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	<title><![CDATA[Latest Technology &amp; Gadgets - News in Hindi | News &amp; Reviews on Gadgets, Smart Phones, Mobile Apps &amp; Gaming | टेक न्यूज़ इन हिंदी | TECHLUSIVE.in Hindi]]></title>
	<description><![CDATA[Latest Technology &amp; Gadgets - News in Hindi | News &amp; Reviews on Gadgets, Smart Phones, Mobile Apps &amp; Gaming | टेक न्यूज़ इन हिंदी | TECHLUSIVE.in Hindi]]></description>
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	 <item>
		<pubDate>Fri, 08 May 2026 12:17:15 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[LPG गैस खत्म होने से 10 दिन पहले मोबाइल पर मिलेगा अलर्ट, कुछ ऐसे काम करता है Smart LPG Systems]]></title>
		<description>LPG सिलेंडर की किल्लत अब भी देखने को मिल रही है। ऐसे में ये डिवाइस आपके काफी काम के साबित होंगे, जो गैस खत्म होने से पहले आपको देंगे अलर्ट। जानें डिटेल्स।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>डिजिटल दौर में हर चीज स्मार्ट हो चुकी है.. जैसे स्मार्ट टीवी, स्मार्टफोन, स्मार्ट डोरलॉक आदि। इसी तरह मार्केट में LPG सिलेंडर के लिए भी Smart LPG Systems मौजूद हैं, जो कि गैस सिलेंडर खत्म होने से पहले आपको गैस खत्म होने का अलर्ट देते हैं। दरअसल, पिछले काफी महीनों से भारत में एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत देखने को मिल रही है। जहां सरकार आए दिनों नियमों में बदलाव कर रही है, वहीं लोगों का कहना है कि गैस बुक कराने के बाद भी उन्हें कई दिनों तक सिलेंडर रिसीव नहीं हो रहा। ऐसे में गैस सिलेंडर का खत्म हो जाना अपने आप में ही एक बुरे सपने जैसा बन चुका है। आपको नहीं पता गैस कब खत्म होगी&#8230; गैस खत्म होने के बाद सिलेंडर बुक करना और फिर सिलेंडर डिलीवरी तक आपको लंबा इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में यदि आपको ऐसा कोई स्मार्ट डिवाइस मिल जाए, जो गैस खत्म होने से 10 दिन पहले ही आपको अलर्ट भेज दे तो आप समय पर सिलेंडर बुक कर सकेंगे और समय से उसकी डिलीवरी रिसीव कर सकेंगे।</p>
</p>
<p>Smart <a href="https://www.techlusive.in/hi/news/lpg-new-rules-from-1st-may-2026-otp-based-delivery-ekyc-1660224/">LPG</a> Systems टेक्नोलॉजी की मदद से अब ऐसा मुमकिन है। जी हां, मार्केट में इस तरह के कई डिवाइस खरीद के लिए उपलब्ध हैं, जो कि आपको गैस खत्म होने से पहले अलर्ट कर देते हैं। यह डिवाइस का अलर्ट आप अपने स्मार्टफोन पर भी पा सकते हैं। आइए जानते हैं इससे जुड़ी सभी जानकारी।</p>
<h2>Smart LPG Systems क्या होता है?</h2>
</p>
<p>ऐसे डिवाइस Smart LPG Systems कहा जाता है, जो कि आपके गैस सिलेंडर को मॉनिटर करके उसमें मौजूद गैस की जानकारी आपको देते हैं। इन डिवाइस में कंपनी स्मार्ट सेंसर्स देते ही, जो कि आपको गैस खत्म होने की जानकारी देते हैं। यह डिवाइस वाई-फाई, ब्लूटूथ व IoT (Internet of Things) की मदद से आपके स्मार्टफोन में कनेक्ट हो जाते हैं।</p>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Gas-6.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-1661534" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Gas-6.jpg" alt="" width="1280" height="900" /></a></p>
</p>
<p>आमतौर पर इस डिवाइस एक बेस होता है, जिसके ऊपर आप अपना सिलेंडर रखते हैं। इस बेस में स्मार्ट सेंसर या फिर कहें तो Weight Machine लगी होती है। गैस भरने के बाद और खत्म होने के बाद हर सिलेंडर का अपना एक मानक वजन होता है, जिसकी जानकारी इन सेंसर्स को होती है। जैसे-जैसे सिलेंडर अपने मानक वजन से कम होने लगता है, वैसे-वैसे यह डिवाइस गैस का अनुमान लगाना शुरू कर देता है। जैसे ही गैस 10 या फिर 20 प्रतिशत बचती है, यह डिवाइस आपको मोबाइल पर अलर्ट भेज देता है, जिसके बाद आप दूसरा सिलेंडर बुक करके समय पर उसे रिसीव कर सकते हैं।</p>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Gas-5.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-1661535" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Gas-5.jpg" alt="" width="1280" height="900" /></a></p>
</p>
<p>इसके अलावा, कुछ Regulator डिवाइस भी मार्केट में मौजूद है, जिन्हें आपको अपने सिलेंडर पर फिट करना होता है। यह रेगुलेटर आपके सिलेंडर में मौजूद गैस को मॉनिटर करने का काम करते हैं।</p>
<h2>इन डिवाइस के क्या हैं फायदे?</h2>
</p>
<p>इस तरह के डिवाइस गैसे अचानक खत्म होने की टेंशन को दूर कर देते हैं। इसके अलावा, आपको समय से गैस खत्म होने की जानकारी पता चल जाती है, जिसके बाद आप समय रहते अपने लिए नया सिलेंडर बुर कर सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
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		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/best-deals/lpg-crisis-gas-cylinder-meter-detect-device-give-alert-before-gas-will-empty-1661533/</guid>
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		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Fri, 08 May 2026 10:56:48 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Apple अपने पुराने iPhone को खुद कर देता है स्लो? पूर्व कर्मचारी का हैरान कर देने वाला खुलासा]]></title>
		<description>Apple कंपनी कई आरोपों के चक्करों में सुर्खियों में घिरी रहती है। हाल ही में खुद को कंपनी की एक्स सॉफ्टवेयर इंजीनियर बताने वाली महिला ने दावा किया है कि कंपनी पुराने iPhone मॉडल्स को खुद स्लो कर देती है, ताकी लोग नए आईफोन मॉडल्स को खरीदें।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Apple</strong> कंपनी स्मार्टफोन इंडस्ट्री की टॉप कंपनियों में से एक है। हालांकि, इन दिनों यह कंपनी अलग-अलग कारणों की वजह से सुर्खियों में घिरी हुई है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक महिला खुद को एप्पल कंपनी की पूर्व कर्मचारी बता रही है। इसके साथ ही उस महिला ने वीडियो के जरिए कुछ सनसनीखेज खुलासे किए हैं। महिला के मुताबिक, एप्पल कंपनी जानबूझकर अपने पुराने iPhone मॉडल्स को स्लो कर देती है, ताकी लोग मजबूरन नए आईफोन की तरह शिफ्ट हो जाएं और उन्हें खरीद लें। आइए जानते हैं इससे जुड़ी सभी डिटेल्स।</p>
</p>
<p>सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में एक महिला खुद को <a href="https://www.techlusive.in/hi/news/apple-introduces-monthly-payment-option-for-annual-subscriptions-on-app-store-1659927/">Apple</a> की पूर्व सॉफ्टवेयर इंजीनियर बता रही है। इस महिला का दावा है कि एप्पल कंपनी नए iPhone लॉन्च करने के बाद अपने पुराने आईफोन्स में अपडेट रोलआउट करती है। इस अपडेट के जरिए कंपनी पुराने आईफोन्स में मालवेयर इंस्टॉल करके उन्हें खुद स्लो कर देती है। ताकी लोग स्लो आईफोन से परेशान होकर नए आईफोन में अपग्रेड हो जाएं।</p>
<h2>वीडियो</h2>
</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">Former software engineer at Apple is whistleblowing</p>
</p>
<p>She says whenever Apple launches a new phone, they would push an update to older iPhones with malware to slow them down. This pushes people to upgrade</p>
</p>
