<?xml version='1.0' encoding='UTF-8' ?><!-- generated-on='June 24, 2026 7:40 am' -->
<rss version='2.0' xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' xmlns:content='http://purl.org/rss/1.0/modules/content/'
	xmlns:wfw='http://wellformedweb.org/CommentAPI/' xmlns:dc='http://purl.org/dc/elements/1.1/'
	xmlns:atom='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:sy='http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/'
	xmlns:slash='http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/'>
  <channel>
	<title><![CDATA[Latest Technology &amp; Gadgets - News in Hindi | News &amp; Reviews on Gadgets, Smart Phones, Mobile Apps &amp; Gaming | टेक न्यूज़ इन हिंदी | TECHLUSIVE.in Hindi]]></title>
	<description><![CDATA[Latest Technology &amp; Gadgets - News in Hindi | News &amp; Reviews on Gadgets, Smart Phones, Mobile Apps &amp; Gaming | टेक न्यूज़ इन हिंदी | TECHLUSIVE.in Hindi]]></description>
	<lastBuildDate>Wed, 24 Jun 2026 07:40:03 +0000</lastBuildDate>
	<link>https://www.techlusive.in/hi/news/</link>
	<atom:link href='https://www.techlusive.in/rss-feeds/news-hindi.xml' rel='self' type='application/rss+xml' />
	 <item>
		<pubDate>Wed, 24 Jun 2026 06:58:21 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Google Chrome का नया Autofill फीचर क्या है और यह कैसे काम करेगा?]]></title>
		<description>मोबाइल पर लंबे-लंबे फॉर्म भरना अक्सर परेशानी भरा काम होता है, खासकर जब पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या गाड़ी की जानकारी दर्ज करनी हो। अब Google Chrome का नया Autofill फीचर इस काम को आसान बनाने वाला है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मोबाइल पर किसी फॉर्म को भरना अक्सर लोगों के लिए झंझट भरा काम होता है। छोटी स्क्रीन पर पासपोर्ट नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस की जानकारी या गाड़ी से जुड़ी डिटेल्स टाइप करना समय लेने वाला और कई बार परेशान करने वाला अनुभव बन जाता है। अब Google इस समस्या को आसान बनाने की तैयारी में है। कंपनी ने Chrome ब्राउजर के लिए नए Autofill फीचर्स जारी किए हैं, जिनकी मदद से Android और iPhone यूजर्स अपने पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और गीड़ी के जुड़ी जानकारी को कुछ ही सेकंड में फॉर्म में भर सकेंगे। यह अपडेट 23 जून 2026 से Android और iOS डिवाइसों पर रोलआउट होना शुरू हो गया है।</p>
<h2><strong>पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस की जानकारी अब मोबाइल पर कैसे भरेगी?</strong></h2>
</p>
<p>दरअसल, Google ने नवंबर 2025 में Chrome Autofill फीचर को और बेहतर बनाया था। पहले Chrome सिर्फ पासवर्ड, पता और पेमेंट की जानकारी अपने आप भर सकता था। बाद में इसमें पासपोर्ट नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस की डिटेल्स, गाड़ी का VIN नंबर और नंबर प्लेट जैसी जानकारियां सेव करने की सुविधा भी जोड़ दी गई। उस समय यह फीचर केवल कंप्यूटर (डेस्कटॉप) यूजर्स के लिए उपलब्ध था। अब Google इसे Android और iPhone यूजर्स के लिए भी लेकर आया है। यानी अगर आपने ये जानकारी पहले से सेव कर रखी है, तो मोबाइल पर कोई फॉर्म भरते समय बार-बार टाइप करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। Chrome खुद ही जानकारी भरने का सजेशन देगा।</p>
<h2><strong>Google Wallet की मदद से कौन-कौन सी जानकारी ऑटोफिल होगी?</strong></h2>
</p>
<p>इस नए फीचर में Google Wallet की अहम भूमिका होगी। Chrome, Google Wallet में सुरक्षित रखी गई जानकारी को आपकी अनुमति मिलने पर फॉर्म में अपने आप भर सकेगा। Google का कहना है कि यह जानकारी पूरी तरह सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड रहेगी। इसके अलावा अब Chrome फ्लाइट, होटल और कार रेंटल से जुड़े लॉयल्टी कार्ड की डिटेल्स भी ऑटोफिल कर पाएगा। अगर आपकी गाड़ी की जानकारी Google Wallet में सेव नहीं है, तो Chrome पहली बार फॉर्म भरते समय उसे सेव करने का ऑप्शन देगा। बाद में आप इन सभी जानकारियों को Google Wallet या Chrome की Autofill सेटिंग्स में जाकर आसानी से देख, बदल और मैनेज कर सकेंगे।</p>
<h2><strong>नए फीचर्स कितने सुरक्षित हैं और यूजर्स को क्या फायदे मिलेंगे?</strong></h2>
</p>
<p>Google ने Autofill को और आसान बनाने के लिए Google Account इंटीग्रेशन भी जोड़ा है। अब अगर आप Chrome में अपने Google अकाउंट से Login हैं, तो किसी वेबसाइट पर Signup या Login करते समय आपका नाम, ईमेल और सेव किया गया घर या ऑफिस का पता अपने आप भर जाएगा। यह फीचर Desktop, Android, iPhone और iPad सभी डिवाइसों पर काम करेगा। Android यूजर्स को Autofill सजेशन के लिए नया इंटरफेस भी मिलेगा, जिससे अलग-अलग सेव किए गए पते और कार्ड को पहचानना आसान होगा। वहीं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए Google ने पासपोर्ट और Identity जैसी जानकारी वाले फीचर को डिफॉल्ट रूप से बंद रखा है। इइसे इस्तेमाल करने के लिए कई डिवाइसों पर बायोमेट्रिक या PIN वेरिफिकेशन की जरूरत होगी।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Google-Chrome-Autofill.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Google Chrome Autofill]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/google-chrome-autofill-now-supports-passport-driver-license-and-vehicle-details-on-android-iphone-1666979/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/google-chrome-autofill-now-supports-passport-driver-license-and-vehicle-details-on-android-iphone-1666979/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Wed, 24 Jun 2026 06:25:05 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[न्यूक्लियर रिएक्टर के आसपास नीली रोशनी क्यों चमकती है? जानिए इसके पीछे का विज्ञान]]></title>
		<description>न्यूक्लियर रिएक्टरों की तस्वीरों में दिखाई देने वाली नीली रोशनी लोगों को अक्सर रहस्यमयी और डरावनी लगती है, लेकिन इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि एक दिलचस्प वैज्ञानिक प्रक्रिया काम करती है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>न्यूक्लियर पावर को बिजली बनाने का एक पावरफुल तरीका माना जाता है। यह पूरी तरह Pollution-Free नहीं है, लेकिन कोयला और तेल जैसे ईंधनों की तुलना में काफी कम ग्रीनहाउस गैसें छोड़ता है। यही वजह है कि दुनिया के कई देश Electricity Generation के लिए परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। हालांकि, न्यूक्लियर रिएक्टरों की तस्वीरों में दिखने वाली नीली रोशनी अक्सर लोगों का ध्यान खींच लेती है। कई लोग इसे देखकर डर जाते हैं, लेकिन असल में इस नीली चमक के पीछे एक बेहद दिलचस्प वैज्ञानिक कारण छिपा हुआ है।</p>
<h2><strong>नीली चमक क्या होती है और यह कैसे बनती है?</strong></h2>
</p>
