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	<title><![CDATA[Latest Technology &amp; Gadgets - News in Hindi | News &amp; Reviews on Gadgets, Smart Phones, Mobile Apps &amp; Gaming | टेक न्यूज़ इन हिंदी | TECHLUSIVE.in Hindi]]></title>
	<description><![CDATA[Latest Technology &amp; Gadgets - News in Hindi | News &amp; Reviews on Gadgets, Smart Phones, Mobile Apps &amp; Gaming | टेक न्यूज़ इन हिंदी | TECHLUSIVE.in Hindi]]></description>
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	 <item>
		<pubDate>Sun, 31 May 2026 05:02:48 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[IPL 2026: अब मैदान के कुछ हिस्सों में नहीं ले जा सकेंगे Smart Glasses, BCCI को किस बात का है डर?]]></title>
		<description>IPL 2026 के आखिरी चरण में BCCI ने खिलाड़ियों और टीम स्टाफ के लिए एक नया सुरक्षा नियम लागू किया है। अब स्टेडियम के कुछ सुरक्षित क्षेत्रों में स्मार्ट ग्लासेस ले जाने की अनुमति नहीं होगी। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>IPL 2026 के आखिरी चरण में BCCI ने एक नया और अहम नियम लागू किया है। अब खिलाड़ी, सपोर्ट स्टाफ और मैच अधिकारियों को मैच के दिन स्टेडियम के कुछ सुरक्षित क्षेत्रों में जाने से पहले अपने स्मार्ट ग्लासेस जमा कराने होंगे। यह निर्देश BCCI की Anti-Corruption and Security Unit (ACSU) ने जारी किया है। हाल के वर्षों में स्मार्ट ग्लासेस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है और कई टेक कंपनियां इन डिवाइसों को खिलाड़ियों और टीम स्टाफ के बीच प्रमोट कर रही हैं। देखने में ये सामान्य चश्मों जैसे लगते हैं, लेकिन इनमें कई ऐसे फीचर्स होते हैं जो सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय बन सकते हैं। इसी वजह से BCCI ने इन्हें प्रतिबंधित उपकरणों की लिस्ट में शामिल कर लिया है।</p>
<h2><strong>स्मार्ट ग्लासेस से सुरक्षा को क्या खतरा है?</strong></h2>
</p>
<p>असल समस्या चश्मों से नहीं, बल्कि उनकी टेक्नोलॉजी से जुड़ी है। आज के स्मार्ट ग्लासेस वीडियो रिकॉर्ड कर सकते हैं, तस्वीरें खींच सकते हैं, मैसेज भेज और प्राप्त कर सकते हैं, यहां तक कि वॉयस और वीडियो कॉल भी कर सकते हैं। इनमें Wi-Fi और मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधाएं मौजूद होती हैं। ACSU का मानना है कि इन फीचर्स का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे मैच के दौरान Confidential Information लीक हो सकती है या Unauthorized Communication हो सकता है। इसी कारण स्मार्ट ग्लासेस को कम्युनिकेशन और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस की कैटेगरी में रखा गया है।</p>
<h2><strong>खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के लिए क्या हैं नए नियम?</strong></h2>
</p>
<p>नए नियमों के तहत किसी भी खिलाड़ी, कोच, सपोर्ट स्टाफ या मैच अधिकारी के पास अगर स्मार्ट ग्लासेस हैं तो उन्हें स्टेडियम के प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करने से पहले Security Liaison Officer (SLO) के पास जमा कराना होगा। यह वही प्रक्रिया है जो Mobile phones, smartwatches और बाकी Communication Devices के लिए पहले से लागू है। BCCI ने साफ कर दिया है कि इस नियम का पालन करना अनिवार्य होगा। अगर कोई व्यक्ति प्रतिबंधित क्षेत्र के अंदर स्मार्ट ग्लासेस का यूज करते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ IPL 2026 के नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।</p>
<h2><strong>क्या IPL में सुरक्षा नियम पहले से भी सख्त हो गए हैं?</strong></h2>
</p>
<p>स्मार्ट ग्लासेस पर प्रतिबंध BCCI के बड़े सुरक्षा अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। इस सीजन में पहले भी कई मामलों में सख्त कार्रवाई देखने को मिली है। राजस्थान रॉयल्स के टीम मैनेजर रोमी भिंडर पर डगआउट में मोबाइल फोन इस्तेमाल करने के कारण 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। वहीं टीम के कप्तान Riyan Parag को ड्रेसिंग रूम में ई-सिगरेट का यूज करते हुए कैमरे में कैद होने के बाद मैच फीस का 25% जुर्माना और एक डिमेरिट प्वाइंट दिया गया था। ऐसे में स्मार्ट ग्लासेस पर लगाया गया नया प्रतिबंध दिखाता है कि BCCI नई टेक्नोलॉजी से होने वाले किसी भी सुरक्षा खतरे को नजरअंदाज नहीं करना चाहता।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Virat-Kohli-Meta-Oakley-Vanguard.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Virat Kohli wearing Oakley Meta Vanguard AI smart glasses. (Image credit: Meta)]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sun, 31 May 2026 03:59:02 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Ghost Particle का रहस्य सुलझने के करीब, वैज्ञानिकों को मिला बड़ा सुराग]]></title>
		<description>ब्रह्मांड के सबसे रहस्यमयी Particles में से एक Neutrino को लेकर वैज्ञानिकों को बड़ा सुराग मिला है। अब तक का सबसे शक्तिशाली Neutrino शायद एक Blazar से आया था। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ब्रह्मांड के सबसे रहस्यमयी Particles में से एक न्यूट्रिनो (Neutrino) को लेकर वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अब तक मिला सबसे शक्तिशाली Neutrino शायद ब्लेजार (Blazar) नाम की एक बेहद Energetic Astronomical Objects से आया था। यह Neutrino 13 फरवरी 2023 को Mediterranean Sea के नीचे लगाए गए KM3NeT/ARCA डिटेक्टर ने रिकॉर्ड किया था। इस Neutrino की एनर्जी करीब 220 PeV थी, जो पहले खोजे गए ज्यादातर न्यूट्रिनो की तुलना में लगभग 30 गुना ज्यादा है। Neutrino को अक्सर &#8216;Ghost Particle&#8217; कहा जाता है क्योंकि यह ग्रहों, तारों और यहां तक कि इंसानों के शरीर के आर-पार भी बिना रुके गुजर सकता है। इसे पकड़ना और इसका अध्ययन करना बेहद कठिन होता है। इस बड़ी खोज से वैज्ञानिक काफी उत्साहित हैं, उनका मानना है कि इससे ब्रह्मांड में मौजूद सबसे शक्तिशाली और रहस्यमयी Energy Sources के बारे में नई जानकारी मिल सकती है, साथ ही यह खोज अंतरिक्ष के कई अनसुलझे रहस्यों को समझने में भी मदद कर सकती है।</p>
