Written By Ashutosh Ojha
Published By: Ashutosh Ojha | Published: Mar 11, 2026, 01:28 PM (IST)
Uber
Uttar Pradesh की सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा और बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब Ola, Uber और बाकी ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं को राज्य में संचालन करने से पहले रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। यह फैसला मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने की। सरकार का कहना है कि इस कदम से यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी, ड्राइवरों की सही पहचान हो सकेगी और इन सेवाओं पर सरकारी निगरानी भी मजबूत होगी। अभी तक कई ऐप-आधारित टैक्सी कंपनियां बिना राज्य स्तर पर रजिस्ट्रेशन के काम कर रही थीं, जिससे कई बार सुरक्षा और जवाबदेही से जुड़े सवाल उठते रहे हैं।
राज्य के परिवहन मंत्री Dayashankar Singh ने कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार अब Motor Vehicles Act, 1988 के तहत बनाए गए नए नियमों को अपनाएगी। इस कानून में 1 जुलाई 2025 को संशोधन किया गया था, जिसके बाद ऐप-आधारित टैक्सी सेवाओं को लेकर स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। मंत्री ने कहा कि पहले Ola और Uber जैसी कंपनियों पर राज्य स्तर पर ज्यादा नियामक नियंत्रण नहीं था, लेकिन अब उन्हें राज्य सरकार के साथ रजिस्ट्रेशन कराना होगा। कंपनियों को इसके लिए आवेदन देना होगा और तय लाइसेंस फीस भी जमा करनी होगी। सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया से टैक्सी सेवाओं को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकेगा और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई करना भी आसान होगा।
नई व्यवस्था के तहत ड्राइवरों की पहचान और उनकी जांच को भी अनिवार्य बनाया गया है। मंत्री ने बताया कि पहले यह स्पष्ट नहीं होता था कि गाड़ी कौन चला रहा है और उसकी पृष्ठभूमि क्या है। अब हर ड्राइवर को मेडिकल जांच, पुलिस वेरिफिकेशन और गाड़ी की फिटनेस टेस्ट से गुजरना होगा। इसके अलावा बिना रजिस्ट्रेशन, फिटनेस सर्टिफिकेट, मेडिकल जांच और पुलिस वेरिफिकेशन के कोई भी गाड़ी राज्य में App-Based टैक्सी सेवा नहीं दे सकेगा। सरकार का कहना है कि इन नियमों का मुख्य उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, खासकर महिलाओं और देर रात यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था ज्यादा सुरक्षित माहौल बनाने में मदद करेगी। साथ ही, ड्राइवरों की पूरी जानकारी उपलब्ध होने से किसी भी शिकायत या घटना की स्थिति में कार्रवाई करना आसान होगा।
लाइसेंस फीस और नवीनीकरण को लेकर भी सरकार ने स्पष्ट नियम बनाए हैं। परिवहन मंत्री के अनुसार कंपनियों को आवेदन करने के लिए 25,000 रुपये की फीस देनी होगी। वहीं 50 से 100 या उससे अधिक गाड़ी का संचालन करने वाली कंपनियों को 5 लाख रुपये का लाइसेंस शुल्क देना होगा। यह लाइसेंस पांच साल के लिए मान्य होगा और हर पांच साल बाद इसका नवीनीकरण करना होगा, जिसके लिए 5000 रुपये की फीस तय की गई है। इसके अलावा सरकार एक खास मोबाइल ऐप भी डेवलप करने की योजना बना रही है, जिसमें ड्राइवरों और गाड़ियों से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होगी। इस ऐप के जरिए यात्री ड्राइवर की पहचान, गीड़ी की जानकारी और बाकी जरूरी डिटेल्स आसानी से देख सकेंगे।