<p>इस नीली चमक को चेरेनकोव रेडिएशन (Cherenkov Radiation) कहा जाता है। यह तब पैदा होती है जब Electron या Proton जैसे Electrical Charge वाले Particles पानी या किसी Transparent Medium में Light की स्पीड से भी तेज चलने लगते हैं, क्योंकि आमतौर पर कोई भी चीज Light की स्पीड से तेज नहीं चल सकती, लेकिन पानी में Light की स्पीड लगभग 25% कम हो जाती है। ऐसे में कुछ High Energy Particles पानी के भीतर Light से तेज स्पीड हासिल कर लेते हैं। इससे पानी के Molecules में गड़बड़ी पैदा होती है और वे Photon यानी Light Particles Emitted करते हैं, जब ऐसा होता है, तो पानी के Molecule Excited हो जाते हैं और नीली रोशनी छोड़ते हैं। वैज्ञानिक इसे Sound के &#8216;Sonic Boom&#8217; की तरह मानते हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि यहां आवाज की जगह रोशनी की चमक दिखाई देती है।</p>
<h2><strong>चेरेनकोव रेडिएशन नीले कलर की ही क्यों दिखाई देती है?</strong></h2>
</p>
<p>यह रोशनी नीले रंग की क्यों दिखती है, इसके पीछे भी एक वैज्ञानिक वजह है। रोशनी छोटे-छोटे कणों यानी फोटॉन से बनी होती है और हर कलर की अपनी अलग Wavelength और Frequency होती है। चेरेनकोव रेडिएशन के दौरान जो फोटॉन निकलते हैं, उनकी Wavelength छोटी और एनर्जी ज्यादा होती है। इसलिए यह रोशनी नीले और बैंगनी कलर के बीच की दिखाई देती है। हालांकि इसमें बैंगनी कलर भी होता है, लेकिन हमारी आंखें नीले कलर को ज्यादा आसानी से देख पाती हैं। यही वजह है कि न्यूक्लियर रिएक्टरों के आसपास यह चमक ज्यादातर नीले कलर की नजर आती है।</p>
<h2><strong>चेरेनकोव रेडिएशन का इस्तेमाल किन-किन कामों में होता है?</strong></h2>
</p>
<p>इसके अलावा, कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रेडियोथेरेपी के दौरान भी यह नीली चमक पैदा हो सकती है। डॉक्टर इसकी मदद से यह समझ सकते हैं कि मरीज के शरीर में रेडिएशन सही जगह और सही मात्रा में पहुंच रही है या नहीं। इतना ही नहीं, Space और Particle Physics से जुड़े कई बड़े वैज्ञानिक प्रयोगों में भी चेरेनकोव रेडिएशन का यूज किया जाता है। इसलिए यह नीली रोशनी सिर्फ एक दिलचस्प नजारा नहीं, बल्कि विज्ञान और चिकित्सा के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण भी है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Nuclear-Reactors.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Nuclear Reactors]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/why-do-nuclear-reactors-glow-blue-light-science-explained-cherenkov-radiation-1666973/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/why-do-nuclear-reactors-glow-blue-light-science-explained-cherenkov-radiation-1666973/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Wed, 24 Jun 2026 03:28:42 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Meta Glasses: AI टेक से लैस स्मार्ट ग्लासेस लॉन्च, जानें कीमत और फीचर्स]]></title>
		<description>Meta Glasses को ग्लोबल बाजार में उतार दिया गया है। इस ग्लासेस में AI टेक का सपोर्ट दिया गया है। इसमें एक्शन बटन और इंटीग्रेटेड कैमरा मिलते हैं। इसे तीन शानदार डिजाइन में उतारा गया है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Meta</strong> ने अपने नए स्मार्ट ग्लासेस को ग्लोबली लॉन्च कर दिया है। इस स्मार्ट चश्मे को प्रीमियम Eyewear ब्रांड EssilorLuxottica के साथ मिलकर तैयार किया है। इस लेटेस्ट ग्लासेस को अलग-अलग आकर्षक स्टाइल में उतारा गया है। फीचर्स की बात करें, तो मेटा ग्लासेस (Meta Glasses) में AI तकनीक का सपोर्ट दिया गया है। इसमें एक्शन बटन मिलता है। इसके अलावा, ग्लासेस में ओपन-इयर स्पीकर और हैंड्स-फ्री फोटो व वीडियो रिकॉर्ड करने की सुविधा मिलती है।</p>
</p>
<p><strong><a href="https://www.techlusive.in/hi/apps/meta-edits-gets-ai-assistant-and-desktop-support-to-boost-video-editing-for-creators-1665686/">Meta</a></strong> Glasses तीन शानदार डिजाइन में उपलब्ध है। Meta Adventurer मॉडल का फ्रेम Rectangular है। यह स्टैंडर्ड और लार्ज साइज में आता है। Meta Fury को अधिक बोल्ड और आकर्षक डिजाइन में पेश किया गया है। इसके साथ Meta Glasses by Kylie को भी उतारा गया है। इसका फ्रेम पतला और ओवल है। कंपनी का कहना है कि इन ग्लासेस को लाने का उद्देश्य यूजर्स को उनकी पसंद और चेहरे के आकार के अनुसार बेहतर ऑप्शन अवेलेबल कराना है।</p>
<h2>ऐसे हैं स्पेसिफिकेशन</h2>
</p>
<table>
<thead>
<tr>
<th>Feature</th>
</p>
<th>Details</th>
</p>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>Product</td>
</p>
<td>Meta Glasses</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>AI Model</td>
</p>
<td>Powered by <strong>Muse Spark AI</strong>, Meta&#8217;s latest AI model developed by Meta Superintelligence Labs</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>Interaction</td>
</p>
<td>Voice-controlled operation</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>Action Button</td>
</p>
<td>Dedicated button for quick access to Meta AI</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>Audio</td>
</p>
<td>Open-ear speakers for calling and media playback</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>Microphone</td>
</p>
<td>Advanced microphone system</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>Camera</td>
</p>
<td>Built-in camera for capturing photos and recording videos</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>Battery Life</td>
</p>
<td>Up to <strong>8 hours</strong> of usage on a single charge (as claimed by the company)</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>Key Purpose</td>
</p>
<td>AI-powered smart glasses with hands-free assistance, communication, and multimedia features</td>
</p>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>मेटा ग्लासेस कंपनी का पहला स्मार्ट ग्लास है, जिसे AI से लैस Muse Spark के साथ लाया गया है। यह कंपनी का लेटेस्ट एआई मॉडल है, जिसे Meta Superintelligence Labs द्वारा तैयार किया गया है। इसका इस्तेमाल बोलकर किया जा सकता है। इसमें एक्शन बटन दिया गया है। इससे मेटा एआई को एक्सेस किया जा सकता है। कॉलिंग और मीडिया प्लेबैक के लिए ओपन-इयर स्पीकर दिया गया है। इसके साथ एडवांस माइक्रोफोन भी मिलता है।</p>
</p>
<p>इस स्मार्ट ग्लासेस में कैमरा लगा है, जिससे शानदार फोटो क्लिक करने के साथ वीडियो शूट की जा सकती है। इसकी बैटरी भी कमाल की है। कंपनी की मानें, तो इसकी बैटरी सिंगल चार्ज में 8 घंटे तक काम करती है।</p>
<h2>जल्द मिलेंगे ये फीचर्स</h2>
</p>
<p>टेक कंपनी मेटा ने अपने लेटेस्ट स्मार्ट ग्लासेस में आने वाले फीचर्स का भी ऐलान किया है। इस स्मार्ट ग्लासेस में Dynamic Photo नाम का एक फीचर मिलेगा। इसकी खासियत है कि यह खुद-ब-खुद कई तस्वीरें कैप्चर करेगा और उनमें से सबसे अच्छी फोटो चुनने में मदद करेगा।</p>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/META-GLASSES-1.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone wp-image-1666943 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/META-GLASSES-1.jpg" alt="" width="1280" height="720" /></a></p>