<h2><strong>वैज्ञानिकों ने इसका पता कैसे लगाया?</strong></h2>
</p>
<p>इस खोज से जुड़ा नया अध्ययन Journal of Cosmology and Astroparticle Physics (JCAP) में प्रकाशित हुआ है। KM3NeT टीम की रिसर्चर मेरियम बेंदाहमान और उनके साथियों ने Blazar कैसे काम करते हैं यह समझने के लिए एक खास कंप्यूटर सिमुलेशन टूल Astro-Multimessenger Modelling का यूज किया। वैज्ञानिकों ने कई अलग-अलग परिस्थितियों में परीक्षण किए और जांचा कि क्या Blazar इतनी ज्यादा एनर्जी वाले Neutrino बना सकते हैं। इसके लिए उन्होंने Particles की एनर्जी और उनकी गति से जुड़े कई मानकों में बदलाव करके अलग-अलग मॉडल तैयार किए। अध्ययन के नतीजों से पता चला कि Blazar वास्तव में बेहद शक्तिशाली Neutrino के Sources हो सकते हैं। इसके अलावा, इन मॉडलों से निकलने वाली Gamma rays की मात्रा भी वैज्ञानिकों के पहले के अनुमानों के अनुसार ही रही। इससे यह संभावना और बढ़ गई कि यह Neutrino किसी Blazar से ही आया था।</p>
<h2><strong>Neutrino को &#8216;Ghost Particle&#8217; क्यों कहा जाता है?</strong></h2>
</p>
<p>Neutrino ब्रह्मांड के सबसे अनोखे और रहस्यमयी Particles में से एक हैं। इनमें कोई Electric Charge नहीं होता और इनका वजन भी बेहद कम होता है। इसी वजह से ये आसानी से ग्रहों, तारों और यहां तक कि इंसानों के शरीर के आर-पार भी निकल जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, हर सेकंड करीब 100 ट्रिलियन न्यूट्रिनो हमारे शरीर से होकर गुजरते हैं, लेकिन हमें इसका बिल्कुल भी पता नहीं चलता। यही कारण है कि इन्हें अक्सर &#8216;Ghost Particle&#8217; कहा जाता है, हाल ही में खोजा गया 220 PeV एनर्जी वाला न्यूट्रिनो बेहद शक्तिशाली था। इसकी एनर्जी दुनिया की सबसे बड़ी कण त्वरक मशीन Large Hadron Collider (LHC) द्वारा पैदा की जाने वाली एनर्जी से लगभग 30,000 गुना ज्यादा थी। यही वजह है कि वैज्ञानिक इस खोज को आधुनिक Astronomy की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मान रहे हैं।</p>
<h2><strong>Blazar क्या है और यह इतना खास क्यों माना जाता है?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों का मानना है कि Blazar ब्रह्मांड के सबसे खतरनाक और ऊर्जावान क्षेत्रों में से एक होते हैं। ये Galaxies के केंद्र में मौजूद ब्लैक होल होते हैं, जो अपने आसपास की चीजों को निगलते हुए Excessive Energy वाले Plasma Jet अंतरिक्ष में फेंकते हैं। जब इनमें से कोई जेट सीधे पृथ्वी की दिशा में होता है, तब उसे Blazar कहा जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर भविष्य में और अधिक हाई एनर्जी Neutrino का पता लगाया जाता है, तो यह सिद्ध किया जा सकेगा कि Blazar वास्तव में Cosmic particles के सबसे बड़े Natural Accelerator हैं। यह खोज न केवल न्यूट्रिनो के रहस्य को सुलझाने में मदद करेगी, बल्कि ब्रह्मांड की सबसे शक्तिशाली घटनाओं को समझने का नया रास्ता भी खोलेगी।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>Neutrino क्या होता है?</strong></h2>
</p>
<p>Neutrino ब्रह्मांड का एक बेहद छोटे और रहस्यमयी Particles है। इसमें कोई Electric Charge नहीं होता और इसका Mass बहुत कम होता है, इसलिए यह आसानी से किसी भी चीजों के आर-पार निकल सकते है।</p>
<h2><strong>Neutrino को &#8216;Ghost Particle&#8217; क्यों कहा जाता है?</strong></h2>
</p>
<p>Neutrino ग्रहों, तारों और इंसानों के शरीर के आर-पार बिना रुके गुजर सकता है। यह इतना कम प्रतिक्रिया करता है कि इसे पकड़ना और अध्ययन करना बेहद मुश्किल होता है, इसलिए इसे &#8216;Ghost Particle&#8217; कहा जाता है।</p>
<h2><strong>हाल ही में खोजा गया Neutrino इतना खास क्यों है?</strong></h2>
</p>
<p>यह अब तक का सबसे शक्तिशाली Neutrino माना जा रहा है, जिसकी एनर्जी करीब 220 PeV है। इसकी एनर्जी नॉर्मल Neutrino की तुलना में कई गुना ज्यादा है।</p>
<h2><strong>Blazar क्या होता है?</strong></h2>
</p>
<p>Blazar एक ऐसी एक्टिव आकाशगंगा का केंद्र होता है, जहां मौजूद सुपरमैसिव ब्लैक होल बेहद शक्तिशाली एनर्जी और प्लाज्मा जेट अंतरिक्ष में फेंकता है। जब यह जेट पृथ्वी की दिशा में होता है, तो उसे Blazar कहा जाता है।</p>
<h2><strong>इस खोज से वैज्ञानिकों को क्या फायदा होगा?</strong></h2>
</p>
<p>यह खोज ब्रह्मांड में मौजूद सबसे शक्तिशाली Energy Sources और Cosmic particles की उत्पत्ति को समझने में मदद कर सकती है, साथ ही इससे अंतरिक्ष के कई अनसुलझे रहस्य भी सुलझ सकते है।</p>
]]></content:encoded>
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		<media:description type='plain'><![CDATA[Neutrino]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Sat, 30 May 2026 07:15:00 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[इंसानों के कपड़े पहन Humanoid Robots ने की कैटवॉक, दिखी भविष्य की झलक]]></title>
		<description>सियोल में दुनिया का पहला यूनीक फैशन शो आयोजित हुआ, जहां इंसानों की बदले रोबोट ने रैंप पर कैटवॉक की। इस शो के जरिए दुनिया को भविष्य की पहली झलक दिखाई गई।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आज के दौर में तकनीक बहुत तेजी से विकसित हो रही है। कुछ समय पहले ह्यूमेनॉइड रोबोट को सिर्फ फैक्ट्रियों, लैब्स या गोदामों के लिए तैयार किया जाता था। अब इन रोबोट को इंसानों की दुनिया में लाने की योजना बनाई जा रही है। इसका ताजा उदाहरण सियोल के फैशन शो में देखने को मिला, जहां रोबोट्स से रैंप पर कैटवॉक कराई गई। इस दौरान रोबोट को इंसानी कपड़ों में देखा गया।</p>
