिति में रहकर लगातार सूर्य पर नजर रख सकता है। यह जगह Solar Activities को साफ और बिना रुकावट देखने के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है। NOAA के मुताबिक, SOLAR-1 अब Solar Storms और CME से जुड़ी तस्वीरें और जरूरी जानकारी सिर्फ 30 मिनट के अंदर स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर तक भेज सकता है। पहले ऐसी जानकारी मिलने में 8 घंटे तक का समय लग जाता था। इससे वैज्ञानिकों को सौर तूफानों की चेतावनी पहले और ज्यादा सटीक तरीके से जारी करने में मदद मिलेगी।</p>
<h2><strong>SOLAR-1 से लोगों और तकनीकी सिस्टम को क्या फायदा होगा?</strong></h2>
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<p>NOAA का कहना है कि SOLAR-1 अमेरिका की स्पेस वेदर चेतावनी सिस्टम का एक अहम हिस्सा है। यह सैटेलाइट सौर तूफानों की जानकारी और अलर्ट समय पर देगा, ताकि Power Companies, Communication Networks, Satellite Operators और Space Mission पहले से तैयारी कर सकें और संभावित नुकसान से बच सकें। इसके अलावा, ऑरोरा (नॉर्दर्न और सदर्न लाइट्स) देखने के शौकीनों को भी ज्यादा सटीक जानकारी मिल सकेगी कि यह खूबसूरत रोशनी कब और कहां दिखाई दे सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज की टेक्नोलॉजी पर निर्भर दुनिया में अंतरिक्ष मौसम पर नजर रखना बेहद जरूरी है। SOLAR-1 के शुरू होने से वैज्ञानिकों को Solar Activities को बेहतर ढंग से समझने और उनके असर से तकनीकी सिस्टम की सुरक्षा करने में मदद मिलेगी।</p>
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