<p>“I used to be a software engineer at Apple, and with every new phone that… <a href="https://t.co/SSeTQGXvUp" rel="nofollow" target="_blank">pic.twitter.com/SSeTQGXvUp</a></p>
</p>
<p>— Wall Street Apes (@WallStreetApes) <a href="https://twitter.com/WallStreetApes/status/2052015524549398589?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 6, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>Apple ने फिलहाल इस वीडियो व महिला के दावे पर किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट हुई, वैसे ही यह वायरल हो गई है। एप्पल पर लगे इस तरह के आरोपों के बाद आईफोन यूजर्स खुद को ठगा-सा महसूस कर रहे हैं।</p>
<h2>सोशल मीडिया पर लोगों ने दी प्रतिक्रिया-</h2>
</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">So proud never used Iphone shiit in my life &#8211; people should just stop giving their money to Iphone tesla and all those stupid people who try to create trillion dollar companies out of fraud &#8211;</p>
</p>
<p>— 👑 (@Alifx2008) <a href="https://twitter.com/Alifx2008/status/2052039431503163406?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 6, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">So proud never used Iphone shiit in my life &#8211; people should just stop giving their money to Iphone tesla and all those stupid people who try to create trillion dollar companies out of fraud &#8211;</p>
</p>
<p>— 👑 (@Alifx2008) <a href="https://twitter.com/Alifx2008/status/2052039431503163406?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 6, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">So proud never used Iphone shiit in my life &#8211; people should just stop giving their money to Iphone tesla and all those stupid people who try to create trillion dollar companies out of fraud &#8211;</p>
</p>
<p>— 👑 (@Alifx2008) <a href="https://twitter.com/Alifx2008/status/2052039431503163406?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 6, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">I will never buy an Apple. There is nothing Apple phones can do that Android phones cannot do and cost about half.</p>
</p>
<p>— TommVR (@TommVR) <a href="https://twitter.com/TommVR/status/2052068880017682676?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 6, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">‼️Don’t update your old iPhones.</p>
<p>Otherwise the cameras for some “odd” reason will also start to all of a sudden take semi blurry not so clear pictures.</p>
</p>
<p>Funny how that happens.</p>
<p>This should be a lawsuit!</p>
</p>
<p>— Wonder Lia 🦸🏻‍♀️ (@RealLiaReyes) <a href="https://twitter.com/RealLiaReyes/status/2052083175564755213?ref_src=twsrc%5Etfw" rel="nofollow" target="_blank">May 6, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
</p>
<p>आपको बता दें, इससे पहले साल 2017 में ऐसा मामला देखने को मिला था। iPhone 7 लॉन्च के कुछ महीने बाद एप्पल ने एक अपडेट रिलीज किया था। इस अपडेट के बाद iPhone 6 यूजर्स ने दावा किया कि अपडेट के बाद उनके आईफोन की बैटरी तेजी से खत्म होने लगी थी। यूजर्स की शिकायत के बाद कंपनी ने एक अन्य अपडेट रिलीज किया जिसके बाद बैटरी की समस्या फिक्स हो गई थी।</p>
]]></content:encoded>
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		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Fri, 08 May 2026 03:50:11 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Google लेकर आया बिना स्क्रीन वाला फिटनेस बैंड, फुल चार्ज में 7 दिन चलेगी बैटरी]]></title>
		<description>Google ने ग्लोबल बाजार में अपने शानदार फिटनेस बैंड को उतार दिया है। यह स्क्रीनलेस बैंड है। इसका उपयोग 24 घंटे तक किया जा सकता है। इसके जरिए हार्ट-रेट, स्लीप और स्टेप को मॉनिटर किया जा सकता है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Google</strong> ने फिटनेस लवर्स को ध्यान में रखकर बिना स्क्रीन वाले फिटनेस बैंड को लॉन्च कर दिया है। यह Google Fitbit Air है। इसका डिजाइन साधारण है, जिससे इसे पूरे दिन पहना जा सकता है। इसमें 24 घंटे हार्ट-रेट ट्रैक करने की सुविधा मिलती है। इसके जरिए ब्लड में मौजूद ऑक्सीजन, स्लीप और स्टेप को भी मॉनिटर किया जा सकता है। इसकी बैटरी सिंगल चार्ज में 6 दिन से ज्यादा चलती है। आइए जानते हैं नए स्मार्ट फिटनेस बैंड की कीमत और फीचर&#8230;</p>
<h2>कितनी है नए फिटनेस बैंड की कीमत ?</h2>
</p>
<p>कंपनी के अनुसार, Google Fitbit Air के स्टैंडर्ड वेरिएंट की कीमत 99 डॉलर यानी करीब 9,405 रुपये है। इसके साथ तीन महीने के लिए गूगल हेल्थ प्रीमियम का सब्सक्रिप्शन मिलेगा। साथ ही, गूगल हेल्थ कोच का एक्सेस दिया जाएगा। Stephen Curry एडिशन की बात करें, तो इस फिटनेस बैंड का प्राइस 129.99 डॉलर यानी करीब 12,225 रुपये रखा गया है। फिलहाल, कंपनी की ओर से यह क्लियर नहीं किया गया है कि इसे भारत में कब तक लॉन्च किया जाएगा।</p>
</p>
<div id="attachment_1661426" style="width: 1210px" class="wp-caption alignnone"><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/untitled-2026-05-08T085454.867.jpg"><img loading="lazy" aria-describedby="caption-attachment-1661426" class="wp-image-1661426 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/untitled-2026-05-08T085454.867.jpg" alt="Google Fitbit Air" width="1200" height="900" /></a></p>
<p id="caption-attachment-1661426" class="wp-caption-text">Google Fitbit Air</p>
</div>
<h2>डिजाइन</h2>
</p>
<p>गूगल के लेटेस्ट स्क्रीनलेस फिटनेस बैंड में Metallic Fabric का इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसे बेहतर लुक मिलता है। इसे दिन और रात दोनों समय पहना जा सकता है। इसका वजन 12 ग्राम है। इसे तीन अलग-अलग बैंड टाइप में लाया गया है। इसमें परफॉर्मेंस लूप, वॉटरप्रूफ एक्टिव और Discreet Elevated मॉर्डन बैंड शामिल है।</p>
<h2>मेमोरी और सेंसर</h2>
</p>
<p>अब फीचर्स पर नजर डालें, तो गूगल का यह फिटनेस बैंड 7 दिन का डिटेल डेटा स्टोर कर सकता है। इसमें 1 दिन का वर्कआउट डेटा और 30 दिन तक का डेटा स्टोर करने की सुविधा मिलती है। इसके अलावा, फिटनेस बैंड में ऑप्टिकल हार्ट रेट मॉनिटर, 3-axis accelerometer, gyroscope, इन्फ्रारेड और SpO2 सेंसर दिया गया है।</p>
<table style="border-collapse: collapse; width: 100%;">
<tbody>
<tr>
<td style="width: 50%;"><strong>Features</strong></td>
</p>
<td style="width: 50%;"><strong>Detail</strong></td>
</p>
</tr>
<tr>
<td style="width: 50%;">Sensors</td>
</p>
<td style="width: 50%;">SpO2, Heart Rate</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td style="width: 50%;">Battery Life</td>
</p>
<td style="width: 50%;">7 Days</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td style="width: 50%;">Charging Time</td>
</p>
<td style="width: 50%;">90 Minutes</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td style="width: 50%;">Connectivity</td>
