Written By Ashutosh Ojha
Published By: Ashutosh Ojha | Published: Jan 12, 2026, 08:59 AM (IST)
India smartphone security rules
भारत सरकार स्मार्टफोन यूजर्स के डेटा को सुरक्षित करने के लिए नए सख्त सुरक्षा नियम लाने की तैयारी में है। इन प्रस्तावित नियमों के तहत Apple, Samsung, Google और Xiaomi जैसी बड़ी मोबाइल कंपनियों से उनका सोर्स कोड (फोन को चलाने वाला मूल सॉफ्टवेयर) शेयर करने को कहा जा सकता है। इसके अलावा कंपनियों को बड़े सॉफ्टवेयर अपडेट जारी करने से पहले सरकार को जानकारी देनी होगी। सरकार का कहना है कि देश में ऑनलाइन फ्रॉड और डेटा चोरी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में यह कदम जरूरी हो गया है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है, जहां करीब 75 करोड़ मोबाइल फोन इस्तेमाल हो रहे हैं, इसलिए यूजर्स की सुरक्षा सरकार की बड़ी प्राथमिकता बन गई है।
हालांकि इन प्रस्तावों को लेकर टेक कंपनियों के बीच काफी नाराजगी है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा सुझाए गए 83 सुरक्षा मानक दुनिया के किसी और देश में लागू नहीं हैं। कंपनियों को डर है कि सोर्स कोड शेयर करने से उनके प्रोप्रायटरी जानकारी बाहर आ सकते हैं। Apple और Samsung जैसे ब्रांड आमतौर पर अपने सोर्स कोड को बेहद सीक्रेट रखते हैं। पहले Apple ने चीन और अमेरिका की एजेंसियों को भी सोर्स कोड देने से इनकार किया था। भारत में भी कंपनियां यही तर्क दे रही हैं कि यह कदम उनकी सुरक्षा और प्राइवेसी नीतियों के खिलाफ है।
सरकार के इन प्रस्तावों में कुछ बड़े सॉफ्टवेयर बदलाव भी शामिल हैं जैसे यूजर्स को फोन में पहले से मौजूद ऐप्स को हटाने (Uninstall) की सुविधा देना और किसी भी ऐप को बिना अनुमति बैकग्राउंड में कैमरा या माइक्रोफोन इस्तेमाल करने से रोकना। इसके अलावा मोबाइल फोन में नियमित रूप से मैलवेयर स्कैनिंग को अनिवार्य बनाने की बात कही गई है। सरकार चाहती है कि फोन का सिस्टम कम से कम 12 महीने तक लॉग डेटा (फोन की एक्टिविटी का रिकॉर्ड) अपने अंदर स्टोर करे। सरकार का मानना है कि इससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जांच करना आसान होगा और साइबर सुरक्षा मजबूत होगी।
दूसरी तरफ मोबाइल और IT कंपनियों के संगठन MAIT ने इन नए नियमों पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि अगर फोन में हर समय मैलवेयर की जांच होती रही तो बैटरी जल्दी खत्म होगी। साथ ही एक साल तक का लॉग डेटा मोबाइल में सेव करने के लिए हर फोन में इतनी स्टोरेज खाली नहीं होती। MAIT का यह भी कहना है कि हर सॉफ्टवेयर अपडेट से पहले सरकार से अनुमति लेना सही नहीं है क्योंकि कई बार सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं को ठीक करने के लिए अपडेट तुरंत जारी करना जरूरी होता है। वहीं IT सचिव एस. कृष्णन ने कहा है कि सरकार कंपनियों की बात ध्यान से सुनेगी और अभी कोई अंतिम फैसला लेना जल्दबाजी होगी फिलहाल सरकार और टेक कंपनियों के बीच बातचीत चल रही है और आने वाले समय में साफ होगा कि ये नियम कैसे और किस रूप में लागू होंगे।