<h2>दिखाई भविष्य की झलक</h2>
</p>
<p>मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रोबोट फैशन शो को गैलेक्सी कॉर्पोरेशन (Galaxy Corporation) ने आयोजित किया। कंपनी ने इस शो के जरिए भविष्य की झलक दिखाई, जिसमें यह बताया गया कि आने वाले समय में इंसान और रोबोट साथ मिलकर काम करेंगे। रोबोट फैक्टरी या ऑफिस तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि इंसानों की जिंदगी का अहम हिस्सा भी बनेंगे।</p>
</p>
<div id="attachment_1664328" style="width: 1210px" class="wp-caption alignnone"><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/robot.jpg"><img loading="lazy" aria-describedby="caption-attachment-1664328" class="wp-image-1664328 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/robot.jpg" alt="" width="1200" height="900" /></a></p>
<p id="caption-attachment-1664328" class="wp-caption-text">Credit : koreajoongangdaily</p>
</div>
</p>
<p>इस फैशन शो में देखा गया कि एक भी रोबोट बिना कपड़ों के नहीं था। सभी रोबोट को मॉडल से मिलते-जुलते कपड़े पहनाए गए थे। एक रोबोट और इंसान की जोड़ी ने नीले रंग की काउबॉय ड्रेस पहनी थी और सिर पर दोनों कैप लगा रखी थी, तो दूसरे रोबोट्स ने चमकीली सिल्वर जैकेट और फ्रॉक जैसी सुंदर दिखने वाली आउटफिट्स पहनी थी।</p>
</p>
<p>इस शो में कई ऐसे भी रोबोट थे, जिन्होंने स्पेस से इंस्पायर्ड ड्रेस पहनी हुई थी। ये सभी दिखने में बहुत सुंदर लग रहे थे। यू कहें कि हमने भविष्य में कदम रख दिया हो।</p>
<h2>रोबोट को मिलनी चाहिए अलग पहचान</h2>
</p>
<p>गैलेक्सी कॉर्पोरेशन के चीफ चोई योंग-हो का कहना है कि इस शो में भविष्य की पहली झलक दिखाई गई है, जहां रोबोट इंसानों का साथ दे रहे हैं। इसलिए इंसानों की तरह रोबोट्स को भी अलग पहचान मिलनी चाहिए। साथ ही, उनका अपना फैशन भी होना चाहिए।</p>
<h2>रोबोट का हक</h2>
</p>
<p>चोई का मानना है कि रोबोट्स को भी कपड़ों की जरूरत है। रोबोट्स को कपड़े पहनाने चाहिए। जिस तरह इंसान अपने आप को अलग दिखाने के लिए कपड़े पहनता है, उस ही तरह रोबोट को भी अलग पहचान मिलनी चाहिए। उसे भी कपड़े पहनने का हक है।</p>
</p>
<p>आपको बता दें कि इस रोबोटिक फैशन शो से पहले फरवरी में देश की राजधानी नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट आयोजित हुआ था, जहां ह्यूमनॉइड रोबोट्स दिखाए गए थे। इसके साथ रोबोटिक डॉग्स और देश-विदेश की एडवांस टेक्नोलॉजी को भी शोकेस किया गया था।</p>
</p>
<p>एआई इम्पैक्ट समिट के अलावा अप्रैल में बेंगलुरु में इंडिया ऑटोमेशन एंड रोबोटिक्स एक्सपो लगाया गया। यहां फैक्ट्रियों में काम करने वाले इंडस्ट्रियल रोबोट्स, एआई तकनीक और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग मशीन दिखाई गई।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/robot.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Credit : koreajoongangdaily]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[ajay verma]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Fri, 29 May 2026 04:24:22 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[ChatGPT हुआ डाउन, यूजर्स को आई सवाल पूछने, नया अकाउंट बनाने और लॉग-इन करने में दिक्कत]]></title>
		<description>ChatGPT यूज करने के वालों के लिए बुरी खबर है। AI चैटबॉट डाउन हो गया है। इस वजह से लॉग-इन करने और अकाउंट बनाने में पेरशानी आ रही है। साथ ही, सवाल पूछने और इमेज बनाने जैसे कार्यों को करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ChatGPT Down:</strong> OpenAI का पॉपुलर AI चैटबॉट डाउन हो गया है। इस सेवा के ठप होने से लाखों यूजर्स प्रभावित हुए। इस दौरान यूजर्स को लॉग-इन करने और सवाल पूछने में दिक्कत आई, तो कईओं को इमेज बनाने और पुरानी चैट लोड करने में परेशानी का सामना करना पड़ा। आपको बता दें कि इस आउटेज को Downdetector ने सबसे पहले स्पॉट किया।</p>
</p>
<p>डाउनडिटेक्टर की मानें, तो भारत में ChatGPT डाउन होने की 470 शिकायत दर्ज की गई। अमेरिका में 4300 से ज्यादा यूजर्स इस समस्या को रिपोर्ट किया। करीब 85 प्रतिशत लोग चैटजीपीटी का उपयोग नहीं कर पाएं, जबकि 6 प्रतिशत लोगों को लॉगइन करने में परेशानी आई। वहीं, बचे हुए लोगों ने सवाल के जवाब नहीं मिलने और फोटो जनरेट न होने की शिकायत की।</p>
<h2>कितने बजे ठप हुआ चैटबॉट ?</h2>
</p>
<p>रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार यानी आज सुबह करीब 8 बजे ChatGPT की सेवाएं अचानक प्रभावित हुई। इस दौरान यूजर्स को चैटबॉट इस्तेमाल करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सबसे पहले दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों से आउटेज की शिकायत की गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी कई यूजर्स ने समस्या को लेकर पोस्ट शेयर किए और अपनी परेशानी भी बताई।</p>
<h2>इस कारण सेवा हुई बाधित</h2>
</p>
<p>OpenAI ने इस आउटेज की आधिकारिक तौर पर पुष्टि की। साथ ही, बताया कि प्लेटफॉर्म में तकनीकी गडबड़ी आने की वजह से सर्विस बाधित हुई, जिसे ठीक करने के लिए इंजीनियर लगातार काम कर रहे हैं। इस आउटेज के दौरान यूजर्स को दो बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा। पहली दिक्कत चैट में आई, जिससे पुरानी चैट्स को देखने में परेशानी हुई। दूसरी दिक्कत की वजह से लॉग-इन सिस्टम फेल हो गया है। इससे यूजर्स को लॉग-इन करने और नया अकाउंट बनाने में समस्या का सामना करना पड़ा।</p>
<h2>किन यूजर का काम हुआ प्रभावित ?</h2>
</p>
<p>चैटजीपीटी के डाउन होने से सबसे ज्यादा असर स्टूडेंट्स, ऑफिस में काम करने वाले प्रोफेशनल से लेकर कंटेंट क्रिएटर्स तक पर पड़ा, जो अपने कार्यों के लिए इस एआई टूल पर निर्भर हैं। इस कारण उनके काम बीच में रुक गए और पूरी दिनचर्या बुरी तरह से प्रभावित हुई।</p>
<h2>अब क्या करें यूजर्स ?</h2>