</p>
<td style="width: 50%;">Bluetooth 5.0</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td style="width: 50%;">Battery Type</td>
</p>
<td style="width: 50%;">Lithium-polymer</td>
</p>
</tr>
</tbody>
</table>
<h2>कनेक्टिविटी और बैटरी</h2>
</p>
<p>तगड़ी कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए नए फिटनेस बैंड में ब्लूटूथ 5.0 दिया है। इस बैंड में Lithium-polymer बैटरी दी गई है, जो फुल चार्ज में पूरे 7 दिन चलती है। इसे फुल चार्ज होने में 90 मिनट का समय लगता है। वहीं, पांच मिनट के चार्ज में 1 दिन का बैटरी बैकअप मिलता है।</p>
</p>
<div id="attachment_1661427" style="width: 1210px" class="wp-caption alignnone"><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/untitled-2026-05-08T090143.742.jpg"><img loading="lazy" aria-describedby="caption-attachment-1661427" class="wp-image-1661427 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/untitled-2026-05-08T090143.742.jpg" alt="Google Fitbit Air" width="1200" height="900" /></a></p>
<p id="caption-attachment-1661427" class="wp-caption-text">Google Fitbit Air</p>
</div>
<h2>Whoop 5.0 से मिलेगी टक्कर</h2>
</p>
<p>बता दें कि गूगल के लेटेस्ट फिटनेस बैंड फिटबिट एयर को पिछले साल लॉन्च हुए Whoop 5.0 से जोरदार टक्कर मिलेगी। यह भी स्क्रीनलेस फिटनेस बैंड है, जिसका इस्तेमाल 24 घंटे तक किया जा सकता है। इसमें हार्ट-रेट, स्लीप, स्टेप और ब्लड ऑक्सीजन को मॉनिटर किया जा सकता है। इसकी बैटरी सिंगल चार्ज में 14 दिन चलने में सक्षम है। इसके जरिए अपनी फिटनेस और सेहत दोनों का बेहतर तरीके से ख्याल रखा जा सकता है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/untitled-2026-05-08T090819.820.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Google Fitbit Air]]></media:description>
		</media:content>
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		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/google-fitbit-air-screenless-fitness-band-launched-know-price-features-1661430/</link>
		<dc:creator><![CDATA[ajay verma]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Thu, 07 May 2026 11:48:16 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[आपके बेहोश होने से 5 मिनट पहले अलर्ट देगी Samsung Galaxy Watch, नई रिसर्च में हुआ खुलासा]]></title>
		<description>Samsung ने एक स्टडी के दौरान जानकारी दी है कि Galaxy Watch 6 किसी के बेहोश होने से 5 मिनट पहले उसे अलर्ट कर सकती है। इस तरह के अलर्ट से मरीज खुद को गंभीर चोट लगने से बचा सकते हैं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>क्या आप जानते हैं <strong>Samsung</strong> स्मार्टवॉच हेल्थ फीचर्स में सबसे बेहतरीन फीचर्स देने में सक्षम है। हाल ही में की गई एक स्टडी में खुलासा हुआ कि Samsung Galaxy Watch आपके बेहोश होने से 5 मिनट पहले आपको अलर्ट कर सकती है। यह स्टडी Vasovagal Syncope (वैसोवैगल सिंकोप) पर बेस्ड थी। वैसोवैगल सिंकोप की बात करें, तो यह इंसानों में देखी जाने वाली एक आम समस्या है, जिसमें अचानक ही हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर डाउन हो जाता है और आप कुछ सोचें या फिर समझे उससे पहले आप बेहोश हो जाते हैं। इसे पहली ऐसी सफल स्टडी कहा जा रहा है कि जिसमें बेहोश होने से पहले उसकी जानकारी एक कमर्शियल स्मार्टवॉच के जरिए प्राप्त की जा सकती है। आइए जानते हैं सभी डिटेल्स।</p>
</p>
<p>Samsung ने अपने लेटेस्ट प्रेस रिलीज के जरिए इस स्टडी की जानकारी दी। यह स्टडी दक्षिण कोरिया के हॉस्पिटल Chung-Ang University Gwangmyeong के साथ मिल कर किए शोध पर आधारित है। रिलीज के मुताबिक, स्टडी में <a href="https://www.techlusive.in/hi/mobile/motorola-razr-fold-india-launch-date-confirmed-13-may-flipkart-sale-compete-to-samsung-galaxy-z-fold-8-1661356/">Samsung</a> Galaxy 6 स्मार्टवॉच को इस्तेमाल किया गया था। क्लिनिकल टेस्टिंग के लिए इस वॉच के जरिए बायोसिग्नल डेटा कलेक्ट किया गया है। इस स्टडी में 132 मरीजों को शामिल किया गया था, जो कि वैसोवैगल सिंकोप के लक्षणों से ग्रसित हैं। उन सभी मरीजों को वो सैमसंग गैलेक्सी 6 स्मार्टवॉच पहनाई गई, जो कि Photoplethysmography Sensor के साथ आती हैं। यह सेंसर टेस्ट के दौरान हार्ट रेट डेटा को मॉनिटर करने का काम करता है।</p>
<h2>शोध में मिले सटिक वॉर्निंग साइन</h2>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Watch-2026-05-07T170551.696.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-1661371" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Watch-2026-05-07T170551.696.jpg" alt="" width="1280" height="900" /></a></p>
</p>
<p>शोध के बाद डेटा कलेक्ट किया गया और AI-based Prediction मॉडल के जरिए उस डेटा को एनलाइज किया गया। सैमसंग के मुताबिक, सिस्टम उन वॉर्निंग साइन को बेहोश होने से 5 मिनट पहले ही डिटेक्ट करने में सक्षम रहा, जो कि 84.6 प्रतिशत सटिक थी।</p>
<h2>अलर्ट से कर सकेंगे खुद का बचाव</h2>
</p>
<p>वैसोवैगल सिंकोप की बात करें, तो यह ज्यादा स्ट्रेस लेने, ज्यादा दर्द लेने या फिर डर की वजह से ट्रिगर होता है। अचानक से बेहोशी का आना कई मामलों में ज्यादा खतरनाक नहीं होता, लेकिन इस वजह से शरीर को काफी चोट पहुंच सकती है। ऐसे में वॉच के जरिए अर्ली वॉर्निंग साइन की वजह से मरीज इन गंभीर चोटों से बच सकते हैं। यदि आपको स्मार्टवॉच खुद अलर्ट कर रही है कि आप बेहोश होने वाले हैं, तो आप कहीं बैठ सकते हैं खुद को किसी सेफ पॉजिशन में रख सकते या फिर किसी को मदद के लिए बुला सकते हैं।</p>
<h2>Samsung Galaxy 6 Price and specs</h2>
</p>
<h2> <a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Watch-2026-05-07T171654.804.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-1661373" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Watch-2026-05-07T171654.804.jpg" alt="" width="1280" height="900" /></a></h2>
</p>
<p>Samsung Galaxy 6 को भारत में 19,999 रुपये की कीमत में लॉन्च किया गया था। फीचर्स की बात करें, तो इस वॉच में 40mm और 43mm ऑप्शन मिलते हैं। इसमें 1.3 इंच स्क्रीन पेश की गई है। वहीं, 47mm व 44mm मॉडस में 1.5 इंच स्क्रीन मिलती है। यह वॉच Exynos W930 प्रोसेसर से लैस है। कंपनी ने इसमें कई हेल्थ फीचर्स दिए हैं।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Watch-2026-05-07T171316.705.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Thu, 07 May 2026 10:51:22 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[अब इंसानों की तरह सीखने लगा AI, Anthropic के Claude में आया खास फीचर]]></title>
		<description>Anthropic ने Claude के लिए नया &#039;Dreaming&#039; फीचर पेश किया है, जो पुराने चैट्स और अनुभवों से सीखकर खुद को बेहतर बना सकेगा। कंपनी का दावा है कि इससे AI पहले से ज्यादा स्मार्ट और यूजफुल बनेगा। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>AI कंपनी Anthropic ने अपने फेमस AI चैटबॉट Claude के लिए एक नया फीचर पेश किया है, जिसे &#8216;Dreaming&#8217; नाम दिया गया है। कंपनी का दावा है कि यह फीचर Claude को समय के साथ खुद को बेहतर बनाने में मदद करेगा। आसान भाषा में समझें तो अब Claude पुराने चैट से सीख सकेगा, अपनी गलतियों को पहचान सकेगा और भविष्य में ज्यादा स्मार्ट तरीके से जवाब देगा। Anthropic ने इस फीचर को अपने &#8216;Code with Claude&#8217; डेवलपर इवेंट के दौरान पेश किया।</p>