</p>
<p>ग्लासेस में पैदल चलने वालों को रास्ता बताने वाले नेविगेशन फीचर भी लाया जाने वाला है। इसके अलावा, लाइव ट्रांसलेशन सुविधा को और बेहतर बनाया जाएगा, जिसमें हिंदी, जापानी, कोरियाई और मंदारिन चीनी समेत 14 नई भाषाओं का सपोर्ट मिलेगा।</p>
<h2>कितनी है कीमत ?</h2>
</p>
<p>Meta Glasses अमेरिका में अवेलेबल है। इसकी कीमत 299 डॉलर यानी 28,315 रुपये से शुरू होती है। फिलहाल, इस ग्लासेस की भारत में लॉन्चिंग को लेकर कोई जानकारी नहीं मिली है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में ग्लासेस की भारत में लॉन्चिंग को लेकर घोषणा की जा सकती है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/META-GLASSES.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/meta-glasses-launched-with-ai-and-integrated-camera-price-features-specs-1666941/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/meta-glasses-launched-with-ai-and-integrated-camera-price-features-specs-1666941/</link>
		<dc:creator><![CDATA[ajay verma]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Tue, 23 Jun 2026 08:26:35 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[WhatsApp CEO Kunal Shah: 15 की उम्र में जो था डिलीवरी बॉय, आज बन गया WhatsApp का हेड]]></title>
		<description>WhatsApp की कमान अब भारतीय के हाथों आ चुकी है। जी हां, Meta ने ऐलान किया है कि अब व्हाट्सऐप के ग्लोबल हेड Kunal Shah होंगे। यहां जानें कौन है कुणाल शाह? पढ़ाई से लेकर करियर तक का सफर।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>WhatsApp</strong> को अपना नया मालिक मिल चुका है। जी हां, पॉपुलर इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप की कमान अब भारतीय के हाथों आ चुकी है। हाल ही में कंपनी ने ऐलान किया है कि Kunal Shah (कुणाल शाह) को व्हाट्सऐप का ग्लोबल CEO नियुक्त किया गया है। कुणाल शाह व्हाट्सऐप से पहले भारतीय CRED ऐप के फाउंडर रह चुके हैं। वहीं, अब वो व्हाट्सऐप के ग्लोबल हेड बन गए हैं। कुणाल शाह से पहले विल कैथकार्ट (Will Cathcart) व्हाट्सऐप के हेड थे, जो कि साल 2019 से इस पद को संभाल रहे थे। ऐसा पहली बार होगा कि Meta कंपनी ने किसी भारतीय को व्हाट्सऐप की कमान दी हो।</p>
</p>
<p>Meta के CEO मार्क जकरबर्ग ने अपने ऑफिशियल Facebook हैंडल के जरिए इस नए फेरबदल की जानकारी सार्वजनिक की। उन्होंने अपने पोस्ट में बताया कि <a href="https://www.techlusive.in/hi/apps/instagram-plus-whatsapp-plus-and-facebook-plus-paid-subscriptions-plan-launched-by-meta-price-in-india-and-exclusive-features-details-1666236/">WhatsApp</a> के हेड विल कैथकार्ट लगभग 7 साल बाद अपने पद को छोड़ रहे हैं। अपने कार्यकाल के दौरान विल ने व्हाट्सऐप को 3 अरब से ज्यादा लोगो तक पहुंचाया। इसके अलावा, उन्होंने प्राइवेसी को भी मजबूत बनाने में अपना अहम किरदार निभाया। व्हाट्सऐप के बाद अब विल मेटा में नया रोल निभाने वाले हैं।</p>
</p>
<p><iframe loading="lazy" style="border: none; overflow: hidden;" src="https://www.facebook.com/plugins/post.php?href=https%3A%2F%2Fwww.facebook.com%2Fzuck%2Fposts%2Fpfbid02u9AKAiwrL72GBtQU9KbMWP6UFeCqkVieJwh5cKcS3cfwhADWLrfV687h9jbyUFicl&amp;show_text=true&amp;width=500" width="500" height="264" frameborder="0" scrolling="no" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>इसके बाद उन्होंने ऐलान किया कि अब व्हाट्सऐप के ग्लोबल CEO कुणाल शाह होंगे। कुणाल भारत में CRED ऐप के फाउंडर रह चुके हैं। क्रेड एक क्रेडिट कार्ड कंपनी है, जो कि बिल पेमेंट के तौर पर शुरू हुई थी। हालांकि, अब इस ऐप के जरिए पेमेंट से लेकर लोन लेने तक की सुविधा मिलती है।</p>
<h2>आखिर कौन हैं Kunal Shah (कुणाल शाह)?</h2>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Kunal-Shah.png"><img loading="lazy" class="alignnone wp-image-1666870 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Kunal-Shah.png" alt="" width="1280" height="900" /></a></p>
</p>
<p>कुणाल शाह गुजराती परिवार से ताल्लुक रखते हैं। कुणाल का जन्म अहमदाबाद में हुआ और उनकी पढ़ाई-लिखाई मुंबई में हुई है। जहां अन्य फाउंडर व सीईओ की बात करें, तो ज्यादातर लोग IIT या फिर IIM डिग्रीधारक होते हैं या फिर कम से कम उनके पास टेक्निकल एजुकेशन में माहरथ हासिल होती है। लेकिन कुणाल शाह के साथ ऐसा नहीं है। उन्होंने मुंबई के विल्सन कॉलेज से फिलॉसफी से ग्रेजुएशन की है। हालांकि, इसके बाद उन्होंने MBA शुरू किया, जिसे उन्होंने बीच में ही छोड़ दिया। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि 14 से 15 की उम्र में उन्होंने फैमिली को सपोर्ट करने के लिए कई तरह की नौकरियां भी की जिसमें डिलीवरी बॉय, डेटा ऑपरेटर, मेहंदी कोन विक्रेता, साइबर कैफे ऑपरेटर आदि का काम भी शामिल है।</p>
</p>
<p>साल 2010 में कुणाल ने संदीप टंडन के साथ मिलकर Frecharge की शुरुआत की थी। यह प्लेटफॉर्म रिचार्ज और बिल पेमेंट के बाद मिलने वाले रिवॉर्ड्स के लिए फेमस हुआ था। 2015 में स्नैपडील ने फ्रीचार्ज को 400 मिलियन डॉलर देकर खरीद लिया। इसके बाद कुणाल ने साल 2018 में CRED शुरू किया। वहीं, अब Meta ने CRED में 900 मिलियन डॉलर का निवेश किया है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Kunal-Shah-1.png' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/whatsapp-new-ceo-kunal-shah-delivery-boy-at-15-and-now-global-head-of-whatsapp-1666869/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/whatsapp-new-ceo-kunal-shah-delivery-boy-at-15-and-now-global-head-of-whatsapp-1666869/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Tue, 23 Jun 2026 06:27:02 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Telegram से हटा बैन, अब फिर से कर सकेंगे चैटिंग]]></title>
		<description>भारत में Telegram एक बार फिर से शुरू हो गया है। केंद्र सरकार का अस्थायी बैन 22 जून को खत्म होने के बाद Google Play Store पर ऐप दोबारा उपलब्ध हो गया है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भारत में Telegram App फिर से वापसी कर चुका है। केंद्र सरकार द्वारा लगाया गया अस्थायी बैन 22 जून की रात खत्म होने के बाद Google Play Store पर मंगलवार सुबह दोबारा वापस आ गया है। अब कई यूजर्स के लिए ऐप फिर से सामान्य रूप से काम करने लगा, हालांकि मंगलवार सुबह तक Apple App Store पर Telegram वापस नहीं आया था और Apple की ओर से भी कोई जवाब नहीं मिला। Telegram की वापसी से उन लाखों भारतीय यूजर्स को राहत मिली है जो पिछले कुछ दिनों से इस ऐप का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे।</p>
<h2><strong>Telegram पर सरकार ने बैन क्यों लगाया था?</strong></h2>
</p>