</p>
<p>ओपनएआई की टीम इस वक्त समस्या को ठीक करने के लिए लगातार काम काम कर रही है। यूजर्स को सलाह दी गई है कि बार-बार लॉग-इन करने या रिफ्रेश करने की कोशिश न करें। इससे सर्वर पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, जिससे परेशानी को ठीक होने में समय लग सकता है। इसलिए बेहतर होगा कि थोड़ा इंतजार करें और सेवाएं चालू होने के बाद चैटबॉट का उपयोग करें।</p>
]]></content:encoded>
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		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[ajay verma]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Thu, 28 May 2026 08:05:11 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Heatwave में राहत दिलाएंगे ये काम के Summer Gadgets, नहीं करने होंगे ज्यादा पैसे खर्च]]></title>
		<description>आप तेज गर्मी से परेशान हो गए हैं और बाहर निकलना मुश्किल हो गया है, तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। यहां सिलेक्टेड Summer Gadgets के बारे में बताया गया है, जो आपको भीषण तपन से राहत दिलाएंगे।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Summer Gadgets to beat Heatwave:</strong> भारत के अधिकतर राज्य इस समय भीषण गर्मी की चपेट में हैं। इस वजह से जन-जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। लोगों के लिए सफर करना भी मुश्किल हो गया है। हालांकि, बाजार में कई ऐसे पोर्टेबल गैजेट्स हैं, जिनसे चिलचिलाती धूप से राहत पाई जा सकती है। हम आपको इस गाइड में चुनिंदा डिवाइस के बारे में बताने जा रहे हैं, जो न सिर्फ आपके सफर को आसान बनाएंगे और गर्मी से भी बचाएंगे। अच्छी बात यह है कि इन्हें किफायती दाम में खरीदा जा सकता है। आइए इन Summer Gadgets पर डालते हैं एक नजर&#8230;</p>
<h2>Portable Fan</h2>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/portable-fan.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone wp-image-1664168 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/portable-fan.jpg" alt="" width="1200" height="900" /></a></p>
</p>
<p>पोर्टेबल फैन की डिमांड बहुत ज्यादा है। इन फैन का वजन कम और डिजाइन कॉम्पैक्ट होता है, जिससे आप इसे आसानी से कहीं भी ले जा सकते हैं। इनका उपयोग ट्रैवल के दौरान किया जा सकता है। इससे गर्मी में तुरंत राहत मिलती है। इन्हें आप अमेजन इंडिया जैसे प्लेटफॉर्म से 1 हजार के अंदर खरीद सकते हैं।</p>
<h2>Water Bottles With Temp Display</h2>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Water-Bottles-With-Temp-Display.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone wp-image-1664169 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Water-Bottles-With-Temp-Display.jpg" alt="" width="1200" height="900" /></a></p>
</p>
<p>40 से 44 डिग्री तापमान में अपने शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप टेम्परेचर डिस्प्ले के साथ आने वाली वॉटर बॉटल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इन बॉटल में पानी ठंडा रहता है और तापमान का भी पता चलता है। इनकी कीमत 200 से 800 रुपये के बीच है। इन्हें अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म से खरीदकर घर लाया जा सकता है।</p>
<h2>Mini Coolers</h2>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Mini-Coolers.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone wp-image-1664170 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Mini-Coolers.jpg" alt="" width="1200" height="900" /></a></p>
</p>
<p>आप घर से काम करते हैं और लगातार AC इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं, तो आप Portable Mini Air Cooler को यूज कर सकते हैं। इन कूलर का डिजाइन कॉम्पैक्ट होता है। इससे कूलर को कहीं भी ले जाया जा सकता है और घर से लेकर ऑफिस तक में उपयोग किया जा सकता है। आपको ये कूलर 500 से 1000 रुपये के बीच में मिल जाएंगे।</p>
<h2>Neck Fan</h2>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Neck-Fan.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone wp-image-1664171 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Neck-Fan.jpg" alt="" width="1200" height="900" /></a></p>
</p>
<p>नैक फैन को खासतौर पर ट्रैवल के दौरान इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है। इसे गर्दन में पहना जाता है, जिससे चेहरे और बालों में ठंडी हवा लगती है, जिससे गर्मी में ठंडक महसूस होती है। मार्केट में ये आपको लगभग 500 से 1000 रुपये के बीच आसानी से मिल जाएंगे।</p>
]]></content:encoded>
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		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[ajay verma]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Thu, 28 May 2026 04:36:46 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Instagram, WhatsApp और Facebook चलाने के लिए देने होंगे पैसे, आ गए नए सब्सक्रिप्शन प्लान]]></title>
		<description>Instagram, WhatsApp और Facebook प्लस सब्सक्रिप्शन प्लान को पेश कर दिया गया है। इन प्लान को लेने वाले यूजर्स को AI टूल के साथ-साथ प्रीमियम फीचर्स और कस्टामाइज ऑप्शन मिलेंगे।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Instagram, WhatsApp</strong> और <strong>Facebook</strong> यूजर्स के लिए बड़ी खबर है। Meta ने अपने तीनों पॉपुलर प्लेटफॉर्म्स के लिए नए पेड सब्सक्रिप्शन प्लान पेश किए हैं। इन प्लान के तहत यूजर्स को एक्सक्लूसिव फीचर्स, एडवांस टूल्स और बेहतर कस्टमाइजेशन ऑप्शंस मिलेंगे, जो फ्री वर्जन में उपलब्ध नहीं हैं। यानी कि आने वाले समय में अधिक सुविधाओं का उपयोग करने के लिए यूजर्स को अतिरिक्त पैसा खर्च करना होगा।</p>