<h2><strong>आखिर Claude का नया फीचर कैसे करेगा काम?</strong></h2>
</p>
<p>Claude का यह नया Dreaming फीचर फिलहाल &#8216;Claude Managed Agents&#8217; प्लेटफॉर्म के लिए लाया गया है। यह प्लेटफॉर्म डेवलपर्स को AI एजेंट बनाने और उन्हें बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने की सुविधा देता है। Anthropic के मुताबिक, AI एजेंट जब लगातार काम करते हैं तो वे हर इंटरैक्शन की जानकारी अपनी मेमोरी में सेव करते रहते हैं, लेकिन समय के साथ यह मेमोरी दोहराई गई जानकारी, पुरानी बातों और विरोधाभासी डेटा से भर जाती है। इसी समस्या को हल करने के लिए Dreaming फीचर तैयार किया गया है। अब Claude पुराने सेशन्स को दोबारा पढ़कर जरूरी जानकारी अलग करेगा, पैटर्न पहचान पाएगा और मेमोरी को ज्यादा व्यवस्थित बना देगा। कंपनी का कहना है कि इससे AI पहले से ज्यादा समझदार और यूजफुल बन सकता है।</p>
<h2><strong>पुराने चैट पढ़कर AI खुद को कैसे बनाएगा ज्यादा स्मार्ट?</strong></h2>
</p>
<p>Anthropic के अनुसार, Dreaming एक Scheduled और Asynchronous प्रक्रिया है, यानी Claude बैकग्राउंड में पुराने डेटा का एनालिसिस करता है और फिर नई व्यवस्थित मेमोरी तैयार करता है। यह सिस्टम लगभग 100 पुराने सेशन्स तक की जानकारी को पढ़ सकता है, खास बात यह है कि असली मेमोरी स्टोर को बदला नहीं जाता, बल्कि Claude एक अलग आउटपुट मेमोरी तैयार करता है, जिसे डेवलपर्स चाहें तो इस्तेमाल कर सकते हैं या हटा सकते हैं। कंपनी का मानना है कि यह फीचर AI एजेंट्स को बार-बार होने वाली गलतियां पहचानने, टीम की पसंद समझने और लंबे प्रोजेक्ट्स में बेहतर तरीके से काम करने में मदद करेगा। डेवलपर्स इसमें अपने निर्देश भी जोड़ सकते हैं, जैसे केवल कोडिंग से जुड़ी जानकारी पर फोकस करना और बाकी बातचीत को नजरअंदाज करना।</p>
<h2><strong>क्या भविष्य में AI खुद अपनी गलतियां सुधार पाएगा?</strong></h2>
</p>
<p>फिलहाल Dreaming फीचर रिसर्च प्रीव्यू के तौर पर उपलब्ध कराया गया है और यह केवल Claude Opus 4.7 और Claude Sonnet 4.6 मॉडल्स को सपोर्ट करता है। इसे इस्तेमाल करने के लिए डेवलपर्स को विशेष अनुमति लेनी होगी। Anthropic ने यह भी बताया कि बड़े डेटा, मेमोरी लिमिट या टाइमआउट जैसी वजहों से Dreaming प्रक्रिया कभी-कभी फेल भी हो सकती है। इसके साथ कंपनी ने &#8216;Outcomes&#8217; फीचर को भी बेहतर बनाया है, जिससे AI अपने काम का खुद मूल्यांकन कर सकेगा और जरूरत पड़ने पर दोबारा कोशिश करेगा। टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह सिस्टम सफल रहा तो आने वाले समय में AI सिर्फ सवालों के जवाब देने वाला टूल नहीं रहेगा, बल्कि अनुभवों से सीखने वाला डिजिटल असिस्टेंट बन सकता है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/02/Anthropic-Claude.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		<media:description type='plain'><![CDATA[Anthropic Claude]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/anthropic-introduces-claude-dreaming-feature-to-make-ai-smarter-over-time-1661366/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/anthropic-introduces-claude-dreaming-feature-to-make-ai-smarter-over-time-1661366/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:45:08 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[IndiGo फ्लाइट में पावर बैंक ब्लास्ट के पीछे हो सकते हैं ये बड़े कारण, जानें यहां]]></title>
		<description>हाल ही में चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर खड़े Indigo विमान में पावर बैंक फटा, जिससे अफरा-तफरी मच गई। ऐसे में यह सवाल उठा कि आखिर क्या कारण रहे, जिससे बैटरी में ब्लास्ट हुआ। आइए जानते हैं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पावर बैंक अहम गैजेट्स में से एक है। इसका इस्तेमाल स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को चार्ज करने के लिए किया जाता है। हालांकि, हाल ही में चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर इंडिगो फ्लाइट में हुए ब्लास्ट ने इसकी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके साथ यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि पावर बैंक क्यों फटा और क्यों इसमें आग लगी। अगर आपके दिमाग में भी ये सवाल उठ रहे हैं, तो हम आपको यहां यह बताने जा रहे हैं कि आखिर पावर बैंक क्यों ब्लास्ट हुआ और क्या इसके कारण रहें।</p>
<h2>पावर बैंक फटने के कारण</h2>
</p>
<h3>थर्मल रनवे</h3>
</p>
<p>पावर बैंक की बैटरी लिथियम-आयन की होती है, जिसमें बहुत एर्नजी स्टोर होती है। यदि इस गैजेट में कोई खराबी आ जाए या फिर शॉर्ट सर्किट हो जाए, तो बैटरी तेजी से गर्म हो जाती है और ज्वलनशील पदार्थ छोड़ती है। इस स्थिति को थर्मल रनवे कहा जाता है। इससे आग लगने और ब्लास्ट होने की संभावना बढ़ जाती है। यह खतरा लैंडिंग और टेकऑफ के दौरान पड़ने वाले दबाव से और भी ज्यादा बढ़ जाता है।</p>
<h3>दबाव और तापमान</h3>
</p>
<p>विशेषज्ञों की मानें, तो विमान जब भी उड़ान भरता है, तब उसमें दबाव और तापमान बदलता रहता है, जिसका प्रभाव यात्री, उनके समान और पावर बैंक जैसे डिवाइस पर पड़ता है। अगर बैटरी पहले से खराब या फूली हुई हो, तो वे उस दबाव को झेल नहीं पाती और ब्लास्ट हो जाती है या फिर आग पकड़ लेती है।</p>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/main-4.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone wp-image-1661351 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/main-4.jpg" alt="" width="1200" height="900" /></a></p>
<h3>बैटरी डैमेज</h3>
</p>
<p>आपका पावर बैंक फूल कर मोटा हो गया है, तो यह संकेत है कि उसकी बैटरी खराब हो गई है। ऐसी बैटरी अतिरिक्त दबाव के कारण ब्लास्ट हो जाती है या फिर आग पकड़ लेती है।</p>
<h3>गलत तरह से रखना</h3>
</p>
<p>फ्लाइट के केबिन में स्पेस कम होता है। इस वजह से Crew मेंबर्स लोगों को समान को सटाकर रख देते हैं, जिससे दबाव की स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसे में आपके बैग में पावर बैंक रखा हो, तो उस पर ज्यादा दबाव पड़ने लगता है। इस दौरान पावर बैंक सिक्के या फिर चाबी जैसी चीजों के संपर्क में आए जाए, तो शॉर्ट सर्किट हो सकता है, जिससे आग लग सकती है या फिर ब्लास्ट हो सकता है।</p>
<h2>ब्लास्ट से कैसे रखें खुद को सुरक्षित ?</h2>
</p>
<p>फ्लाइट में खुद को सुरक्षित रखने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। कभी लोकल पावर बैंक का इस्तेमाल करें। फोन चार्ज करने के लिए अच्छी कंपनी वाले पावर बैंक का उपयोग करें। अगर पावर बैंक फूल गया है, तो उसे तुरंत फेंक दें, क्योंकि बैटरी खराब हो चुकी है।</p>
</p>
<p>फ्लाइट में जाते वक्त भूलकर भी पावर बैंक को बैग में न रखें। ऐसा करने से डिवाइस पर अधिक दबाव नहीं पड़ेगा और न ही वो हीटअप हो जाएगा।</p>
<h2>क्या था मामला ?</h2>
</p>
