Written By Ajay Verma
Published By: Ajay Verma | Published: Jan 29, 2025, 09:47 AM (IST)
ISRO (Indian Space Research Organisation) ने आज यानी 29 जनवरी 2025 को अपने 100वें लॉन्च के साथ बड़ा इतिहास रच दिया है। भारतीय स्पेस एजेंसी ने आंध्र प्रदेश स्थित श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से GSLV-F15 के साथ NVS-02 2nd Gen NavIC सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। इससे भारतीय नेविगेशन बहुत मजबूत हो जाएगा। इसे भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। और पढें: ISRO Roadmap: इंडिया स्पेस स्टेशन से लेकर गगनयान तक, बताया भविष्य का रोडमैप
ISRO के अनुसार, NVS-02 सैटेलाइट को 36 हजार किलोमीटर दूर स्थापित किया गया है, जहां अब सैटेलाइट की संख्या 4 की जगह 5 हो जाएगी। इसके पहुंचने से नेविगेशन सिस्टम बहुत स्ट्रॉन्ग हो जाएगा। यह सिस्टम कश्मीर से कन्याकुमारी और गुजरात से अरुणाचल प्रदेश तक कवर करेगा। इससे हवाई, समुद्री और सड़क के रास्ते को नेविगेट करना बहुत आसान हो जाएगा। और पढें: ISRO का PSLV-C62 मिशन हुआ फेल, जानें अचानक ऐसा क्या हुआ?
📸 Relive the moment! Here are stunning visuals from the GSLV-F15/NVS-02 launch.
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A proud milestone for India’s space journey! 🌌 #GSLV #NAVIC #ISRO pic.twitter.com/RK4hXuBZNN
— ISRO (@isro) January 29, 2025
नेविगेशन के अलावा इस भारतीय सिस्टम का इस्तेमाल आपातकालीन सर्विस और मोबाइल फोन्स में भी किया जा सकेगा। इससे नाविक से मिलने वाली सेवाएं बहुत बेहतर हो जाएंगी। आपको बता दें कि इस सैटेलाइट का वजन 2250 किलोग्राम है। इसमें स्वदेशी और इंपोर्ट की गई रुबिडियम एटॉमिक क्लॉक का उपयोग किया गया है। इसकी लाइफ साइकल 12 साल की है।
#100thLaunch:
Congratulations @isro for achieving the landmark milestone of #100thLaunch from #Sriharikota.
It’s a privilege to be associated with the Department of Space at the historic moment of this record feat.
Team #ISRO, you have once again made India proud with… pic.twitter.com/lZp1eV4mmL— Dr Jitendra Singh (@DrJitendraSingh) January 29, 2025
भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो का यह नए साल में पहला मिशन है। इसे वी नारायणन की अध्यक्षता में सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। भारत दुनिया का चौथा देश बन गया है, जिसने अंतरिक्ष में दो स्पेसक्राफ्ट डॉक किए हैं। इससे पहले रशिया, अमेरिका और चीन ने यह कारनामा किया था।