<h2>नए प्लान की कीमत</h2>
</p>
<p>टेक जाइंट मेटा ने <strong><a href="https://www.techlusive.in/hi/webstories/tips-and-tricks-hindi/how-to-hide-instagram-instants-easily-step-by-step-guide-1664082/">Instagram</a></strong> और Facebook Plus नाम से सब्सक्रिप्शन प्लान को पेश किया है। इसकी कीमत 3.99 डॉलर यानी करीब 387 रुपये है। WhatsApp की बात करें, तो इसके प्लस सब्सक्रिप्शन का प्राइस 2.99 डॉलर यानी करीब 290 रुपये है। इन प्लान को अमरिका में रिलीज किया गया है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक भारतीय यूजर्स के लिए सब्सक्रिप्शन प्लान की कीमतों का ऐलान नहीं किया है।</p>
</p>
<p>रिपोर्ट्स की मानें, तो मेटा ने अपनी कमाई बढ़ाने के लिए सब्सक्रिप्शन प्लान को उतारा है। इस कदम से पता चलता है कि कंपनी रेवेन्यू के लिए सिर्फ विज्ञापन पर भरोसे नहीं बैठना चाहती है।</p>
<h2>WhatsApp प्लस में मिलेंगी ये सुविधाएं</h2>
</p>
<p><strong><a href="https://www.techlusive.in/hi/apps/whatsapp-soon-replace-tenor-with-klipy-gif-provider-report-claims-1664142/">व्हाट्सएप</a></strong> प्लस लेने वाले यूजर्स को ऐप में ऐसे फीचर्स दिए जाएंगे, जिससे उनका चैटिंग एक्सपीरियंस बेहतर होगा। इसके साथ कस्टमाइज थीम, यूनिक रिंगटोन, एक्सक्लूसिव स्टीकर और अधिक चैट्स को पिन करने का विकल्प दिया जाएगा।</p>
</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इंस्टाग्राम और फेसबुक प्लस सब्सक्रिप्शन लेने वाले यूजर्स को कई खास व प्रीमियम फीचर्स मिलेंगे। इंस्टाग्राम में यूजर्स देख पाएंगे कि उनकी स्टोरी को कितनी बार दोबारा देखा गया है। इसमें ऑडियंस लिस्ट बनाने के साथ बिना व्यूअर लिस्ट आए स्टोरी प्रीव्यू देखने का विकल्प मिलेगा।</p>
</p>
<p>नए प्लान के तहत इंस्टाग्राम में 24 घंटे से ज्यादा स्टोरी लगाई जा सकेगी। हर सप्ताह में एक बार स्टोरी को हाइलाइट किया जा सकेगा, जिससे ज्यादा से ज्यादा यूजर्स उस स्टोरी को देख सकेंगे। इसके अलावा, एनिमेटेड हार्ट रिएक्शन, कस्टम ऐप आइकन और बायो में डिटेल लिखने के लिए स्पेशल फॉन्ट मिलेंगे।</p>
<h2>वेरिफाइड प्लान से हैं अलग</h2>
</p>
<p><strong><a href="https://www.techlusive.in/hi/news/meta-ray-ban-display-smart-glasses-feature-allow-users-message-through-hand-gesture-1662432/">मेटा</a></strong> द्वारा लॉन्च किए गए प्लान वेरिफाइड प्लान से अलग हैं। वेरिफाइड कंपनी का मौजूदा पेड प्लान है। इसमें सिर्फ ब्लू टिक दिया जाता है, जिससे पता चलता है कि यह अकाउंट वेरिफाइड है।</p>
<h2>Meta One प्लान से उठा पर्दा</h2>
</p>
<p>आपको बता दें कि मेटा ने व्हाट्सएप, एफबी और इंस्टाग्राम प्लस सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च करने के अलावा मेटा वन नाम का प्लान पेश किया है। इसकी कीमत 7.99 डॉलर (775 रुपये) है। इसमें एआई से इमेज और वीडियो बनाने के लिए टूल मिल रहे हैं। इसके साथ मेटा वन प्रीमियम नाम से भी प्लान को उतारा है। इसकी कीमत 19.99 डॉलर (1939 रुपये) है। इसमें कंपनी के सबसे लेटेस्ट फीचर्स इस्तेमाल करने के लिए मिल रहे हैं।</p>
<h2>क्रिएटर्स के लिए भी आए प्लान</h2>
</p>
<p>मेटा ने क्रिएटर्स के लिए भी प्लान लॉन्च किए हैं। इनमें पहला Meta One Essential और दूसरा Meta One Advanced है। इनकी कीमतें 14.99 डॉलर (करीब 1454 रुपये) और 49.99 डॉलर (करीब 4,813 रुपये) है।</p>
]]></content:encoded>
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		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[ajay verma]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 11:47:10 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Amazon Echo Dot Max और Amazon Echo Studio भारत में AZ3 चिप के साथ लॉन्च, कीमत 10,999 से शुरू]]></title>
		<description>Amazon ने Amazon Echo Dot Max और Amazon Echo Studio स्मार्ट होम स्पीकर्स भारत में लॉन्च कर दिए हैं। इन स्पीकर्स में आपको कई धाकड़ फीचर्स मिलेंगे। यहां जानें कीमत और खूबियां।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Amazon Echo Dot Max</strong> और Amazon Echo Studio स्मार्ट होम स्पीकर्स भारत में लॉन्च हो गए हैं। भारत से पहले इन स्पीकर्स को अमेरिकी मार्केट में पेश किया गया था। भारत में ये दोनों ही डिवाइस कस्टम डिजाइन सिलिकॉन AZ3 सीरीज चिप से लैस है। इनके साथ स्पीकर्स में माइक्रोफोन टॉगल दिया गया है। यह पुराने Echo डिवाइस की तुलना में ज्यादा एनहैंस्ड बेस प्रोवाइड करता है। Echo Dot Max में कंपनी ने 3 कलर ऑप्शन पेश किए हैं, वहीं स्टूडियो में 2 कलर ऑप्शन मौजूद है। आइए जानते हैं इनकी कीमत, उपलब्धता और फीचर्स।</p>
<h2>Amazon Echo Dot Max, Echo Studio Price in India, Availability</h2>
</p>
<p>कंपनी ने <a href="https://www.techlusive.in/hi/news/amazon-fire-tv-stick-hd-launched-in-india-with-fhd-1080p-streaming-xbox-cloud-gaming-support-price-and-specifications-1662907/">Amazon</a> Echo Dot Max को 10,999 रुपये की कीमत में पेश किया है। जैसे कि हमने बताया कंपनी ने इन स्पीकर्स को Amethyst, Glacier White और Graphite कलर ऑप्शन में पेश किया है। वहीं, दूसरी Amazon Echo Studio को 23,999 रुपये में पेश किया गया है। इसमें आपको Glacier White और Graphite कलर ऑप्शन मिलते हैं। इन दोनों ही डिवाइस को आप Amazon और Flipkart के जरिए खरीद सकते हैं।</p>
</p>
<div id="attachment_1664087" style="width: 1330px" class="wp-caption alignnone"><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Echo-dot-max.jpg"><img loading="lazy" aria-describedby="caption-attachment-1664087" class="wp-image-1664087 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Echo-dot-max.jpg" alt="" width="1320" height="743" /></a></p>
<p id="caption-attachment-1664087" class="wp-caption-text">Amazon Echo Dot Max</p>