<p>अंत में आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि 5 मई 2026 को हैदराबाद से चंडीगढ़ आ रही इंडिगो फ्लाइट जब लैंड हुई, तब एक यात्री के पावर बैंक में अचानक आग लगी और फिर ब्लास्ट हुआ। इससे पूरे विमान में अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद सभी यात्रियों को स्लाइड के जरिए विमान से सुरक्षित बाहर निकाला गया।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/main-5.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/four-reasons-behind-power-bank-blast-in-indigo-flight-at-chandigarh-1661344/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/four-reasons-behind-power-bank-blast-in-indigo-flight-at-chandigarh-1661344/</link>
		<dc:creator><![CDATA[ajay verma]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:21:57 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Adobe Acrobat हुआ और भी स्मार्ट, अब AI करेगा मिनटों में पूरा काम]]></title>
		<description>Adobe Acrobat अब पहले से ज्यादा स्मार्ट हो गया है। Adobe ने नया AI-Based Productivity Agent लॉन्च किया है, जो सिर्फ एक कमांड पर टेक्स्ट, इमेज, प्रेजेंटेशन और सोशल मीडिया कंटेंट तक तैयार कर सकता है। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Adobe ने अपने फेमस PDF प्लेटफॉर्म Adobe Acrobat के लिए एक नया AI-Based Productivity Agent पेश किया है। कंपनी का कहना है कि यह नया टूल यूजर्स के काम को पहले से ज्यादा आसान और तेज बना देगा। यह AI एजेंट सिर्फ टेक्स्ट लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि नेचुरल लैंग्वेज कमांड के जरिए इमेज, प्रेजेंटेशन, सोशल मीडिया पोस्ट, पॉडकास्ट और दूसरे रिच कंटेंट भी तैयार कर सकता है, यानी अब यूजर सिर्फ साधारण भाषा में निर्देश देंगे और AI उनके लिए पूरा कंटेंट बना देगा। Adobe ने इस फीचर को अपने पेड प्लान्स जैसे Acrobat AI, Acrobat Studio और Adobe Express Premium में शामिल किया है। कंपनी का मानना है कि इससे ऑफिस, एजुकेशन और क्रिएटिव काम करने वाले लोगों की प्रोडक्टिविटी काफी बढ़ेगी।</p>
<h2><strong>Adobe का नया Productivity Agent आखिर क्या-क्या कर सकता है?</strong></h2>
</p>
<p>Adobe के अनुसार यह Productivity Agent एक एडवांस AI असिस्टेंट की तरह काम करता है, जो अलग-अलग टूल्स और AI मॉडल्स को जोड़कर यूजर के लिए काम पूरा करता है। यह एजेंट Adobe के दूसरे क्रिएटिव AI टूल्स के साथ-साथ थर्ड पार्टी एजेंट्स के साथ भी काम कर सकता है। यूजर अगर किसी डॉक्यूमेंट का समरी, टाइटल या विजुअल कंटेंट बनाना चाहते हैं तो उन्हें सिर्फ एक सिंपल कमांड देनी होगी, खास बात यह है कि यह AI पुराने डॉक्यूमेंट्स, ब्रांड गाइडलाइंस और यूजर की पसंद को भी समझता है ताकि तैयार किया गया कंटेंट उसी स्टाइल और टोन में हो, जैसा यूजर चाहता है। Adobe के Creativity &amp; Productivity Business के प्रेसिडेंट David Wadhwani ने कहा कि कंपनी डॉक्यूमेंट इंटेलिजेंस और AI एजेंट्स को मिलाकर लोगों के काम करने का तरीका बदलना चाहती है।</p>
<h2><strong>यूजर्स को क्या फायदा मिलेगा?</strong></h2>
</p>
<p>इसके साथ ही Adobe ने PDF Spaces फीचर में भी बड़ा अपडेट दिया है। PDF Spaces एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां लोग डॉक्यूमेंट्स को शेयर और मैनेज कर सकते हैं। अब इसमें Sharing और Publishing फीचर्स मिलेंगे। यूजर अब PDFs, डॉक्यूमेंट्स, वेबसाइट लिंक और नोट्स को एक जगह जोड़कर अपना पर्सनलाइज्ड स्पेस बना सकते हैं। AI एजेंट इस स्पेस को यूजर की जरूरत के हिसाब से स्ट्रक्चर, मल्टीमीडिया और जरूरी जानकारी के साथ बेहतर बना सकता है। सबसे खास बात यह है कि PDF Spaces को देखने के लिए सामने वाले व्यक्ति के पास Adobe अकाउंट होना जरूरी नहीं होगा। इससे टीमवर्क और कंटेंट शेयरिंग पहले से ज्यादा आसान हो जाएगी।</p>
<h2><strong>क्या Adobe का यह AI फीचर बदल देगा काम करने का तरीका?</strong></h2>
</p>
<p>Adobe का कहना है कि यह सिर्फ नया फीचर नहीं, बल्कि डॉक्यूमेंट शेयरिंग का एक बिल्कुल नया तरीका है। कंपनी के Document Cloud डिविजन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट Abhigyan Modi ने बताया कि अब डॉक्यूमेंट शेयर करना सिर्फ फाइल भेजना नहीं रहेगा, बल्कि एक पूरा इंटरैक्टिव अनुभव होगा। कंपनियां अपने क्लाइंट्स, टीम या बड़े ऑडियंस के लिए अलग-अलग तरह के कस्टमाइज्ड स्पेसेस तैयार कर सकेंगी। अब AI की मदद से हर डॉक्यूमेंट ज्यादा पर्सनलाइज्ड और स्मार्ट बनेगा।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2025/04/adobe.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/adobe-unveiled-ai-productivity-agent-for-acrobat-adds-smarter-pdf-spaces-features-1661345/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/adobe-unveiled-ai-productivity-agent-for-acrobat-adds-smarter-pdf-spaces-features-1661345/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Thu, 07 May 2026 08:30:59 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[Acer Iconia iM11 5G टैबलेट 11.45 इंच स्क्रीन और 7400mAh बैटरी के साथ भारत में लॉन्च, जानें कीमत]]></title>
		<description>Acer Iconia iM11 5G को कंपनी ने लेटेस्ट टैब के तौर पर लॉन्च कर दिया है। इस टैब को प्रोडक्टिविटी, मनोरंजन व डेली यूज को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यहां जानें कीमत और खूबियां।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Acer Iconia iM11 5G</strong> टैबलेट भारत में लॉन्च हो गया है। यह कंपनी का लेटेस्ट टैबलेट है, जिसे कंपनी ने प्रोडक्टिविटी, मनोरंजन व डेली यूज को ध्यान में रखकर डिजाइन किया है। फीचर्स की बात करें, तो इस टैब में आपको 11.45 IPS डिस्प्ले मिलता है। इसके अलावा, यह टैब MediaTek MT8791 प्रोसेसर से लैस है। फोटोग्राफी के लिए टैब में 1 नहीं बल्कि 2 कैमरा सेंसर दिए गए हैं। इसमें 16MP मेन व 2MP का सेकेंडरी कैमरा मिलता है। सेल्फी व वीडियो कॉलिंग के लिए टैब में फ्रंट कैमरा भी दिया गया है। टैब की बैटरी 7400mAh की है। कनेक्टिविटी के लिए टैब में 5G सपोर्ट मिलता है। सिक्योरिटी के लिए फिंगरप्रिंट सेंसर पावर बटन में मौजूद है। आइए जानते हैं टैब की कीमत, उपलब्धता और फीचर्स से जुड़ी डिटेल्स।</p>
<h2>Acer Iconia iM11 5G Price in India</h2>
</p>
<p>कंपनी ने <a href="https://www.techlusive.in/hi/best-deals/top-5-tablets-under-20000-in-india-best-deals-on-oneplus-redmi-acer-realme-many-more-1657804/">Acer</a> Iconia iM11 5G को 25,499 रुपये की कीमत में लॉन्च किया गया है। इस टैब को Acer स्टोर व ऑनलाइन स्टोर के साथ-साथ Amazon और Flipkart के जरिए भी खरीदा जा सकता है। कंपनी ने टैब में ब्लू व सिल्वर कलर ऑप्शन पेश किया है।</p>
<h2>Acer Iconia iM11 5G Specs</h2>
</p>
<p>फीचर्स पर नजर डालें, तो Acer Iconia iM11 5G टैब में 11.45 इंच का IPS डिस्प्ले दिया गया है। इस डिस्प्ले का रेजलूशन 1440 × 2200 पिक्सल है। इसकी ब्राइटनेस 450 Nits की है। कंपनी ने इस टैब को stylus सपोर्ट के साथ पेश किया है। परफॉर्मेंस के लिए टैब में MediaTek MT8791 प्रोसेसर दिया गया है। इसमें आपको 2 Cortex-A78 कोर, जिनकी क्लॉक स्पीड 2.4GHz है। वहीं, 6 Cortex-A55 cores की स्पीड 2.0GHz है। साथ ही चिप में AI Processing Unit (APU) क्षमता भी मौजूद है, जो कि edge-AI और on-device AI ऐप के लिए 2.6 TOPS डिलीवर करता है। यह टैबलेट Android 15 के साथ आया है। कंपनी ने इसमें 8GB RAM + 128GB स्टोरेज भी दी है। हालांकि, आप टैब की स्टोरेज को माइक्रोएसडी कार्ड के जरिए 1TB तक बढ़ा सकते हैं।</p>