<p>सरकार ने Telegram पर यह अस्थायी बैन NEET परीक्षा के पेपर लीक और फर्जी जानकारी फैलने की वजह से लगाया था। अधिकारियों के मुताबिक Telegram पर लीक पेपर, गलत खबरें और कई तरह की धोखाधड़ी से जुड़ी चीजें तेजी से शेयर की जा रही थी, जिससे परीक्षा व्यवस्था पर असर पड़ रहा था। बैन लगाने से पहले 3 जून को सरकार ने Telegram के अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी और अपनी चिंताएं बताई थीं, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं होने पर केंद्र सरकार ने Telegram, उसके वेब वर्जन और उससे जुड़े सभी लिंक को 22 जून तक ब्लॉक करने का फैसला लिया था।</p>
<h2><strong>बैन के बाद Telegram को कौन-कौन से निर्देश मिले?</strong></h2>
</p>
<p>बैन के दौरान सरकार ने Telegram को कुछ नए नियमों का पालन करने के लिए भी कहा था। कंपनी को अपने प्लेटफॉर्म पर निगरानी बढ़ाने और गलत या आपत्तिजनक कंटेंट पर तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। इसके अलावा Telegram के Message Editing फीचर को 30 जून तक बंद रखने को कहा गया है। माना जा रहा है कि यह फैसला फर्जी जानकारी या लीक हुए डॉक्यूमेंट्स में बाद में बदलाव करके सबूत छिपाने जैसी एक्टिविटी को रोकने के लिए लिया गया है। इस बीच 21 जून को NEET की दोबारा परीक्षा भी की गई और अब तक किसी बड़े पेपर लीक या गड़बड़ी की खबर सामने नहीं आई है।</p>
<h2><strong>Telegram के CEO ने बैन पर क्या कहा?</strong></h2>
</p>
<p>Telegram पर लगे प्रतिबंध को लेकर कंपनी की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली। Telegram के संस्थापक और CEO Pavel Durov ने भारत सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि कुछ यूजर्स की गलतियों की वजह से पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना उचित नहीं था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि Meta की हिस्सेदारी वाली Reliance और Telegram की प्रतिद्वंद्वी सेवा WhatsApp ने कंपनी के खिलाफ लॉबिंग की हो सकती है। हालांकि इन आरोपों पर किसी भी संबंधित कंपनी या सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। फिलहाल Telegram की सेवाएं फिर से बहाल हो चुकी हैं और यूजर्स सामान्य रूप से ऐप का उपयोग कर सकते हैं। Telegram पर लगे बैन को लेकर कंपनी ने भी नाराजगी जताई थी। Telegram के संस्थापक और CEO Pavel Durov ने कहा कि कुछ लोगों की गलत हरकतों की वजह से पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना सही फैसला नहीं था।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Telegram-4-1.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Telegram]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/telegram-ban-lifted-in-india-app-returns-to-google-play-store-after-temporary-government-block-1666811/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/telegram-ban-lifted-in-india-app-returns-to-google-play-store-after-temporary-government-block-1666811/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Tue, 23 Jun 2026 06:59:57 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[क्या Zero-Watt Bulb सच में 0 बिजली खर्च करता है? जानिए सच्चाई]]></title>
		<description>भारत के लगभग हर घर में रात के समय जलने वाला छोटा &#039;Zero-Watt Bulb&#039; आज भी काफी फेमस है, बहुत से लोग मानते हैं कि यह बल्ब बिल्कुल बिजली खर्च नहीं करता, लेकिन सच्चाई कुछ और है। आइए जानते हैं कि इसे Zero-Watt Bulb क्यों कहा जाता है और इसकी असली सच्चाई क्या है...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भारत के लगभग हर घर में रात के समय एक छोटा बल्ब जलता हुआ दिखाई देता है, जिसे आमतौर पर &#8216;Zero-Watt Bulb&#8217; कहा जाता है। बेडरूम, सीढ़ियों, पूजा घर या हॉल में इस्तेमाल होने वाला यह बल्ब वर्षों से लोगों के बीच फेमस है। हालांकि इसके नाम को लेकर एक बड़ी गलतफहमी भी मौजूद है। बहुत से लोग मानते हैं कि यह बल्ब बिल्कुल भी बिजली खर्च नहीं करता, लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है। अगर कोई बल्ब रोशनी दे रहा है, तो वह निश्चित रूप से बिजली का यूज कर रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इसे जीरो-वॉट बल्ब क्यों कहा जाता है और इसकी असली बिजली खपत कितनी होती है?</p>
<h2><strong>Zero-Watt Bulb नाम आखिर कैसे पड़ा?</strong></h2>
</p>
<p>दरअसल, &#8216;Zero-Watt&#8217; नाम पुराने समय के बिजली मीटरों की वजह से पड़ा। पहले घरों में एनालॉग बिजली मीटर लगाए जाते थे, जिनमें घूमने वाली डिस्क और सुई होती थी। ये मीटर बहुत कम बिजली खपत को सही तरीके से माप नहीं पाते थे। जब घर के बड़े उपकरण जैसे पंखा, टीवी या ट्यूबलाइट बंद कर दिए जाते थे और केवल यह छोटा बल्ब जलता रहता था, तब मीटर की सुई लगभग स्थिर दिखाई देती थी। कई बार डिस्क भी घूमती हुई नजर नहीं आती थी। लोगों को लगा कि यह बल्ब बिजली खर्च ही नहीं कर रहा है और यहीं से इसका नाम &#8216;Zero-Watt Bulb&#8217; पड़ गया। धीरे-धीरे यह नाम इतना फेमस हो गया कि आज भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।</p>
<h2><strong>क्या डिजिटल मीटर भी Zero-Watt Bulb की बिजली खपत रिकॉर्ड करते हैं?</strong></h2>
</p>
<p>आज के डिजिटल बिजली मीटर पहले के मीटरों से ज्यादा सटीक होते हैं। ये बहुत कम बिजली खर्च को भी रिकॉर्ड कर लेते हैं। इसलिए अगर आप आज &#8216;Zero-Watt Bulb&#8217; जलाते हैं, तो उसकी बिजली खपत मीटर में गिनी जाती है और बिल में भी जुड़ती है, हालांकि यह बल्ब बहुत कम बिजली खर्च करता है, लेकिन इसकी खपत बिल्कुल जीरो नहीं होती। पुराने Zero-Watt Bulb आमतौर पर 5 से 15 Watt तक बिजली लेते थे। कुछ बल्ब करीब 10 Watt बिजली खर्च करते थे, यानी नाम भले ही &#8216;Zero-Watt&#8217; हो, लेकिन यह बल्ब बिजली जरूर खाता है।</p>
<h2><strong>LED Zero-Watt Bulb कितना बिजली बचाता है और क्या इसे खरीदना चाहिए?</strong></h2>
</p>
<p>आज मिलने वाले LED Zero-Watt Bulb पुराने बल्बों की तुलना में काफी कम बिजली खर्च करते हैं। ये आमतौर पर सिर्फ 0.3 से 1 Watt तक बिजली का यूज करते हैं, साथ ही ये ज्यादा समय तक चलते हैं और बहुत कम गर्म होते हैं। अगर आपको रात में हल्की रोशनी चाहिए, तो LED Zero-Watt Bulb एक अच्छा ऑप्शन है। पुराने Zero-Watt Bulb 5 से 15 Watt तक बिजली खर्च करते थे, जबकि नए LED मॉडल 1 Watt से भी कम बिजली लेते हैं। इसलिए यह कहना गलत होगा कि Zero-Watt Bulb बिल्कुल बिजली नहीं खाता।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Zero-Watt-Bulb.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Zero-Watt Bulb]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/zero-watt-bulb-myth-explained-does-it-really-consume-no-electricity-1666816/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/zero-watt-bulb-myth-explained-does-it-really-consume-no-electricity-1666816/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 11:46:12 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Asus Chromebook CM32 Detachable, CM14, और CM15 लैपटॉप भारत में लॉन्च, जानें कीमत]]></title>