</div>
<h2>Amazon Echo Dot Max, Echo Studio Specifications, Features</h2>
</p>
<p>फीचर्स की बात करें, तो Amazon Echo Dot Max और Amazon Echo Studio में कंपनी ने कस्टम AZ3 और AZ3 Pro चिप दी है। यह चिप Alexa को स्मार्ट होम डिवाइस में बेहतर wake-word detection प्रोवाइड करती है। इतना ही नहीं इस बार कंपनी ने चिप के साथ शानदार Conversation Detection को भी बेहतर किया है।</p>
</p>
<div id="attachment_1664085" style="width: 1330px" class="wp-caption alignnone"><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/echo-studio.jpg"><img loading="lazy" aria-describedby="caption-attachment-1664085" class="size-full wp-image-1664085" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/echo-studio.jpg" alt="" width="1320" height="743" /></a></p>
<p id="caption-attachment-1664085" class="wp-caption-text">Amazon Echo Dot Max</p>
</div>
</p>
<p>Echo Dot Max और Echo Studio को Fire TV sticks के साथ कनेक्ट करके Alexa Home Theatre एक्सपीरियंस प्राप्त किया जा सकता है। कनेक्टिविटी के लिए इसमें Wi-Fi, Zigbee, Thread, Matter और Bluetooth आदि शामिल है। साथ ही इनमें बिल्ट-इन स्मार्ट होम हब दिया गया है, जो कि अन्य स्मार्ट होम अप्लाइंसेस के साथ वायरलेस कनेक्टिविटी प्रोवाइड करता है, जिसमें लाइट्स, एसी, फैन्स  स्मार्ट प्लग आदि शामिल है।</p>
</p>
<p>ऑडियो की बात करें, तो ये पुराने Echo Dot की तुलना में 3 गुना बेहतर bass enhancement डिलीवर करते हैं। इनमें 2-वे स्पीकर सेटअप दिया गया है, जिसमें “high-excursion” woofer व tweeter शामिल है। इतना ही नहीं इनमें spatial audio और Dolby Atmos का सपोर्ट भी मिलता है। कंपनी ने इनमें 3D knit fabric बॉडी दी है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Echo-Dot-Max-and-Studio.png' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Amazon’s New Echo Speakers Bring Dolby Atmos, Smart Home Features]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/amazon-echo-dot-max-and-echo-studio-launched-in-india-with-custom-az3-series-chips-price-and-specs-1664103/</guid>
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		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 08:02:41 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[मंगल ग्रह के नीचे छिपा है बड़ा राज, क्या अब रोबोट खोलेंगे नया रहस्य?]]></title>
		<description>मंगल ग्रह की सतह के नीचे छिपी रहस्यमयी लावा सुरंगों को खोजने के लिए वैज्ञानिक खास रोबोट और छोटे ड्रोन तैयार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि ये गुफाएं भविष्य में इंसानों को सुरक्षित ठिकाना दे सकती हैं, साथ ही यहां जीवन के संकेत मिलने की उम्मीद भी है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मंगल ग्रह की सतह के नीचे छिपे रहस्यमयी लावा ट्यूब्स को खोजने के लिए वैज्ञानिक अब खास तरह के रोबोट तैयार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि मंगल ग्रह के नीचे लगभग 746 मील लंबे सुरंगों का विशाल नेटवर्क मौजूद है, जो करोड़ों साल पहले ज्वालामुखी विस्फोटों से बना था। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये भूमिगत गुफाएं मंगल पर मौजूद खतरनाक रेडिएशन से सुरक्षा दे सकती हैं। इतना ही नहीं, यहां सूक्ष्म जीवों के जीवन के संकेत भी मिल सकते हैं और भविष्य में इंसानों के रहने के लिए सुरक्षित जगह भी तैयार हो सकती है। अब तक इन गुफाओं की जांच करना बेहद मुश्किल था, लेकिन नई टेक्नोलॉजी ने उम्मीद बढ़ा दी है।</p>
<h2><strong>क्या है ये खास टेक्नोलॉजी?</strong></h2>
</p>
<p>अमेरिका केNew Mexico Tech के वैज्ञानिक Mostafa Hassanalian एक खास रोबोटिक सिस्टम पर काम कर रहे हैं, जो प्रकृति से प्रेरित है। इस सिस्टम का पहला हिस्सा &#8216;Roly-Poly Robot&#8217; है, जिसे पिलबग नाम के छोटे कीड़े की तरह डिजाइन किया गया है। यह रोबोट गेंद की तरह गोल होकर मंगल की सतह पर मौजूद बड़े गड्ढों यानी &#8216;Skylight&#8217; से नीचे लावा ट्यूब्स में उतर सकता है। वहां पहुंचने के बाद यह हजारों छोटे &#8216;डैंडेलियन ड्रोन&#8217; छोड़ता है। ये बेहद हल्के उड़ने वाले ड्रोन हैं, जो मंगल की सुरंगों में बहने वाली तेज हवाओं के सहारे कई मील तक उड़ सकते हैं और रास्ते का नक्शा तैयार कर सकते हैं।</p>
<h2><strong>क्या छोटे ड्रोन मंगल की सुरंगों का नक्शा बना पाएंगे?</strong></h2>
</p>
<p>इन छोटे ड्रोन को खास सफेद रंग में बनाया गया है, ताकि वे कम गर्म हों और वजन में हल्के रहें। वैज्ञानिकों के अनुसार, ये ड्रोन एक खास Piezoelectric टेक्नोलॉजी से चलते हैं, जिसमें नरम और लचीले पॉलिमर से एनर्जी बनाई जाती है। इन ड्रोन का काम मंगल की लावा सुरंगों के अंदर जाकर वहां का तापमान, सुरंगों की बनावट और जीवन से जुड़े संकेतों की जानकारी जुटाना है। अभी मंगल पर मौजूद बड़े रोवर्स जैसे Curiosity और Perseverance बहुत बड़े और भारी हैं, इसलिए वे इन पतली और तंग सुरंगों में नहीं जा सकते। इसी वजह से वैज्ञानिक लंबे समय से छोटे रोबोट्स बनाने की कोशिश कर रहे थे।</p>
<h2><strong>क्या मंगल ग्रह की इन गुफाओं में इंसानों को फायदा होगा?</strong></h2>
</p>
<p>मंगल ग्रह के नीचे छिपे रहस्यों को जानने की दौड़ अब पूरी दुनिया में तेज हो गई है। यूरोप के वैज्ञानिक स्पेन के Lanzarote इलाके की लावा गुफाओं में ऐसे रोबोट्स का टेस्ट भी कर चुके हैं। वहीं NASA भी मंगल ग्रह के Arsia Mons ज्वालामुखी इलाके की जांच की तैयारी कर रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इन लावा सुरंगों में जीवन के कोई निशान मिलते हैं, तो यह इंसानों के लिए बहुत बड़ी और ऐतिहासिक खोज होगी। इतना ही नहीं, भविष्य में मंगल पर इंसानों की बस्ती बसाने में भी ये सुरंगें काफी मददगार साबित हो सकती हैं।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Mars-Lava-Tubes.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Mars Lava Tubes]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/scientists-develop-swarm-robots-to-explore-hidden-lava-tubes-beneath-mars-surface-1664031/</guid>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 07:35:42 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Spotify Premium यूजर्स की हुई बल्ले-बल्ले, मुफ्त में मिलेगा ये नया फीचर]]></title>