</p>
<p>इस टैब में डुअल रियर कैमरा सेटअप मिलता है। इस सेटअप में 16MP प्राइमरी कैमरा और 2MP का सेकेंडरी कैमरा मिलता है। सेल्फी व वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 8MP का फ्रंट कैमरा मौजूद है। ऑडियो के लिए कंपनी ने इस टैब में स्टीरियो स्पीकर्स दिए गए हैं। साथ ही इसकी बैटरी 7400mAh की है, जिसके साथ 18W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट मौजूद है। कनेक्टिविटी के लिए इस टैब में 5G, 4G LTE, Wi-Fi 6, Bluetooth 5.2 और GPS सपोर्ट मिलता है। सिक्योरिटी के लिए इसमें फिंगरप्रिंट सेंसर पावर बटन में मिलता है।</p>
<table>
<thead>
<tr>
<th>Acer Iconia iM11 5G</th>
</p>
<th>स्पेसिफिकेशन</th>
</p>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>डिस्प्ले</td>
</p>
<td>11.45 इंच IPS डिस्प्ले</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>रेजलूशन</td>
</p>
<td>1440 × 2200 पिक्सल</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>ब्राइटनेस</td>
</p>
<td>450 Nits</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>स्टायलस सपोर्ट</td>
</p>
<td>हां</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>प्रोसेसर</td>
</p>
<td>MediaTek MT8791</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>CPU कॉन्फिगरेशन</td>
</p>
<td>2× Cortex-A78 @ 2.4GHz + 6× Cortex-A55 @ 2.0GHz</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>AI क्षमता</td>
</p>
<td>2.6 TOPS APU (Edge-AI और On-device AI सपोर्ट)</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>ऑपरेटिंग सिस्टम</td>
</p>
<td>Android 15</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>रैम</td>
</p>
<td>8GB</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>स्टोरेज</td>
</p>
<td>128GB</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>स्टोरेज एक्सपेंशन</td>
</p>
<td>माइक्रोएसडी कार्ड से 1TB तक</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>रियर कैमरा</td>
</p>
<td>16MP + 2MP डुअल कैमरा</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>फ्रंट कैमरा</td>
</p>
<td>8MP</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>ऑडियो</td>
</p>
<td>स्टीरियो स्पीकर्स</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>बैटरी</td>
</p>
<td>7400mAh</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>फास्ट चार्जिंग</td>
</p>
<td>18W</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>कनेक्टिविटी</td>
</p>
<td>5G, 4G LTE, Wi-Fi 6, Bluetooth 5.2, GPS</td>
</p>
</tr>
<tr>
<td>सिक्योरिटी</td>
</p>
<td>साइड फिंगरप्रिंट सेंसर (पावर बटन में)</td>
</p>
</tr>
</tbody>
</table>
<h2>Acer Iconia iM11 5G को ये टैब देंगे करारी टक्कर</h2>
</p>
<p><strong>Lenovo Idea Tab</strong></p>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Tab-75.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-1661340" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Tab-75.jpg" alt="" width="1280" height="900" /></a></p>
</p>
<p>Lenovo Idea Tab के 8GB RAM + 256GB स्टोरेज को आप 24,999 रुपये में खरीद सकते हैं। कंपनी ने इस टैब में 11 इंच का डिस्प्ले दिया है। यह टैब MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर से लैस है। वहीं, इसकी बैटरी 7040mAh की है। ऑडियो के लिए इसमें 4 स्पीकर मौजूद है।</p>
</p>
<p><strong>Motorola Pad 60 Neo</strong></p>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Tab-76.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-1661339" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Tab-76.jpg" alt="" width="1280" height="900" /></a></p>
</p>
<p>Motorola Pad 60 Neo के 8GB RAM + 128GB स्टोरेज को आप 23,775 रुपये में खरीद सकते हैं। कंपनी ने इस टैब में 11 इंच का डिस्प्ले दिया है। यह टैब MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर से लैस है। वहीं, इसकी बैटरी 7040mAh की है। कंपनी ने इसमें 8MP का रियर व 5MP का फ्रंट कैमरा दिया है।</p>
</p>
<p><strong>HONOR Pad X9</strong></p>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Tab-77.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone size-full wp-image-1661338" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Tab-77.jpg" alt="" width="1280" height="900" /></a></p>
</p>
<p>HONOR Pad X9 के 4GB RAM + 128GB स्टोरेज को आप 24,999 रुपये में खरीद सकते हैं। कंपनी ने इस टैब में 11.5 इंच का डिस्प्ले दिया है। यह टैब Snapdragon 685 प्रोसेसर से लैस है। ऑडियो के लिए इसमें 6 स्पीकर मौजूद है।</p>
]]></content:encoded>
		<media:content url='https://st1.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Tab-78.jpg' type='image/jpg' expression='full' width='805' >
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/acer-iconia-im11-5g-launched-in-india-with-11-45-screen-size-7400mah-battery-price-and-specs-1661337/</guid>
		<link>https://www.techlusive.in/hi/news/acer-iconia-im11-5g-launched-in-india-with-11-45-screen-size-7400mah-battery-price-and-specs-1661337/</link>
		<dc:creator><![CDATA[Manisha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Thu, 07 May 2026 07:34:02 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[इंसानों के बाद अब रोबोट करेगा पूजा-पाठ, आ गया Robot Monk]]></title>
		<description>दक्षिण कोरिया में टेक्नोलॉजी और अध्यात्म का अनोखा मेल देखने को मिला है। यहां देश का पहला रोबोट भिक्षु (Monk) ‘Gabi’ लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। यह रोबोट मंत्र पढ़ सकता है, पूजा में शामिल हो सकता है और लोगों के सवालों के जवाब भी दे सकता है। अब AI और रोबोटिक्स धर्म की दुनिया में भी कदम रख रहे हैं। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>दक्षिण कोरिया में अब टेक्नोलॉजी और अध्यात्म का ऐसा अनोखा मेल देखने को मिला है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राजधानी सियोल के प्रसिद्ध बौद्ध मंदिर में देश के पहले ह्यूमनॉइड रोबोट भिक्षु (Monk) &#8216;Gabi&#8217; को पेश किया गया। यह रोबोट सिर्फ मशीन नहीं है, बल्कि इसे बौद्ध परंपराओं और आध्यात्मिक में शामिल होने के लिए तैयार किया गया है। खास बात यह है कि गाबी मंत्रोच्चार कर सकता है, प्रार्थना के दौरान झुक सकता है और लोगों के सवालों का जवाब भी दे सकता है। दक्षिण कोरिया के बौद्ध धार्मिक संगठन का मानना है कि आधुनिक टेक्नोलॉजी की मदद से युवाओं को अध्यात्म और बौद्ध धर्म के करीब लाया जा सकता है।</p>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Robot-Monk-5.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone wp-image-1661311 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Robot-Monk-5.jpg" alt="Robot Monk" width="1200" height="900" /></a></p>