		<description>Asus ने 3 नए लैपटॉप्स भारतीय मार्केट में लॉन्च कर दिए हैं, जिसमें Asus Chromebook CM32 Detachable, CM14, और CM15 शामिल है। यहां जानें कीमत और खूबियां।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Asus</strong> ने लेटेस्ट Chromebooks लाइनअप भारत में लॉन्च हो गया है। इस लाइनअप में कंपनी ने Chromebook CM32 Detachable, Chromebook CM14 और Chromebook CM15 को पेश किया है। फीचर्स की बात करें, तो जैसे कि नाम से समझ आता है कि इस लाइनअप में 14 इंच और 15 इंच स्क्रीन साइज पेश किया गया है। साथ ही ये लैपटॉप ChromeOS पर काम करता है। इसके अलावा, ये दोनों ही लैपटॉप MediaTek Kompanio 540 प्रोसेसर से लैस हैं। ये लैपटॉप सिंगल चार्ज पर 20 घंटे तक की बैटरी देता है। आइए जानते हैं लैपटॉप की कीमत, उपलब्धता और फीचर्स से जुड़ी डिटेल्स।</p>
<h2>Asus Chromebooks Series Price in India</h2>
</p>
<p>कीमत की बात करें, तो <a href="https://www.techlusive.in/hi/best-deals/amazon-great-summer-sale-2026-best-laptop-deals-on-hp-dell-asus-and-lenovo-for-students-1661683/">Asus </a>Chromebooks CM32 Detachable को 37,990 रुपये में पेश किया गया है। वहीं, ASUS Chromebook CM14 की कीमत 26,990 रुपये है। तीसरे ASUS Chromebook CM15 की कीमत 28,990 रुपये है।</p>
<h2>Asus Chromebook CM32 Detachable, CM14, and CM15 specifications and features</h2>
</p>
<p>फीचर्स की बात करें, तो Chromebook CM14 और Chromebook CM15 में इनके नाम की तरह 14 इंच और 15 इंच की स्क्रीन दी गई है। डिस्प्ले में पतले किनारे दिए गए हैं। साथ ही इसमें 180 डिग्री ले-फ्लेट हींज मिलते हैं। कंपनी ने खासतौर पर इन लैपटॉप को ऑनलाइन स्टडी, कॉलेब्रेशन व डेली टास्ट के लिए पेश किया है। दोनों ही लैपटॉप MediaTek Kompanio 540 प्रोसेसर से लैस हैं।</p>
</p>
<p>जैसे कि हमने बताया यह लैपटॉप सिंगल चार्ज पर 20 घंटे तक की बैटरी प्रोवाइड करता है। साथ ही ये ChromeOS पर काम करते हैं, जो कि यूजर्स को गूगल क्लाउड बेस्ड इकोसिस्टम व एआई एक्सपीरियंस प्रोवाइड करता है। इस लैपटॉप के साथ ग्राहकों को Google AI Pro बेनेफिट के साथ 5TB क्लाउड स्टोरेज प्राप्त होगी, जो कि 3 महीने के लिए उपलब्ध होगी।</p>
</p>
<p>ASUS Chromebook CM32 Detachable की बात करें, तो इस लैपटॉप में कंपनी ने 2 इन 1 डिजाइन दिया है। ऐसे में लैपटॉप को आप टैब के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें 2.5k टचस्क्रीन मिलती है। इसके साथ कंपनी ने डिटैचेबल कीबोर्ड और मैग्नेटिक स्टैंड दिया है। साथ ही इसमें ASUS Pen का सपोर्ट मिलता है। कंपनी ने इस लैपटॉप में मिल्टी-ग्रेड ड्यूरिबिल्टी दी है।</p>
<table>
<thead>
<tr>
<th>फीचर</th>
</p>
<th>ASUS Chromebook CM14</th>
</p>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><strong>डिस्प्ले</strong></td>
</p>
<td>14 इंच स्क्रीन</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>डिजाइन</strong></td>
</p>
<td>पतले बेज़ेल्स (Thin Bezels)</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>हिंज</strong></td>
</p>
<td>180° Lay-Flat Hinge</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>प्रोसेसर</strong></td>
</p>
<td>MediaTek Kompanio 540</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>ऑपरेटिंग सिस्टम</strong></td>
</p>
<td>ChromeOS</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>बैटरी</strong></td>
</p>
<td>सिंगल चार्ज पर 20 घंटे तक</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>उपयोग</strong></td>
</p>
<td>Online Study, Collaboration, Daily Tasks</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>AI फीचर्स</strong></td>
</p>
<td>Google AI Pro Benefits</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>क्लाउड स्टोरेज</strong></td>
</p>
<td>5TB Cloud Storage (3 महीने के लिए)</td>
</p>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>&nbsp;</p>
<table>
<thead>
<tr>
<th>फीचर</th>
</p>
<th>ASUS Chromebook CM15</th>
</p>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><strong>डिस्प्ले</strong></td>
</p>
<td>15 इंच स्क्रीन</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>डिजाइन</strong></td>
</p>
<td>पतले बेज़ेल्स (Thin Bezels)</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>हिंज</strong></td>
</p>
<td>180° Lay-Flat Hinge</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>प्रोसेसर</strong></td>
</p>
<td>MediaTek Kompanio 540</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>ऑपरेटिंग सिस्टम</strong></td>
</p>
<td>ChromeOS</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>बैटरी</strong></td>
</p>
<td>सिंगल चार्ज पर 20 घंटे तक</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>उपयोग</strong></td>
</p>
<td>Online Study, Collaboration, Daily Tasks</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>AI फीचर्स</strong></td>
</p>
<td>Google AI Pro Benefits</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>क्लाउड स्टोरेज</strong></td>
</p>
<td>5TB Cloud Storage (3 महीने के लिए)</td>
</p>
</tr>
</tbody>
</table>
<p>&nbsp;</p>
<table>
<thead>
<tr>
<th>फीचर</th>
</p>
<th>ASUS Chromebook CM32 Detachable</th>
</p>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><strong>डिजाइन</strong></td>
</p>
<td>2-in-1 Detachable Design</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>उपयोग</strong></td>
</p>
<td>Laptop और Tablet दोनों के रूप में इस्तेमाल</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>डिस्प्ले</strong></td>
</p>
<td>2.5K Touchscreen</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>कीबोर्ड</strong></td>
</p>
<td>Detachable Keyboard</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>स्टैंड</strong></td>
</p>
<td>Magnetic Stand</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>स्टायलस सपोर्ट</strong></td>
</p>
<td>ASUS Pen Support</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>ऑपरेटिंग सिस्टम</strong></td>
</p>
<td>ChromeOS</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>ड्यूरेबिलिटी</strong></td>
</p>
<td>Military-Grade Durability</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>AI फीचर्स</strong></td>
</p>
<td>Google AI Pro Benefits</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>क्लाउड स्टोरेज</strong></td>
</p>
<td>5TB Cloud Storage (3 महीने के लिए)</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td><strong>बैटरी</strong></td>
</p>
<td>20 घंटे तक (सीरीज के अनुसार)</td>
</p>
</tr>
</tbody>