		<description>Spotify ने अपने यूजर्स के लिए एक शानदार नया फीचर लॉन्च किया है। अब लोग सिर्फ गाने और पॉडकास्ट ही नहीं, बल्कि लंबी मैगजीन आर्टिकल्स भी ऑडियो फॉर्म में सुन सकेंगे। खास बात यह है कि Spotify Premium यूजर्स को यह सुविधा बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के मिलेगी। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Spotify ने अपने यूजर्स के लिए एक नया और खास फीचर पेश किया है। अब यूजर्स ऐप पर सिर्फ गाने और पॉडकास्ट ही नहीं, बल्कि लंबी मैगजीन आर्टिकल्स को ऑडियो फॉर्म में भी सुन सकेंगे। कंपनी ने बताया कि यह फीचर उन 22 देशों में शुरू किया जा रहा है जहां पहले से Spotify Audiobooks उपलब्ध हैं। इस नए फीचर के जरिए यूजर्स अब मशहूर मैगजीन और पब्लिकेशन के लेखों को बिना पढ़े, सीधे सुन सकेंगे। कंपनी का मानना है कि इससे लोगों को जानकारी हासिल करने का नया और आसान तरीका मिलेगा।</p>
<h2><strong>Premium और Free यूजर्स के लिए क्या होंगे नए नियम?</strong></h2>
</p>
<p>Spotify ने बताया कि Premium सब्सक्राइबर्स को यह सुविधा बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के मिलेगी। यानी जो लोग पहले से Spotify Premium इस्तेमाल कर रहे हैं, वे अपने मौजूदा Audiobooks प्लेबैक अलाउंस के अंदर इन आर्टिकल्स को सुन पाएंगे। वहीं फ्री यूजर्स को हर आर्टिकल अलग से खरीदना होगा, जिसकी कीमत 1.99 डॉलर यानी लगभग 190 रुपये रखी गई है। कंपनी के मुताबिक हर ऑडियो आर्टिकल की लंबाई दो घंटे से कम होगी, ताकि यूजर्स आसानी से उन्हें सुन सकें। यह फीचर खासतौर पर उन लोगों के लिए यूजफुल माना जा रहा है जो लंबे आर्टिकल्स पढ़ने की बजाय सुनना पसंद करते हैं।</p>
<h2><strong>किन मशहूर मैगजीन के आर्टिकल्स सुनने को मिलेंगे?</strong></h2>
</p>
<p>Spotify की इस नई लाइब्रेरी में फिलहाल 650 से ज्यादा लंबे आर्टिकल्स शामिल किए गए हैं। इनमें मशहूर पब्लिकेशन जैसे Rolling Stone, The Atlantic, Vogue, WIRED, GQ, Billboard और Vanity Fair के आर्टिकल्स मौजूद हैं। फिलहाल ये सभी आर्टिकल्स केवल अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध हैं। Spotify का कहना है कि यह फीचर यूजर्स को पॉडकास्ट से आगे बढ़ाकर ऑडियोबुक्स और लंबे कंटेंट की दुनिया से जोड़ने का काम करेगा। साथ ही इससे लोग अपने पसंदीदा कलाकारों और विषयों के बारे में ज्यादा गहराई से जानकारी भी हासिल कर पाएंगे।</p>
<h2><strong>Spotify का यह नया फीचर यूजर्स के लिए क्यों खास है?</strong></h2>
</p>
<p>Spotify Audiobooks की Licensing Lead Colleen Prendergast ने कहा कि यह फीचर म्यूजिक, पॉडकास्ट और ऑडियोबुक्स के बीच एक नेचुरल एक्सटेंशन की तरह काम करेगा। उनके अनुसार लोग जिन विषयों को पसंद करते हैं, अब उन्हीं से जुड़े लंबे आर्टिकल्स भी ऑडियो फॉर्म में सुन सकेंगे। कंपनी को उम्मीद है कि यह नया फीचर यूजर्स के कंटेंट सुनने के अनुभव को और बेहतर बनाएगा। आने वाले समय में Spotify इस लाइब्रेरी में और ज्यादा पब्लिकेशन और भाषाओं को भी जोड़ सकता है, जिससे दुनिया भर के यूजर्स को इसका फायदा मिलेगा।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2025/08/Spotify-India-price-hike.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Spotify India price hike]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/spotify-launches-audio-magazine-articles-feature-for-premium-users-1664020/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/spotify-launches-audio-magazine-articles-feature-for-premium-users-1664020/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 06:13:03 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[सौर मंडल से जुड़े सबसे बड़े राज का हुआ खुलासा, वैज्ञानिकों की इन नई रिचर्स ने सबको चौंकाया!]]></title>
		<description>सौर मंडल की शुरुआत को लेकर वैज्ञानिकों ने एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। नई रिसर्च के मुताबिक, Jupiter ग्रह के बाहर मौजूद धूल और गैस की विशाल रिंग कभी ‘Planet Factory’ की तरह काम करती थी। यहीं से छोटे अंतरिक्षीय पिंड बने, जिन्होंने बाद में ग्रहों और Asteroids की नींव रखी। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>वैज्ञानिकों ने Solar System की शुरुआत से जुड़ा एक बड़ा रहस्य समझने का दावा किया है। जर्मनी के Max Planck Institute for Solar System Research के वैज्ञानिकों के मुताबिक, Jupiter ग्रह के बाहर धूल और गैस की एक बहुत बड़ी रिंग मौजूद थी, जो अरबों साल पहले &#8216;Planet Factory&#8217; की तरह काम कर रही थी। इसी जगह पर छोटे-छोटे अंतरिक्षीय पत्थर बने, जिन्हें प्लैनेटेसिमल्स कहा जाता है, बाद में यही पत्थर मिलकर ग्रहों और Asteroids की नींव बने। वैज्ञानिकों का मानना है कि करीब 4.6 अरब साल पहले जब Solar System बन रहा था, तब युवा सूर्य के चारों ओर गैस और धूल का एक विशाल घेरा फैला हुआ था। इस घेरे में मौजूद छोटे कण आपस में टकराते रहे और धीरे-धीरे बड़े होते गए। समय के साथ यही कण ग्रहों में बदलने लगे। नई स्टडी के अनुसार, ग्रह बनने की यह प्रक्रिया पूरे सौर मंडल में एक जैसी नहीं थी। अलग-अलग जगहों पर हालात अलग थे, इसलिए कहीं ग्रह तेजी से बने तो कहीं उनकी बनावट अलग तरीके से हुई। वैज्ञानिकों का कहना है कि बृहस्पति के बाहर वाला इलाका ग्रह बनाने के लिए सबसे खास और एक्टिव जगहों में से एक था।</p>