<h2><strong>धार्मिक समारोह में Gabi ने क्या-क्या किया?</strong></h2>
</p>
<p>Gabi को सियोल के जोग्ये मंदिर में बुद्ध पूर्णिमा समारोह से पहले आयोजित एक खास धार्मिक कार्यक्रम में पेश किया गया। करीब चार फीट लंबे इस रोबोट को पारंपरिक भूरे और ग्रे कलर के भिक्षु वस्त्र पहनाए गए थे। समारोह के दौरान यह बाकी भिक्षुओं के साथ बैठा, मंत्रोच्चार में शामिल हुआ और धार्मिक परंपराओं का पालन करता दिखाई दिया। जब एक भिक्षु ने उससे पूछा कि क्या वह बुद्ध और उनकी शिक्षाओं के प्रति समर्पित रहेगा, तो Gabi ने जवाब दिया, &#8216;हां, मैं खुद को समर्पित करूंगा।&#8217; रोबोट ने प्रार्थना की मुद्रा में हाथ जोड़े, पगोडा के चारों ओर घूमकर अनुष्ठान पूरा किया और 108 मोतियों वाली माला भी ग्रहण की।</p>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Robot-Monk-1.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone wp-image-1661315 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Robot-Monk-1.jpg" alt="Robot Monk" width="1200" height="900" /></a></p>
<h2><strong>Gabi रोबोट को कैसे बनाया गया और उसके नाम का क्या मतलब है?</strong></h2>
</p>
<p>Gabi को चीन की कंपनी के यूनिट्री G1 ह्यूमनॉइड प्लेटफॉर्म पर तैयार किया गया है। इसका शरीर इंसानों की तरह डिजाइन किया गया है ताकि यह चल सके, हाथ हिला सके और धार्मिक गतिविधियों में भाग ले सके। इसके नाम के पीछे भी खास आध्यात्मिक अर्थ छिपा है। &#8216;Gabi&#8217; नाम गौतम बुद्ध के बचपन के नाम सिद्धार्थ और कोरियाई शब्द &#8216;जाबी&#8217; से मिलकर बना है, जिसका अर्थ दया और करुणा होता है। मंदिर से जुड़े भिक्षुओं का कहना है कि नाम ऐसा चुना गया ताकि यह सुनने में आसान लगे और साथ ही बौद्ध मूल्यों को भी दर्शाए। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर भी गाबी को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता देखने को मिल रही है।</p>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Robot-Monk-4.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone wp-image-1661312 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Robot-Monk-4.jpg" alt="Robot Monk" width="1200" height="900" /></a></p>
<h2><strong>इस रोबोट के लिए कौन-कौन से खास नियम बनाए गए हैं?</strong></h2>
</p>
<p>इस रोबोट को सिर्फ धार्मिक कार्यक्रमों में दिखाने के लिए नहीं बनाया गया, बल्कि इसके लिए खास &#8216;रोबोट बौद्ध नियम&#8217; भी तैयार किए गए हैं। इन नियमों में जीवन का सम्मान करना, किसी रोबोट या वस्तु को नुकसान न पहुंचाना, इंसानों की बात मानना, झूठ न बोलना और जरूरत से ज्यादा बैटरी चार्ज न करना जैसी बातें शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन नियमों को तैयार करने में AI चैटबॉट्स जैसे ChatGPT और Gemini की भी मदद ली गई। धार्मिक संगठनों का मानना है कि आने वाले समय में ऐसे रोबोट मंदिरों में लोगों को बौद्ध शिक्षाओं के बारे में जानकारी देंगे और युवाओं के साथ संवाद बनाने में मदद करेंगे।</p>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Robot-Monk-2.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone wp-image-1661314 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Robot-Monk-2.jpg" alt="Robot Monk" width="1200" height="900" /></a></p>
<h2><strong>क्या Gabi जैसे और भी रोबोट है?</strong></h2>
</p>
<p>Gabi अकेला ऐसा रोबोट नहीं है जो अध्यात्म की दुनिया में कदम रख रहा हो। हाल ही में जापान की क्योटो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने &#8216;Buddharoid&#8217; नाम का AI आधारित रोबोट डेवलप किया था। यह रोबोट लोगों से बातचीत कर सकता है, बौद्ध धर्मग्रंथों को सीख सकता है और आध्यात्मिक सवालों के जवाब भी दे सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जापान में धार्मिक गुरुओं की उम्र बढ़ रही है और नए युवा इस क्षेत्र में कम आ रहे हैं। ऐसे में AI आधारित रोबोट भविष्य में धार्मिक परंपराओं को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं। बुद्धारॉयड को इस तरह तैयार किया गया है कि वह इंसानों के साथ बातचीत करते हुए लगातार नई बातें सीख सके और समय के साथ खुद को बेहतर बना सके।</p>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Robot-Monk.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone wp-image-1661316 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/Robot-Monk.jpg" alt="Robot Monk" width="1200" height="900" /></a></p>
<h2><strong>क्या भविष्य में टेक्नोलॉजी और अध्यात्म साथ-साथ चलेंगे?</strong></h2>
</p>
<p>टेक्नोलॉजी और अध्यात्म का यह मेल अब दुनिया में नई बहस को जन्म दे रहा है। कुछ लोग इसे भविष्य की जरूरत मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि आध्यात्मिकता केवल इंसानी भावनाओं और अनुभवों से जुड़ी होती है, जिसे मशीन पूरी तरह समझ नहीं सकती, हालांकि दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों में AI और रोबोटिक्स तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, इसलिए धार्मिक संस्थाएं भी समय के साथ खुद को बदलने की कोशिश कर रही हैं। Gabi जैसे रोबोट यह दिखाते हैं कि आने वाले समय में टेक्नोलॉजी सिर्फ कामकाज या फैक्ट्री तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इंसानों की संस्कृति, धर्म और अध्यात्म का भी हिस्सा बन सकती है।</p>
]]></content:encoded>
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		<media:description type='plain'><![CDATA[Robot Monk]]></media:description>
		</media:content>
		<guid isPermaLink='true'>https://www.techlusive.in/hi/news/humanoid-robot-monk-gabi-south-korea-first-learning-buddhism-and-spiritual-practices-1661310/</guid>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
	 </item>
	 <item>
		<pubDate>Thu, 07 May 2026 06:36:30 +0000</pubDate>
		<title><![CDATA[सूरज की वजह से धरती पर गिर रहे पुराने सैटेलाइट! ISRO ने किया बड़ा खुलासा]]></title>
		<description>सूरज की बढ़ती एक्टिविटी अब सिर्फ धरती के मौसम को ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में घूम रहे पुराने सैटेलाइट्स को भी प्रभावित कर रही है। ISRO की नई रिसर्च में बड़े खुलासे हुए हैं। आइए जानते हैं...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अंतरिक्ष में घूम रहे पुराने और खराब सैटेलाइट्स, जिन्हें स्पेस डेब्रिस या स्पेस जंक कहा जाता है, दुनिया भर की स्पेस एजेंसियों के लिए बड़ी परेशानी बन चुके हैं। अब भारत की स्पेस एजेंसी ISRO से जुड़ी एक नई रिसर्च में इस बारे में बेहद दिलचस्प बात सामने आई है। वैज्ञानिकों ने पहली बार साफ सबूत पाया है कि सूरज की बढ़ती एक्टिविटी पुराने और बेकार सैटेलाइट्स को तेजी से पृथ्वी की तरफ खींचने में मदद करती है। यह रिसर्च Vikram Sarabhai Space Centre के वैज्ञानिकों ने की है। रिसर्च के मुताबिक जब सूरज ज्यादा एक्टिव होता है, तो पृथ्वी के आसपास का वातावरण थोड़ा फैल जाता है। इससे अंतरिक्ष में घूम रहे पुराने सैटेलाइट्स और स्पेस जंक की स्पीड कम होने लगती है और वे धीरे-धीरे नीचे आने लगते हैं। आखिर में ये पृथ्वी के वातावरण में घुसकर जल जाते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज भविष्य में सुरक्षित स्पेस मिशन बनाने में काफी मदद करेगी। इस स्टडी में 34 साल से अंतरिक्ष में घूम रहे 17 अलग-अलग स्पेस ऑब्जेक्ट्स पर नजर रखी गई। लंबे समय से माना जा रहा था कि सूरज की गतिविधियों का असर स्पेस जंक पर पड़ता है, लेकिन अब पहली बार इसे साफ तौर पर साबित किया गया है।</p>