</table>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Untitled-design-2.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/asus-chromebook-cm32-detachable-cm14-and-cm15-launched-in-india-starting-price-rs-26990-specs-1666747/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/asus-chromebook-cm32-detachable-cm14-and-cm15-launched-in-india-starting-price-rs-26990-specs-1666747/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 07:12:23 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[57 प्रकाश-वर्ष दूर इस गुलाबी ग्रह और यहां मौजूद हैं नमक के बादल, सिर्फ 2 घंटे में JWST ने खोल दिए इसके राज!]]></title>
		<description>57 प्रकाश-वर्ष दूर मौजूद गुलाबी ग्रह GJ 504b ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। James Webb Space Telescope (JWST) ने सिर्फ 2 घंटे के अध्ययन में इसके वातावरण के कई रहस्यों का खुलासा किया। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Space Science में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए James Webb Space Telescope (JWST) ने GJ 504b नाम के एक अनोखे एक्सोप्लैनेट जैसी दुनिया के वातावरण के बारे में नई जानकारी जुटाई है। यह खगोलीय पिंड पृथ्वी से करीब 57 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है और अपने गुलाबी रंग की वजह से &#8216;Pink Planet&#8217; के नाम से मशहूर है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह न तो पूरी तरह ग्रह है और न ही तारा, बल्कि दोनों के बीच की एक खास कैटेगरी का पिंड हो सकता है। सबसे खास बात यह है कि JWST ने सिर्फ दो घंटे तक इस पिंक प्लैनेट का अध्ययन करके इसके वातावरण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कर लीं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज भविष्य में ऐसे दूर, ठंडे और धुंधले ग्रहों को समझने में काफी मददगार साबित होगी।</p>
<h2><strong>JWST ने GJ 504b के वातावरण का एनालिसिस कैसे किया?</strong></h2>
</p>
<p>18 जून को The Astronomical Journal में प्रकाशित इस अध्ययन का नेतृत्व नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता Aneesh Baburaj ने किया। वैज्ञानिकों ने JWST के NIRSpec उपकरण की मदद से GJ 504b की हल्की रोशनी को उसके पास मौजूद तारे की तेज चमक से अलग किया। यह काम लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए काफी मुश्किल था। अध्ययन के दौरान ग्रह के वातावरण में Water Vapor, Carbon Dioxide, Methane और Ammonia जैसी गैसों के संकेत मिले। शुरुआत में वैज्ञानिक इन संकेतों को पूरी तरह समझ नहीं पाए, लेकिन बाद में अलग-अलग तरह के बादलों वाले मॉडल की जांच करने पर पता चला कि इस ग्रह के वातावरण में नमक से बने बादल मौजूद हो सकते हैं, जो इन संकेतों को सबसे अच्छी तरह समझाते हैं।</p>
<h2><strong>क्या है इस ग्रह की सबसे बड़ी खासियत?</strong></h2>
</p>
<p>रिसर्च के मुताबिक GJ 504b के वातावरण में मौजूद नमक के बादल अंदर की परतों से आने वाले कुछ गैसों के संकेतों को ढक देते हैं, जिससे इसका स्पेक्ट्रम अलग दिखाई देता है। इसी आधार पर वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि यह खगोलीय पिंड करीब 2.5 से 4 अरब साल पुराना हो सकता है। इसका तापमान लगभग 550 डिग्री फारेनहाइट (करीब 288 डिग्री सेल्सियस) है, जो इसे अब तक अध्ययन किए गए सबसे ठंडे एक्सोप्लैनेट जैसे पिंडों में शामिल करता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी ठंडे एक्सोप्लैनेट में नमक से बने बादलों के इतने स्पष्ट सबूत पहली बार मिले हैं।</p>
<h2><strong>वैज्ञानिकों का क्या कहना है?</strong></h2>
</p>
<p>हालांकि JWST ने GJ 504b के वातावरण से जुड़े कई रहस्यों का खुलासा किया है, लेकिन यह अब भी साफ नहीं है कि यह वास्तव में एक ग्रह है या फिर ब्राउन ड्वार्फ। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसमें भारी तत्व काफी ज्यादा मात्रा में मौजूद हैं, इसलिए इसकी असली पहचान तय करना आसान नहीं है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस अध्ययन में इस्तेमाल की गई नई टेक्नोलॉजी भविष्य में ऐसे बाकी ठंडे और कम रोशनी वाले खगोलीय पिंडों को समझने में भी मदद करेगी। इससे उन दूर की दुनियाओं के बारे में ज्यादा जानकारी मिल सकेगी, जिन्हें आज की टेक्नोलॉजी से सीधे देख पाना बेहद मुश्किल है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/JWST-Reveals-Salt-Clouds-on-Pink-Planet-GJ-504b.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[JWST Reveals Salt Clouds on Pink Planet GJ 504b]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/jwst-reveals-salt-clouds-on-pink-planet-gj-504b-uncovers-atmosphere-of-a-mysterious-exoplanet-1666699/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/jwst-reveals-salt-clouds-on-pink-planet-gj-504b-uncovers-atmosphere-of-a-mysterious-exoplanet-1666699/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 06:18:52 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Fiber Optic Cable कैसे करते हैं काम? इंटरनेट की स्पीड के पीछे छिपा है ये अनोखा विज्ञान]]></title>
		<description>आज हम सभी तेज इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि डेटा इतनी तेजी से आपके फोन या कंप्यूटर तक कैसे पहुंचता है? इसका जवाब फाइबर ऑप्टिक केबल में छिपा है। आइए जानते हैं इस खास टेक्नोलॉजी के बारे में...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आज के डिजिटल दौर में तेज इंटरनेट हमारी रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग, वीडियो कॉल और क्लाउड सेवाओं जैसी सुविधाओं के पीछे जिस टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा योगदान है, वह है फाइबर ऑप्टिक केबल। ये केबल सामान्य तांबे के तारों से बिल्कुल अलग होते हैं और इनमें डेटा को बिजली की बजाय रोशनी (Light) के जरिए भेजा जाता है। फाइबर ऑप्टिक केबल बेहद पतले कांच या प्लास्टिक के रेशों से बने होते हैं। जब एक सिरे से Light भेजी जाती है, तो वह केबल के अंदर लगातार उछलती हुई आगे बढ़ती रहती है। इसी प्रक्रिया की वजह से डेटा बहुत तेज स्पीड से लंबी दूरी तक पहुंच पाता है।</p>
<h2><strong>फाइबर ऑप्टिक केबल के अंदर डेटा आखिर कैसे ट्रैवल करता है?</strong></h2>
</p>
<p>फाइबर ऑप्टिक केबल में डेटा ट्रांसफर की प्रक्रिया काफी दिलचस्प होती है। केबल के बाहरी हिस्से में मौजूद खास परत, जिसे क्लैडिंग (Cladding) कहा जाता है, Light को बाहर निकलने नहीं देती। इससे रोशनी केबल के अंदर ही बार-बार रिफ्लेक्ट होती रहती है। इस टेक्नोलॉजी को &#8216;Total Internal Reflection&#8217; कहा जाता है। जब यह Light अपनी मंजिल तक पहुंचता है, तो वहां मौजूद ऑप्टिकल रिसीवर इसे फिर से इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदल देता है। इसके बाद यह सिग्नल आपके कंप्यूटर, स्मार्टफोन, टीवी या बाकी डिवाइस तक पहुंचता है और वही डेटा स्क्रीन पर दिखाई देता है। हालांकि बहुत लंबी दूरी पर कुछ डेटा लॉस हो सकता है, लेकिन फिर भी यह टेक्नोलॉजी बाकी केबलों की तुलना में कहीं ज्यादा भरोसेमंद और तेज मानी जाती है।</p>