<h2><strong>कैसे बना Jupiter के पास धूल और गैस का विशाल &#8216;Dust Trap&#8217;?</strong></h2>
</p>
<p>शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर सिमुलेशन की मदद से पता लगाया कि Jupiter ग्रह के बाहर मौजूद यह &#8216;Dust Trap&#8217; लाखों सालों तक नए-नए अंतरिक्षीय पिंड बनाता रहा। वैज्ञानिकों के अनुसार, जब Jupiter ने अपने आसपास की ज्यादातर गैस और धूल को अपनी ओर खींच लिया, तब उसके बाहर एक बहुत घना और दबाव वाला इलाका बन गया। इस इलाके में बड़ी मात्रा में धूल जमा होने लगी। धीरे-धीरे छोटे-छोटे कण, जो कंकड़ जैसे दिखते थे, आपस में जुड़कर बड़े पत्थरों और पिंडों में बदलने लगे। बाद में यही पिंड ग्रहों और क्षुद्रग्रहों की नींव बने। रिसर्च टीम की प्रमुख Joanna Drążkowska ने बताया कि एक ही जगह पर अलग-अलग समय में अलग तरह के प्लैनेटेसिमल्स बने। यही वजह हो सकती है कि आज Solar System में Planets, Meteorites और Asteroids एक-दूसरे से इतने अलग दिखाई देते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह &#8216;Planet Factory&#8217; करीब 20 लाख साल तक लगातार काम करती रही और इस दौरान अंतरिक्ष में नए-नए पिंड बनते रहे।</p>
<h2><strong>Meteorites में कैसे छिपे हैं सौर मंडल के जन्म के पुराने राज?</strong></h2>
</p>
<p>इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने खास तरह के उल्कापिंडों का अध्ययन किया, जिन्हें &#8216;Carbonaceous Chondrite&#8217; कहा जाता है। इन उल्कापिंडों में कार्बन बहुत ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि ये सौर मंडल की शुरुआत के समय से लगभग वैसे ही बचे हुए हैं और इनमें ज्यादा बदलाव नहीं हुआ। पृथ्वी पर मिलने वाले ये उल्कापिंड वैज्ञानिकों के लिए किसी &#8216;Time Capsule&#8217; की तरह हैं क्योंकि इनके जरिए सौर मंडल के पुराने समय की जानकारी मिलती है। लैब में जांच करने पर पता चला कि इनकी उम्र और बनावट उसी इलाके से मिलती है, जिसे वैज्ञानिकों ने अपने कंप्यूटर सिमुलेशन में खोजा था। कुछ उल्कापिंड बहुत नरम और धूल जैसी चीजों से बने, जबकि कुछ में बड़े और मजबूत कण पाए गए। वैज्ञानिकों का कहना है कि बहुत पहले, जब सौर मंडल बन रहा था, तब अंतरिक्ष में दो तरह की चीजें थीं। एक बिल्कुल बारीक धूल जैसी थी, जबकि दूसरी सख्त और मजबूत टुकड़ों जैसी थी, जो बहुत ज्यादा गर्म जगहों पर बनी थीं। समय के साथ ये छोटी-छोटी चीजें आपस में चिपकती गईं और धीरे-धीरे बड़ी होती गईं, बाद में इन्हीं से ग्रह, उल्कापिंड और अंतरिक्ष के दूसरे बड़े-बड़े पिंड बन गए।</p>
<h2><strong>क्या इस खोज से अब ग्रहों के बनने की पूरी कहानी समझ आएगी?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज सिर्फ Meteorites के बनने की कहानी नहीं बताती, बल्कि इससे यह समझने में भी मदद मिलती है कि पूरा सौर मंडल कैसे बना था। रिसर्च टीम ने कंप्यूटर मॉडल की मदद से बहुत छोटे धूल के कणों की टक्कर से लेकर अंतरिक्ष में गैस और धूल की बड़ी हलचल तक सबकुछ समझने की कोशिश की। वैज्ञानिकों ने देखा कि Jupiter बड़े और भारी कणों को अपनी तरफ रोक लेता था, जबकि छोटे और हल्के धूल के कण आगे निकल जाते थे। धीरे-धीरे अंतरिक्ष में इन कणों की मात्रा बदलती गई और अलग-अलग समय पर नए-नए अंतरिक्षीय पिंड बनने लगे। बाद में इन्हीं से ग्रह, Meteorites और दूसरे बड़े पिंड बने। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आगे होने वाली नई रिसर्च से यह भी पता चल सकेगा कि पृथ्वी और दूसरे ग्रह आखिर कैसे बने थे। यह खोज इस बात का मजबूत सबूत भी देती है कि धूल से भरे ऐसे इलाके ही अंतरिक्ष में ग्रह बनाने की सबसे बड़ी फैक्ट्रियां थे।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>आखिर वैज्ञानिकों ने सौर मंडल को लेकर क्या नई खोज की है?</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि Jupiter ग्रह के बाहर धूल और गैस की एक विशाल रिंग मौजूद थी, जो अरबों साल पहले &#8216;Planet Factory&#8217; की तरह काम करती थी। इसी जगह छोटे-छोटे अंतरिक्षीय पिंड बने, जिनसे बाद में Planets और Asteroids तैयार हुए।</p>
<h2><strong>‘Dust Trap’ क्या होता है?</strong></h2>
</p>
<p>‘Dust Trap’ अंतरिक्ष का ऐसा इलाका होता है जहां धूल और गैस बड़ी मात्रा में जमा हो जाती है। Jupiter के आसपास बने इस क्षेत्र में छोटे कण आपस में जुड़ते गए और धीरे-धीरे बड़े पत्थरों व प्लैनेटेसिमल्स में बदल गए।</p>
<h2><strong>Carbonaceous Chondrite उल्कापिंड इतने खास क्यों हैं?</strong></h2>
</p>
<p>ये उल्कापिंड सौर मंडल के शुरुआती समय के सबसे पुराने अवशेष माने जाते हैं। इनमें करोड़ों साल पुरानी जानकारी सुरक्षित है, इसलिए वैज्ञानिक इन्हें &#8216;Time Capsule&#8217; की तरह इस्तेमाल करते हैं।</p>
<h2><strong>क्या Jupiter ने ग्रह बनने की प्रक्रिया को प्रभावित किया था?</strong></h2>
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<p>वैज्ञानिकों के अनुसार Jupiter ने अपने Gravity से बड़े और भारी कणों को रोक लिया, जबकि हल्के कण आगे बढ़ते रहे। इसी वजह से अलग-अलग जगहों पर अलग तरह के ग्रह और अंतरिक्षीय पिंड बने।</p>
<h2><strong>इस रिसर्च से भविष्य में क्या फायदा होगा?</strong></h2>
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<p>इस खोज से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि पृथ्वी और दूसरे ग्रह आखिर कैसे बने थे। साथ ही इससे पूरे Solar System की शुरुआती कहानी को और बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।</p>
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		<media:description type='plain'><![CDATA[Jupiter Planet Factory]]></media:description>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
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