<h2><strong>आखिर सूरज की एक्टिविटी से कैसे गिरते हैं पुराने सैटेलाइट</strong></h2>
</p>
<p>वैज्ञानिकों के अनुसार सूरज लगभग 11 साल के एक सोलर साइकिल पर काम करता है। इस दौरान कभी उसकी गतिविधियां कम रहती हैं तो कभी बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं। जब सूरज अपने एक्टिव फेज में पहुंचता है, तब उसकी सतह पर सनस्पॉट्स यानी काले धब्बों की संख्या तेजी से बढ़ने लगती है। इसी दौरान सूरज से निकलने वाली तेज रेडिएशन पृथ्वी के ऊपरी वातावरण को गर्म करने लगती है। पृथ्वी के वातावरण की सबसे ऊपरी परत, जिसे थर्मोस्फीयर कहा जाता है, गर्म होकर ऊपर की तरफ फैलने लगती है। यही बदलाव अंतरिक्ष में घूम रहे पुराने सैटेलाइट्स और स्पेस डेब्रिस के लिए मुश्किल पैदा करता है। दरअसल जब यह परत फैलती है तो वहां हवा का घनत्व बढ़ जाता है। इससे अंतरिक्ष में मौजूद बेकार सैटेलाइट्स को ज्यादा एयर ड्रैग यानी घर्षण का सामना करना पड़ता है। यह घर्षण उनकी स्पीड कम कर देता है और उनकी ऑर्बिट धीरे-धीरे नीचे आने लगती है। आखिरकार वे पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश कर जलकर खत्म हो जाते हैं। रिसर्च में शामिल वैज्ञानिक Ayesha M. Ashraf ने बताया कि जैसे ही सोलर एक्टिविटी अपने पीक लेवल के करीब 70 प्रतिशत तक पहुंचती है, स्पेस डेब्रिस की ऊंचाई तेजी से कम होने लगती है। यह पैटर्न लगातार तीन सोलर साइकल्स में देखा गया, जिससे इस थ्योरी को मजबूत वैज्ञानिक आधार मिला है।</p>
</p>
<p><a href="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/ISRO-1.jpg"><img loading="lazy" class="alignnone wp-image-1661276 size-full" src="https://www.techlusive.in/wp-content/uploads/2026/05/ISRO-1.jpg" alt="ISRO " width="1200" height="900" /></a></p>
<h2><strong>34 साल की स्टडी में मिले बेहद अहम संकेत</strong></h2>
</p>
<p>इस रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने 1986 से 2024 तक तीन अलग-अलग सोलर साइकल्स का एनालिसिस किया। उन्होंने पृथ्वी से करीब 160 से 2000 किलोमीटर की ऊंचाई पर मौजूद 17 स्पेस ऑब्जेक्ट्स को ट्रैक किया। ये ऑब्जेक्ट्स हर 90 से 120 मिनट में पृथ्वी का चक्कर लगा रहे थे। रिसर्च में पाया गया कि जैसे ही सूरज की गतिविधियां बढ़ीं, इन सभी ऑब्जेक्ट्स की ऊंचाई कई किलोमीटर तक तेजी से घटने लगी। वैज्ञानिकों के लिए सबसे दिलचस्प बात यह रही कि यह बदलाव हर बार लगभग एक जैसे पैटर्न में दिखाई दिया। इसका मतलब यह है कि भविष्य में वैज्ञानिक पहले से अनुमान लगा सकते हैं कि किस समय स्पेस डेब्रिस तेजी से पृथ्वी की ओर लौटेगा। आज दुनिया भर में हजारों निष्क्रिय सैटेलाइट्स और लाखों छोटे-बड़े मलबे के टुकड़े पृथ्वी की ऑर्बिट में घूम रहे हैं। ये एक्टिव सैटेलाइट्स और स्पेस मिशनों के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। कई बार छोटे टुकड़े भी तेज रफ्तार के कारण भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में यह रिसर्च स्पेस एजेंसियों को बेहतर तरीके से मिशन प्लान करने में मदद दे सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर सोलर एक्टिविटी के समय को ध्यान में रखकर लॉन्च प्लान किए जाएं, तो भविष्य में स्पेस ट्रैफिक और टक्कर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।</p>
<h2><strong>भविष्य के स्पेस मिशनों के लिए यह खोज बेहद जरूरी</strong></h2>
</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स की संख्या बहुत तेजी से बढ़ने वाली है। कई प्राइवेट कंपनियां भी हजारों नए सैटेलाइट लॉन्च कर रही हैं। इसी वजह से पृथ्वी के आसपास ऑर्बिट अब पहले से ज्यादा हो गई है। ऐसे में अंतरिक्ष में फैले कचरे यानी स्पेस डेब्रिस को कंट्रोल करना पूरी दुनिया के लिए जरूरी बन गया है। ISRO की यह नई रिसर्च इस समस्या का हल ढूंढने में बड़ी मदद कर सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर पहले से पता चल जाए कि सूरज की कौन-सी गतिविधियां पुराने सैटेलाइट्स को जल्दी नीचे लाएंगी, तो नए मिशनों की प्लानिंग ज्यादा सुरक्षित तरीके से की जा सकती है। इससे भविष्य में स्पेस स्टेशन, कम्युनिकेशन सैटेलाइट्स और दूसरे वैज्ञानिक मिशनों को अंतरिक्ष में टक्कर से बचाने में मदद मिलेगी। यह रिसर्च यह भी दिखाती है कि प्रकृति खुद भी अंतरिक्ष की सफाई करने में मदद करती है, हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि सिर्फ सूरज की एक्टिविटी पर भरोसा करना काफी नहीं होगा। स्पेस एजेंसियों को पुराने सैटेलाइट्स को सुरक्षित तरीके से हटाने और अंतरिक्ष में कचरा कम करने के लिए नई टेक्नोलॉजी पर तेजी से काम करना होगा, फिर भी सूरज की इस प्राकृतिक प्रक्रिया को समझना भविष्य के सुरक्षित और बेहतर स्पेस मिशनों के लिए बहुत जरूरी माना जा रहा है।</p>
<h2><strong>FAQ</strong></h2>
</p>
<h2><strong>स्पेस डेब्रिस या स्पेस जंक क्या होता है?</strong></h2>
</p>
<p>स्पेस डेब्रिस उन पुराने, खराब या बेकार सैटेलाइट्स और रॉकेट के टुकड़ों को कहा जाता है जो अंतरिक्ष में पृथ्वी की ऑर्बिट में घूमते रहते हैं। ये एक्टिव सैटेलाइट्स और स्पेस मिशनों के लिए खतरा बन सकते हैं।</p>
<h2><strong>सूरज की एक्टिविटी पुराने सैटेलाइट्स को कैसे प्रभावित करती है?</strong></h2>
</p>
<p>जब सूरज ज्यादा एक्टिव होता है, तब उसकी रेडिएशन पृथ्वी के ऊपरी वातावरण को गर्म कर देती है। इससे वातावरण फैलता है और स्पेस डेब्रिस पर एयर ड्रैग बढ़ जाता है, जिससे उनकी स्पीड कम होकर वे धीरे-धीरे पृथ्वी की तरफ आने लगते हैं।</p>
<h2><strong>क्या पुराने सैटेलाइट्स धरती पर गिरकर नुकसान पहुंचाते हैं?</strong></h2>
</p>
<p>ज्यादातर पुराने सैटेलाइट्स पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करते ही जलकर खत्म हो जाते हैं, हालांकि कुछ बड़े हिस्से कभी-कभी धरती तक पहुंच सकते हैं, इसलिए वैज्ञानिक लगातार उनकी निगरानी करते हैं।</p>
<h2><strong>ISRO की इस रिसर्च में क्या खास पता चला?</strong></h2>
</p>
<p>ISRO के वैज्ञानिकों ने पहली बार साफ सबूत दिया है कि सोलर एक्टिविटी बढ़ने पर स्पेस डेब्रिस तेजी से नीचे आने लगता है। यह पैटर्न लगातार तीन सोलर साइकल्स में देखा गया।</p>
<h2><strong>इस रिसर्च से भविष्य के स्पेस मिशनों को क्या फायदा होगा?</strong></h2>
</p>
<p>इस खोज से वैज्ञानिक पहले से अनुमान लगा सकेंगे कि कब स्पेस डेब्रिस बढ़ सकता है। इससे सैटेलाइट लॉन्च और स्पेस मिशनों की प्लानिंग ज्यादा सुरक्षित तरीके से की जा सकेगी।</p>
]]></content:encoded>
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		<media:description type='plain'><![CDATA[ISRO Research Reveals Sun Activity Helps Pull Space Debris Back to Earth

(AI Image)]]></media:description>
		</media:content>
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		<dc:creator><![CDATA[Ashutosh Ojha]]></dc:creator>
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