<h2><strong>फाइबर ऑप्टिक टेक्नोलॉजी कितनी पुरानी है और इसमें क्या नए बदलाव हुए हैं?</strong></h2>
</p>
<p>दिलचस्प बात यह है कि फाइबर ऑप्टिक टेक्नोलॉजी कोई नई खोज नहीं है। इसकी शुरुआत 1950 के दशक में हो गई थी, लेकिन इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल 1980 के दशक में शुरू हुआ, जब Telecom Companies ने इसे अपने नेटवर्क का हिस्सा बनाना शुरू किया। समय के साथ इसकी क्षमता और क्वालिटी में काफी सुधार हुआ है। वैज्ञानिकों ने ऐसी नई फाइबर टेक्नोलॉजी भी डेवलप की है जिन्हें &#8216;Hollow Fiber&#8217; कहा जाता है। इनमें Light फाइबर की तुलना में करीब 50% ज्यादा तेजी से ट्रैवल कर सकती है। इससे इंटरनेट की स्पीड बढ़ने के साथ-साथ लेटेंसी भी कम होती है, जो ऑनलाइन गेमिंग और रियल-टाइम कम्युनिकेशन के लिए बेहद जरूरी है।</p>
<h2><strong>फाइबर ऑप्टिक के अलावा और क्या ऑप्शन हैं?</strong></h2>
</p>
<p>फाइबर ऑप्टिक केबल आज पूरी दुनिया के इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ बन चुके हैं। हाल ही में जापान के वैज्ञानिकों ने फाइबर ऑप्टिक टेक्नोलॉजी की मदद से 1.02 पेटाबिट प्रति सेकंड की रिकॉर्ड डेटा ट्रांसफर स्पीड हासिल की है, जो इस क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। हालांकि सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं जैसे कि Starlink भी तेजी से फेमस हो रही हैं, लेकिन स्पीड और स्थिरता के मामले में फाइबर ऑप्टिक अब भी सबसे आगे है।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>फाइबर ऑप्टिक केबल क्या होती है?</strong></h2>
</p>
<p>फाइबर ऑप्टिक केबल बेहद पतले कांच या प्लास्टिक के रेशों से बनी होती है। इसमें डेटा को बिजली की बजाय रोशनी (Light) के जरिए भेजा जाता है, जिससे इंटरनेट की स्पीड काफी तेज हो जाती है।</p>
<h2><strong>फाइबर ऑप्टिक केबल में डेटा कैसे ट्रांसफर होता है?</strong></h2>
</p>
<p>फाइबर ऑप्टिक केबल के अंदर Light लगातार रिफ्लेक्ट होती हुई आगे बढ़ती है। इस प्रक्रिया को Total Internal Reflection कहा जाता है। मंजिल तक पहुंचने पर ऑप्टिकल रिसीवर इस Light को फिर से इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदल देता है।</p>
<h2><strong>फाइबर ऑप्टिक टेक्नोलॉजी कितनी पुरानी है?</strong></h2>
</p>
<p>फाइबर ऑप्टिक टेक्नोलॉजी की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी। हालांकि इसका बड़े स्तर पर इस्तेमाल 1980 के दशक में शुरू हुआ, जब टेलीकॉम कंपनियों ने इसे अपने नेटवर्क में शामिल करना शुरू किया।</p>
<h2><strong>क्या सैटेलाइट इंटरनेट फाइबर ऑप्टिक की जगह ले सकता है?</strong></h2>
</p>
<p>सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं जैसे Starlink तेजी से फेमस हो रही हैं, लेकिन स्पीड, स्थिरता और कम लेटेंसी के मामले में फाइबर ऑप्टिक इंटरनेट अभी भी सबसे बेहतर ऑप्शन माना जाता है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/How-Fiber-Optic-Cables-Work.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[How Fiber Optic Cables Work]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/how-fiber-optic-cables-work-the-science-behind-high-speed-internet-1666689/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/how-fiber-optic-cables-work-the-science-behind-high-speed-internet-1666689/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 05:34:12 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Space के बारे में बचपन से सुनीं ये 5 बातें निकलीं झूठ, सच जानकर रह जाएंगे हैरान!]]></title>
		<description>अंतरिक्ष की दुनिया हमेशा से लोगों की जिज्ञासा का केंद्र रही है, बचपन से हम अंतरिक्ष से जुड़ी कई बातें सुनते आए हैं, लेकिन इनमें से कुछ सिर्फ मिथक निकलीं। NASA की रिसर्च और अंतरिक्ष मिशनों ने ऐसे कई भ्रमों की सच्चाई सामने लाई है। आइए जानते हैं अंतरिक्ष से जुड़े 5 ऐसे मिथकों के बारे में, जो वास्तव में सच नहीं हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अंतरिक्ष हमेशा से इंसानों के लिए रहस्य और रोमांच का विषय रहा है। सदियों से लोग तारों, ग्रहों और ब्रह्मांड के बारे में अलग-अलग धारणाएं और मिथक बनाते रहे हैं। समय के साथ विज्ञान ने काफी तरक्की की, लेकिन कई गलतफहमियां आज भी लोगों के बीच मौजूद हैं। NASA ने अपने मिशनों, अंतरिक्ष यानों और वैज्ञानिक शोधों के जरिए ऐसे कई मिथकों की सच्चाई दुनिया के सामने रखी है। चांद, सूरज, अंतरिक्ष की आवाज और गुरुत्वाकर्षण से जुड़े कई भ्रमों को NASA ने तथ्यों और सबूतों के आधार पर गलत साबित किया है। आइए जानते हैं ऐसे 5 अजीब अंतरिक्ष मिथकों के बारे में, जिनकी सच्चाई NASA ने उजागर की।</p>
</p>
<div id="attachment_1666684" style="width: 1290px" class="wp-caption alignnone"><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/sun.jpg"><img loading="lazy" aria-describedby="caption-attachment-1666684" class="wp-image-1666684 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/sun.jpg" alt="sun" width="1280" height="720" /></a></p>
<p id="caption-attachment-1666684" class="wp-caption-text">sun<br />image credit: NASA</p>
</div>
<h2><strong>क्या सूरज सच में जल रहा है?</strong></h2>
</p>
<p>बहुत से लोग सोचते हैं कि सूरज आग का एक बड़ा गोला है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है। सूरज लकड़ी, गैस या कोयले की तरह नहीं जलता। वहां आग नहीं लगी हुई है, बल्कि सूरज के अंदर एक खास प्रक्रिया चलती है, जिसे Nuclear Fusion कहा जाता है। न्यूक्लियर फ्यूजन में सूरज के अंदर मौजूद हाइड्रोजन गैस मिलकर हीलियम बनाती है। इस प्रक्रिया में बहुत ज्यादा एनर्जी निकलती है। यही एनर्जी गर्मी और रोशनी के रूप में बाहर आती है और पृथ्वी तक पहुंचती है। अगर सूरज सच में आग से जल रहा होता, तो उसे ऑक्सीजन की जरूरत होती, लेकिन अंतरिक्ष में ऑक्सीजन बहुत कम होती है। इसलिए सूरज का गर्म होना आग की वजह से नहीं, बल्कि उसके अंदर हो रही परमाणु प्रक्रिया की वजह से है। सूरज की सतह पर हमें कई बार आग जैसी लपटें दिखती हैं। इन्हें देखकर लगता है कि सूरज जल रहा है, लेकिन ये असल में गर्म गैस और एनर्जी के विस्फोट होते हैं। इन्हें सोलर फ्लेयर्स या प्लाज्मा एक्टिविटी कहा जाता है। वैज्ञानिकों के लिए आज भी सूरज एक बड़ा रहस्य है। खासकर यह बात कि सूरज का बाहरी वातावरण, यानी Solar Corona, उसकी सतह से ज्यादा गर्म क्यों है। NASA जैसे स्पेस एजेंसी इस रहस्य को समझने की कोशिश कर रही हैं।</p>
</p>
<div id="attachment_1666685" style="width: 1290px" class="wp-caption alignnone"><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Great-Wall-of-China.jpg"><img loading="lazy" aria-describedby="caption-attachment-1666685" class="wp-image-1666685 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Great-Wall-of-China.jpg" alt="There's no water in space" width="1280" height="720" /></a></p>
<p id="caption-attachment-1666685" class="wp-caption-text">Great Wall of China<br />image credit: NASA</p>
</div>
<h2><strong>क्या Great Wall of China अंतरिक्ष से दिखती है?</strong></h2>
</p>
<p>कई सालों से यह दावा किया जाता है कि Great Wall of China अंतरिक्ष से साफ दिखाई देती है। यह बात सुनने में बहुत दिलचस्प लगती है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। Great Wall of China बहुत लंबी जरूर है, लेकिन वह ज्यादा चौड़ी नहीं है। अंतरिक्ष से किसी चीज को देखने के लिए उसका बहुत बड़ा और साफ दिखाई देने वाला आकार होना जरूरी होता है। दीवार लंबी है, लेकिन उसकी चौड़ाई कम होने की वजह से उसे पहचानना मुश्किल है। NASA के कई अंतरिक्ष यात्रियों ने बताया है कि अंतरिक्ष से Great Wall को आंखों से देखना आसान नहीं है। Apollo मिशन के दौरान भी इसे देखने की कोशिश की गई थी, लेकिन कोई साफ प्रमाण नहीं मिला। International Space Station पृथ्वी के ज्यादा करीब है, लेकिन वहां से भी Great Wall of China को बिना कैमरे या खास लेंस के देख पाना मुश्किल है। कई बार जो फोटो दिखाई जाती हैं, उनमें दीवार को पहचानना भी आसान नहीं होता। इसलिए यह कहना सही होगा कि Great Wall of China इंसानों द्वारा बनाई गई महान संरचना जरूर है, लेकिन इसे अंतरिक्ष से आंखों से साफ देखना लगभग असंभव है।</p>
</p>
<div id="attachment_1666687" style="width: 1290px" class="wp-caption alignnone"><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Theres-no-water-in-space.jpg"><img loading="lazy" aria-describedby="caption-attachment-1666687" class="wp-image-1666687 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Theres-no-water-in-space.jpg" alt="There's no water in space" width="1280" height="720" /></a></p>
<p id="caption-attachment-1666687" class="wp-caption-text">There&#8217;s no water in space<br />image credit:NASA</p>
</div>
<h2><strong>क्या अंतरिक्ष में पानी नहीं होता?</strong></h2>
</p>
<p>बहुत लोग सोचते हैं कि अंतरिक्ष पूरी तरह खाली है और वहां पानी जैसी कोई चीज नहीं हो सकती, लेकिन यह बात गलत है। अंतरिक्ष में पानी अलग-अलग रूपों में मौजूद है। पानी सिर्फ नदी, समुद्र या बारिश के रूप में ही नहीं होता। पानी Ice, Steam और Molecules के रूप में भी हो सकता है। अंतरिक्ष में कई जगह पानी की बर्फ और Water Vapor पाए गए हैं। Comet, Saturn के Rings और कुछ ग्रहों के चंद्रमाओं पर बर्फ मौजूद है। वैज्ञानिक मानते हैं कि कई चंद्रमाओं के अंदर बर्फ के नीचे महासागर भी हो सकते हैं। NASA ने एक Quasar के आसपास बहुत बड़ी मात्रा में Water Vapor खोजा था। यह पानी इतना ज्यादा बताया गया कि वह पृथ्वी के समुद्रों से कई खरब गुना ज्यादा हो सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हम वहां जाकर आसानी से पानी ला सकते हैं। ये चीजें पृथ्वी से बहुत दूर हैं, लेकिन यह खोज बताती है कि अंतरिक्ष पूरी तरह सूखा नहीं है, बल्कि वहां पानी कई अलग-अलग रूपों में मौजूद है।</p>
</p>
<div id="attachment_1666683" style="width: 1290px" class="wp-caption alignnone"><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/asteroid-belt.jpg"><img loading="lazy" aria-describedby="caption-attachment-1666683" class="wp-image-1666683 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/asteroid-belt.jpg" alt="asteroid belt" width="1280" height="720" /></a></p>
<p id="caption-attachment-1666683" class="wp-caption-text">asteroid belt<br />image credit: AI</p>
</div>
<h2><strong>क्या Asteroid Belt बहुत खतरनाक जगह है?</strong></h2>
</p>
<p>फिल्मों में Asteroid Belt को बहुत खतरनाक दिखाया जाता है। ऐसा लगता है कि वहां हर तरफ बड़े-बड़े पत्थर तैर रहे हैं और कोई भी स्पेसशिप उनसे टकरा सकता है। लेकिन असलियत इससे काफी अलग है। हमारे सोलर सिस्टम में Asteroid Belt, Mars and Jupiter Planets के बीच मौजूद है। यहां लाखों छोटे-बड़े पत्थर और चट्टानें हैं, लेकिन ये एक-दूसरे से बहुत दूर-दूर हैं। फिल्मों में Asteroid बहुत पास-पास दिखते हैं ताकि सीन रोमांचक लगे। असल में एक बड़े Asteroid और दूसरे Asteroid के बीच लाखों किलोमीटर की दूरी हो सकती है। यानी वहां खाली जगह बहुत ज्यादा होती है। NASA के कई स्पेसक्राफ्ट Asteroid Belt से गुजर चुके हैं। वे बिना किसी टक्कर के सुरक्षित आगे निकल गए। इसका मतलब है कि वहां से गुजरना उतना खतरनाक नहीं है, जितना फिल्मों में दिखाया जाता है। इसलिए Asteroid Belt को खतरनाक Obstacle Course समझना गलत है। वहां खतरा है, लेकिन टक्कर की संभावना बहुत कम होती है। असली स्पेस ट्रैवल में Radiation, Fuel, Communication और Life Support जैसी चीजें ज्यादा बड़ी चुनौती होती हैं।</p>
</p>
<div id="attachment_1666686" style="width: 1290px" class="wp-caption alignnone"><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/You-will-die-instantly-if-exposed-to-space.jpg"><img loading="lazy" aria-describedby="caption-attachment-1666686" class="wp-image-1666686 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/You-will-die-instantly-if-exposed-to-space.jpg" alt="You will die instantly if exposed to space" width="1280" height="720" /></a></p>
<p id="caption-attachment-1666686" class="wp-caption-text">You will die instantly if exposed to space<br />image credit:NASA</p>
</div>
<h2><strong>क्या अंतरिक्ष में बिना स्पेससूट के जाते ही इंसान तुरंत मर जाएगा?</strong></h2>
</p>
<p>फिल्मों में अक्सर दिखाया जाता है कि अगर इंसान बिना स्पेससूट के अंतरिक्ष में चला जाए, तो वह तुरंत जम जाएगा या फट जाएगा, लेकिन असल में ऐसा तुरंत नहीं होता। अंतरिक्ष में हवा नहीं होती और दबाव भी बहुत कम होता है। इसलिए सबसे बड़ा खतरा ऑक्सीजन की कमी है। इंसान कुछ सेकंड तक होश में रह सकता है, लेकिन सांस न मिलने की वजह से जल्दी बेहोश हो जाएगा। अंतरिक्ष बहुत ठंडा माना जाता है, लेकिन वहां हवा नहीं होती जो शरीर की गर्मी तुरंत खींच ले। इसलिए इंसान तुरंत बर्फ की तरह नहीं जमता। शरीर की गर्मी धीरे-धीरे निकलती है। कम दबाव की वजह से शरीर के अंदर मौजूद गैस फैल सकती है। इससे शरीर को नुकसान हो सकता है। इसलिए स्पेससूट बहुत जरूरी होता है, क्योंकि वह शरीर को सही दबाव और ऑक्सीजन देता है। NASA के एक टेस्ट में एक व्यक्ति गलती से Vacuum Chamber में Exposure का शिकार हुआ था, लेकिन वह नहीं मरा। उसे बाद में बचा लिया गया। इसलिए अंतरिक्ष बेहद खतरनाक है, लेकिन तुरंत मौत वाला दावा सही नहीं है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/06/Space-Myths.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Space Myths]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/5-space-myths-nasa-truth-sun-great-wall-of-china-asteroids-more-1666681/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/5-space-myths-nasa-truth-sun-great-wall-of-china-asteroids-more-1666681/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
  </channel>
</rss>